भूमि घोटाले और दबंगई के आरोपों से घिरे प्रदीप यादव, भाकियू ‘असली’ ने मांगी जांच

संभल।
भारतीय किसान यूनियन ‘असली’ की मुरादाबाद इकाई ने पूर्व मंत्री व सपा से जुड़े रहे प्रदीप यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन ने आरोपों की जांच की मांग करते हुए साफ कहा है कि अगर 10 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।

यूनियन के मंडल अध्यक्ष दिलीप कुमार उर्फ़ टीटू यादव ने ग्रामीणों के साथ गुन्नौर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रदीप यादव पर ग्राम समाज की जमीन कब्जाने, अवैध रेत खनन करने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने जैसे आरोप लगाए गए।

जमीन कब्जा और खनन का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि 1990 से 1995 के बीच प्रदीप यादव ने बाहरी लोगों को पट्टे पर दी गई जमीन वापस लेकर अपने परिवार के नाम करा ली। सैकड़ों बीघा ग्राम समाज की जमीन से अवैध रेत निकालकर बेचने और कब्जा जमाने का भी आरोप है।

सरकारी धन से निजी फायदा

यूनियन का आरोप है कि प्रदीप यादव ने पंचायत और गौशाला की धनराशि का इस्तेमाल निजी कोठी बनाने में किया। वहीं, शिक्षक पद पर रहते हुए बिना स्कूल गए वर्षों तक वेतन उठाने का भी आरोप लगाया गया।

धमकी और गाली-गलौज की शिकायत

ग्रामीणों का कहना है कि प्रदीप यादव विरोध करने वालों को धमकाते हैं और झूठे मुकदमों में फँसाते हैं। हाल ही में 12 सितंबर को पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद में प्रियंका यादव और उनके परिवार को गाली-गलौज करने का आरोप भी सामने आया है।

कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन

भाकियू ‘असली’ ने चेतावनी दी है कि अगर 10 अक्टूबर तक जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेगा।

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