29 जुलाई 1836 को उद्घाटित Arc de Triomphe ने 190 साल पूरे कर लिए हैं। जानिए नेपोलियन की सैन्य जीत, अज्ञात सैनिक की कब्र और स्मरण की लौ से जुड़ी इसकी पूरी कहानी।
पेरिस, फ्रांस: पेरिस के आसमान में एक विशाल पत्थर की मेहराब खड़ी है, जिसके नीचे से गुजरते हुए शायद किसी पर्यटक को सिर्फ एक खूबसूरत इमारत दिखाई दे, लेकिन फ्रांस के लिए आर्क डी ट्रायम्फ (Arc de Triomphe) का स्थान इससे कहीं अधिक है।
यह स्मारक युद्ध और विजय की कहानी भी कहता है, नेपोलियन बोनापार्ट की महत्वाकांक्षा का प्रतीक भी है और प्रथम विश्व युद्ध में जान गंवाने वाले अज्ञात सैनिकों की स्मृति को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
इसकी दीवारों पर उकेरे गए नाम और मूर्तियां फ्रांस के सैन्य इतिहास की याद दिलाते हैं, जबकि इसके नीचे स्थित Tomb of the Unknown Soldier और वहां हर शाम फिर से प्रज्वलित की जाने वाली Flame of Remembrance इसे राष्ट्रीय शोक और सम्मान का केंद्र बनाती है।
29 जुलाई 1836 को Arc de Triomphe का उद्घाटन हुआ था। इस तरह 29 जुलाई को इस ऐतिहासिक स्मारक के सार्वजनिक उद्घाटन ने 190 वर्ष पूरे कर लिए हैं। हालांकि, इसकी कहानी केवल 1836 से शुरू नहीं होती। इसके पीछे लगभग तीन दशक लंबा निर्माण इतिहास, फ्रांस की बदलती राजनीतिक व्यवस्था, नेपोलियन का साम्राज्य, राजशाही की वापसी और फिर फ्रांस के राष्ट्रीय गौरव की बदलती परिभाषा छिपी है।
नेपोलियन ने बनवाया था Arc de Triomphe?
Arc de Triomphe की नींव उस दौर में रखी गई थी, जब नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस की राजनीति और यूरोप की सैन्य शक्ति पर अपना प्रभाव मजबूत कर रहे थे। 18 फरवरी 1806 को नेपोलियन ने एक शाही आदेश पर हस्ताक्षर कर Grande Armée यानी फ्रांसीसी साम्राज्य की सेना के सम्मान में एक विशाल विजय-तोरण बनाने का आदेश दिया।

इस स्मारक के लिए पेरिस में Place de l’Étoile, जिसे आज Place Charles de Gaulle के नाम से जाना जाता है, को चुना गया। उस समय यह स्थान शहर के पश्चिमी हिस्से में था और Champs-Élysées के पश्चिमी छोर की दिशा में स्थित था। नेपोलियन की इच्छा थी कि यह स्मारक इतना भव्य हो कि इसे शाही निवास पैलेस डेस टुइलरीज़ (Palais des Tuileries) से भी देखा जा सके।
इस परियोजना के शुरुआती डिजाइन का काम वास्तुकार जीन-फ़्रस्वा तेरेस शलग्राँ (Jean-François Thérèse Chalgrin) और जीन-अर्नाउड रेमंड (Jean-Arnaud Raymond) को सौंपा गया। डिजाइन में प्राचीन रोमन विजय-तोरणों की स्थापत्य परंपरा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। खास तौर पर रोम के Arch of Titus और Arch of Constantine जैसे स्मारकों से प्रेरणा ली गई थी।

नेपोलियन के लिए यह केवल एक वास्तुशिल्प परियोजना नहीं थी। यह उन सैन्य अभियानों और विजयों का सार्वजनिक प्रतीक था, जिनके जरिए फ्रांस की शक्ति और Grande Armée की प्रतिष्ठा को प्रदर्शित किया जाना था।
1806 में रखी गई नींव
Arc de Triomphe की नींव 15 अगस्त 1806 को रखी गई। यह तारीख भी प्रतीकात्मक थी, क्योंकि यह नेपोलियन के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती थी। नींव लगभग आठ मीटर की गहराई पर रखी गई थी। लेकिन जिस तेजी से नेपोलियन का साम्राज्य यूरोप में विस्तार कर रहा था, उस तेजी से स्मारक का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
निर्माण के दौरान राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलती रहीं। 1810 में नेपोलियन और ऑस्ट्रिया की मैरी-लुईस के विवाह के अवसर पर शाही जोड़े के पेरिस प्रवेश का रास्ता प्लास द लेत्वाल (Place de l’Étoile) से होकर गुजरना था।
उस समय Arc de Triomphe अधूरा था। इसलिए एक अस्थायी, लगभग वास्तविक आकार का लकड़ी और कैनवास से बना मॉडल तैयार किया गया, ताकि शाही जुलूस के सामने एक भव्य प्रवेश-द्वार जैसा दृश्य बनाया जा सके। इस अस्थायी संरचना को तैयार करने में सैकड़ों मजदूर लगाए गए थे।
इस बीच 20 जनवरी 1811 को तेरेस शलग्राँ की मृत्यु हो गई। उस समय स्मारक का निर्माण अभी काफी दूर था। उनके बाद उनके शिष्य लुई-रॉबर्ट गौस्ट (Louis-Robert Goust) ने परियोजना की जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर जीन-निकोलस हुयोट (Jean-Nicolas Huyot) भी इससे जुड़े।
नेपोलियन के बाद बदल गई स्मारक की कहानी
1814 में नेपोलियन के पतन के बाद फ्रांस की सत्ता में लुई XVIII आए। नए राजनीतिक दौर में नेपोलियन के आदेश पर शुरू किया गया यह स्मारक प्राथमिकता से बाहर हो गया और निर्माण कार्य रुक गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

