Thursday, 05 November 2026
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Asian Games 2026: सुचिका तारियाल ने रचा इतिहास, MMA में भारत को पहला पदक; 700 ग्राम ने रोका गोल्ड का रास्ता

सुचिका तारियाल ने आत्मरक्षा के लिए 12 साल की उम्र में जूडो शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने जूडो, कुराश और जिउ-जित्सु में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2024 में जिउ-जित्सु विश्व चैंपियन बनने के बाद MMA में कदम रखा।

आइची-नागोया: भारत की सुचिका तारियाल ने एशियन गेम्स 2026 में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में देश के लिए इतिहास रच दिया है। 36 वर्षीय सुचिका ने महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किग्रा श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया। यह एशियन गेम्स में MMA में भारत का पहला पदक है।

हालांकि, पदक तक पहुंचने का उनका सफर बेहद नाटकीय रहा। सेमीफाइनल में सिंगापुर की टेओ हुई हून के खिलाफ मुकाबला बेहद करीबी रहा और अतिरिक्त समय के बाद इसे ड्रॉ माना गया। इसके बाद विजेता तय करने के लिए लागू टाई-ब्रेक नियम में सुचिका करीब 700 ग्राम भारी होने के कारण फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं।

क्वार्टर फाइनल में मंगोलियाई खिलाड़ी को 2-0 से हराया

सुचिका ने पदक पक्का करने के लिए क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलामा को 2-0 से हराया था। इस जीत के साथ वह सेमीफाइनल में पहुंचीं और एशियन गेम्स में MMA का कांस्य पदक भारत के नाम सुनिश्चित हो गया, क्योंकि इस स्पर्धा में दोनों हारने वाले सेमीफाइनलिस्टों को कांस्य पदक दिया जाता है।

क्वार्टर फाइनल में सुचिका ने अपने जूडो अनुभव का प्रभावी इस्तेमाल किया। उनका खेल टेकडाउन, ग्राउंड कंट्रोल और ग्राउंड एंड पाउंड पर आधारित रहा। मुकाबले से पहले उन्होंने बताया था कि उनके कोच ने उन्हें टेकडाउन के बाद ग्राउंड पर नियंत्रण बनाए रखने और सबमिशन या लॉक के जरिए मुकाबला खत्म करने की रणनीति पर काम करने को कहा था।

सेमीफाइनल में सिंगापुर की टेओ से हुआ मुकाबला

सेमीफाइनल में सुचिका का सामना सिंगापुर की टेओ हुई हून से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। शुरुआती राउंड में टेओ ने बॉक्सिंग के जरिए बढ़त बनाई, जबकि सुचिका ने अपने जूडो कौशल का इस्तेमाल करते हुए टेकडाउन और ग्राउंड गेम पर जोर दिया।

पहला राउंड सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में गया। इसके बाद सुचिका को वापसी की जरूरत थी और उन्होंने दूसरे राउंड में ऐसा किया। उन्होंने टेओ को फिर जमीन पर गिराया और कुछ समय तक उन्हें नियंत्रित किया। दूसरे राउंड में सुचिका के प्रदर्शन के बाद मुकाबला एक मिनट के अतिरिक्त समय में चला गया।

अतिरिक्त समय में टेओ ने नियंत्रण बनाए रखा। सुचिका ने वापसी की कोशिश की, लेकिन मुकाबला निर्णायक रूप से किसी एक खिलाड़ी के पक्ष में नहीं जा सका।

अपील के बाद मुकाबला ड्रॉ हुआ

मुकाबले के शुरुआती फैसले में टेओ को विजेता घोषित किया गया था। सुचिका इस फैसले से संतुष्ट नहीं थीं और भारतीय टीम ने परिणाम को चुनौती दी। MMA Sports Federation के अध्यक्ष निखिल कुंडे के अनुसार, चुनौती के बाद मुकाबले की समीक्षा की गई और इसे ड्रॉ माना गया।

यहीं से मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण नियम सामने आया। ड्रॉ के बाद भी फाइनल में पहुंचने के लिए विजेता तय करना जरूरी था। इसके लिए एशियाई MMA के टाई-ब्रेक नियम लागू किए गए। इसमें मुकाबले के दौरान चेतावनियों और अन्य मानकों के बाद खिलाड़ियों के सुबह के वजन को निर्णायक आधार बनाया गया।

