Thursday, 16 July 2026
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‘यहां फेल होना ही एडमिशन की पहली शर्त है’…आखिर क्यों SECMOL में सिर्फ नाकाम छात्रों के लिए खुलते हैं शिक्षा के दरवाजे?

भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था जहां अंकों से सफलता तय करती है, वहीं लद्दाख के SECMOL ने असफल छात्रों को नई पहचान और आत्मविश्वास देकर उनकी जिंदगी बदलने का प्रयास किया है।

नई दिल्ली/लेह: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारक और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया है। वांगचुक केंद्र सरकार से कथित परीक्षा अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी केंद्र और दिल्ली सरकार को नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन सोनम वांगचुक केवल एक आंदोलनकारी नहीं हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली सबसे बड़ी वजह है Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL)।

एक ऐसा संस्थान, जहां अक्सर वही छात्र प्रवेश पाते हैं जिन्हें पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था ‘फेल’ घोषित कर चुकी होती है।

भारत की शिक्षा व्यवस्था जहां बोर्ड परीक्षा के अंकों को सफलता का पैमाना मानती है, वहीं लद्दाख की सिंधु घाटी में स्थित यह संस्थान छात्रों से कहता है –अगर तुम परीक्षा में फेल हुए हो, तो शायद गलती तुम्हारी नहीं, बल्कि व्यवस्था की है।”

यही सोच SECMOL को भारत के सबसे अनोखे शैक्षणिक मॉडलों में शामिल करती है।

कैसे हुई SECMOL की शुरुआत?

SECMOL की स्थापना 1988 में सोनम वांगचुक और उनके कुछ साथियों ने की थी। उस समय लद्दाख के सरकारी स्कूलों का परिणाम बेहद खराब था। बड़ी संख्या में छात्र हर साल बोर्ड परीक्षाओं में असफल हो रहे थे। वांगचुक का मानना था कि समस्या छात्रों में नहीं, बल्कि उस शिक्षा प्रणाली में है जो स्थानीय भाषा, संस्कृति, मौसम और जीवनशैली से बिल्कुल मेल नहीं खाती।

इसी सोच के साथ उन्होंने “Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh” यानी SECMOL की शुरुआत की।

आखिर यहां सिर्फ फेल छात्रों को ही क्यों मिलता है प्रवेश?

SECMOL की सबसे अनोखी पहचान यही है। यहां अधिकांश छात्र वे होते हैं जो 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में असफल हो चुके होते हैं या पारंपरिक स्कूलों में खुद को असफल मानने लगे होते हैं।

संस्थान का उद्देश्य उन्हें दोबारा रटकर परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि उनका आत्मविश्वास लौटाना है।

SECMOL मानता है कि परीक्षा में फेल होना इस बात का प्रमाण नहीं कि छात्र प्रतिभाशाली नहीं है। कई बार शिक्षा व्यवस्था स्थानीय जरूरतों और सीखने के तरीके को समझने में विफल रहती है।

यही कारण है कि यहां आने वाले छात्रों को “फेलियर” नहीं बल्कि “Potential Learners” माना जाता है।

जहां पूरी दिनचर्या ही एक स्कूल है

SECMOL का शिक्षा मॉडल पारंपरिक स्कूलों से बिल्कुल अलग है।

यहां घंटी बजने पर क्लास शुरू नहीं होती। शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि छात्रों के साथ रहते हैं। किताबों से ज्यादा महत्व वास्तविक जीवन के अनुभवों को दिया जाता है।

छात्र यहां खुद कैंपस चलाते हैं, भोजन बनाते हैं, खेती करते हैं, बिजली प्रबंधन संभालते हैं, निर्माण कार्य सीखते हैं, सौर ऊर्जा प्रणाली संचालित करते हैं और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।

यानी यहां शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहती बल्कि रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाती है।

किताबों से ज्यादा करके सीखनेपर जोर

SECMOL का सबसे बड़ा सिद्धांत है – Learning by Doing.

