Sunday, 27 September 2026
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Baruipur Horror: 11 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर लाश तालाब में फेंकी, गुस्साई भीड़ ने की पीट-पीटकर आरोपी की हत्या

11 वर्षीय बच्ची की मौत से बारुईपुर में आक्रोश फैल गया। आरोपी की भीड़ ने हत्या कर दी, पुलिस ने SIT बनाई और कई लोगों को हिरासत में लिया।

बारुईपुर, प. बंगाल: कभी-कभी एक अपराध केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज के गुस्से और व्यवस्था पर अविश्वास का प्रतीक बन जाता है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर (Baruipur) में 11 वर्षीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद ठीक ऐसा ही हुआ।

बच्ची का शव तालाब से मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया। देखते ही देखते इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और जिस युवक पर इस अपराध का शक जताया गया, उसे भीड़ ने पकड़कर बेरहमी से पीट दिया। बाद में उसकी भी मौत हो गई।

इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, भीड़ द्वारा न्याय (Mob Lynching) और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जबकि पूरे इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

कैसे शुरू हुई पूरी घटना?

शनिवार (4 जुलाई) की शाम बारुईपुर के एक गांव में रहने वाली 11 वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई। परिवार ने काफी देर तक उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। देर रात परिजनों और ग्रामीणों ने आसपास के इलाकों में खोजबीन शुरू की और पुलिस को भी सूचना दी।

अगले दिन यानी 5 जुलाई की सुबह गांव के पास स्थित एक तालाब में बच्ची का शव मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया गया।

हालांकि, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की थी। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत और कथित यौन अपराध की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

परिजनों ने लगाए आरोप

बच्ची के परिवार का आरोप है कि घटना सुनियोजित थी। उनका कहना है कि बच्ची शाम से लापता थी और काफी देर तक खोजने के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन शव मिलने के बाद परिवार ने स्थानीय युवक पर गंभीर आरोप लगाए।

इसी दौरान गांव में यह खबर तेजी से फैल गई कि एक स्थानीय व्यक्ति इस अपराध में शामिल हो सकता है। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

भीड़ ने आरोपी को पकड़ लिया

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीणों ने जिस व्यक्ति पर शक जताया, उसे पकड़ लिया। इसके बाद भीड़ ने उस पर हमला कर दिया। देखते ही देखते सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए और युवक की बेरहमी से पिटाई शुरू हो गई।

पुलिस जब तक मौके पर पहुंची, तब तक आरोपी गंभीर रूप से घायल हो चुका था। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस का बयान

पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि बच्ची की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

पुलिस ने यह भी कहा कि जिस युवक की भीड़ ने हत्या कर दी, उसके खिलाफ आरोपों की भी जांच की जा रही थी। लेकिन भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया।

अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की।

इलाके में भड़का गुस्सा

बच्ची की मौत की खबर सामने आते ही बारुईपुर और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कई जगहों पर लोगों ने सड़क जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बच्ची के साथ हुई घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।

धारा 163 लागू

बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी।

इस प्रावधान के तहत लोगों के एकत्र होने और सार्वजनिक गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया ताकि किसी नई हिंसा को रोका जा सके।

पूरे इलाके में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए।

SIT का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने Special Investigation Team (SIT) का गठन किया है।

SIT को बच्ची की मौत, कथित यौन अपराध, आरोपी युवक की लिंचिंग और पूरी हिंसा की अलग-अलग जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

जांच टीम फॉरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

कई लोगों की गिरफ्तारी

लिंचिंग की घटना के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर कई लोगों की पहचान शुरू की।

रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ हिंसा में शामिल होने के आरोप में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू

बारुईपुर की घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी जघन्य अपराध को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची के साथ हुई घटना को लेकर विभिन्न दल अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की होनी चाहिए।

खेड़ा ने राज्य सरकार से पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के अनुसार सजा दिलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को एकजुट होकर न्याय और कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

अभिषेक बनर्जी ने भी भाजपा को घेरा

इस घटना के सामने आने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नेता अभ्षेक बनर्जी के भी भाजपा को टैग करते हुए उनपर निशाना साधा।

उन्होंने लिखा –

यह न केवल महिलाओं को निराश करता है, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाता है जहाँ जघन्य अपराधों के आरोपी यह मानने लगते हैं कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। जहाँ राजनीतिक संबंध न्याय को प्रभावित करते प्रतीत होते हैं। जहाँ प्रभाव कानून के शासन से अधिक प्रभावशाली प्रतीत होता है। जहाँ यह चिंताजनक प्रश्न उठता है कि क्या राजनीतिक दबाव न्याय की खोज पर हावी हो रहा है। यही बरुईपुर हत्याकांड के पीछे की असली त्रासदी है!

आगे उन्होंने लिखा, भाजपा बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा का वादा लेकर आई थी। इसके विपरीत, ऐसी हर घटना उसके खोखले वादों पर नए सवाल खड़े करती है। चुप्पी भी उतनी ही मार्मिक है। कोई विरोध नहीं। कोई आक्रोश नहीं। जवाबदेही की कोई मांग नहीं। इस्तीफे की कोई मांग नहीं। अंतरात्मा की कोई जागृति नहीं।

जब न्याय चयनात्मक हो जाता है और आक्रोश राजनीतिक हो जाता है, तो न केवल पीड़ित को भुगतना पड़ता है, बल्कि समाज को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।

SIT जांच, गिरफ्तारी और प्रशासन की कार्रवाई

घटना के बाद पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की और घटनास्थल से फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए। मृत बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया, जबकि परिवार ने शुरू से ही दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या, अपहरण और अन्य संबंधित धाराओं के साथ-साथ POCSO Act के तहत भी मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कई संदिग्धों से पूछताछ की गई और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच शुरू हुई।

मुख्य आरोपी की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी

इस घटना का सबसे सनसनीखेज पहलू यह रहा कि जिस व्यक्ति पर बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया गया, वह पुलिस हिरासत तक पहुंच ही नहीं पाया।

स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और आरोपी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ इतनी आक्रामक थी कि वह सफल नहीं हो सकी।

आरोपी की मौत के बाद पुलिस ने अलग से Mob Lynching का मामला दर्ज किया और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान शुरू की। वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और मोबाइल रिकॉर्डिंग के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई। बाद में इस मामले में कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया।

इलाके में हिंसा की खबर

आरोपी की मौत के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और कई स्थानों पर प्रदर्शन शुरू हो गए।

प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम की, पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि इलाके में कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। तनाव बढ़ने पर पुलिस ने अतिरिक्त बल बुलाया।

बारुईपुर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई, जिसके तहत लोगों की भीड़ जुटाने और सार्वजनिक गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया।

ये भी पढ़ें :- The Battle of Gettysburg: तीन दिन तक चली वह लड़ाई, जिसने अमेरिकी गृहयुद्ध की दिशा बदल दी

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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