700 ग्राम का अंतर पड़ा भारी

सुचिका और टेओ दोनों 60 किग्रा श्रेणी में थीं। लेकिन मुकाबले के दिन सुबह हुए आधिकारिक वजन में टेओ का वजन सुचिका से करीब 700 ग्राम कम था। चूंकि मुकाबला ड्रॉ था और अन्य टाई-ब्रेक स्थितियां निर्णायक नहीं बनीं, इसलिए हल्के वजन वाली टेओ को विजेता घोषित किया गया। वह फाइनल में पहुंच गईं, जबकि सुचिका को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

MMA Sports Federation के अध्यक्ष निखिल कुंडे ने बताया कि भारतीय टीम की चुनौती के बाद परिणाम ड्रॉ किया गया और सुबह के वजन के आधार पर सिंगापुर की खिलाड़ी को फाइनल में भेजा गया।

इस तरह सुचिका की हार सीधे तौर पर किसी एक निर्णायक अंक या सबमिशन से नहीं हुई, बल्कि ड्रॉ के बाद लागू टाई-ब्रेक प्रक्रिया ने फाइनलिस्ट का फैसला किया।

ये भी पढ़ें :- Asian Games 2026: भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम का दबदबा, पाकिस्तान को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

MMA में क्या है वजन का नियम?

MMA में अलग-अलग वजन वर्ग बनाए जाते हैं ताकि खिलाड़ियों के बीच शारीरिक अंतर सीमित रहे। एशियन गेम्स 2026 के लिए Olympic Council of Asia (OCA) ने MMA में छह स्पर्धाएं मंजूर की हैं—पुरुषों के लिए आधुनिक MMA में 60 और 71 किग्रा, ट्रेडिशनल MMA में 65 और 77 किग्रा तथा महिलाओं के लिए आधुनिक 54 और ट्रेडिशनल 60 किग्रा।

OCA के अनुसार ट्रेडिशनल MMA में खिलाड़ी MMA Gi और सुरक्षात्मक उपकरण पहनते हैं। इनमें माउथगार्ड, कम से कम 4-औंस के ग्लव्स और शिन पैड शामिल हैं। ट्रेडिशनल फॉर्मेट में Gi को पकड़कर टेकडाउन और सबमिशन तकनीकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सुचिका के मुकाबले में इस्तेमाल हुआ टाई-ब्रेक सिस्टम सामान्य दर्शकों के लिए थोड़ा अलग लग सकता है। मुकाबला ड्रॉ होने पर पहले यह देखा जाता है कि खिलाड़ियों को कितनी चेतावनियां मिलीं। अगर चेतावनियों की स्थिति भी समान हो, तो अन्य निर्धारित मानकों के बाद प्रतियोगिता के दिन सुबह किए गए वजन को देखा जाता है। यदि वजन भी समान हो तो मुकाबले के बाद का वजन निर्णायक हो सकता है। इसके बाद भी बराबरी रहने पर तीन सहायक रेफरी के फ्लैग निर्णय से विजेता तय किया जा सकता है।

फैसले से भावुक हुईं सुचिका

परिणाम घोषित किए जाने के समय सुचिका काफी भावुक नजर आईं। रिपोर्ट के मुताबिक जब अधिकारियों ने दोनों खिलाड़ियों को विजेता की घोषणा के लिए बीच में बुलाया, तो सुचिका तुरंत वहां नहीं गईं। बाद में कोच के कहने पर वह अधिकारी के पास पहुंचीं, जहां टेओ का हाथ ऊपर उठाया गया। इसके बाद भारतीय टीम ने फैसले को चुनौती दी।

आखिरकार अपील के बाद मुकाबले को ड्रॉ माना गया, लेकिन वजन के टाई-ब्रेक ने पहले फैसले को नहीं बदला। सुचिका को कांस्य पदक मिला और टेओ फाइनल में पहुंच गईं।

