Saturday, 22 August 2026
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मलेशिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लगा सोशल मीडिया प्रतिबंध, Instagram, TikTok अकाउंट बनाना हुआ मुश्किल…

मलेशिया सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगा दी है। जानें नए नियम, उम्र सत्यापन और जुर्माने की पूरी जानकारी।

सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव और बच्चों की ऑनलाइन असुरक्षा के बढ़ते मामलों को लेकर दुनियाभर में चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी बीच मलेशिया ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। 1 जून (सोमवार) को लागू हुए नए नियमों के तहत अब 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Meta, TikTok और Instagram आदि) पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे। मलेशिया सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों को साइबर बुलिंग, हानिकारक कंटेंट, ऑनलाइन शोषण और सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए लिया गया है। इस फैसले के साथ ही मलेशिया बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर कड़े नियम लागू करने वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है।

क्या कहते हैं नए नियम?

मलेशियाई संचार एवं मल्टीमीडिया आयोग (MCMC) द्वारा लागू नए नियमों के अनुसार, 16 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब नया अकाउंट रजिस्टर नहीं कर सकेंगे। नियमों का उल्लंघन न हो, इसके लिए सभी सोशल मीडिया कंपनियों को आयु सत्यापन (Age Verification) सिस्टम लागू करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।

आपको बता दें कि ये नियम उन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होंगे जिनके मलेशिया में कम से कम 80 लाख यूजर्स हैं। आंकड़ों के अनुसार इनमें Facebook, Instagram, TikTok, YouTube और अन्य बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं। सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे नए यूजर्स के उम्र की जांच करें और ऐसे बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने से रोकें जिनकी आयु 16 वर्ष से कम है।

मौजूदा अकाउंट्स पर भी लागू होंगे नियम

सरकार द्वारा जारी नए नियम सिर्फ नए उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित नहीं हैं। इनमें पहले से मौजूद अकाउंट्स पर भी नकेल कसने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नियम के दायरे में आने वाले सभी सोशल मीडिया कंपनियों को अगले 6 महीने के अंदर अपने मौजूदा यूजर्स की आयु सत्यापित करनी होगी। यदि किसी यूजर की उम्र 16 वर्ष से कम पाई जाती है, तो उसे अपने फोटो, वीडियो और अन्य डेटा डाउनलोड या ट्रांसफर करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित अकाउंट पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कैसे होगी उम्र की जांच?

इस पूरे विषय में सबसे ज्यादा चर्चा उम्र सत्यापन प्रक्रिया को लेकर हो रही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अब सभी यूजर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पहचान पत्र, पासपोर्ट या अन्य सरकारी दस्तावेजों को शामिल करना पड़ सकता है, जिसके आधार पर उनकी आयु सत्यापन की जांच हो सकेगी। सरकार का मानना है कि पुरानी सेल्फ-डिक्लेरेशन यानी स्वयं उम्र दर्ज करने वाली प्रणाली प्रभावी नहीं है, क्योंकि इसकी मदद से बच्चे आसानी से अपनी गलत उम्र दर्ज करके अकाउंट बना सकते हैं। इसलिए अधिक मजबूत और विश्वसनीय वेरिफिकेशन सिस्टम पर जोर दिया जा रहा है।

नियम तोड़ने पर कंपनियों पर गिरेगी गाज

मलेशिया सरकार ने इस कानून को गंभीरता से लागू करने का संकेत दिया है। यदि कोई सोशल मीडिया कंपनी सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों का पालन नहीं करती है तो उनपर 1 करोड़ मलेशियाई रिंगिट (करीब 24 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि इस मामले में अभिभावकों को छूट दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई बच्चा किसी तरह इन नियमों का उल्लंघन करके अकाउंट बना लेता है तो उसके अभिभावकों पर किसी भी तरह की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस पूरे मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनियों को ही दोषी माना जाएगा।

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

मलेशिया सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराध, साइबर बुलिंग, डिजिटल धोखाधड़ी और हानिकारक कंटेंट की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके अलावा सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। सरकार ने माना है कि सोशल मीडिया ने बच्चों को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। मलेशिया में हुए एक शोध से भी इस बात की पुष्टि होती है कि बच्चे अब घर से बाहर जाकर खेलना कम कर चुके हैं, जिसकी वजह से उनकी शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो बिना फोन के खाना भी नहीं खाते।

अधिकारियों का मानना है कि बच्चों को उम्र के अनुरूप डिजिटल अनुभव मिलना चाहिए और उन्हें ऐसे कंटेंट से दूर रखना चाहिए जो उनके मानसिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम बच्चों को तकनीक से दूर करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

दुनियाभर में बढ़ रहा सोशल मीडिया बैन का ट्रेंड

मलेशिया सरकार के इस फैसले को वैश्विक रुझान का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मलेशिया से पहले भी कई देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए हैं या फिर उस दिशा में काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया पहले ही बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठा चुका है। वहीं इंडोनेशिया ने भी हाल ही में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया है। यूरोप के कई देश और यूरोपीय संसद द्वारा भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु सीमा बढ़ाने पर विचार किया गया है।

फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस बड़े फैसले को लेकर लोगों की तरफ से काफी मिली-जुली सी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां कई अभिभावक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकार संगठनों ने इसपर चिंता भी जताई है।

समर्थकों का कहना है कि इससे बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होगा और वे वास्तविक जीवन की गतिविधियों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर नहीं कर पाएगा। इसके बजाय कुछ बच्चे बिना निगरानी वाले या कम सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की ओर जा सकते हैं, जो कि एक खतरनाक रूप धारण कर सकता है। कुछ संगठनों ने आयु सत्यापन के लिए सरकारी पहचान पत्रों के उपयोग को लेकर गोपनीयता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि इस तरह की व्यवस्था नागरिकों की निजी जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ा सकती है।

सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नई चुनौती

Meta, Google, TikTok और अन्य टेक कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावी आयु सत्यापन प्रणाली विकसित करने की होगी। अभी तक अधिकांश प्लेटफॉर्म केवल यूजर द्वारा दर्ज की गई जन्मतिथि पर निर्भर रहते थे, लेकिन नए नियमों के बाद अधिक मजबूत तकनीकी समाधान की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां इन नियमों का पालन किस प्रकार करती हैं और यह मॉडल अन्य देशों के लिए कितना प्रभावी साबित होता है।

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MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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