Saturday, 22 August 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
जनसेवा और सादगी के लिए पहचाने जाते थे पूर्व सांसद सज्जन कुमार, निधन पर शोक बनी-ठनी से पिछवाई तक, बीकानेर हाउस में जीवंत हुई राजस्थान की सदियों पुरानी चित्रकला विरासत POCO M8x 5G भारत में लॉन्च, 7,900mAh की दमदार बैटरी और प्रोसेसर से लैस, जानिए कीमत और फीचर्स India Sugar Price Hike: चीनी के दाम में रिकॉर्ड उछाल से बढ़ी चिंता, ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट से E20 तक समझिए पूरी कहानी Delhi-Bihar TB Cases: स्क्रीनिंग में सामने आए 99 हजार से ज्यादा टीबी के मामले, जानिए क्यों बढ़ी चिंता ENG vs PAK: रूट ने सचिन के 68 टेस्ट अर्धशतकों के रिकॉर्ड की बराबरी की, पाकिस्तान पर इंग्लैंड की 195 रन की बढ़त Judicial Service Practice Rule: सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त घटाकर की 1 साल, चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग और क्लर्कशिप अनिवार्य हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पहली बार मनाई गई तुलसी जयंती , मोरारी बापू ने वैश्विक मंच पर 9 विद्वानों को सम्मानित किया जनसेवा और सादगी के लिए पहचाने जाते थे पूर्व सांसद सज्जन कुमार, निधन पर शोक बनी-ठनी से पिछवाई तक, बीकानेर हाउस में जीवंत हुई राजस्थान की सदियों पुरानी चित्रकला विरासत POCO M8x 5G भारत में लॉन्च, 7,900mAh की दमदार बैटरी और प्रोसेसर से लैस, जानिए कीमत और फीचर्स India Sugar Price Hike: चीनी के दाम में रिकॉर्ड उछाल से बढ़ी चिंता, ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट से E20 तक समझिए पूरी कहानी Delhi-Bihar TB Cases: स्क्रीनिंग में सामने आए 99 हजार से ज्यादा टीबी के मामले, जानिए क्यों बढ़ी चिंता ENG vs PAK: रूट ने सचिन के 68 टेस्ट अर्धशतकों के रिकॉर्ड की बराबरी की, पाकिस्तान पर इंग्लैंड की 195 रन की बढ़त Judicial Service Practice Rule: सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त घटाकर की 1 साल, चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग और क्लर्कशिप अनिवार्य हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पहली बार मनाई गई तुलसी जयंती , मोरारी बापू ने वैश्विक मंच पर 9 विद्वानों को सम्मानित किया

परिवार को 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी दिलाने वाले, नरेश पाल गंगवार बने नए उच्च शिक्षा सचिव

NEET-UG 2026 विवाद के बीच सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग की कमान नरेश पाल गंगवार को सौंपी है। जानिए उनका प्रशासनिक अनुभव, NHB सब्सिडी विवाद और नई नियुक्ति का महत्व।

नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने 1994 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) का नया सचिव नियुक्त किया है।

उन्होंने इस पद पर विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर देशभर में व्यापक बहस चल रही है।

हालांकि, नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति जितनी चर्चा में है, उतना ही उनके परिवार से जुड़े एक राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) सब्सिडी विवाद ने भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनकी पत्नी, मां और बेटे को राजस्थान में व्यावसायिक बागवानी परियोजनाओं के लिए कुल ₹1.16 करोड़ से अधिक की सब्सिडी मिली थी।

कौन हैं नरेश पाल गंगवार?

नरेश पाल गंगवार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1994 बैच के अधिकारी हैं और राजस्थान कैडर से संबंध रखते हैं। अपने तीन दशक लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

राजस्थान सरकार में उन्होंने कृषि उत्पादन आयुक्त (Agriculture Production Commissioner), प्रधान सचिव (कृषि), प्रधान सचिव (उद्योग एवं MSME) और निवेश से जुड़े विभागों में काम किया। प्रशासनिक हलकों में उन्हें ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने कृषि, उद्योग, निवेश और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में काम करने का अनुभव हासिल किया। यही व्यापक अनुभव उनकी नई नियुक्ति के प्रमुख कारण रहे।

केंद्र सरकार में भी निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

राजस्थान से केंद्र सरकार में आने के बाद नरेश पाल गंगवार ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्हें मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में सचिव बनाया गया।

अब उन्हें ऐसे समय में उच्च शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब शिक्षा मंत्रालय अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहा है। NEET-UG 2026 विवाद, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दे फिलहाल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

आखिर शिक्षा मंत्रालय में बदलाव क्यों हुआ?

हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठे। कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ियां और छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के कारण केंद्र सरकार पर सुधारों का दबाव बढ़ गया।

इसी बीच केंद्र ने सचिव स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय भेज दिया और उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग की कमान सौंप दी।

सरकार ने इस बदलाव को व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इसे शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या है ₹1.16 करोड़ सब्सिडी का मामला?

