सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन पर जानिए उनके क्रिकेट करियर, कप्तानी, NatWest जीत, BCCI अध्यक्ष बनने और भारतीय क्रिकेट बदलने की पूरी कहानी।
नई दिल्ली: एक समय था जब भारतीय क्रिकेट टीम विदेशी दौरों पर जीतने से ज्यादा सम्मानजनक हार की उम्मीद लेकर मैदान में उतरती थी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में मुकाबला जीतना किसी सपने से कम नहीं माना जाता था।
खिलाड़ी प्रतिभाशाली जरूर थे, लेकिन टीम के भीतर वह आक्रामक सोच और आत्मविश्वास अक्सर नजर नहीं आता था, जो विश्व क्रिकेट पर राज करने के लिए आवश्यक था।
फिर भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा कप्तान मिला, जिसने सिर्फ बल्लेबाजी से नहीं बल्कि अपने रवैये से भारतीय क्रिकेट को बदला। वह विरोधी टीम की आंखों में आंखें डालकर जवाब देता था, अपने खिलाड़ियों के लिए खुलकर खड़ा रहता था और युवा प्रतिभाओं पर इतना भरोसा करता था कि आगे चलकर वही खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे बने।
यह कहानी है सौरव गांगुली की, जिन्हें दुनिया “दादा”, “Prince of Kolkata” और “God of the Off Side” के नाम से जानती है।
8 जुलाई 2026 को Ganguly अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके 54वें जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उस खिलाड़ी की पूरी कहानी, जिसने केवल रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि भारतीय क्रिकेट की मानसिकता ही बदल दी।
एक समृद्ध परिवार से क्रिकेट तक का सफर
Sourav Ganguly का जन्म 8 जुलाई 1972 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ। उनके पिता Chandidas Ganguly शहर के बड़े प्रिंटिंग व्यवसायियों में थे और परिवार आर्थिक रूप से काफी संपन्न था। उनकी मां Nirupa Ganguly गृहिणी थीं।
बचपन में गांगुली की पहली पसंद क्रिकेट नहीं बल्कि फुटबॉल थी। वे स्कूल के दिनों में फुटबॉल खेलते थे। हालांकि उनके बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली, जो बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके थे, ने उन्हें क्रिकेट अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने St. Xavier’s Collegiate School से पढ़ाई की और फिर क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया।

घरेलू क्रिकेट से टीम इंडिया तक
Sourav Ganguly ने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हुए अपनी पहचान बनाई। शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 1992 में Australia दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह मिली।
हालांकि उनका पहला अंतरराष्ट्रीय अनुभव बेहद निराशाजनक रहा। Brisbane में खेले गए ODI में वे केवल तीन रन बना सके। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।
कई खिलाड़ियों का करियर यहीं खत्म हो जाता, लेकिन Ganguly ने घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाकर वापसी का रास्ता तैयार किया।
Lord’s से ऐतिहासिक शुरुआत
20 जून 1996 भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तारीखों में शामिल है। इंग्लैंड दौरे पर गांगुली को Lord’s Cricket Ground, London में टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने अपने पहले ही टेस्ट में 131 रन बनाए।
इसके बाद Trent Bridge, Nottingham में दूसरे टेस्ट में उन्होंने 136 रन की पारी खेली। वे लगातार अपने पहले दो टेस्ट में शतक लगाने वाले दुनिया के चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हो गए। इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय टीम का स्थायी सदस्य बना दिया।

