आज की भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट जिंदगी में “समय नहीं है” सबसे बड़ा बहाना बन चुका है। लैपटॉप के सामने 8 से 10 घंटे लगातार बैठना, बैक-टू-बैक मीटिंग्स और डेडलाइन्स के दबाव के बीच सेहत कहीं पीछे छूट जाती है,
लेकिन एक फिटनेस और लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट के तौर पर मेरा मानना है कि सेहत के लिए समय निकाला नहीं जाता, बल्कि अपनी दिनचर्या में से समय चुराया जाता है।
यदि आप एक वर्किंग प्रोफेशनल हैं, तो आपको यह समझना होगा कि हर किसी के शरीर की जरूरत और नौकरी का प्रोफाइल अलग होता है। आइए जानते हैं कि आप अपनी व्यस्त लाइफस्टाइल के साथ वर्कआउट को कैसे मैनेज कर सकते हैं और आपके लिए सुबह या शाम में से कौन सा वक्त सबसे बेस्ट है।
सुबह बनाम शाम: आपके लिए वर्कआउट का कौन सा वक्त बेस्ट है? (Morning vs Evening Workout)
यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बॉडी क्लॉक कैसी है और आपकी नौकरी का स्ट्रेस लेवल क्या है। दोनों ही समय के अपने वैज्ञानिक फायदे हैं:
1. मॉर्निंग वर्कआउट (Morning Workout) — शिफ्ट और अनिश्चित टाइमिंग वालों के लिए
अगर आपकी नौकरी ऐसी है जहाँ शाम को अचानक क्लाइंट कॉल आ जाती है, ओवरटाइम करना पड़ता है या शिफ्ट का समय फिक्स नहीं रहता, तो सुबह का वक्त आपके लिए वरदान है।
- फायदे: सुबह वर्कआउट करने से एंडोर्फिन (Endorphins) हार्मोन रिलीज होता है, जिसे ‘हैप्पी हार्मोन’ भी कहते हैं। इससे आपका मूड पूरा दिन शानदार रहता है और ऑफिस में फोकस बढ़ता है। सबसे बड़ी बात, सुबह का वर्कआउट कोई ‘कैंसल’ नहीं कर सकता।
- क्विक टिप: अगर सुबह उठने में आलस आता है, तो रात को ही अपने वर्कआउट के कपड़े और जूते बेड के पास तैयार रखें।
2. इवनिंग वर्कआउट (Evening Workout) — मेंटल स्ट्रेस दूर करने के लिए
अगर आप सुबह जल्दी नहीं उठ पाते या आपकी जॉब बहुत ज्यादा मेंटल प्रेशर वाली है, तो शाम का वक्त आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।
- फायदे: दिनभर कंप्यूटर स्क्रीन को देखकर जो मानसिक थकान और तनाव इकट्ठा होता है, उसे जिम में पसीने के रूप में बहाना एक बेहतरीन ‘स्ट्रेस बस्टर’ है। शाम को शरीर का तापमान भी थोड़ा अधिक होता है, जिससे मांसपेशियों में चोट (Injury) लगने का खतरा कम होता है।
- क्विक टिप: ऑफिस से सीधे जिम या पार्क जाएं। एक बार आप घर जाकर सोफे पर बैठ गए, तो दोबारा बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
आपकी जॉब प्रोफ़ाइल के अनुसार कैसा होना चाहिए वर्कआउट?
