भारतीय विश्वविद्यालयों में से करीब 71% की रैंक पिछले साल के मुकाबले नीचे आई है। केवल 18% संस्थानों ने सुधार किया, जबकि 11% की स्थिति लगभग स्थिर रही। जानें इसके पीछे क्या वजहें हैं।
नई दिल्ली: एशिया की प्रमुख यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस विस्तार के साथ उनकी रैंकिंग में सुधार नहीं हो रहा है। क्वाक्वेरेली साइमंड्स की ओर से जारी QS World University Rankings: Asia 2027 में भारत के 325 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। इस तरह भारत एशिया में सबसे अधिक विश्वविद्यालयों की मौजूदगी के मामले में दूसरे स्थान पर है।
हालांकि, रैंकिंग में शामिल भारतीय विश्वविद्यालयों में से करीब 71 प्रतिशत की स्थिति पिछले साल के मुकाबले नीचे आई है। देश के शीर्ष छह संस्थानों की रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है।
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत ने अपनी मौजूदगी का विस्तार किया है। इस साल 34 भारतीय संस्थान पहली बार सूची में शामिल हुए हैं। वहीं, एशिया के स्तर पर कुल 1,722 विश्वविद्यालयों को रैंकिंग में जगह मिली है, जो 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों से आते हैं।
पिछले संस्करण के मुकाबले इस बार 195 नए संस्थान सूची में शामिल हुए हैं। QS के मुताबिक, भारत के सामने चुनौती अब केवल विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि शोध के प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय पहचान और अकादमिक प्रतिष्ठा को मजबूत करने की भी है।
देश के शीर्ष छह विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट
QS एशिया रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली लगातार भारत का शीर्ष संस्थान बना हुआ है। हालांकि, इसकी रैंकिंग में सात स्थान की गिरावट आई है। 2026 की सूची में इसे 59वां स्थान मिला था, जबकि 2027 में यह 66वें स्थान पर है। इसके बाद IISc बेंगलुरु का स्थान है, जिसकी रैंक 64 से गिरकर 79 हो गई है।
IIT बॉम्बे को इस बार 83वीं रैंक मिली है। पिछले संस्करण में यह 71वें स्थान पर था। इसी तरह IIT मद्रास 70वें से 85वें, IIT खड़गपुर 77वें से 90वें और IIT कानपुर 77वें से 97वें स्थान पर पहुंच गया। इस तरह भारत के छह सबसे बेहतर रैंक वाले संस्थानों में से किसी की भी रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ।
दिल्ली विश्वविद्यालय की रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई। यह 95वें स्थान से 106वें स्थान पर पहुंच गया और एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों की सूची से बाहर हो गया। हालांकि, भारत के विश्वविद्यालयों की कुल मौजूदगी एशिया के शीर्ष 200 में बढ़ी है। पिछले संस्करण में इस श्रेणी में भारत के 20 संस्थान थे, जबकि 2027 की सूची में इनकी संख्या 21 हो गई है।
QS Asia Rankings 2027 में भारत के शीर्ष विश्वविद्यालय
| विश्वविद्यालय | 2027 रैंक | 2026 रैंक |
| IIT दिल्ली | 66 | 59 |
| IISc बेंगलुरु | 79 | 64 |
| IIT बॉम्बे | 83 | 71 |
| IIT मद्रास | 85 | 70 |
| IIT खड़गपुर | 90 | 77 |
| IIT कानपुर | 97 | 77 |
| चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी | 104 | 109 |
| दिल्ली विश्वविद्यालय | 106 | 95 |
| IIT गुवाहाटी | 120 | 115 |
| IIT रुड़की | 124 | 114 |
| जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय | 128 | 130 |
| लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी | 154 | 187 |
| VIT वेल्लोर | 156 | 156 |
| BITS पिलानी | 161 | 154 |
| ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी | 165 | 163 |
| सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी | 175 | 200 |
| शूलिनी यूनिवर्सिटी | 177 | 159 |
| एमिटी यूनिवर्सिटी | 181 | 187 |
| जामिया मिल्लिया इस्लामिया | 183 | 197 |
| UPES | 183 | 163 |
| मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन | 195 | 206 |