ऑफ साइड के महारथी
Ganguly की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी पहचान उनके शानदार ऑफ-साइड शॉट्स थे। Cover Drive, Square Cut और Extra Cover के ऊपर खेले गए उनके शॉट्स इतने आकर्षक होते थे कि उन्हें “God of the Off Side” कहा जाने लगा। बाएं हाथ के बल्लेबाज Ganguly ने भारतीय बल्लेबाजी को नई मजबूती दी।
कप्तान जिसने भारतीय क्रिकेट की रूपरेखा बदली
साल 2000 भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद कठिन दौर लेकर आया। मैच फिक्सिंग कांड ने टीम की साख और खिलाड़ियों का मनोबल दोनों को गहरी चोट पहुंचाई थी। ऐसे समय में सौरव गांगुली को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई।
उन्होंने केवल टीम की कमान ही नहीं संभाली, बल्कि भारतीय क्रिकेट को नई दिशा भी दी। गांगुली ने युवा प्रतिभाओं पर भरोसा जताया और वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, इरफान पठान, मोहम्मद कैफ, महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ियों को अवसर दिए।
इनमें से अधिकांश आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे बने। गांगुली के नेतृत्व में भारतीय टीम ने निडर, आक्रामक और आत्मविश्वास से भरा नया दौर शुरू किया, जिसने आने वाले वर्षों में विश्व क्रिकेट में भारत की पहचान बदल दी।

विदेशी धरती पर जीतने वाली टीम बनाई
Ganguly की कप्तानी से पहले भारत विदेशी दौरों पर अक्सर संघर्ष करता था।
लेकिन उनके नेतृत्व में टीम ने—
- Australia को कड़ी टक्कर दी।
- England में शानदार प्रदर्शन किया।
- Pakistan में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती।
- विदेशी परिस्थितियों में जीतने का आत्मविश्वास विकसित किया।
उन्होंने खिलाड़ियों में यह विश्वास पैदा किया कि भारत किसी भी टीम को उसके घर में चुनौती दे सकता है।
2001 की ऐतिहासिक Eden Gardens जीत
मार्च 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज़ भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में गिनी जाती है।
उस समय ऑस्ट्रेलिया लगातार 16 टेस्ट मैच जीत चुका थी और दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जाती थी। फॉलो-ऑन खेलने के बाद भारत की हार लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन वीवीएस लक्ष्मण (281 रन) और राहुल द्रविड़ (180 रन) की ऐतिहासिक साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया।
दूसरी ओर हरभजन सिंह ने हैट्रिक सहित शानदार गेंदबाज़ी कर ऑस्ट्रेलिया को दबाव में ला दिया। भारत ने यह मुकाबला जीतकर क्रिकेट इतिहास की सबसे महान वापसी में से एक दर्ज की। इस पूरी सीरीज़ में कप्तान Sourav Gangulyकी आक्रामक सोच और निडर नेतृत्व की दुनिया भर में सराहना हुई।

2002 की ऐतिहासिक NatWest Final
13 जुलाई 2002 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में भारत और इंग्लैंड के बीच NatWest Series का फाइनल खेला गया। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 325 रन बनाए, जिसके जवाब में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। एक समय टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए थे, लेकिन युवराज सिंह (69 रन) और मोहम्मद कैफ (नाबाद 87 रन) ने शानदार साझेदारी कर भारत की उम्मीदें जिंदा रखीं।
अंत में भारत ने दो विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। जीत के बाद कप्तान सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी टी-शर्ट उतारकर लहराई, जो भारतीय क्रिकेट के नए आत्मविश्वास और आक्रामक तेवर का प्रतीक बन गया। यह जीत आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार और प्रेरणादायक सफलताओं में गिनी जाती है।

2003 विश्व कप
South Africa में खेले गए ICC Cricket World Cup 2003 में Ganguly की कप्तानी में भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची।
भारत ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन फाइनल में उसे Australia से हार का सामना करना पड़ा।
फिर भी यह भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई क्योंकि लगभग दो दशकों बाद टीम विश्व कप फाइनल में पहुंची थी।

