Friday, 31 July 2026
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Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 3 महीने की जेल, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

5 करोड़ रुपये के निवेश, बाउंस हुए चेक और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 3 महीने की जेल की सजा सुनाई। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली: बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े चेक बाउंस (Cheque Bounce) मामले में उनकी दोषसिद्धि (Conviction) को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की कैद की सजा सुनाई है।

हालांकि अदालत ने पहले दी गई छह महीने की सजा को घटाकर तीन महीने कर दिया, लेकिन यह साफ कर दिया कि अभिनेता को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

यह मामला कोई नया नहीं है। इसकी शुरुआत लगभग एक दशक पहले हुई थी और अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने कहा कि अभिनेता ने Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत अपराध किया है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत का फैसला सही था।

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि, राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने अपनी कंपनी श्री नौरंग गॉडावरी एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Shri Naurang Godavari Entertainment Ltd.) के माध्यम से एक फिल्म “अता पता लापता” (Ata Pata Laapata) की निर्माण परियोजना शुरू की थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म के निर्माण के लिए वर्ष 2010 में दिल्ली के कारोबारी एम. जी. अग्रवाल (M.G. Agarwal) से लगभग ₹5 करोड़ का निवेश लिया गया था। यह रकम फिल्म निर्माण के लिए दी गई थी।

फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई और बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। इसके बाद निवेश की गई राशि लौटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।

कैसे पहुंचा मामला चेक बाउंस तक?

विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। समझौते के तहत राजपाल यादव की ओर से निवेशक को भुगतान के लिए कई चेक जारी किए गए।

हालांकि, जब इन चेकों को बैंक में प्रस्तुत किया गया तो वे पर्याप्त धनराशि (Insufficient Funds) न होने के कारण बाउंस हो गए।

इसके बाद निवेशक ने Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया। यहीं से यह मामला आपराधिक मुकदमे में बदल गया।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा

मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस का दोषी माना था। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें जुर्माने और भुगतान से जुड़े निर्देश भी दिए गए थे।

राजपाल यादव ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी और सजा पर रोक की मांग की।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले के सभी दस्तावेज, समझौते और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि का फैसला सही था।

अदालत ने माना कि आरोपी की ओर से जारी किए गए चेक वैध देनदारी (Legally Enforceable Debt) के भुगतान के लिए थे और उनके बाउंस होने की पुष्टि रिकॉर्ड से होती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

हालांकि अदालत ने कुछ परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जेल की अवधि छह महीने से घटाकर तीन महीने कर दी।

अदालत ने सजा क्यों कम की?

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषसिद्धि को हटाने का कोई आधार नहीं बनता। लेकिन अदालत ने यह भी देखा कि मामला कई वर्षों से लंबित था और आरोपी पहले भी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर चुका है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा की अवधि कम करने का निर्णय लिया। यानी दोष बरकरार रहा, लेकिन कारावास की अवधि घटा दी गई।

पहले भी जेल जा चुके हैं राजपाल यादव

यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा हो। इससे पहले भी अदालत के आदेशों का पालन न करने और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जा चुका था।

बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें राहत मिली थी, लेकिन मूल चेक बाउंस का मामला अदालत में जारी रहा। अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में है।

क्या कहता है चेक बाउंस कानून?

भारत में Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए चेक जारी करता है और वह बैंक से बाउंस हो जाता है, तो यह आपराधिक अपराध माना जाता है।

ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजा जाता है। यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है।

दोष सिद्ध होने पर आरोपी को जुर्माना, मुआवजा और जेल तीनों में से एक या अधिक सजा दी जा सकती है।

फैसले का राजपाल यादव पर असर

हाई कोर्ट के फैसले का सीधा मतलब यह है कि राजपाल यादव की दोषसिद्धि अब भी बरकरार है। यदि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिलती, तो उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित सजा का पालन करना होगा।

साथ ही, यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में जारी किए गए चेक केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं होते, बल्कि उनका कानूनी महत्व भी होता है।

क्या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं राजपाल यादव?

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव के सामने अब सबसे बड़ा कानूनी विकल्प सुप्रीम कोर्ट का है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट है, तो वह सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition – SLP) दायर कर सकता है।

यदि राजपाल यादव सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं, तो वहां से उन्हें अंतरिम राहत (Interim Relief) मिल सकती है या फिर हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार भी रखा जा सकता है। फिलहाल, इस खबर के लिखे जाने तक अभिनेता या उनके वकीलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

फिल्मी करियर पर क्या पड़ेगा असर?

Rajpal Yadav हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी अभिनेताओं में गिने जाते हैं। पिछले दो दशकों में उन्होंने ‘हंगामा’, ‘चुप चुप के’, ‘भूल भुलैया’, ‘गरम मसाला’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘फिर हेरा फेरी’, ‘मालामाल वीकली’, ‘भूल भुलैया 2’ जैसी अनेक फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई है।

हाल के वर्षों में भी वह फिल्मों और वेब सीरीज में लगातार सक्रिय रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास आने वाले समय में भी कई फिल्मी प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹1,200 करोड़ बताई जा रही है। इनमें बड़े बैनर की कई फिल्में शामिल हैं।

यदि अभिनेता को जेल होती है, तो कुछ फिल्मों की शूटिंग और रिलीज शेड्यूल प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि तीन महीने की सजा अपेक्षाकृत कम होने के कारण उद्योग के जानकार मानते हैं कि लंबी अवधि में उनके करियर पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।

यह फैसला क्यों है महत्वपूर्ण?

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला केवल राजपाल यादव तक सीमित नहीं है। यह उन सभी व्यक्तियों और कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है जो बड़े वित्तीय लेनदेन में चेक का उपयोग करते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि चेक केवल भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी भी है। यदि पर्याप्त धनराशि के बिना चेक जारी किया जाता है और भुगतान नहीं हो पाता, तो संबंधित व्यक्ति को कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

साथ ही यह मामला दिखाता है कि चाहे व्यक्ति कितना भी प्रसिद्ध क्यों न हो, कानून की नजर में सभी समान हैं।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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