यदि किसी छात्र को सौर ऊर्जा समझनी है तो वह केवल सिद्धांत नहीं पढ़ता बल्कि स्वयं सोलर पैनल लगाना सीखता है।

जल संरक्षण पढ़ाया जाता है तो छात्र स्वयं पानी की व्यवस्था संभालते हैं।

यदि उद्यमिता पढ़ाई जाती है तो छात्र छोटे व्यवसायिक मॉडल विकसित करते हैं।

यही कारण है कि यहां से निकलने वाले कई छात्र बाद में सामाजिक उद्यमी, इंजीनियर, शिक्षक और स्थानीय नेतृत्वकर्ता बने हैं।

सरकारी स्कूलों से कैसे अलग है SECMOL?

भारत के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शिक्षा का ढांचा बोर्ड परीक्षा, निर्धारित पाठ्यक्रम और अंकों पर आधारित है। वहीं SECMOL में सफलता का पैमाना केवल परीक्षा नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल (Practical Skills), नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और सामुदायिक जिम्मेदारी है।

सरकारी स्कूलों में छात्र अक्सर शिक्षक पर निर्भर रहते हैं, जबकि SECMOL में पूरा कैंपस छात्रों की भागीदारी से चलता है। यहां कोई छात्र केवल पढ़ने नहीं आता, बल्कि जिम्मेदारी निभाना भी सीखता है। कैंपस की सफाई, रसोई, खेती, ऊर्जा प्रबंधन, पुस्तकालय और कई प्रशासनिक कार्य भी छात्र स्वयं संभालते हैं।

शिक्षा का माध्यम भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रखा जाता है ताकि छात्रों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़कर सीखने का अवसर मिले।

दुनिया के सबसे अनोखे सोलर कैंपस में से एक

लेह से लगभग 18 किलोमीटर दूर सिंधु नदी के किनारे स्थित SECMOL कैंपस अपनी सस्टेनेबल आर्किटेक्चर के लिए भी प्रसिद्ध है।

लद्दाख में सर्दियों के दौरान तापमान कई बार -20 से -30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद कैंपस की अधिकांश इमारतें बिना पारंपरिक हीटर के गर्म रहती हैं। इसकी मुख्य वजह Passive Solar Design है।

इमारतों का निर्माण स्थानीय मिट्टी, पत्थर और पारंपरिक तकनीकों से किया गया है। बिजली का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से आता है जबकि पानी के संरक्षण और कचरा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

SECMOL का मॉडल केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जलवायु-अनुकूल जीवनशैली का भी उदाहरण माना जाता है।

क्या यही है ‘3 Idiots’ वाले रैंचो’ का स्कूल?

फिल्म 3 Idiots में दिखाई गई “Rancho School” की वजह से SECMOL पूरी दुनिया में चर्चा में आया। हालांकि वास्तविकता यह है कि फिल्म की शूटिंग Druk Padma Karpo School में हुई थी।

बाद में सोनम वांगचुक ने Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की स्थापना की, जिसे लोग आज भी “Real Rancho School” के नाम से जानते हैं।

हालांकि SECMOL और HIAL दोनों की सोच एक जैसी है और दोनों संस्थानों की स्थापना में सोनम वांगचुक की प्रमुख भूमिका रही है। यही वजह है कि आम लोगों के बीच दोनों संस्थानों को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है।

FCRA लाइसेंस को लेकर केंद्र और SECMOL के बीच विवाद

SECMOL पिछले कुछ वर्षों से केंद्र सरकार के साथ Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) को लेकर भी विवाद में रहा है।

सितंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने SECMOL का FCRA लाइसेंस नवीनीकृत नहीं किया। इसका अर्थ यह हुआ कि संस्था विदेशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता स्वीकार नहीं कर सकती।

सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया कि संस्था FCRA के प्रावधानों का पालन करने में विफल रही और इसी आधार पर उसका लाइसेंस समाप्त कर दिया गया।

