Monday, 22 June 2026
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AAP नेता राघव चड्ढा पर गिरी गाज: पार्टी ने छीना डिप्टी लीडर पद, संसद में आवाज भी थामी

सांसद अशोक मित्तल को दी गई अब यह जिम्मेदारी

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने प्रमुख युवा चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बड़ा संगठनात्मक एक्शन लिया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता (डिप्टी लीडर) के पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया है कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। AAP ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस फैसले ने पार्टी के भीतर चल रही हलचल को खुलकर सामने ला दिया है।

क्या है पूरा मामला

सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व चड्ढा के काम करने के तरीके से नाखुश था। आरोप है कि वे कई बार बिना पार्टी लाइन के मुद्दे उठाते थे और सदन में किन विषयों पर बोलेंगे, इसकी जानकारी पहले से पार्टी को नहीं देते थे। बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें पहले भी अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी थी, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।

क्यों लिया गया फैसला: अंदर की 4 बड़ी वजहें

पार्टी लाइन से अलग बयान: कई बार पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग मुद्दों पर बोलना
संसद में ज्यादा समय लेना: तय समय से अधिक बोलने के कारण अन्य सांसदों को मौका कम मिलना
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी: जैसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को राहत मिलने पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं देना
आंतरिक कलह: बहरहाल, राघव चड्डा ने इस पर अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस घटना से आम आदमी पार्टी का अंदरूनी कलह सामने आ गया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल सीमित संख्या में सांसद हैं। संजय सिंह जेल में होने के बाद राघव चड्डा को अनौपचारिक रूप से उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी। वे कई महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय रहे, लेकिन पार्टी का कहना है कि व्यक्तिगत स्टाइल के बजाय सामूहिक फैसला जरूरी है।

किन मुद्दों पर सक्रिय थे राघव चड्ढा

हाल के समय में राघव चड्ढा कई जनहित मुद्दों को लेकर संसद में मुखर रहे थे—

  • राइट टू रिकॉल (जनता को प्रतिनिधि वापस बुलाने का अधिकार)
  • मिडिल क्लास पर बढ़ता टैक्स बोझ
  • खाद्य पदार्थों में मिलावट
  • गिग वर्कर्स (डिलीवरी बॉय) की सुरक्षा
  • एयरपोर्ट पर महंगी चाय-पानी और टिकट कीमतें

इन मुद्दों पर उनकी सक्रियता चर्चा में रही, लेकिन पार्टी का मानना था कि यह सब सामूहिक रणनीति के तहत होना चाहिए।

अभी तक चुप हैं चड्ढा

इस पूरे घटनाक्रम पर राघव चड्ढा की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पार्टी ने भी आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।

क्या संकेत देता है यह फैसला

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम AAP के भीतर अनुशासन को सख्ती से लागू करने का संकेत है। साथ ही यह भी साफ करता है कि पार्टी अब व्यक्तिगत नेतृत्व शैली से ज्यादा सामूहिक निर्णयों को प्राथमिकता देना चाहती है। हालांकि, इस घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया है कि पार्टी के अंदर सब कुछ सामान्य नहीं है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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