हर नौकरी की मांग अलग होती है। कोई दिनभर कुर्सी पर बैठा रहता है, तो किसी को लगातार खड़े रहना पड़ता है। अपनी जॉब के हिसाब से सही वर्कआउट चुनना बहुत जरूरी है:
1: डेस्क या सिटिंग जॉब (IT Professionals, Designers, Writers, Call Centers)
- समस्या: दिनभर बैठे रहने से हिप फ्लेक्सर्स (कमर का निचला हिस्सा) टाइट हो जाते हैं, पोस्चर बिगड़ता है (कंधे आगे झुक जाते हैं) और मेटाबॉलिज्म बेहद धीमा हो जाता है, जिससे वजन बढ़ता है।
- बेस्ट वर्कआउट: आपके लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) और पोस्चर सुधारने वाली एक्सरसाइज सबसे जरूरी हैं। हफ्ते में 3 दिन वेट ट्रेनिंग करें जिसमें स्क्वाट्स (Squats) और डेडलिफ्ट (Deadlifts) शामिल हों। बाकी दिन 20-30 मिनट की कार्डियो या ब्रिस्क वॉक करें।
2: हाई-स्ट्रेस जॉब (Managers, Sales Executives, Corporate Leaders)
- समस्या: मानसिक थकान बहुत ज्यादा होती है, जिससे कॉर्टिसोल (Cortisol) यानी स्ट्रेस हार्मोन का लेवल हमेशा बढ़ा रहता है।
- बेस्ट वर्कआउट: आपको बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है जो शरीर को और थका दे। आपके लिए HIIT (High-Intensity Interval Training) बेहतरीन है। सिर्फ 20 मिनट का क्विक HIIT सेशन आपके दिमाग को रीसेट कर देगा। इसके अलावा हफ्ते में दो दिन योग (Yoga) या मेडिटेशन को दें।
3: फील्ड या स्टैंडिंग जॉब (Teachers, Medical Staff, Retail Staff)
- समस्या: ये लोग दिनभर पैरों पर रहते हैं। इनकी शारीरिक थकान ज्यादा होती है, जिससे घुटनों और एड़ियों पर दबाव रहता है।
- बेस्ट वर्कआउट: आपको भारी कार्डियो (जैसे रनिंग) से बचना चाहिए क्योंकि आपके पैर पहले ही थक चुके हैं। आपके लिए लो-इम्पैक्ट वर्कआउट (Low-impact workout) जैसे स्विमिंग (Swimming), साइकिलिंग या पाइलेट्स (Pilates) बेस्ट हैं, जो जोड़ों पर दबाव डाले बिना मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।
व्यस्त दिनों के लिए “15-मिनट नो-इक्विपमेंट वर्कआउट” रूटीन
अगर किसी दिन आपके पास जिम जाने का बिल्कुल समय नहीं है, तो वर्कआउट छोड़ने के बजाय इस क्विक होम-रूटीन को अपनाएं। इसे आप अपने बेडरूम में भी कर सकते हैं:
- 2 मिनट – वॉर्म-अप (Warm-up): जगह पर ही हल्की जॉगिंग करें या जंपिंग जैक्स (Jumping Jacks) करें ताकि बॉडी एक्टिव हो जाए।
- 4 मिनट – लोअर बॉडी (Lower Body): 20-20 के तीन सेट फ्री स्क्वाट्स (Squats) या रिवर्स लंजेस (Lunges) लगाएं। यह पैर की बड़ी मांसपेशियों को मजबूत करेगा।
- 4 मिनट – अपर बॉडी (Upper Body): पुश-अप्स (Push-ups) करें। अगर नॉर्मल पुश-अप्स मुश्किल लगें, तो घुटने जमीन पर रखकर या दीवार के सहारे (Wall Push-ups) करें।
- 3 मिनट – कोर और कार्डियो (Core & Cardio): 1-1 मिनट के तीन प्लैंक (Plank) होल्ड करें या माउंटेन क्लाइम्बर्स (Mountain Climbers) करें।
- 2 मिनट – कूल डाउन (Cool Down): गहरी सांसें लें और पूरी बॉडी को हल्का स्ट्रेच करें ताकि मांसपेशियों की अकड़न दूर हो सके और आप ऑफिस के काम के लिए रिलैक्स महसूस करें।
एक्सपर्ट की सलाह: फिटनेस कोई ‘ऑल-ऑर-नथिंग’ (या तो सब कुछ या कुछ नहीं) का खेल नहीं है। अगर आप हफ्ते में 6 दिन वर्कआउट नहीं कर सकते, तो 3 दिन ही करें। ऑफिस में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और हर 1 घंटे में अपनी सीट से उठकर 2 मिनट के लिए टहलना भी आपको एक्टिव रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। निरंतरता (Consistency) ही लंबी उम्र और अच्छी सेहत की असली चाबी है।
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