Monday, 13 July 2026
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स्टडी: महासागरों के 56 फीसदी पानी का बदला रंग, वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली।

एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले दो दशक में महासागरों के 56 फीसदी से अधिक पानी का रंग बदल गया है, जो पृथ्वी की कुल भूमि विस्तार से भी बड़ा है। इसके पीछे की वजह मानव-जनित जलवायु परिवर्तन बताया जा रहा है।

महासागरों के बदलते रंग को इंसानी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), अमेरिका और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने नेचर जर्नल में प्रकाशित पत्र में लिखा है। भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों में महासागर का रंग समय के साथ लगातार हरा होता जा रहा है, जो सतही महासागरों के भीतर पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत देता है।

अध्ययन करने में लगेंगे 30 साल

समुद्र के पानी का हरा रंग फाइटोप्लांकटन में मौजूद हरे वर्णक क्लोरोफिल से आता है, जो ऊपरी महासागर में पाए जाने वाले रोगाणु हैं। इसलिए वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन पर उनकी प्रतिक्रिया देखने के लिए फाइटोप्लांकटन की निगरानी करने के इच्छुक हैं। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे पहले किए गए अध्ययन में कहा गया है कि क्लोरोफिल परिवर्तनों पर नजर रखने में 30 साल लगेंगे।

सभी सात महासागर पर नजर

यूके के नेशनल ओशनोग्राफी सेंटर साउथेम्प्टन के मुख्य लेखक बीबी कैल और उनकी टीम ने साल 2002 से 2022 तक सभी सात महासागर पर नजर रखी। उन्होंने शुरू में रंगों की प्राकृतिक विविधताओं का अध्ययन यह देखकर किया कि वे किसी दिए गए वर्ष में क्षेत्रीय रूप से कैसे बदलते हैं। बाद में दो दशकों में हुए बदलाव पर अध्ययन किया गया।

ग्रीनहाउस-गैस मॉडल की ली मदद

रंगों के बदलते समीकरण में जलवायु परिवर्तन के योगदान को समझने के लिए, उन्होंने दो परिदृश्यों के तहत पृथ्वी के महासागरों का अनुकरण करने के लिए डटकीविक्ज के 2019 मॉडल का उपयोग किया। मॉडल का इस्तेमाल एक ग्रीनहाउस गैसों के साथ और दूसरा उनके बिना किया गया। ग्रीनहाउस-गैस मॉडल ने 20 वर्षों से कम समय में दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत सतही महासागरों के रंग में बदलाव की भविष्यवाणी की।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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