सुतीर्था मुखर्जी, सिंड्रेला दास और श्रीजा अकुला ने अपने-अपने मुकाबले सीधे गेम में जीते; ग्रुप एफ में लगातार तीसरी जीत के साथ भारत शीर्ष पर
आइची-नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सोमवार, 21 सितंबर को पाकिस्तान को 3-0 से हरा दिया। आइची-नागोया में खेले गए ग्रुप एफ के मुकाबले में भारत की तीनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने सिंगल्स मुकाबले सीधे गेम में जीते। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीसरी जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ली है।
भारत ने इससे पहले रविवार को अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया के खिलाफ 3-0 की जीत से की थी। इसके बाद टीम ने सिंगापुर को रोमांचक मुकाबले में 3-2 से हराया था। पाकिस्तान के खिलाफ एकतरफा जीत ने भारत को ग्रुप एफ में तीन जीत के साथ शीर्ष स्थान दिलाया।
सुतीर्था ने दिलाई मजबूत शुरुआत
सुतीर्था मुखर्जी के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि वह एशियन गेम्स के पिछले संस्करण में भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं। हांगझोउ 2023 में सुतीर्था और अयहिका मुखर्जी की जोड़ी ने महिला युगल में कांस्य पदक जीता था। एशियन गेम्स 2026 की भारतीय महिला टीम में सुतीर्था का अनुभव टीम के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने अलीना खान को लगातार तीन गेम में हराया। उनके खेल में शुरुआत से ही आक्रामकता और नियंत्रण दिखाई दिया। 11-3 और 11-3 से शुरुआती दो गेम जीतने के बाद तीसरे गेम में भी उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और 11-4 से मैच समाप्त किया।
भारत को टीम मुकाबले में शुरुआती बढ़त दिलाने की जिम्मेदारी सुतीर्था ने पूरी तरह निभाई।
17 साल की सिंड्रेला दास ने भी दिखाया दम
भारत की जीत में युवा खिलाड़ी सिंड्रेला दास का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। 17 वर्षीय सिंड्रेला को पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे मैच में उतारा गया और उन्होंने कलसूम खान को 3-0 से हराकर टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी।
सिंड्रेला की एशियन गेम्स टीम में मौजूदगी भारतीय टेबल टेनिस में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के उभरने को भी दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह इस समय आईटीटीएफ महिला सिंगल्स रैंकिंग में 99वें स्थान पर हैं और घरेलू सर्किट में उनके प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय सीनियर टीम में जगह मिली।
पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने तीनों गेम में लगातार बढ़त बनाए रखी। पहले गेम में 11-6 की जीत के बाद उन्होंने दूसरे गेम में 11-7 और तीसरे में 11-5 से मुकाबला अपने नाम किया।
श्रीजा अकुला ने खत्म किया मुकाबला
भारत की ओर से तीसरे मुकाबले में श्रीजा अकुला उतरीं। उनके सामने फातिमा खान थीं। भारत के पास पहले ही 2-0 की बढ़त थी, लेकिन श्रीजा ने किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया और सीधे गेम में जीत हासिल की।
उन्होंने पहला गेम 11-4 से जीतने के बाद दूसरे गेम में भी यही स्कोर दोहराया। तीसरे गेम में उन्होंने 11-5 से जीत दर्ज की और भारत को 3-0 से विजयी बना दिया।
श्रीजा की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे टीम का क्वार्टर फाइनल स्थान औपचारिक रूप से पक्का हो गया।
सिंगापुर के खिलाफ भारत को करना पड़ा था संघर्ष
