हैंडसम चेहरा, मीठी बातें और खौफनाक इरादे! जानिए कौन था चार्ल्स शोभराज, जिसे दुनिया ‘बिकिनी किलर’ और ‘द सर्पेंट’ के नाम से जानती है?
वह हैंडसम था, पढ़ा-लिखा था, कई भाषाएं बोलता था और लोगों को अपनी बातों से मिनटों में प्रभावित कर लेता था। लड़कियां उस पर भरोसा करती थीं, विदेशी पर्यटक उसे अपना दोस्त समझते थे और कई लोग उसे मददगार इंसान मान बैठते थे।
लेकिन इसी आकर्षक चेहरे के पीछे छिपा था 20वीं सदी के सबसे कुख्यात अपराधियों में से एक Charles Sobhraj
Sobhraj को दुनिया “द सर्पेंट” और “बिकिनी किलर” जैसे नामों से जानती है। 1970 के दशक में एशिया के कई देशों में फैले उसके अपराधों ने पुलिस एजेंसियों को वर्षों तक परेशान रखा।
वह सिर्फ एक Serial Killer नहीं था, बल्कि एक ऐसा ठग, चालबाज और मनोवैज्ञानिक खिलाड़ी था जो पहले लोगों का विश्वास जीतता था और फिर उसी विश्वास को उनके खिलाफ हथियार बनाता था।
चार्ल्स शोभराज की कहानी अपराध, आकर्षण, मनोविज्ञान और छल की ऐसी कहानी है जो आज भी लोगों को हैरान कर देती है।
वियतनाम से शुरू हुआ खतरनाक सफर
चार्ल्स शोभराज का जन्म 6 अप्रैल 1944 को वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। उसके पिता भारतीय मूल के थे और मां वियतनामी थीं।
बचपन से ही उसका जीवन सामान्य नहीं था। माता-पिता के रिश्तों में तनाव और पारिवारिक अस्थिरता ने उसके व्यक्तित्व को प्रभावित किया।
बाद में उसकी मां ने एक फ्रांसीसी सैनिक से विवाह कर लिया और परिवार फ्रांस चला गया। लेकिन फ्रांस पहुंचने के बाद भी चार्ल्स का व्यवहार सामान्य नहीं रहा। किशोरावस्था में ही वह चोरी और छोटे अपराधों में शामिल होने लगा।
जेल उसके जीवन का शुरुआती हिस्सा बन गई। लेकिन अधिकांश अपराधियों के विपरीत, चार्ल्स ने जेल को सुधारगृह नहीं बल्कि प्रशिक्षण केंद्र की तरह इस्तेमाल किया। वहीं उसने लोगों को समझना, उनका भरोसा जीतना और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाना सीखा।
एशिया बना Sobhraj शिकार क्षेत्र
1970 का दशक दुनिया भर के युवाओं के लिए रोमांच और यात्रा का दौर था। हजारों यूरोपीय और अमेरिकी युवा तथाकथित “हिप्पी ट्रेल” ( Hippie Trail) के जरिए एशिया की यात्रा करते थे। यह मार्ग तुर्की, अफगानिस्तान, भारत, नेपाल और थाईलैंड से होकर गुजरता था।
चार्ल्स शोभराज ने इसी मार्ग को अपने अपराधों का केंद्र बना लिया। वह विदेशी यात्रियों के बीच घुलमिल जाता था। कभी खुद को रत्न व्यापारी बताता, कभी सफल कारोबारी और कभी अनुभवी यात्री।
उसकी बातचीत में आत्मविश्वास झलकता था और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। विदेशी पर्यटक, जो अक्सर स्थानीय परिस्थितियों से अनजान होते थे, उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे।
दोस्ती से शुरू होता था मौत का खेल
चार्ल्स का तरीका दूसरे सीरियल किलर से बेहद अलग था। वह अपने शिकारों को अचानक नहीं मारता था। पहले उनसे दोस्ती करता, उनकी समस्याएं सुनता, उन्हें खाने-पीने के लिए बुलाता और कई बार उनकी मदद भी करता दिखाई देता।
इसके बाद वह उन्हें नशीले पदार्थ देता या जहर मिलाकर बीमार कर देता। जब पीड़ित कमजोर या बेहोश हो जाते, तब वह उनका पैसा, पासपोर्ट और कीमती सामान चुरा लेता। कई मामलों में उसने हत्या का रास्ता भी चुना।
जांचकर्ताओं का मानना है कि उसकी कई वारदातों का उद्देश्य केवल लूट नहीं था। कई बार वह अपने अपराधों के गवाहों को खत्म करने के लिए भी हत्या करता था।
कैसे मिली ‘बिकिनी किलर’ की उपाधि?
