700 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट, 2001 की ऐतिहासिक हैट्रिक और कई विवादों के बावजूद शानदार वापसी। हरभजन सिंह के 46वें जन्मदिन पर पढ़िए उनके प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।
नई दिल्ली: 3 जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर में जन्मे हरभजन सिंह आज अपना 46वां जन्मदिन मना रहे हैं। करीब दो दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने भारत के लिए 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए, टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लेने वाले पहले भारतीय ऑफ स्पिनर बने और 2001 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से लेकर 2011 विश्व कप तक कई यादगार जीतों में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि उनका करियर केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई विवाद भी उनके साथ जुड़े रहे। फिर भी, हरभजन की कहानी संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और वापसी की मिसाल मानी जाती है।
परिवार की चाह थी कि ‘भज्जी’ कारोबार संभाले
हरभजन सिंह का जन्म 3 जुलाई 1980 को जालंधर (पंजाब) में हुआ। उनके पिता सरदार सरदेव सिंह प्लाहा का बॉल-बेयरिंग और वाल्व का व्यवसाय था, जबकि उनकी मां अवतार कौर गृहिणी थीं।
परिवार चाहता था कि हरभजन बड़े होकर पारिवारिक कारोबार संभालें, लेकिन बचपन से ही उनका मन क्रिकेट में लगता था। शुरुआत में वे तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। लेकिन उनके पहले कोच चरणजीत सिंह भुल्लर ने उनकी कद-काठी और गेंदबाजी शैली को देखते हुए उन्हें ऑफ स्पिन पर ध्यान देने की सलाह दी। यही फैसला आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ।
स्कूटर की हेडलाइट में किया अभ्यास
हरभजन सिंह की शुरुआती जिंदगी आर्थिक संघर्षों से भरी रही। तब उनके पास अभ्यास के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होती थीं। एक समय ऐसा भी था जब वे शाम को अंधेरा होने के बाद स्कूटर की हेडलाइट जलाकर गेंदबाजी का अभ्यास करते थे।
उनकी मेहनत रंग लाई और जल्द ही पंजाब के आयु वर्ग क्रिकेट में उनकी पहचान बनने लगी। उनके पिता ने भी बेटे के सपने को समझा और हर संभव सहयोग दिया।
घरेलू क्रिकेट से टीम इंडिया तक का सफर
हरभजन ने 1997-98 रणजी ट्रॉफी में पंजाब के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। घरेलू क्रिकेट में उनकी शानदार गेंदबाजी ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने 25 मार्च 1998 को शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया। इसके बाद 1998 में ही उन्होंने बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में भी पदार्पण किया।
हालांकि शुरुआती वर्षों में उन्हें टीम में लगातार मौके नहीं मिले। उस समय भारतीय स्पिन आक्रमण में अनिल कुंबले की मजबूत मौजूदगी थी। कई बार उन्हें टीम से बाहर भी होना पड़ा, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन जारी रखा।

वह मैच जिसने हरभजन को ‘टर्बनेटर‘ बना दिया
Harbhajan Singh के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2001 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी बनी। ऑस्ट्रेलिया उस समय लगातार 16 टेस्ट मैच जीत चुकी थी और दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जाती थी।
स्टीव वॉ की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर आई थी। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में हरभजन ने इतिहास रच दिया। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न को आउट किया।
पूरी सीरीज में हरभजन ने 32 विकेट लिए और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसी सीरीज के बाद उन्हें दुनिया भर में “टर्बनेटर” के नाम से जाना जाने लगा।

टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफल ऑफ स्पिनरों में शामिल
2001 के बाद हरभजन भारतीय टेस्ट टीम का अहम हिस्सा बन गए।
2011 में वे टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट पूरे करने वाले पहले भारतीय ऑफ स्पिनर बने। यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में गिनी जाती है।
उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 103 मैचों में 417 विकेट लिए। उनके नाम 25 बार पांच विकेट और 5 बार दस विकेट लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
सीमित ओवरों में भी छोड़ी अलग पहचान
Harbhajan Singh केवल टेस्ट विशेषज्ञ नहीं थे। उन्होंने वनडे और टी-20 क्रिकेट में भी भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 236 वनडे मैचों में 269 विकेट लिए। कई बड़े टूर्नामेंटों में मध्य ओवरों में विकेट निकालकर उन्होंने भारतीय टीम को जीत दिलाई।
टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उन्होंने 28 मैचों में 25 विकेट हासिल किए। उनके अनुभव का फायदा भारत को शुरुआती टी-20 दौर में खूब मिला।