71 प्रतिशत भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट
QS एशिया रैंकिंग 2027 का एक अहम पहलू यह है कि सूची में शामिल भारतीय विश्वविद्यालयों में से 71 प्रतिशत की रैंक पिछले साल के मुकाबले नीचे आई है। करीब 18 प्रतिशत संस्थानों ने अपनी स्थिति में सुधार किया, जबकि 11 प्रतिशत की रैंकिंग लगभग स्थिर रही।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, QS के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने इस आंकड़े को भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र की गुणवत्ता में 71 प्रतिशत की गिरावट के रूप में समझने से आगाह किया है। उनके अनुसार, रैंकिंग में नीचे जाने का अर्थ यह जरूरी नहीं कि किसी विश्वविद्यालय का वास्तविक प्रदर्शन भी कमजोर हुआ हो। रैंकिंग में शामिल भारतीय विश्वविद्यालयों में से लगभग दो-तिहाई ऐसे थे जिनकी रैंक नीचे आई, लेकिन उनके कुल स्कोर में सुधार हुआ। IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली और IISc जैसे संस्थानों के स्कोर भी मोटे तौर पर स्थिर रहे।
इसका एक कारण एशिया में विश्वविद्यालयों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। इस साल रैंकिंग में 195 नए संस्थान शामिल हुए। इसके अलावा कई पुराने संस्थानों ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया। ऐसे में किसी विश्वविद्यालय का स्कोर बेहतर होने के बावजूद उसकी रैंक नीचे जा सकती है, क्योंकि दूसरे संस्थानों का प्रदर्शन उससे अधिक तेजी से सुधरा हो।
QS के अनुसार, जापान के 85 प्रतिशत, जबकि ताइवान और इंडोनेशिया के लगभग 70 प्रतिशत विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में भी गिरावट आई है।
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किन भारतीय विश्वविद्यालयों ने रैंकिंग में सुधार किया?
कई भारतीय विश्वविद्यालय ऐसे भी हैं जिन्होंने इस बार अपनी स्थिति बेहतर की है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने 109वें स्थान से 104वें स्थान पर पहुंचकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की रैंक 187 से सुधरकर 154 हो गई। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने भी 200वें स्थान से 175वें स्थान तक का सफर तय किया।
सरकारी और केंद्रीय संस्थानों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की रैंक 130 से सुधरकर 128 हो गई। जामिया मिल्लिया इस्लामिया 197वें स्थान से 183वें स्थान पर पहुंचा, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की रैंक 278 से सुधरकर 268 हो गई। IIT (BHU) वाराणसी ने 237वें स्थान से 219वीं रैंक हासिल की। IIT हैदराबाद भी 270वें से 251वें स्थान पर पहुंच गया।
कुछ संस्थानों ने रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। IIT (ISM) धनबाद 424वें स्थान से 373वें स्थान पर पहुंचा। डॉ. बी.आर. अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जालंधर ने 666वें स्थान से छलांग लगाकर 486वीं रैंक हासिल की। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी की रैंक 700 से सुधरकर 584 हो गई। निजी संस्थानों में जैन यूनिवर्सिटी ने 595वें स्थान से 374वीं रैंक हासिल की, जबकि वॉक्सन यूनिवर्सिटी 694वें स्थान से सुधरकर 499वें स्थान पर पहुंची।
इसके उलट कुछ विश्वविद्यालयों को काफी बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, कोट्टायम की रैंक 495 से गिरकर 697 हो गई। उस्मानिया यूनिवर्सिटी 470वें स्थान से 650वें स्थान पर पहुंच गई, जबकि मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी की रैंक 458 से गिरकर 631 हो गई।
शोध प्रकाशन में भारत की स्थिति मजबूत
रैंकिंग के आंकड़ों में भारत के लिए शोध से जुड़ा एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। Papers per Faculty यानी प्रति फैकल्टी सदस्य शोध पत्रों के आधार पर भारत के 27 विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल हैं। इनमें से पांच विश्वविद्यालय शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहे।