Charles Sobhraj से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में अमेरिकी युवती टेरेसा नोल्टन (Teresa Knowlton) की हत्या शामिल है।
1975 में थाईलैंड के एक समुद्री तट पर उसका शव मिला था। उसने बिकिनी पहन रखी थी और उसकी मौत ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा।
इसके बाद मीडिया ने शोभराज को “Bikini Killer” कहना शुरू कर दिया।
हालांकि यह उसका एकमात्र अपराध नहीं था। जांच एजेंसियों ने उसे कई विदेशी पर्यटकों की संदिग्ध मौतों से जोड़ा। उसके संभावित पीड़ितों में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, नीदरलैंड और अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।
लड़कियां क्यों शोभराज पर भरोसा कर लेती थीं?
चार्ल्स शोभराज की कहानी का सबसे रहस्यमय पहलू यही है। सवाल यह है कि आखिर इतने लोग, खासकर युवा महिलाएं, उस पर इतना भरोसा क्यों करती थीं?
इसका जवाब उसके व्यक्तित्व में छिपा था। वह बेहद आत्मविश्वासी था। महंगे कपड़े पहनता था, सलीके से बात करता था और लोगों को यह महसूस कराता था कि वह उनकी परवाह करता है।
उसके पास बातचीत करने की अद्भुत क्षमता थी। वह सामने वाले की जरूरत, कमजोरी और भावनाओं को जल्दी समझ लेता था।
कई पीड़ितों के परिचितों ने बाद में बताया कि पहली मुलाकात में चार्ल्स बेहद आकर्षक और भरोसेमंद लगता था। उसके व्यक्तित्व में ऐसा आत्मविश्वास था जो लोगों को प्रभावित कर देता था।
यही कारण था कि कई महिलाएं उसे एक सफल, बुद्धिमान और आकर्षक व्यक्ति समझ बैठती थीं।
क्या थी चार्ल्स की मनःस्थिति?
विशेषज्ञों के अनुसार Charles Sobhraj में साइकोपैथिक व्यक्तित्व के कई लक्षण दिखाई देते थे।
वह जिन लोगों को अपना शिकार बनाता था, उनके प्रति उसमें भावनात्मक जुड़ाव नहीं था। उसके लिए लोग अवसर थे, इंसान नहीं।
वह अपनी पहचान, पेशा और जीवन की कहानी बार-बार बदल सकता था। कई बार वह एक ही समय में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग कहानियां सुनाता था।
चार्ल्स केवल पैसा नहीं चाहता था। उसे लोगों को नियंत्रित करने में भी आनंद आता था। वह चाहता था कि लोग उसकी बातों पर भरोसा करें और उसके प्रभाव में आ जाएं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उसे कानून को चुनौती देने और गिरफ्तारी से बच निकलने में रोमांच महसूस होता था। यही वजह थी कि वह लगातार जोखिम भरे कदम उठाता रहा।
एक महिला जिसने दिया चार्ल्स का साथ
Charles Sobhraj की कहानी में मैरी-आंद्रे लेक्लर (Marie-Andrée Leclerc) का नाम बार-बार सामने आता है। कनाडा की रहने वाली लेक्लर चार्ल्स के प्यार में पड़ गई थीं और लंबे समय तक उसके साथ रहीं।
जांच के दौरान आरोप लगे कि उन्होंने कई अपराधों में उसकी मदद की। हालांकि यह बहस आज भी जारी है कि वह कितनी हद तक उसकी सहयोगी थीं और कितनी हद तक उसके प्रभाव में थीं।
यह मामला दिखाता है कि चार्ल्स केवल अपने शिकारों को ही नहीं, बल्कि अपने करीबियों को भी मानसिक रूप से प्रभावित करने में सक्षम था।
चार्ल्स तक कैसे पहुंची पुलिस?