दो विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा
Harbhajan Singh उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारत की दो बड़ी आईसीसी विश्व कप जीत में योगदान दिया।
वे 2007 ICC T20 World Cup जीतने वाली महेंद्र सिंह धोनी की युवा टीम का हिस्सा थे। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट लेकर भारत की सफलता में अहम भूमिका निभाई।
इसके बाद 2011 ICC Cricket World Cup में भी हरभजन भारतीय टीम के प्रमुख स्पिनर रहे। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर भारत ने 28 वर्षों बाद विश्व कप जीता और हरभजन का बचपन का सपना पूरा हुआ।

IPL में भी रहे सफल
हरभजन सिंह IPL के शुरुआती सितारों में शामिल रहे। उन्होंने लंबे समय तक मुंबई इंडियंस का प्रतिनिधित्व किया और टीम के कई खिताबी अभियानों का हिस्सा बने। बाद में वे चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए भी खेले।
आईपीएल में उन्होंने 160 से अधिक मैच खेले और 150 से ज्यादा विकेट हासिल किए। अपनी कसी हुई गेंदबाजी और अनुभव के दम पर वे लंबे समय तक लीग के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में गिने गए।

सिर्फ गेंदबाज नहीं, उपयोगी बल्लेबाज भी
Harbhajan Singh को अक्सर उनकी गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है, लेकिन उन्होंने कई बार बल्ले से भी टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।
टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम दो शतक और 9 अर्धशतक दर्ज हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ 2010 में लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाकर उन्होंने साबित किया कि जरूरत पड़ने पर वे निचले क्रम में भी मैच बदलने की क्षमता रखते हैं।

हरभजन सिंह के करियर की पांच सबसे बड़ी विवादित घटनाएं
हरभजन सिंह का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा। कई बार उनका आक्रामक स्वभाव सुर्खियां बना, तो कुछ मामलों में उन्हें आलोचनाओं और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
1. IPL 2008 का ‘Slapgate’ विवाद
हरभजन सिंह के करियर का सबसे चर्चित विवाद IPL 2008 में सामने आया। मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के बीच मैच के बाद हरभजन ने मैदान पर अपने भारतीय साथी खिलाड़ी एस. श्रीसंत को थप्पड़ मार दिया था।
घटना के बाद श्रीसंत कैमरे के सामने रोते हुए दिखाई दिए, जिसकी तस्वीरें पूरे देश में वायरल हो गईं। BCCI ने मामले की जांच के बाद हरभजन को पूरे IPL 2008 सीजन से निलंबित कर दिया। इसके अलावा उन पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया। बाद में हरभजन ने सार्वजनिक रूप से इस घटना पर खेद व्यक्त किया।
अगस्त 2025 में पूर्व IPL चेयरमैन ललित मोदी ने 2008 के चर्चित “Slapgate” विवाद का पहले कभी न देखा गया वीडियो सार्वजनिक किया। यह वीडियो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल क्लार्क के Beyond23 Cricket Podcast में बातचीत के दौरान जारी किया।
वीडियो सामने आने के बाद हरभजन सिंह और एस. श्रीसंत के बीच हुए उस विवाद को लेकर एक बार फिर क्रिकेट जगत में चर्चा तेज हो गई। श्रीसंत ने हाल ही में हरभजन सिंह को 2008 के ‘स्लैपगेट’ विवाद पर रिंग में बॉक्सिंग मुकाबले की खुली चुनौती दी। हरभजन ने अभी तक इस चुनौती पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
2. ‘Monkeygate’ विवाद (सिडनी टेस्ट, 2008)
2008 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान सिडनी टेस्ट में हरभजन सिंह पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एंड्रयू साइमंड्स के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप लगा। साइमंड्स ने दावा किया कि हरभजन ने उन्हें “मंकी” कहा।
मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर ने शुरुआत में हरभजन पर तीन टेस्ट मैचों का प्रतिबंध लगाया। हालांकि भारतीय टीम और BCCI ने इस फैसले के खिलाफ अपील की।
बाद में अपील सुनने वाले न्यायाधीश जॉन हैनसेन ने नस्लीय टिप्पणी का आरोप साबित न होने पर प्रतिबंध हटा दिया और इसे अपमानजनक भाषा के सामान्य मामले में बदल दिया। यह विवाद भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संबंधों के सबसे तनावपूर्ण अध्यायों में गिना जाता है।