पाकिस्तान के खिलाफ भारत की आसान जीत से पहले टीम को सिंगापुर के खिलाफ कड़ी चुनौती मिली थी। रविवार को ग्रुप एफ के मुकाबले में भारतीय टीम एक समय 1-2 से पीछे चल रही थी। ऐसे में मुकाबला हारने से बचने के लिए भारत को आखिरी दो मुकाबले जीतने थे।
श्रीजा अकुला और यशस्विनी घोरपड़े ने इसके बाद जिम्मेदारी संभाली और दोनों मुकाबले जीतकर भारत को 3-2 से जीत दिलाई।
इससे पहले भारत ने अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया को 3-0 से हराकर की थी। यानी टीम ने ग्रुप चरण में अलग-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना किया, जिसमें पहले एकतरफा जीत, फिर संघर्षपूर्ण वापसी और उसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ फिर से क्लीन स्वीप।
पाकिस्तान के खिलाफ टीम में हुए बदलाव
इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम ने अपनी लाइनअप में बदलाव भी किए। सुतीर्था मुखर्जी और सिंड्रेला दास को खेलने का मौका मिला, जबकि पिछले मुकाबले में शामिल दीया चितले और यशस्विनी घोरपड़े इस टाई की शुरुआती लाइनअप में नहीं थीं। इसके बावजूद टीम के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा।
यह बदलाव भारतीय टीम के पास उपलब्ध विकल्पों और बेंच स्ट्रेंथ को भी दर्शाता है। अलग-अलग खिलाड़ियों को मौका देने के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ तीनों मैच सीधे गेम में जीते।
मुकाबले के बाद खिलाड़ियों ने मिलाया हाथ
भारत-पाकिस्तान मुकाबलों में खेल के बाहर की परिस्थितियां भी अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। लेकिन महिला टेबल टेनिस के इस मुकाबले में खिलाड़ियों के बीच खेल भावना साफ दिखाई दी।
सुतीर्था और अलीना के मुकाबले के बाद दोनों खिलाड़ियों ने हाथ मिलाया। इसके बाद सिंड्रेला और कलसूम तथा श्रीजा और फातिमा के मुकाबलों के बाद भी खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया।

यह पहलू इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि पिछले कुछ समय में भारत-पाकिस्तान मुकाबलों में खिलाड़ियों के हाथ मिलाने को लेकर अलग-अलग खेलों में अलग-अलग स्थितियां देखने को मिली हैं। टेबल टेनिस में इस मुकाबले के दौरान ऐसा कोई विवाद सामने नहीं आया और दोनों टीमों की खिलाड़ियों ने मुकाबलों के बाद खेल भावना के अनुरूप एक-दूसरे का अभिवादन किया।
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भारतीय टेबल टेनिस का एशियन गेम्स इतिहास
एशियन गेम्स में भारतीय टेबल टेनिस का पदक इतिहास अपेक्षाकृत नया है। टेबल टेनिस को एशियन गेम्स में पहली बार 1958 में शामिल किया गया था, लेकिन भारत को अपने पहले पदक के लिए 60 साल का इंतजार करना पड़ा। 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीतकर यह इंतजार खत्म किया।
इसके कुछ ही दिनों बाद शरत कमल और मनिका बत्रा की जोड़ी ने मिश्रित युगल में भी कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह 2018 में भारत ने टेबल टेनिस में दो पदक जीते।
2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में सुतीर्था मुखर्जी और अयहिका मुखर्जी ने महिला युगल में कांस्य पदक जीता। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक था।
अब 2026 के आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन पर नजर है। टीम स्पर्धा में आगे बढ़ना भारतीय टेबल टेनिस के पदक इतिहास को और मजबूत करने का मौका है।
एशियन गेम्स में टेबल टेनिस में कितने पदक दांव पर?
