ताजानी की टिप्पणी पर विरोध के दौरान विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। महिला अधिकार और सरकार की सामाजिक नीतियों के संदर्भ में इस बयान पर राजनीतिक बहस आगे बढ़ी।
रोम: इटली में इन दिनों महिला नेताओं के मिनी स्कर्ट पहनकर सामने आने की तस्वीरें चर्चा में हैं। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक यह मामला पहुंच चुका है। लेकिन इसके पीछे वजह कोई फैशन ट्रेंड नहीं, बल्कि इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी की महिलाओं के पहनावे और उनके वैवाहिक जीवन को लेकर की गई एक टिप्पणी है।
ताजानी ने एक राजनीतिक कार्यक्रम में कहा था कि अगर किसी पुरुष को शादी के लिए महिला चुननी हो तो उसे कम दिखावटी महिला को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में ऐसी महिला का जिक्र किया, जिसकी स्कर्ट कुछ लंबी हो और जिसे उन्होंने बेहतर मां और अधिक भरोसेमंद पत्नी के रूप में पेश किया।
इस टिप्पणी के बाद इटली की कई महिला नेताओं ने विरोध का अलग तरीका अपनाया। पूर्व ट्यूरिन मेयर और फाइव स्टार मूवमेंट की सांसद कियारा अप्पेंडिनो ने मिनी स्कर्ट में अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और सवाल किया कि क्या इससे वह भरोसेमंद महिला या अच्छी मां नहीं रह जातीं।
इसके बाद अन्य महिला सांसदों ने भी छोटे स्कर्ट पहनकर संसद में पहुंचकर ताजानी की टिप्पणी पर विरोध जताया।
क्या था एंटोनियो ताजानी का बयान?
विवाद की शुरुआत एक राजनीतिक कार्यक्रम में ताजानी के भाषण से हुई। उन्होंने अपने बच्चों की शादी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई युवा पुरुष उनसे पूछे कि उसे किस तरह की महिला से शादी करनी चाहिए, तो वह कम दिखावटी लेकिन अधिक गंभीर और भरोसेमंद महिला को चुनने की सलाह देंगे।
ताजानी ने ऐसी महिला को अच्छी मां और ऐसी पत्नी के तौर पर बताया जो शादी के रिश्ते के प्रति प्रतिबद्ध रहे। इसके बाद उन्होंने उसके पहनावे का जिक्र करते हुए कहा कि वह शायद कम सुंदर हो और उसकी स्कर्ट कुछ लंबी हो। उन्होंने इसके उलट अधिक आकर्षक महिला को लेकर यह बात कही कि उसके रिश्तों की संख्या अधिक हो सकती है और उसके बेवफाई करने की आशंका भी हो सकती है।
उनकी टिप्पणी का यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना। आलोचकों ने सवाल उठाया कि किसी महिला के कपड़ों की लंबाई को उसके चरित्र, भरोसेमंद होने या अच्छी मां बनने से कैसे जोड़ा जा सकता है।
मिनी स्कर्ट पहनकर सामने आईं कियारा अप्पेंडिनो
ताजानी की टिप्पणी के बाद पूर्व ट्यूरिन मेयर और फाइव स्टार मूवमेंट की सांसद कियारा अप्पेंडिनो ने सोशल मीडिया पर मिनी स्कर्ट पहने अपनी तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने सीधे ताजानी को संबोधित करते हुए पूछा कि क्या इस पोशाक से वह भरोसेमंद महिला या अच्छी मां नहीं बन सकतीं।
अप्पेंडिनो ने अपनी पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि वर्ष 2026 में किसी सरकार के मंत्री की ओर से महिलाओं के कपड़ों की लंबाई को उनके चरित्र और वैवाहिक विश्वसनीयता से जोड़ने वाली बात क्यों सुननी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि किसी महिला की विश्वसनीयता उसके कपड़ों के सेंटीमीटर से तय नहीं हो सकती और ऐसी सोच को पीछे छोड़ने की जरूरत है।
संसद में भी दिखा विरोध
ताजानी की टिप्पणी के खिलाफ विरोध का असर इटली की संसद में भी दिखाई दिया। विपक्षी खेमे की महिला सांसदों के एक समूह ने मिनी स्कर्ट पहनकर संसद पहुंचकर इस बयान के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 केंद्र-वाम महिला सीनेटर रोम स्थित पालाजो मदामा पहुंचीं और अपने पहनावे के जरिए ताजानी की उस टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने महिलाओं के कपड़ों को उनके चरित्र, वैवाहिक रिश्ते और मातृत्व से जोड़कर देखा था।
महिला सांसदों का कहना था कि किसी महिला की पोशाक की लंबाई उसके व्यक्तित्व, निष्ठा या मां के रूप में उसकी भूमिका का पैमाना नहीं हो सकती। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि महिलाओं की पहचान और उनकी क्षमताओं का आकलन उनके कपड़ों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
सीनेटर वालेरिया वालेंटे ने ताजानी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे महिलाओं को लेकर चली आ रही पारंपरिक सोच का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि इस तरह की धारणा महिलाओं की पहचान को उनके परिवार, पति और बच्चों की जिम्मेदारियों तक सीमित कर देती है। संसद में महिला सांसदों के इस प्रतीकात्मक विरोध के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। इससे ताजानी की टिप्पणी को लेकर चल रहा विवाद संसद से बाहर व्यापक सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया।
मारिया एलेना बोश्की ने भी कसा तंज
इटालिया वीवा की नेता और सांसद मारिया एलेना बोश्की ने भी ताजानी की टिप्पणी पर व्यंग्य किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब सरकार महिलाओं की स्कर्ट की लंबाई को लेकर कोई कानून बनाने वाली है।
बोश्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर महिलाओं की विश्वसनीयता को उनके पहनावे से जोड़ा जा रहा है तो वह दिन दूर नहीं जब स्कूल, दफ्तर और संसद में लंबी स्कर्ट को अनिवार्य कर दिया जाएगा।
