Thursday, 16 July 2026
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पत्रकार ने ‘नमो एम्बुलेंस’ योजना पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, तो सांसद ने करा दी Income Tax की रेड? जाने क्या है पूरा मामला

देवघर के पत्रकार Chaman Kumar की ‘नमो एम्बुलेंस’ रिपोर्ट के बाद उनके घर पर पड़ी Income Tax रेड हुई। जानिए पूरा विवाद, आरोप, सांसद और पत्रकार का पक्ष।

देवघर (झारखंड): झारखंड के देवघर से सामने आया पत्रकार चमन कुमार और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे से जुड़ा विवाद इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला केवल एक पत्रकार और एक सांसद के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, जांच एजेंसियों की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पत्रकार Chaman Kumar ने सांसद निशिकांत दुबे की चर्चित ‘नमो एम्बुलेंस’ पहल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके कुछ समय बाद आयकर विभाग (Income Tax Department) ने चमन कुमार के घर और उनसे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की।

पत्रकार का आरोप है कि यह कार्रवाई उनकी खोजी पत्रकारिता का परिणाम है, जबकि आयकर विभाग ने अपनी कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया है जिससे यह साबित हो कि रेड का संबंध उनकी रिपोर्टिंग से था।

ऐसे में यह मामला अब जांच और राजनीतिक बहस दोनों का विषय बन चुका है।

क्या है नमो एम्बुलेंसविवाद?

‘नमो एम्बुलेंस’ सेवा गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा शुरू की गई एक स्वास्थ्य सेवा पहल के रूप में प्रचारित की गई थी।

इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बताया गया था। योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी प्रचार हुआ और इसे सामाजिक सेवा की बड़ी पहल के रूप में पेश किया गया।

इसी दौरान देवघर के पत्रकार चमन कुमार ने इस परियोजना की पड़ताल शुरू की। अपनी रिपोर्टों में उन्होंने दावा किया कि एम्बुलेंस सेवा के संचालन, संसाधनों के उपयोग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पत्रकार का कहना था कि सार्वजनिक हित से जुड़े इस मुद्दे पर तथ्य सामने लाना उनका पेशेवर दायित्व था। हालांकि इन आरोपों की किसी सरकारी एजेंसी ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही किसी अदालत ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष दिया है।

रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद बढ़ा विवाद

रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आया। पत्रकार चमन कुमार का कहना है कि रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया गया। उनका आरोप है कि उन्हें खबरें हटाने और आगे ऐसी रिपोर्टिंग न करने के लिए अप्रत्यक्ष संदेश भी मिले। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।

मामला तब और अधिक चर्चा में आया जब आयकर विभाग ने उनके घर और अन्य परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। पत्रकार का दावा है कि यह कार्रवाई उनकी रिपोर्टिंग से जुड़ी है, जबकि सरकारी एजेंसियों ने दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं की।

पत्रकार के घर हुई छापेमारी

रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग की टीम ने देवघर स्थित पत्रकार चमन कुमार के आवास और उनसे जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों ने कई घंटों तक दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।

बताया गया कि टीम ने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच की तथा आवश्यक दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की और आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी। हालांकि आयकर विभाग ने कार्रवाई पूरी होने के बाद सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया कि जांच में क्या मिला या किस विशेष आधार पर यह रेड की गई थी।

यही कारण है कि रेड का वास्तविक आधार अभी भी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है। पत्रकार लगातार यह दावा कर रहे हैं कि यह कार्रवाई उनकी खोजी रिपोर्टिंग के बाद हुई, जबकि आयकर विभाग ने इस दावे की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन।

चमन कुमार ने लगाए गंभीर आरोप

छापेमारी के बाद पत्रकार चमन कुमार ने मीडिया से बातचीत और वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने केवल जनहित से जुड़े सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, यदि किसी सार्वजनिक परियोजना में अनियमितता की आशंका दिखाई देती है तो पत्रकार का कर्तव्य है कि वह उसकी जांच करे और तथ्यों को जनता के सामने रखे।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद जिस तरह उनके घर पर आयकर विभाग की कार्रवाई हुई, उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सत्ता से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने वालों को दबाया जा सकता है।

Chaman Kumar ने यह भी कहा कि उनके परिवार को मानसिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और इनकी पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।

सांसद निशिकांत दुबे का पक्ष

इस पूरे विवाद में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से चमन कुमार के आरोपों का कोई विस्तृत तथ्यात्मक जवाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। उनके समर्थकों का कहना है कि आयकर विभाग एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी है और उसकी कार्रवाई को सीधे किसी राजनीतिक व्यक्ति से जोड़ना उचित नहीं होगा।

अब तक ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज या बयान सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि सांसद ने आयकर विभाग की कार्रवाई में किसी प्रकार की भूमिका निभाई हो। इसलिए इस संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी हुई तेज

मामले के सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति भी गर्मा गई। महागठबंधन और विपक्ष से जुड़े कई नेताओं ने पत्रकार के समर्थन में आवाज उठाई। जमशेदपुर सहित कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का पुतला भी फूंका गया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल आलोचनात्मक आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आयकर विभाग ने कोई कार्रवाई की है तो वह उपलब्ध वित्तीय तथ्यों और कानून के आधार पर की होगी। उनके अनुसार, किसी भी जांच को बिना पर्याप्त सबूत राजनीतिक प्रतिशोध कहना उचित नहीं है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

मामले में फिलहाल दो समानांतर दावे मौजूद हैं। एक ओर पत्रकार चमन कुमार का कहना है कि ‘नमो एम्बुलेंस’ पर उनकी रिपोर्टिंग के कारण उन्हें निशाना बनाया गया, जबकि दूसरी ओर आयकर विभाग ने रेड के पीछे ऐसा कोई कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है।

इसी तरह, निशिकांत दुबे की ओर से भी इन आरोपों को स्वीकार करने वाला कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यही वजह है कि इस पूरे विवाद का अंतिम सच केवल जांच पूरी होने या सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता, जांच एजेंसियों की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ये भी पढ़ें :- New Zealand Labour Party: 110 साल पहले शुरू हुई एक ऐसी राजनीतिक यात्रा, जिसने बदल दी न्यूज़ीलैंड की सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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