9 अक्टूबर 1823 को Louis XVIII ने निर्माण को फिर से शुरू करने का फैसला किया। हालांकि, अब स्मारक की राजनीतिक व्याख्या बदलने की कोशिश की गई। इसे नेपोलियन की सेना के बजाय Army of the Pyrenees की विजय से जोड़ने की योजना बनाई गई। इस तरह Arc de Triomphe एक ऐसी परियोजना बन गया, जिसका अर्थ फ्रांस की बदलती राजनीतिक व्यवस्थाओं के साथ लगातार बदलता रहा।
लुई XVIII की मृत्यु के बाद चार्ल्स X सत्ता में आए और निर्माण जारी रहा। इस दौरान वास्तुकारों के बीच डिजाइन को लेकर भी मतभेद हुए। कभी स्तंभों को जोड़ने की योजना बनी, तो कभी मूल डिजाइन को बनाए रखने पर जोर दिया गया।

फिर 1830 की जुलाई क्रांति (July Revolution) ने फ्रांस की राजनीति को एक बार फिर बदल दिया। इस समय Arc de Triomphe का निर्माण एक ऐसे दौर का साक्षी बना, जिसमें सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक संघर्ष लगातार जारी थे। आधिकारिक इतिहास के अनुसार, उस समय हजारों लोग इस निर्माण स्थल के आसपास जमा हुए थे।
29 जुलाई 1836 को हुआ उद्घाटन
कई राजनीतिक बदलावों और लगभग तीन दशकों तक चले निर्माण के बाद Arc de Triomphe आखिरकार पूरा हुआ। इसका उद्घाटन 29 जुलाई 1836 को हुआ।
हालांकि, यह स्मारक जिस शासक ने शुरू कराया था, वह इसके उद्घाटन के समय सत्ता में नहीं था। नेपोलियन की मृत्यु 1821 में हो चुकी थी और फ्रांस में कई राजनीतिक परिवर्तन हो चुके थे। इसके बावजूद उनकी सैन्य विरासत इस स्मारक के स्थापत्य और शिल्प में मौजूद रही।
बाद में लुई-फिलीप I के शासनकाल में इसकी अंतिम राजनीतिक व्याख्या और सजावट को इस तरह विकसित किया गया कि यह फ्रांसीसी क्रांति और साम्राज्य दोनों के दौर की सेनाओं को सम्मान देने वाला स्मारक बन सके। इस तरह Arc de Triomphe धीरे-धीरे सिर्फ नेपोलियन की जीत का स्मारक न रहकर फ्रांस के व्यापक सैन्य इतिहास का प्रतीक बन गया।
दीवारों पर दर्ज फ्रांस का सैन्य इतिहास
Arc de Triomphe की सबसे खास विशेषताओं में इसकी विशाल मूर्तियां, उभरी हुई आकृतियां और स्मारक पर दर्ज नाम शामिल हैं। इसकी वास्तुकला में प्राचीन रोमन विजय-तोरणों का प्रभाव है, लेकिन इसकी सजावट फ्रांस के अपने सैन्य इतिहास और राजनीतिक स्मृति से जुड़ी हुई है।
इसकी चारों प्रमुख दिशाओं पर बड़े-बड़े sculptural reliefs बनाए गए हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कृतियों में François Rude की “Le Départ des Volontaires de 1792”, जिसे आम तौर पर La Marseillaise के नाम से भी जाना जाता है, शामिल है। यह मूर्ति फ्रांसीसी क्रांतिकारी स्वयंसेवकों के युद्ध के लिए प्रस्थान को दर्शाती है।
स्मारक पर फ्रांसीसी सैन्य अभियानों और युद्धों से जुड़े नाम भी अंकित हैं। इसलिए यह इमारत केवल बाहर से देखने वाला स्थापत्य स्मारक नहीं, बल्कि फ्रांस के सैन्य अतीत को पढ़ने का एक ऐतिहासिक दस्तावेज भी है।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद बना राष्ट्रीय स्मृति का केंद्र
Arc de Triomphe का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय प्रथम विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ। युद्ध में लाखों लोगों की जान गई और फ्रांस को भी भारी सैन्य और मानवीय नुकसान उठाना पड़ा।
11 नवंबर 1920 को एक अज्ञात फ्रांसीसी सैनिक के अवशेषों को Arc de Triomphe के नीचे रखने का निर्णय लिया गया। इस सैनिक का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति का सम्मान करना नहीं था, बल्कि उन सभी सैनिकों का प्रतिनिधित्व करना था जिनकी पहचान युद्ध में खो गई थी।
इस अज्ञात सैनिक के चयन की प्रक्रिया भी ऐतिहासिक है। ऑगस्टे थिन (Auguste Thin) नाम के युवा सैनिक ने वेरदूँ में रखे आठ अज्ञात सैनिकों के ताबूतों में से एक को चुना। इसके बाद उसे पेरिस लाया गया। अंतिम दफन 28 जनवरी 1921 को Arc de Triomphe के नीचे किया गया।
इस घटना ने स्मारक का अर्थ हमेशा के लिए बदल दिया। जो इमारत कभी मुख्य रूप से सैन्य विजय का प्रतीक थी, वह अब युद्ध में बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति का भी केंद्र बन गई।
हर शाम जलती है ‘Flame of Remembrance’
अज्ञात सैनिक की कब्र के ऊपर जलने वाली स्मरण की लौ (Flame of Remembrance) Arc de Triomphe की सबसे भावनात्मक पहचान है।
यह लौ पहली बार 11 नवंबर 1923 को जलाई गई थी। इसके बाद से हर शाम इस लौ को फिर से प्रज्वलित करने की परंपरा जारी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह समारोह हर दिन शाम करीब 6:30 बजे आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य युद्ध में मारे गए सैनिकों और फ्रांस के लिए दिए गए बलिदान की स्मृति को जीवित रखना है।