3. टीवी शो में धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप (2008)
उसी वर्ष हरभजन एक डांस रियलिटी शो में अभिनेत्री मोना सिंह के साथ दिखाई दिए, जहां उन्होंने पौराणिक पात्र रावण जैसी वेशभूषा धारण की थी।
कुछ धार्मिक संगठनों ने आरोप लगाया कि इस प्रस्तुति से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। कई स्थानों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं और विरोध प्रदर्शन भी हुए।
बढ़ते विवाद के बाद हरभजन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था और यदि किसी को दुख पहुंचा है तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
4. 2007 टी-20 विश्व कप में श्रीसंत से मैदान पर बहस
IPL विवाद से पहले भी Harbhajan Singh और श्रीसंत के रिश्तों में तनाव दिखाई दे चुका था। 2007 के टी-20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान पर तीखी बहस हुई थी।
आखिरी ओवर में इंग्लैंड के बल्लेबाजों द्वारा लगातार बड़े शॉट लगाने के बाद हरभजन काफी निराश दिखाई दिए। इसी दौरान श्रीसंत से उनकी बहस कैमरे में कैद हुई। हालांकि बाद में दोनों खिलाड़ियों ने मामला शांत कर दिया, लेकिन इस घटना ने उनके संबंधों को लेकर चर्चा तेज कर दी थी।
5. पैरालंपिक समुदाय पर टिप्पणी को लेकर विवाद
2024 में World Championship of Legends जीतने के बाद हरभजन सिंह, युवराज सिंह और सुरेश रैना ने सोशल मीडिया पर एक डांस वीडियो साझा किया। वीडियो में इस्तेमाल किए गए एक लोकप्रिय फिल्मी स्टेप को लेकर पैरालंपिक समुदाय के कई लोगों ने आपत्ति जताई।
आलोचकों का कहना था कि यह स्टेप शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने जैसा प्रतीत होता है। विवाद बढ़ने के बाद हरभजन सिंह सहित सभी खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।
2021 में क्रिकेट से संन्यास
24 दिसंबर 2021 को Harbhajan Singh ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा की। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने क्रिकेट से वह सब हासिल किया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी और अब वह जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करना चाहते हैं।
संन्यास के बाद उन्होंने कमेंट्री, क्रिकेट विश्लेषण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। वह विभिन्न टीवी चैनलों पर विशेषज्ञ के रूप में दिखाई देते हैं और युवा खिलाड़ियों को अपने अनुभव भी साझा करते रहते हैं।
सन्यास के बाद राजनीतिक पारी
क्रिकेट से सन्यास के बाद, जुलाई 2022 में हरभजन सिंह ने राजनीति में कदम रखा। आम आदमी पार्टी (AAP) ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया।
सांसद बनने के बाद उन्होंने अपनी पूरी संसदीय सैलरी किसानों की बेटियों की शिक्षा और कल्याण के लिए दान करने की घोषणा की। अप्रैल 2026 तक उन्होंने AAP का प्रतिनिधित्व किया।
इसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया।
ये भी पढ़ें :- FIFA World Cup 2026: Dallas में Egypt की टीम और पुलिस के बीच टकराव, क्या खिलाड़ियों के साथ हो रहा है अलग व्यवहार?

