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Wednesday, February 28, 2024
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एशियन गेम्स 2023: ओलंपियन योगेश्वर दत्त ने एडहॉक कमेटी पर उठाए सवाल, एशियन गेम्स में चयन के तरीके पर लगाई फटकार

नई दिल्ली।

भारतीय कुश्ती महासंघ की तदर्थ समिति(एडहॉक कमेटी) ने मंगलवार 18 जुलाई को एशियन गेम्स के लिए पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओ की 53 किग्रा का सिलेक्शन पहले ही कर लिया। इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट इस कैटेगरी में हैं जिनका सीधा सिलेक्शन हुआ है। इस बात की पुष्टी खुद पैनल के सदस्य अशोक गर्ग ने की है। उन्होंने कहा, ‘हां बजरंग और विनेश को ट्रायल से छूट दी गई है। हालांकि तदर्थ समिति द्वारा जारी किए गए परिपत्र में दोनों पहलवानों का नाम नहीं था। अब दोनों के इस चयन पर भारत के पूर्व दिग्गज रेसलर योगेश्वर दत्त ने आपत्ति जताई है।

योगेश्वर दत्त ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा, ‘कुश्ती की तदर्थ समिति का गठन कुश्ती के विकास के लिए किया गया था न कि भेदभाव के लिए। एशियन के लिए सिलेक्शन नियम बेहद अपारदर्शी और भेदभाव वाले हैं।’ योगेश्वर ने आगे लिखा, ‘आईओए एडहॉक कमेटी का गठन कुश्ती संघ के खेल और विकास संबंधी कामों को पारदर्शी तरीके से करने के लिए किया गया था। आज निर्वाचित एडहॉक कमेटी ने चीन में होने वाले एशियन गेम्स के लिए सिलेक्शन घोषित किए हैं जिसमें बताया गया है कि पुरुषों के 65 किग्रा और महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में खिलाड़ियों का चयन पहले से ही कर लिया गया है। उन्होंने आगे लिखा, ‘यह कैसा निर्णय जिसमें केवल दो भार वर्ग में चयन पहले ही कर लिया गया है और बाकी का ट्रायल से किया जाएगा। न तो यह बताया गया कि किस नियम के तहत चुनाव किया गया है और न यह कि क्या यह नियम सिर्फ 65 किग्रा पुरुष और 53 किग्रा महिलाओं के भार में ही कैसे लागू होता है।’

खिलाड़ियों के नाम गुप्त क्यों रखे गए

ओलंपिक मेडल विनर योगेश्वर दत्त ने आगे अपने बयान में इस बात का भी जिक्र किया कि आखिर खिलाड़ियों का नाम गुप्त क्यों रखा गया है। उन्होंने लिखा, ‘गजब की बात यह है कि अगर चुनाव हो ही गया है तो खिलाड़ियों के नाम को गुप्त क्यों रखा गया है। वास्तविक में एडहॉक कमेटी का यह निर्णय न तो पारदर्शी है और न ही कुश्ती के उत्थान के लिए। यह भारत की कुश्ती और युवा खिलाड़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने की राह है।’ उन्होंने लिखा, ‘किस दबाव में यह निर्णय किया जा रहा है जो हर उभरते और यहां तक कि मौजूदा ओलंपिक विजेता पहलवानों के साथ तक भेदभाव हो रहा है।’

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