नरेश पाल गंगवार का नाम पिछले महीने तब चर्चा में आया, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनके परिवार के तीन सदस्यों मां बिंदुमती, पत्नी डॉ. रंजिता सिंह और बेटे कुमार रित्विक को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) की एक योजना के तहत व्यावसायिक बागवानी परियोजनाओं के लिए पांच वर्षों में कुल ₹1.16 करोड़ से अधिक की सब्सिडी मिली।

रिपोर्ट के अनुसार, ये परियोजनाएं राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित कृषि भूमि पर विकसित की गईं और इनमें मुख्य रूप से खीरे की संरक्षित खेती (Protected Cultivation) से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, अलग-अलग परियोजनाओं के लिए अलग-अलग समय पर सब्सिडी स्वीकृत की गई।

क्या कहते हैं दस्तावेज और जांच रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार, नरेश पाल गंगवार के परिवार को मिली सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) की उस योजना के तहत दी गई, जिसका उद्देश्य संरक्षित खेती (Protected Cultivation) और उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत पॉलीहाउस और नेट हाउस जैसी आधुनिक कृषि परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का एक हिस्सा सरकारी अनुदान के रूप में दिया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि गंगवार के परिवार के नाम पर अलग-अलग परियोजनाओं के लिए आवेदन किए गए थे और सब्सिडी भी विभिन्न वर्षों में स्वीकृत हुई। इनमें मुख्य रूप से खीरे (Cucumber) की संरक्षित खेती से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं। दस्तावेजों के अनुसार, इन परियोजनाओं की कुल सब्सिडी राशि ₹1.16 करोड़ से अधिक रही।

हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में नरेश पाल गंगवार के खिलाफ किसी अदालत द्वारा भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन का दोष सिद्ध नहीं किया गया है। विवाद मुख्यतः हितों के टकराव (Conflict of Interest) और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों से जुड़ा है।

नरेश पाल गंगवार पक्ष की इस पर सफाई

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में यह भी कहा गया कि संबंधित परियोजनाओं के लिए आवेदन और स्वीकृतियां योजना के निर्धारित नियमों के तहत हुई थीं। जांच में ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसमें यह कहा गया हो कि सब्सिडी अवैध तरीके से प्राप्त की गई या किसी जांच एजेंसी ने गंगवार को दोषी ठहराया हो।

अब उनके सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां?

उच्च शिक्षा सचिव बनने के बाद नरेश पाल गंगवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की होगी। हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET-UG 2026 को लेकर उठे विवादों ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नई जिम्मेदारी संभालते ही उन्हें कई मोर्चों पर काम करना होगा जिसमें –

  • राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना।
  • परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और तकनीक-आधारित बनाना।
  • विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक सुधारों को गति देना।
  • छात्रों और सरकार के बीच विश्वास बहाल करना शामिल होगा।
  • शिक्षा सुधारों से जुड़े लंबित प्रस्तावों को आगे बढ़ाना।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव इन चुनौतियों से निपटने में मददगार हो सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में परिणाम ही उनकी कार्यशैली की असली परीक्षा होंगे।

क्या नई नियुक्ति से बदलेगी उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा?

नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब शिक्षा मंत्रालय केवल परीक्षा विवादों से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कई अधूरे सुधारों को लागू करने की चुनौती से भी जूझ रहा है।

उच्च शिक्षा विभाग के सामने फिलहाल विश्वविद्यालयों में सुधार, नियामकीय ढांचे में बदलाव, Academic Bank of Credits (ABC), विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश, डिजिटल शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य लंबित हैं।

नए सचिव के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल प्रशासनिक फैसले लेना नहीं, बल्कि छात्रों, विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच टूटते भरोसे को दोबारा स्थापित करना होगी। खासकर NEET-UG 2026 विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय पर लोगों की अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

विपक्ष के निशाने पर भी आई नियुक्ति

नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति के कुछ ही घंटों बाद विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि, “नरेंद्र मोदी के पास छिपने के लिए साफ-सुथरे चेहरे खत्म हो गए हैं। विनीत जोशी को बचाने के लिए सरकार ने एजुकेशन सेक्रेटरी की जगह किसी ऐसे व्यक्ति को रखा है जिस पर खुद जांच होनी चाहिए। नए एजुकेशन सेक्रेटरी नरेश पाल गंगवार की पत्नी, मां और बेटे ने मिलकर नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की सब्सिडी में ₹1.16 करोड़ से ज़्यादा लिए, जबकि वे एनिमल हसबैंड्री और फिशरीज़ के सेक्रेटरी थे। इस सरकार (भाजपा) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह दिखाता है”।

हालांकि अब तक उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें यह कहा गया हो कि नरेश पाल गंगवार किसी आपराधिक मामले में दोषी पाए गए हों।

क्या केवल अधिकारी बदलने से हल होगी समस्या?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट किसी एक अधिकारी या एक विभाग तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन, डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था एक बड़े संस्थागत सुधार की मांग करती है।

ऐसे में नए उच्च शिक्षा सचिव की नियुक्ति को एक प्रशासनिक शुरुआत जरूर माना जा सकता है, लेकिन असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में परीक्षा सुधारों को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।

विश्वविद्यालयों में लंबित सुधार, नियामकीय ढांचे में बदलाव और NEP 2020 के अधूरे एजेंडे को भी आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नरेश पाल गंगवार शिक्षा मंत्रालय में वह भरोसा वापस ला पाएंगे, जिसकी मांग छात्र, अभिभावक और शैक्षणिक संस्थान लंबे समय से कर रहे हैं।

यदि उनके नेतृत्व में परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनती है, तो यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें :- आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर मंडरा रहा बुलडोजर का खतरा! छात्रों ने कहा- नाम बदल दो, लेकिन संस्थान मत तोड़ो

Home » परिवार को 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी दिलाने वाले, नरेश पाल गंगवार बने नए उच्च शिक्षा सचिव
शेयर करें: Facebook X WhatsApp
MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।