इस तरह ताजानी की टिप्पणी पर विरोध केवल विपक्षी दलों के सामान्य राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा। महिला नेताओं ने अपने पहनावे को ही विरोध का माध्यम बना लिया।
मातेओ रेंजी ने भी किया विरोध
इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और सीनेटर मातेओ रेंजी ने भी ताजानी की बात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे महिलाओं को लेकर पुराने जमाने की सोच से जोड़ते हुए आलोचना की।
रेंजी ने व्यंग्य करते हुए ताजानी की मिनी स्कर्ट पहने हुए एक कृत्रिम रूप से बनाई गई तस्वीर भी साझा की। इसका मकसद ताजानी की उस दलील का मजाक उड़ाना था जिसमें उन्होंने स्कर्ट की लंबाई को महिला की गंभीरता और भरोसेमंद होने से जोड़ दिया था।
रेंजी ने यह भी सवाल उठाया कि विदेश मंत्री को महिलाओं के कपड़ों पर टिप्पणी करने के बजाय दुनिया के उन हिस्सों में महिलाओं के अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए जहां महिलाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध हैं।
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ताजानी ने मांगी माफी
बढ़ते विवाद को देखते हुए एंटोनियो ताजानी ने माफी मांग ली है। उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा कि अगर उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची तो उन्हें इसका खेद है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा महिलाओं का अपमान करना नहीं था और उन्होंने अपने निजी या सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को अपमानित करने का उद्देश्य कभी नहीं रखा।
ताजानी ने अपने बचाव में महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपने काम का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरान और अफगानिस्तान में महिला राजदूतों की नियुक्ति की है और इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश देना था।
हालांकि उनकी माफी के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। महिला नेताओं और विपक्षी दलों की ओर से विरोध और आलोचना जारी रही।
कौन हैं एंटोनियो ताजानी?
एंटोनियो ताजानी इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री हैं। वह फोर्जा इटालिया पार्टी के नेता भी हैं। यह पार्टी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है।
ताजानी लंबे समय से इटली की राजनीति और यूरोपीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनके मौजूदा पदों को देखते हुए महिलाओं के पहनावे और पारिवारिक भूमिका को लेकर की गई टिप्पणी का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया।
इसी वजह से विपक्षी नेताओं ने इसे केवल एक निजी राय मानकर छोड़ने के बजाय एक वरिष्ठ सरकारी पद पर बैठे नेता की सार्वजनिक टिप्पणी के रूप में उठाया।
विवाद के बीच जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ
इस विवाद का एक और राजनीतिक संदर्भ इटली सरकार की हाल की सामाजिक और सांस्कृतिक नीतियां हैं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने हाल में स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने और विदेशी छात्रों की संख्या को लेकर नए नियमों की घोषणा की है।
इसी पृष्ठभूमि में मारिया एलेना बोश्की और अन्य आलोचकों ने ताजानी की स्कर्ट संबंधी टिप्पणी को सरकार की व्यापक सामाजिक बहस से जोड़कर देखा। हालांकि बुर्का-नकाब से जुड़े सरकारी नियम और ताजानी की व्यक्तिगत टिप्पणी अलग-अलग मुद्दे हैं।
यही कारण है कि इस विवाद में कपड़ों की स्वतंत्रता, महिला अधिकार, व्यक्तिगत पसंद और सरकार की सामाजिक नीतियों जैसे कई मुद्दे एक साथ चर्चा में आ गए हैं।
क्या विवाद महज कपडों को लेकर था?
ऊपरी तौर पर यह मामला स्कर्ट की लंबाई को लेकर शुरू हुआ, लेकिन इसके केंद्र में महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर चरित्र, विवाह और मातृत्व से जोड़ने का सवाल है।
ताजानी ने अपने बयान में जिस तरह ‘कम दिखावटी’ महिला को अधिक भरोसेमंद और बेहतर मां के रूप में पेश किया, उसकी आलोचना इसी आधार पर हुई। आलोचकों का कहना है कि किसी महिला की वैवाहिक निष्ठा या मातृत्व क्षमता का अनुमान उसके कपड़ों से नहीं लगाया जा सकता।
दूसरी ओर, ताजानी ने अपनी टिप्पणी को एक व्यक्तिगत उदाहरण और मजाकिया अंदाज में कही गई सलाह के रूप में पेश किया और बाद में माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा महिलाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
इसलिए विवाद का तथ्यात्मक केंद्र ताजानी की टिप्पणी और उसके बाद हुई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं, जबकि दोनों पक्ष इस टिप्पणी के अर्थ और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से देखते हैं।
फिलहाल, मिनी स्कर्ट में सामने आई महिला नेताओं की तस्वीरें इस विवाद का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा हैं। लेकिन असली सवाल कपड़ों की लंबाई से आगे जाकर उस सोच को लेकर है, जिसमें किसी महिला के पहनावे को उसके चरित्र और पारिवारिक भूमिका का संकेत माना जाता है।
इसी वजह से इटली का यह विवाद अब केवल एक मंत्री की टिप्पणी नहीं रह गया, बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को देखने के नजरिए पर चल रही बहस का हिस्सा बन चुका है।


