Thursday, 22 October 2026
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आईटीआरएचडी ने वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर ग्रामीण धरोहर और सतत विकास पर संवाद आयोजित किया, साथ ही 15 वर्षों की यात्रा को रेखांकित किया

वर्ल्ड हेरिटेज डे पर सांसद मनीष तिवारी ने कहा—भारत में मजबूत कानून हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर संवेदनशीलता और कार्रवाई की कमी

नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026

वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट (आईटीआरएचडी) ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें भारत की ग्रामीण धरोहर के संरक्षण और उसके विकास में उपयोग पर गंभीर चर्चा हुई। इस वर्ष की थीम — “संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया” — के संदर्भ में वक्ताओं ने धरोहर संरक्षण को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई। कार्यक्रम के दौरान आईटीआरएचडी के 15 वर्षों के कार्यों को भी सामने रखा गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा सांसद मनीष तिवारी शामिल हुए, जबकि पद्म भूषण श्री एस.के. मिश्रा, अध्यक्ष, आईटीआरएचडी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में मनीष तिवारी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्षों के बीच धरोहर स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में धरोहर संरक्षण के लिए कानून तो मजबूत हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो पर्याप्त जागरूकता है और न ही संवेदनशीलता। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इस कमी की ओर ध्यान दिलाया।

एस.के. मिश्रा ने कहा कि धरोहर संरक्षण केवल एक सांस्कृतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है। उन्होंने यह भी बताया कि आईटीआरएचडी ग्रामीण धरोहर को विकास के एक साधन के रूप में देखता है और उपेक्षित स्थलों को स्थानीय समुदाय से जोड़ने पर काम कर रहा है, खासकर बौद्ध धरोहर से जुड़े क्षेत्रों में।

कार्यक्रम में भूटान के पूर्व राष्ट्रीय परिषद अध्यक्ष डाशो सोनम किंगा, तिब्बत हाउस नई दिल्ली के प्रमुख गेशे दोरजी दामदुल और लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने भी अपने विचार रखे।

डाशो सोनम किंगा ने कहा कि भूटान में बौद्ध धरोहर को संरक्षित रखने में समुदाय की सक्रिय भूमिका, सांस्कृतिक परंपराएं और सरकारी सहयोग एक साथ काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जब लोग धरोहर को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं, तभी वह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।

गेशे दोरजी दामदुल ने कहा कि धरोहर केवल इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करुणा, ज्ञान और सामंजस्य जैसे मानवीय मूल्यों को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को बचाए बिना धरोहर संरक्षण अधूरा रहेगा।

कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा कि धरोहर को बचाने के लिए उसके दर्शन और विचार को समझना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि जब लोग इन मूल्यों को अपने अनुभव से समझते हैं, तो धरोहर अपने आप आगे बढ़ती है।

चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि भारत की ग्रामीण धरोहर—जिसमें स्मारक, पारंपरिक खेती, हस्तशिल्प, भाषाएं और लोक कलाएं शामिल हैं—अभी भी देश के विकास मॉडल में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाई है। वक्ताओं ने इसे आर्थिक और सामाजिक विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत की करीब 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जहां अब भी आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में धरोहर को रोजगार और विकास के अवसर के रूप में देखने की जरूरत बताई गई।

वर्ल्ड हेरिटेज डे हर साल 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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