आइची-नागोया एशियन गेम्स में टेबल टेनिस के मुकाबले भारतीय खिलाड़ियों के लिए कई पदक जीतने के मौके लेकर आएंगे। इस खेल में कुल सात स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। इनमें पुरुष टीम, महिला टीम, पुरुष सिंगल्स, महिला सिंगल्स, पुरुष डबल्स, महिला डबल्स और मिश्रित युगल स्पर्धाएं शामिल हैं।
टेबल टेनिस में मुकाबलों का आयोजन अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। शुरुआत में टीम स्पर्धाओं पर ध्यान रहेगा, जहां खिलाड़ी अपने देश के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगे। इसके बाद सिंगल्स और डबल्स मुकाबले आयोजित होंगे। मिश्रित युगल भी प्रतियोगिता का अहम हिस्सा रहेगा।
भारतीय खिलाड़ियों के लिए टीम स्पर्धाओं के अलावा व्यक्तिगत वर्गों में भी पदक जीतने का अवसर होगा। सिंगल्स में खिलाड़ी सीधे अपनी व्यक्तिगत क्षमता के दम पर चुनौती पेश करेंगे, जबकि डबल्स और मिश्रित युगल में तालमेल और रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
टेबल टेनिस के अंतिम पदक मुकाबले 28 सितंबर तक चलने हैं। ऐसे में प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के पास अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी दावेदारी मजबूत करने और पदक तालिका में भारत का योगदान बढ़ाने के कई अवसर होंगे।
भारत के लिए आगे की चुनौती
ग्रुप चरण में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद भारतीय महिला टीम अब नॉकआउट चरण में उतरेगी। क्वार्टर फाइनल में मुकाबले की चुनौती ग्रुप चरण से अलग होगी, क्योंकि यहां एक खराब मुकाबला भी टीम के पदक अभियान पर असर डाल सकता है।
भारत ने हालांकि ग्रुप चरण में अपने खेल से यह संकेत दिया है कि टीम के पास अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा विकल्प भी मौजूद हैं। सुतीर्था का अनुभव, श्रीजा अकुला की निरंतरता और सिंड्रेला दास जैसी युवा खिलाड़ी का आत्मविश्वास टीम के लिए अहम रहेगा।
सिंगापुर के खिलाफ मुश्किल स्थिति से वापसी और पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 की जीत ने टीम के अभियान को मजबूती दी है। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजर क्वार्टर फाइनल से आगे बढ़कर पदक मुकाबलों में जगह बनाने पर होगी।
पुरुष टीम के मिश्रित नतीजे
महिला टीम जहां ग्रुप एफ में लगातार तीन जीत के साथ आगे बढ़ी है, वहीं भारतीय पुरुष टीम को शुरुआती मुकाबलों में मिश्रित नतीजे मिले हैं।
पुरुष टीम ने रविवार को इंडोनेशिया को 3-0 से हराकर अभियान की शुरुआत की थी। मानव ठक्कर ने पांच गेम तक चले मुकाबले में मोहम्मद जुनिंद्रा को हराया, जबकि साथियान ज्ञानसेकरन और मनुष शाह ने भी अपने मुकाबले जीते।
हालांकि इसके बाद भारत को ईरान के खिलाफ 0-3 की हार का सामना करना पड़ा। मनुष शाह, मानव ठक्कर और हरमीत देसाई अपने-अपने मुकाबले हार गए। पुरुष टीम को ग्रुप चरण में पाकिस्तान के खिलाफ भी मुकाबला खेलना है।
इस तरह एशियन गेम्स में भारतीय टेबल टेनिस के लिए फिलहाल महिला टीम का अभियान अधिक सकारात्मक स्थिति में है।
अब नजर पदक पर
पाकिस्तान के खिलाफ इस बड़ी जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने ग्रुप चरण को शानदार तरीके से समाप्त किया है। तीन मुकाबलों में तीन जीत और पाकिस्तान के खिलाफ बिना कोई गेम गंवाए जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली रही।
हालांकि नॉकआउट चरण में ग्रुप स्टेज के रिकॉर्ड का कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा और हर मुकाबला नए सिरे से शुरू होगा। इसलिए अब सुतीर्था मुखर्जी, श्रीजा अकुला, सिंड्रेला दास और टीम की बाकी खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने इस प्रदर्शन को क्वार्टर फाइनल और उसके बाद के मुकाबलों में दोहराने की होगी।