एशियन गेम्स में पहली बार शामिल हुआ MMA

सुचिका की उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 2026 एशियन गेम्स में MMA को पहली बार आधिकारिक पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया है। एशियन ओलंपिक काउंसिल (OCA) ने मई 2025 में MMA को खेलों के कार्यक्रम में शामिल किए जाने की पुष्टि की थी। इसके साथ ही MMA ने एशियाई खेलों के प्रतिस्पर्धी खेलों की सूची में अपनी जगह बनाई।

2026 एशियन गेम्स में MMA के तहत पुरुषों और महिलाओं की मॉडर्न तथा ट्रेडिशनल MMA श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। इससे इस खेल को एशिया के बड़े बहु-खेल मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

ऐसे में सुचिका का पदक भारतीय MMA के लिए भी खास महत्व रखता है। वह एशियन गेम्स के इतिहास में MMA में भारत की पहली पदक विजेता बन गई हैं। उनकी उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में MMA का प्रतिस्पर्धी ढांचा अभी कुश्ती, मुक्केबाजी, जूडो और जिउ-जित्सु जैसे पारंपरिक कॉम्बैट स्पोर्ट्स की तुलना में अपेक्षाकृत नया है।

सुचिका का प्रदर्शन देश में MMA को लेकर बढ़ती रुचि और खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसरों की ओर भी संकेत करता है।

जूडो से शुरू हुआ था सुचिका का सफर

सुचिका का MMA तक पहुंचना एक लंबी खेल यात्रा का परिणाम है। उन्होंने बचपन में जूडो शुरू किया था। 12 साल की उम्र में एक छेड़छाड़ की घटना के बाद उन्होंने आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट सीखने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने जूडो प्रशिक्षण शुरू किया और आगे चलकर आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन बनीं।

उनकी खेल यात्रा इसके बाद जूडो तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कुराश और जिउ-जित्सु में भी प्रतिस्पर्धा की। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 एशियन गेम्स में कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने MMA को नई चुनौती के रूप में चुना।

2024 में जिउ-जित्सु विश्व चैंपियन बनने के बाद MMA में उनका प्रवेश हुआ। उनके लिए यह बदलाव आसान नहीं था, क्योंकि MMA में स्ट्राइकिंग, बॉक्सिंग, किकिंग और ग्राउंड गेम सभी पर समान रूप से काम करना पड़ता है।

जूडो का अनुभव बना सबसे बड़ा हथियार

सुचिका ने एशियन गेम्स से पहले बताया था कि जूडो ने उन्हें अन्य कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए मजबूत आधार दिया। उनके खेल में टेकडाउन और ग्राउंड एंड पाउंड उनकी प्रमुख ताकत रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना था कि MMA के लिए उन्हें स्ट्राइकिंग, किकिंग और बॉक्सिंग में और सुधार करना था।

एशियन गेम्स में मंगोलियाई खिलाड़ी के खिलाफ क्वार्टर फाइनल और सिंगापुर की टेओ के खिलाफ सेमीफाइनल में उनके खेल में जूडो की यह पृष्ठभूमि साफ दिखाई दी। ग्राउंड पर मुकाबले को ले जाना और वहां नियंत्रण बनाना उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

कांस्य पदक से आगे की कहानी

सुचिका फाइनल में नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उनका कांस्य पदक भारतीय MMA के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बन गया है। 36 वर्ष की उम्र में उन्होंने उस खेल में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक जीता, जिसने इसी संस्करण से महाद्वीपीय खेलों में आधिकारिक शुरुआत की है।

उनका सेमीफाइनल मुकाबला यह भी दिखाता है कि कॉम्बैट स्पोर्ट्स में मुकाबले का परिणाम केवल पंच, टेकडाउन या सबमिशन से तय नहीं होता। निर्धारित नियमों के भीतर वजन, चेतावनी और अन्य टाई-ब्रेक मानक भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। सुचिका के मामले में यही 700 ग्राम अंत में फाइनल और कांस्य के बीच अंतर बन गया।

फाइनल में जगह नहीं बना पाने के बावजूद सुचिका अब भारतीय MMA इतिहास की पहली एशियन गेम्स पदक विजेता हैं। उनके लंबे कॉम्बैट-स्पोर्ट्स करियर और अलग-अलग विधाओं से हासिल अनुभव ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। आइची-नागोया में मिला यह कांस्य भारत के लिए MMA के नए एशियन गेम्स अध्याय की पहली बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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