यही वजह है कि आज Arc de Triomphe को केवल “विजय का स्मारक” कहना अधूरा होगा। यह फ्रांस के लिए विजय, पराजय, बलिदान, शोक और राष्ट्रीय एकता इन सभी भावनाओं को एक साथ समेटे हुए है।
फ्रांस के राष्ट्रीय समारोहों में विशेष स्थान
समय के साथ Arc de Triomphe फ्रांस के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोहों का अभिन्न हिस्सा बन गया। 14 जुलाई यानी बास्टिल दिवस (Bastille Day) के अवसर पर होने वाले राष्ट्रीय समारोहों से लेकर 11 नवंबर और 8 मई जैसे स्मृति दिवसों तक, यह स्थान राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

14 जुलाई 1919 को प्रथम विश्व युद्ध की विजय के बाद आयोजित Allied Victory Parade भी इसी स्मारक के आसपास हुई थी। यह समारोह फ्रांस के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण था और इसने Arc de Triomphe को राष्ट्रीय विजय और स्मृति के एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित किया।
बाद के वर्षों में भी यह स्थान फ्रांस के बड़े राजनीतिक और ऐतिहासिक क्षणों का गवाह बना रहा। यहां से गुजरने वाली सैन्य परेड, राष्ट्रीय स्मृति समारोह और राजकीय आयोजन इसे फ्रांस की सार्वजनिक और नागरिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।
पेरिस की पहचान में Arc de Triomphe का महत्व
Arc de Triomphe का महत्व केवल इतिहास तक सीमित नहीं है। यह आज पेरिस के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में शामिल है और शहर के शहरी परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके आसपास से कई प्रमुख सड़कें निकलती हैं और यह पेरिस की प्रसिद्ध सड़क चैम्प्स-एलिसीज (Champs-Élysées) के पश्चिमी छोर पर स्थित है।
आज पर्यटक इसके आसपास बने Pedestrian Underpass के जरिए स्मारक तक पहुंच सकते हैं। ऊपर पहुंचने पर यहां से पेरिस के कई हिस्सों का पैनोरैमिक व्यू (Panoramic View) देखा जा सकता है।
हालांकि, इसकी लोकप्रियता के पीछे सिर्फ इसकी भव्यता नहीं है। दुनिया भर से आने वाले पर्यटक यहां फ्रांस के उस इतिहास को महसूस करने आते हैं, जिसमें नेपोलियन के साम्राज्य से लेकर विश्व युद्धों और आधुनिक गणराज्य तक की कहानी शामिल है।
29 जुलाई को इसके उद्घाटन को 190 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह सिर्फ एक ऐतिहासिक तारीख नहीं है, यह उस स्मारक की लंबी यात्रा को याद करने का अवसर है, जो नेपोलियन की महत्वाकांक्षा से शुरू होकर फ्रांस की सामूहिक राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बन गया। आज भी इसके नीचे जलती लौ और ऊपर खड़ा विशाल आर्च यही संदेश देता है कि इतिहास केवल जीत की कहानी नहीं होता। उसमें बलिदान, स्मृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी गई विरासत भी शामिल होती है।
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