Thursday, 05 November 2026
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पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी की 49वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, संगीत जगत ने किया नमन

भारतीय शास्त्रीय संगीत में पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी का योगदान अविस्मरणीय

नई दिल्ली, 17 मई 2026

भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात संगीताचार्य और चतुर्वेदी संगीत विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी को उनकी 49वीं पुण्यतिथि पर संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक जगत की अनेक हस्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी ने अपना पूरा जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार को समर्पित कर दिया था।

पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी ने वर्ष 1914 में पुरानी दिल्ली के नई सड़क क्षेत्र में चतुर्वेदी संगीत विद्यालय की स्थापना की थी। उन्होंने अपने अथक परिश्रम और समर्पण से हजारों विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी और देश की समृद्ध संगीत परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य किया। उनके शिष्य और अनुयायी उन्हें स्नेहपूर्वक “गुरुजी” कहकर संबोधित करते थे।

पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्रा ने कहा कि पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी केवल एक संगीतकार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के सच्चे साधक थे। उन्होंने संगीत को आध्यात्म, सेवा और संस्कारों का माध्यम बनाया। उनके शिष्य आज भी दुनिया भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा को आगे बढ़ा रहे हैं।

पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी ने समाज के हर वर्ग तक संगीत शिक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने निस्वार्थ भाव से अनगिनत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया और भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने में अमूल्य योगदान दिया।

प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित उमा शंकर चतुर्वेदी, जो उनके ज्येष्ठ पुत्र हैं, ने कहा कि उनके पिता का मानना था कि संगीत आत्मा की भाषा है। उन्होंने कहा कि गुरुजी का अनुशासन, शिक्षाएं और समर्पण आज भी परिवार और शिष्यों को प्रेरित करता है।

राष्ट्र टाइम्स के संपादक विजय शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि गुरुजी का जीवन संघर्ष, समर्पण और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा नई पीढ़ी को भारतीय संगीत और परंपराओं से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

प्रसिद्ध तबला वादक शरीफ भारती ने कहा कि पंडित हीरा लाल चतुर्वेदी जैसी महान विभूतियां अपने समर्पण और आजीवन संगीत साधना के माध्यम से समाज को निरंतर प्रेरित करती रहती हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित संगीत प्रेमी और शिष्य गुरुजी को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि भले ही गुरुजी आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, सुर और संस्कार हमेशा जीवित रहेंगे।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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