बतौर खिलाड़ी प्रमुख उपलब्धियां
Sourav Ganguly ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं।
टेस्ट क्रिकेट
- 113 टेस्ट
- 7,000 से अधिक रन
- 16 शतक
- सर्वश्रेष्ठ स्कोर 239
वनडे क्रिकेट
- 311 मैच
- 11,000 से अधिक रन
- 22 शतक
- कई वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ODI बल्लेबाजों में शामिल
- ODI में सबसे तेज 10,000 रन बनाने वाले खिलाड़ियों में लंबे समय तक शामिल रहे।
- ODI में 100 से अधिक विकेट भी लिए।
- International Cricket में 18,000 से अधिक रन बनाए।
- लंबे समय तक भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में शामिल रहे।
Greg Chappell विवाद
सौरव गांगुली के करियर का सबसे बड़ा विवाद 2005 में सामने आया, जब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल (Greg Chappell) भारतीय टीम के मुख्य कोच बने। शुरुआती दिनों में दोनों से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन जल्द ही टीम चयन, नेतृत्व शैली और खिलाड़ियों के प्रबंधन को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।
विवाद तब और गहरा गया, जब चैपल का एक गोपनीय ईमेल मीडिया में लीक हुआ, जिसमें उन्होंने गांगुली की कप्तानी और प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। इसके बाद गांगुली को कप्तानी गंवानी पड़ी और वे भारतीय टीम से भी बाहर हो गए।
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन और रन बनाकर उन्होंने चयनकर्ताओं का भरोसा दोबारा जीता। 2006 में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर उनकी भारतीय टीम में वापसी हुई, जिसे भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कमबैक कहानियों में से एक माना जाता है।

संन्यास
Sourav Ganguly ने नवंबर 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। उनका आखिरी टेस्ट मैच नागपुर में खेला गया, जहां उन्होंने भारतीय टीम के साथ अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर का समापन किया।
संन्यास के बाद भी उन्होंने कुछ समय तक आईपीएल और घरेलू क्रिकेट खेला। मैदान से विदा लेने के बाद गांगुली ने प्रशासक, कमेंटेटर और बाद में बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में भी भारतीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गांगुली ने IPL में Kolkata Knight Riders और बाद में Pune Warriors India की कप्तानी की।
हालांकि IPL में उनकी सफलता अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसी नहीं रही।
BCCI अध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका
अक्टूबर 2019 में सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष चुने गए। उनके कार्यकाल में घरेलू क्रिकेट के ढांचे को मजबूत करने, महिला क्रिकेट को अधिक समर्थन देने और खिलाड़ियों के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही, भारत में बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों और क्रिकेट प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में भी कई अहम कदम उठाए गए।
आने वाली है “दादा” की बायोपिक
सौरव गांगुली की प्रेरणादायक जिंदगी अब बड़े पर्दे पर भी देखने को मिलेगी। उनकी आधिकारिक बायोपिक पर काम तेज़ी से चल रहा है, जिसमें अभिनेता राजकुमार राव सौरव गांगुली का किरदार निभा रहे हैं।
8 जुलाई को सौरव गांगुली के जन्मदिन के मौके पर राजकुमार राव ने उन्हें बधाई देते हुए फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया गया, जिसमें 2002 के ऐतिहासिक NatWest Final के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराने वाले गांगुली के यादगार पल को दोबारा जीवंत किया गया।
यह फिल्म उनके शुरुआती संघर्ष, भारतीय टीम के कप्तान बनने, ऐतिहासिक उपलब्धियों, विवादों और शानदार वापसी की कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करेगी। क्रिकेट प्रेमियों और सिनेमा दर्शकों के बीच इस बायोपिक को लेकर अभी से काफी उत्साह और उत्सुकता देखने को मिल रही है।
भारतीय क्रिकेट में Sourav Ganguly की विरासत
सिर्फ आंकड़ों से Sourav Ganguly के योगदान को नहीं मापा जा सकता।
उन्होंने भारतीय टीम को डरने वाली टीम से लड़ने वाली टीम बनाया। युवा खिलाड़ियों पर भरोसा करना, विदेशी मैदानों पर जीत का सपना देखना और आक्रामक मानसिकता के साथ क्रिकेट खेलना, ये सभी बदलाव उनके नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
यही कारण है कि आज भी जब भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों की बात होती है, तो Sourav Ganguly का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है।
ये भी पढ़ें :- नहीं रहे अफगानिस्तान के तेज गेंदबाज शपूर ज़ादरान, 38 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा


