Friday, 10 July 2026
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Sunil Gavaskar Birthday: अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली से लेकर, बिना हेलमेट 10,000 टेस्ट रन बनाने तक का ऐतिहासिक सफर

बिना हेलमेट वेस्टइंडीज़ के घातक गेंदबाज़ों का सामना करने वाले ‘लिटिल मास्टर’ ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी। सुनील गावस्कर के जन्मदिन पर जानिए उनके जीवन के कुछ दिल्चस्प किस्से और रिकॉर्ड

मुंबई: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके बिना इस खेल की कहानी अधूरी मानी जाती है। सुनील मनोहर गावस्कर उन्हीं महान खिलाड़ियों में से एक हैं। जिस दौर में दुनिया के सबसे खतरनाक तेज़ गेंदबाज़ बल्लेबाज़ों के लिए खौफ का दूसरा नाम हुआ करते थे, उस समय एक भारतीय बल्लेबाज़ बिना हेलमेट के उनके सामने डटकर खड़ा हुआ और साबित कर दिया कि तकनीक, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी रफ्तार से बड़ा हथियार हो सकता है।

10 जुलाई 1949 को मुंबई में जन्मे सुनील गावस्कर आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़, लंबे समय तक सबसे अधिक टेस्ट शतकों के रिकॉर्डधारी और भारतीय बल्लेबाजी को नई पहचान देने वाले गावस्कर का करियर केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और असाधारण मानसिक मजबूती की मिसाल भी है।

जन्म के समय ही बदल गया था बच्चा

गावस्कर की जिंदगी का सबसे चर्चित किस्सा उनके जन्म से जुड़ा है। अपनी आत्मकथा Sunny Days में उन्होंने लिखा है कि जन्म के बाद अस्पताल में गलती से उनकी दूसरे नवजात शिशु से अदला-बदली हो गई थी।

उनके मामा और पूर्व भारतीय विकेटकीपर माधव मंत्री अस्पताल में बच्चे को देखने पहुंचे। उन्होंने देखा कि नवजात के कान के पास मौजूद वह छोटा-सा जन्मचिह्न नहीं है, जिसके बारे में परिवार जानता था।

जांच करने पर पता चला कि असली सुनील गावस्कर को गलती से पास में लेटे एक मछुआरे के परिवार के बच्चे से बदल दिया गया था। यदि उस दिन यह गलती पकड़ में नहीं आती, तो शायद भारतीय क्रिकेट का इतिहास कुछ और ही होता। बाद में गावस्कर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि शायद वह क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक साधारण मछुआरे बनकर जीवन बिताते।

क्रिकेट परिवार से मिला पहला संस्कार

सुनील गावस्कर का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ। उनके पिता मनोहर गावस्कर क्लब स्तर के क्रिकेटर थे, जबकि मामा माधव मंत्री भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके थे। घर में क्रिकेट का माहौल था, इसलिए बचपन से ही उनका झुकाव इस खेल की ओर हो गया।

मुंबई के सेंट ज़ेवियर्स हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने स्कूल क्रिकेट में लगातार रन बनाए। बाद में मुंबई विश्वविद्यालय और घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि जल्द ही चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी। उस दौर में मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) भारतीय क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम मानी जाती थी और वहां जगह बनाना ही बड़ी उपलब्धि थी।

जब दुनिया ने पहली बार लिटिल मास्टरको देखा

सुनील गावस्कर का टेस्ट पदार्पण 6 मार्च 1971 को वेस्टइंडीज़ के खिलाफ हुआ। चोट के कारण वह पहला टेस्ट नहीं खेल सके, लेकिन दूसरे टेस्ट से उन्हें मौका मिला।

उस समय वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उसके घर में खेलना किसी भी नए बल्लेबाज़ के लिए सबसे कठिन चुनौती माना जाता था। लेकिन गावस्कर ने अपने पहले ही टेस्ट दौरे में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया को चौंका दिया।

उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 774 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने चार शतक और तीन अर्धशतक लगाए। आज भी किसी बल्लेबाज़ द्वारा अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ में बनाए गए 774 रन विश्व रिकॉर्ड हैं।

इसी प्रदर्शन की बदौलत भारत ने पहली बार वेस्टइंडीज़ में टेस्ट सीरीज़ जीती। यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास का ऐतिहासिक मोड़ माना जाता है।

तेज़ गेंदबाज़ों के सामने निडर थे गावस्कर

1970 और 1980 का दशक तेज़ गेंदबाज़ों का दौर माना जाता है। डेनिस लिली, जेफ थॉमसन, माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, मैल्कम मार्शल, रिचर्ड हैडली, इमरान खान जैसे गेंदबाज़ दुनिया के सबसे खतरनाक नाम थे।

उस समय आधुनिक हेलमेट का चलन भी नहीं था। बावजूद इसके Sunil Gavaskar ने अपनी बेहतरीन तकनीक, सीधी बैटिंग और शानदार फुटवर्क के दम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों का सामना किया।

विशेष रूप से वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उन्होंने उस टीम के खिलाफ 13 टेस्ट शतक लगाए, जो लंबे समय तक विश्व क्रिकेट की सबसे ताकतवर टीम मानी जाती थी। उनकी बल्लेबाजी ने यह धारणा बदल दी कि भारतीय बल्लेबाज़ केवल स्पिन के खिलाफ ही अच्छा खेल सकते हैं।

रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाते गए सनी

Sunil Gavaskar ने अपने करियर में ऐसे कई रिकॉर्ड बनाए, जो वर्षों तक कायम रहे। टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज़ बने। उन्होंने अपने करियर में 125 टेस्ट मैचों में 10,122 रन बनाए। उनका बल्लेबाजी औसत 51.12 रहा।

उन्होंने 34 टेस्ट शतक लगाए, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड था। यह रिकॉर्ड बाद में सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा।

उनका सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 236 नाबाद रहा, जो उन्होंने दिसंबर 1983 में चेन्नई में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ बनाया था।

कप्तान के रूप में भी छोड़ी छाप

Sunil Gavaskar केवल महान बल्लेबाज़ ही नहीं, बल्कि भारतीय टीम के सफल कप्तानों में भी गिने जाते हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया।

हालांकि उनके कप्तानी कार्यकाल में एक दिलचस्प दौर भी आया, जब कप्तानी कई बार उनके और कपिल देव के बीच बदलती रही। चयनकर्ताओं ने समय-समय पर दोनों खिलाड़ियों को कप्तानी सौंपी। बावजूद इसके दोनों ने भारतीय क्रिकेट के हित को हमेशा प्राथमिकता दी और मैदान पर एक-दूसरे का पूरा साथ दिया।

लिटिल मास्टरनाम कैसे पड़ा?

Sunil Gavaskar की लंबाई लगभग 5 फीट 4 इंच थी, लेकिन उनकी बल्लेबाजी का कद दुनिया के सबसे खिलाड़ियों से भी ऊंचा माना जाता था।

उनकी शानदार तकनीक, बेखौफ बल्लेबाजी और लगातार बड़े रन बनाने की क्षमता के कारण उन्हें प्यार से ‘लिटिल मास्टर’ कहा जाने लगा। बाद में यही उपनाम भारतीय क्रिकेट की पहचान बन गया और वर्षों बाद सचिन तेंदुलकर को भी Master Blaster के नाम से पुकारा जाने लगा।

1987 विश्व कप की धीमी पारी की आलोचना

Sunil Gavaskar के शानदार करियर में एक ऐसा अध्याय भी है, जिसकी चर्चा आज भी होती है। यह था 1987 क्रिकेट विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई उनकी 36 रन की नाबाद पारी।

31 अक्टूबर 1987 को नागपुर में खेले गए इस मैच में भारत को 222 रन का लक्ष्य मिला था। गावस्कर ने पूरे 60 ओवर बल्लेबाजी की, लेकिन 174 गेंदों पर सिर्फ 36 रन ही बना सके। उनकी इस धीमी पारी के कारण भारत लक्ष्य से काफी पीछे रह गया और मैच हार गया।

यह पारी आज भी वनडे क्रिकेट के सबसे विवादित प्रदर्शनों में गिनी जाती है। बाद में गावस्कर ने स्वीकार किया कि वह उनके करियर के सबसे निराशाजनक दिनों में से एक था। उन्होंने यह भी कहा कि उस दिन वह अपनी लय नहीं पकड़ सके और टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी नहीं कर पाए।

1974 में विवाह

Sunil Gavaskar ने 23 सितंबर 1974 को मार्शनेइल गावस्कर से विवाह किया था। मार्शा मूल रूप से एक व्यवसायी परिवार से आती हैं और शादी के बाद उन्होंने हमेशा सुनील गावस्कर के क्रिकेट करियर के दौरान परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाली मार्शा मीडिया में बहुत कम दिखाई देती हैं और उन्होंने हमेशा निजी जीवन को प्राथमिकता दी।

इस दंपति का एक बेटा रोहन गावस्कर है, जिनका जन्म 20 फरवरी 1976 को हुआ। रोहन ने भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए क्रिकेट को करियर बनाया। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज रहे और 2004 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भी खेला। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।

1987 में लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

लगभग 16 वर्षों तक भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बने रहने के बाद सुनील गावस्कर ने 1987 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया। अपने अंतिम टेस्ट मैच में भी उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में शानदार 96 रन बनाए।

भारत यह मुकाबला बेहद कम अंतर से हार गया, लेकिन गावस्कर की यह पारी आज भी उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिनी जाती है।

उन्होंने अपने करियर का अंत 125 टेस्ट, 10,122 रन, 34 टेस्ट शतक और 45 अर्धशतकों के साथ किया। लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक रन और सबसे अधिक शतक का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम रहा।

कमेंटेटर और क्रिकेट विश्लेषक के रूप में नई पारी

संन्यास के बाद भी गावस्कर क्रिकेट से कभी दूर नहीं हुए। उन्होंने कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण की दुनिया में कदम रखा और जल्दी ही दुनिया के सबसे सम्मानित कमेंटेटरों में शामिल हो गए।

अपनी बेबाक राय, संतुलित विश्लेषण और खेल की गहरी समझ के कारण आज भी उनकी टिप्पणियों का क्रिकेट जगत में विशेष महत्व माना जाता है। ICC टूर्नामेंट हो या IPL, उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए खास मानी जाती है।

हाल के वर्षों में गावस्कर के बयान

क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर Sunil Gavaskar लगातार अपनी राय रखते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि खिलाड़ियों को हर साल कम-से-कम एक महीने का अनिवार्य विश्राम मिलना चाहिए।

उनका मानना है कि लगातार क्रिकेट खेलने और खिलाड़ियों के रोटेशन के कारण भारत की टेस्ट कैप का महत्व कहीं न कहीं कम होता जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि क्रिकेट बोर्डों को खिलाड़ियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए संतुलित कैलेंडर तैयार करना चाहिए।

सम्मान और पुरस्कार

भारतीय क्रिकेट में सुनील गावस्कर के अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें देश और दुनिया के कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 1975 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसने उनके शानदार क्रिकेट करियर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

इसके बाद 1980 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा।

वर्ष 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने उन्हें ICC Hall of Fame में शामिल कर क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में स्थान दिया। इसके अलावा उन्हें भारत और विदेश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट और विशेष सम्मान भी प्राप्त हुए, जो उनके अमूल्य योगदान को दर्शाते हैं।

भारतीय क्रिकेट की सोच बदलने वाले बल्लेबाज

Sunil Gavaskar से पहले विदेशी दौरों पर भारतीय बल्लेबाजी को अक्सर कमजोर माना जाता था। लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह धारणा बदल दी कि भारतीय बल्लेबाज केवल स्पिन के खिलाफ ही सफल हो सकते हैं।

उनकी तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती ने आने वाली खिलाड़ियों जैसे कि सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग और विराट कोहली जैसे बल्लेबाजों के लिए मजबूत नींव तैयार की।

सुनील गावस्कर केवल एक महान बल्लेबाज नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सोच बदलने वाले पहले वैश्विक सुपरस्टार के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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