ईपीएस-95 पेंशन मुद्दे पर ईपीएफओ ने पेंशनरों के साथ की बैठक, पेंशनरों की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग

नई पेंशन स्कीम पर भी हुई चर्चा

नई दिल्ली।

सरकार की पहल पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएस-95 पेंशनरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक का उद्देश्य पेंशनरों की लंबित मांगों पर चर्चा करना था। देशभर में लगभग 77 लाख ईपीएस-95 पेंशनभोगी सरकार द्वारा लागू की गई नई पेंशन स्कीम (यू पी एस) के बाद अपनी न्यूनतम पेंशन बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष, कमांडर अशोक राउत ने बताया कि केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति के साथ हुई इस बैठक में न्यूनतम पेंशन ₹7500 प्रति माह, महंगाई भत्ता और पति-पत्नी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा जैसी प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई। समिति द्वारा उठाए गए मुद्दों और दिए गए सुझावों पर 15 दिनों के भीतर पुनः बैठक करने पर सहमति बनी है।

बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कहा है कि जब सरकार यू पी एस में अपना अंशदान 18.5% दे रही है, तो ईपीएस-95 में केवल 1.16% क्यों? उन्होंने न्यूनतम पेंशन 10000 रुपए करने की मांग करते हुए कहा कि वे केवल 7500 रुपए की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि एक ओर यह बैठक ईपीएफओ मुख्यालय में हो रही थी, वहीं दूसरी ओर देशभर में ईपीएफओ कार्यालयों में प्रधानमंत्री और श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे थे।

इस बैठक में अतिरिक्त सीपीएफसी चंद्र मौली चक्रवर्ती, अपराजिता जग्गी, शुभम अग्रवाल सहित समिति के कई वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे। जबकि समिति की ओर से कमांडर अशोक राउत, वीरेंद्र सिंह राजावत, राष्ट्रीय सलाहकार पी एन पाटिल, राष्ट्रीय सचिव रमेश बहुगुणा, राजीव भटनागर, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बी एस नारखेडे, महिला मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा आरस और राष्ट्रीय सचिव सरिता नारखेडे शामिल रहीं। पेंशनरों को उम्मीद है कि इस बैठक के परिणामस्वरूप उनकी मांगों पर सरकार जल्द ही सकारात्मक कदम उठाएगी, जिससे उन्हें राहत मिल सकेगी।

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