इस श्रेणी में IISc बेंगलुरु एशिया में पहले स्थान पर है। IIT मद्रास तीसरे, IIT दिल्ली सातवें, IIT रुड़की आठवें और IIT रोपड़ नौवें स्थान पर है। यह संकेत देता है कि भारतीय विश्वविद्यालयों में प्रति शिक्षक शोध प्रकाशन की गतिविधि मजबूत है।
शोध के क्षेत्र में एक अन्य संकेतक Staff with PhD है। इसके तहत 15 भारतीय विश्वविद्यालयों ने एशिया में संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, 47 भारतीय संस्थान इस श्रेणी में एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल हैं। 2018 में ऐसे भारतीय संस्थानों की संख्या 16 थी। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में पीएचडी योग्यताधारी शिक्षकों की मौजूदगी बढ़ने का संकेत मिलता है।
हालांकि, शोध पत्रों की संख्या और उनके वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर भी सामने आया है। Citations per Paper यानी प्रति शोध पत्र मिलने वाले उद्धरणों के आधार पर एशिया के शीर्ष 50 संस्थानों में केवल तीन भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में शोध प्रकाशनों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनके अंतरराष्ट्रीय अकादमिक प्रभाव को और मजबूत करने की जरूरत है।
एशिया की शीर्ष यूनिवर्सिटी कौन-सी?
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में हांगकांग यूनिवर्सिटी ने लगातार दूसरे साल पहला स्थान बरकरार रखा है। चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी दूसरे स्थान पर रही, जबकि सिंघुआ यूनिवर्सिटी छह स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इस तरह मुख्यभूमि चीन की दो यूनिवर्सिटी पहली बार 2023 के बाद एशिया के शीर्ष तीन संस्थानों में शामिल हुईं।
हांगकांग की सिटी यूनिवर्सिटी चौथे और चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग पांचवें स्थान पर रही। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) छठे और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी आठवें स्थान पर रही। पिछले संस्करण में ये दोनों संस्थान संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर थे।
भारतीय विश्वविद्यालयों की मौजूदगी में बड़ा विस्तार
QS के अनुसार, पिछले एक दशक में एशिया की रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2016 में इस सूची में भारत के केवल 24 संस्थान शामिल थे, जबकि 2027 में इनकी संख्या बढ़कर 325 हो गई है। यह 13 गुने से अधिक का विस्तार है। भारत अब एशिया की कुल रैंकिंग में शामिल विश्वविद्यालयों का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा रखता है और इस मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
QS के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर के मुताबिक, भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शोध और डॉक्टरेट शिक्षा की क्षमता बढ़ी है। हालांकि, इस क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान और शोध के प्रभाव में बदलना आगे की महत्वपूर्ण चुनौती होगी। भारत के विश्वविद्यालयों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब गुणवत्ता, वैश्विक सहयोग और अकादमिक प्रतिष्ठा पर भी ध्यान देना जरूरी है। QS Asia Rankings 2027 के नतीजे भारतीय उच्च शिक्षा क्षेत्र की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रखते हैं। एक ओर भारत के विश्वविद्यालयों की संख्या और शोध प्रकाशन में विस्तार हुआ है, वहीं दूसरी ओर शीर्ष संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय पहचान से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
आने वाले वर्षों में भारतीय विश्वविद्यालय अपनी बढ़ती शोध क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रभाव और प्रतिष्ठा में कितना बदल पाते हैं, यह उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति के लिए अहम होगा।