1970 के दशक में अलग-अलग देशों में विदेशी पर्यटकों की रहस्यमय मौतों की खबरें सामने आ रही थीं। लेकिन उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना आज जितना आसान नहीं था।
ऐसे में एक डच राजनयिक हरमन निपेनबर्ग (Herman Knippenberg) ने कई मामलों को जोड़ना शुरू किया।
उन्होंने गायब हुए पर्यटकों, चोरी हुए पासपोर्ट और संदिग्ध मौतों के बीच संबंध खोजे। धीरे-धीरे जांच की दिशा चार्ल्स शोभराज की ओर बढ़ने लगी। निपेनबर्ग की मेहनत को बाद में इस मामले को उजागर करने में निर्णायक माना गया।
जब तिहाड़ जेल से फरार हुआ शोभराज
1976 में चार्ल्स शोभराज भारत में गिरफ्तार हुआ। दिल्ली में उसने फ्रांसीसी छात्रों के एक समूह को नशीला पदार्थ देने की कोशिश की थी। मामला खुलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी उसकी कहानी खत्म नहीं हुई।
1986 में उसने तिहाड़ जेल के कुछ कर्मचारियों और कैदियों को नशीली मिठाइयां खिलाईं। जब वे बेहोश हो गए तो वह जेल से भाग निकला। यह घटना भारत की सबसे चर्चित जेल फरारियों में शामिल हो गई।
हालांकि कुछ समय बाद उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया और उसकी सजा बढ़ा दी गई।
नेपाल में फिर गिरफ्तारी
1997 में भारत से रिहा होने के बाद वह फ्रांस लौट गया। ऐसा लग रहा था कि उसका अपराध का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। लेकिन 2003 में उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसने दुनिया को चौंका दिया।
वह नेपाल पहुंच गया। नेपाल में पुलिस ने उसे पहचान लिया और गिरफ्तार कर लिया। उस पर 1970 के दशक में दो विदेशी पर्यटकों की हत्या का मुकदमा चला।
अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद उसने लगभग दो दशक नेपाल की जेल में बिताए।
‘द सर्पेंट’ कैसे बन गया वैश्विक सनसनी?
चार्ल्स शोभराज की कहानी में अपराध के साथ-साथ रहस्य और नाटकीयता भी थी। इसी कारण उस पर कई किताबें लिखी गईं, डॉक्यूमेंट्री बनाई गईं और बाद में अंतरराष्ट्रीय टीवी सीरीज “The Serpent” भी आई।
इस सीरीज ने दुनिया भर के लोगों को उसकी कहानी से परिचित कराया। हालांकि कई विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी कि किसी अपराधी को अत्यधिक ग्लैमराइज करना उसके पीड़ितों के दर्द को पीछे छोड़ सकता है।
बॉलीवुड में भी बनी फिल्म
Charles Sobhraj की रहस्यमयी और खौफनाक जिंदगी ने बॉलीवुड फिल्म निर्माताओं को भी आकर्षित किया। 2015 में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म “मैं और चार्ल्स” में अभिनेता Randeep Hooda ने शोभराज का किरदार निभाया था, जबकि Richa Chadha और Adil Hussain भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे।
फिल्म में उसकी चालाकी, जेल से भागने की घटनाओं और भारतीय पुलिस के साथ उसके बिल्ली-चूहे के खेल को दिखाया गया था।
2022 में रिहाई और नई बहस
दिसंबर 2022 में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए उसकी रिहाई का आदेश दिया।
इसके बाद उसे फ्रांस भेज दिया गया। रिहाई के साथ ही एक बार फिर बहस शुरू हो गई कि क्या इतने गंभीर अपराधों से जुड़े व्यक्ति को आज भी मीडिया में इतनी जगह मिलनी चाहिए।
खबरों के मुताबिक इस वक्त Charles Sobhraj फ्रांस में है, और एक स्वतंत्र नागरिक के तौर पर जीवन यापन कर रहा है।
ये भी पढ़ें ;- Bharat Tiwari Encounter: सिस्टम से लड़ने वाला नायक या कानून को चुनौती देने वाला युवक? जानिए भरत तिवारी की कहानी


