Wednesday, 15 July 2026
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Lucknow Fire: लखनऊ के एनीमेशन सेंटर में आग लगने से 14 छात्रों की मौत, छात्रों ने जान बचाने के लिए लगाई छलांग

अलीगंज के एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र में लगी आग ने 14 मासूम जिंदगियां छीन लीं। धुएं और लपटों के बीच छात्रों ने इमारत से छलांग लगाई। मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

अलीगंज: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार (22 जून) को एक दर्दनाक हादसे की गवाह बनी। शहर के अलीगंज इलाके में स्थित एक एनीमेशन और प्रशिक्षण केंद्र में लगी भीषण आग ने कम से कम 14 छात्रों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूदने पर मजबूर हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और लपटों से भर गई, जिससे अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

यह हादसा केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि शहरी इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सोमवार दोपहर करीब 3 बजे लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित उषा मेहता मार्ग पर बने तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी।

इमारत में एक एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र संचालित होता था, जहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। भवन में अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही थीं, जिनमें एक पेट क्लिनिक का भी उल्लेख किया गया है।

आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती आशंकाओं में शॉर्ट सर्किट या किसी विद्युत उपकरण में खराबी की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियां और अग्निशमन विभाग घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रहे हैं।

कुछ मिनटों में बदल गया सब कुछ

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के बाद पहले धुआं दिखाई दिया और फिर अचानक लपटें तेजी से फैलने लगीं। देखते ही देखते सीढ़ियां और निकास मार्ग धुएं से भर गए। अंदर मौजूद कई छात्र ऊपरी मंजिलों पर फंस गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ छात्रों ने खिड़कियों और बालकनियों से मदद के लिए आवाज लगाई। कई छात्र घबराहट में पहली मंजिल से नीचे कूद गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी लोगों को आग से बचने के लिए इमारत से छलांग लगाते देखा गया।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचा तो इमारत से घना धुआं निकल रहा था और कुछ छात्रों को पहले ही बाहर निकाला जा चुका था। हालांकि अंदर अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई थी।

मौत का आंकड़ा 14 तक पहुंचा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कम से कम 14 मौतों की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मृतक छात्र थे और उन्होंने स्वयं घटनास्थल पर शव देखे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 15 तक बताई गई है, लेकिन आधिकारिक तौर पर 14 मौतों की पुष्टि की गई है।

घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। कई गंभीर रूप से झुलसे लोगों का इलाज लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में चल रहा है।

बचाव अभियान में जुटी कई एजेंसियां

आग की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने के लिए 14 फायर टेंडर और एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म वाहन तैनात किए गए।

इसके बाद NDRF, SDRF और सिविल डिफेंस की टीमों को भी राहत कार्य में शामिल किया गया।

राहत दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इमारत के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचना था। आग और धुएं के कारण अंदर प्रवेश करना मुश्किल हो रहा था। बचावकर्मियों ने पड़ोसी इमारत की छत से पहुंच बनाते हुए दीवार में बड़े छेद किए और वहां से लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या देखा?

घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान बेहद दर्दनाक तस्वीर पेश करते हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने धुआं निकलते देखा और तुरंत लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। कुछ छात्रों को सुरक्षित बाहर लाया गया, लेकिन कई लोग ऊपर की मंजिलों में फंस गए थे।

दूसरे स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि 7 से 8 छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाई। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

हादसे के बाद राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने दुख व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने का फैसला किया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही घटना की जांच के आदेश भी दिए गए।

क्या इमारत में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी?

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोचिंग सेंटर, प्रशिक्षण संस्थान और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों वाले भवनों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास द्वार और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होने चाहिए।

यदि आग लगने के बाद लोग बाहर नहीं निकल पाए, तो यह निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भवन के पास आवश्यक फायर सेफ्टी मंजूरी थी या नहीं और क्या सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

कोचिंग और प्रशिक्षण संस्थानों की सुरक्षा पर फिर बहस

देश में यह पहला मामला नहीं है जब किसी शैक्षणिक या प्रशिक्षण केंद्र में आग लगने से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई हो। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कई संस्थान सीमित स्थान में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाते हैं। यदि इमारत का ढांचा सुरक्षित न हो या निकास मार्ग पर्याप्त न हों, तो आपात स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। लखनऊ की यह घटना भी इसी व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

घटनास्थल के बाहर सबसे दर्दनाक दृश्य उन परिवारों का था जो अपने बच्चों की तलाश में अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगा रहे थे।

कई अभिभावकों को शुरू में यह तक पता नहीं था कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं या नहीं। जैसे-जैसे मृतकों की पहचान होने लगी, अस्पतालों और पोस्टमार्टम केंद्रों के बाहर मातम जैसा माहौल है गया।

एक ऐसा प्रशिक्षण केंद्र, जहां युवा अपने करियर और भविष्य के सपनों को आकार देने जाते थे, कुछ ही मिनटों में शोक का केंद्र बन गया।

जांच से क्या निकलकर आएगा?

फिलहाल प्रशासन ने आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जाएगा कि:

  • आग की वास्तविक वजह क्या थी?
  • क्या भवन में अग्नि सुरक्षा उपकरण मौजूद थे?
  • क्या आपातकालीन निकास मार्ग पर्याप्त थे?
  • क्या भवन संचालकों ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था?
  • क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई?

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल एक दुर्घटना थी या फिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी ने इसे त्रासदी में बदल दिया।

लखनऊ के अलीगंज स्थित एनीमेशन प्रशिक्षण केंद्र में लगी आग ने 14 युवा जिंदगियां छीन लीं और कई परिवारों को हमेशा के लिए दर्द दे दिया। यह हादसा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि तेजी से बढ़ते शहरी ढांचे के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।

ये भी पढ़ें :- राजघाट में ‘रन अगेंस्ट ड्रग एब्यूज’ के 24वें संस्करण का आयोजन, 2000 से ज्यादा लोगों ने नशा मुक्त भारत अभियान का समर्थन किया

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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