दूसरी ओर सोनम वांगचुक ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी संस्था वर्षों से शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है तथा यह निर्णय उनके सामाजिक अभियानों से जुड़ा प्रतीत होता है।

हालांकि केंद्र सरकार ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार की गई है।

SECMOL ने गढ़े बदलाव के असली नायक

बोर्ड परीक्षा में असफल होने वाले कई युवाओं ने इसी संस्थान से नई शुरुआत की। किसी ने महिलाओं के लिए ट्रैवल कंपनी बनाई, किसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली फिल्में बनाईं, तो किसी ने शिक्षा, सामाजिक नेतृत्व और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की। यह संस्थान साबित करता है कि सही अवसर मिलने पर असफलता भी सफलता की नींव बन सकती है।

1) लेसोंग चुस्कित:

भारतीय महिला राष्ट्रीय आइस हॉकी टीम की कप्तान लेसोंग चुस्कित उन छात्राओं में शामिल हैं, जिन्होंने SECMOL से आत्मविश्वास और नेतृत्व की सीख हासिल की।

उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने खेल को निखारा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने IIHF एशिया कप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनकी सफलता लद्दाख की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

2) थिनलास चोरोल:


थिनलास चोरोल ने पारंपरिक शिक्षा से निराश होने के बाद SECMOL में नई दिशा पाई। आगे चलकर उन्होंने Ladakhi Women’s Travel Company की स्थापना की, जो लद्दाख की पहली ऐसी ट्रैवल एजेंसी मानी जाती है, जिसका स्वामित्व और संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है। उनकी पहल ने स्थानीय महिलाओं को रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और पर्यटन उद्योग में नेतृत्व का अवसर दिया। आज वे लद्दाख में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल हैं।

3) स्टैंजिन दोरजाई ग्या:


स्टैंजिन दोरजाई ग्या कभी अर्ध-घुमंतू चरवाहा परिवार से जुड़े थे, लेकिन SECMOL ने उनकी सोच और जीवन की दिशा बदल दी। आगे चलकर उन्होंने फिल्म निर्माण में कदम रखा और The Shepherdess of the Glaciers जैसी डॉक्यूमेंट्री के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। उन्होंने Himalayan Film House की स्थापना भी की, जो हिमालयी समाज, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़ी कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का काम करती है।

4) चोजांग नामग्याल:


औपचारिक शिक्षा में संघर्ष करने के बावजूद चोजांग नामग्याल ने SECMOL में अपनी क्षमताओं को नई पहचान दी। यहां से मिली सीख के आधार पर उन्होंने Ladakh Fine Foods नामक कृषि-आधारित उद्यम शुरू किया। यह ब्रांड लद्दाख के स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का काम करता है। उनकी सफलता दिखाती है कि व्यवहारिक शिक्षा और उद्यमिता की सोच युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बना सकती है।

आज भी क्यों खास है SECMOL?

SECMOL आज केवल एक स्कूल नहीं बल्कि Alternative Education Model के रूप में देखा जाता है।

देश-विदेश से शिक्षक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और छात्र यहां अध्ययन के लिए आते हैं। कई विश्वविद्यालय और शिक्षा विशेषज्ञ इसे भारत में Experiential Learning के सबसे सफल मॉडलों में गिनते हैं।

इस संस्थान ने यह साबित किया कि जिन छात्रों को पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था “असफल” मान लेती है, वही सही वातावरण मिलने पर समाज के लिए बदलाव लाने वाले नागरिक बन सकते हैं।

क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था इससे कुछ सीख सकती है?

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) भी कौशल आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक सीखने और स्थानीय ज्ञान पर जोर देती है। इन सिद्धांतों पर SECMOL तीन दशक से अधिक समय से काम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में भी रटने के बजाय प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा, स्थानीय भाषा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और जीवन कौशल को अधिक महत्व दिया जाए, तो बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने वाले लाखों छात्रों का भविष्य बदल सकता है।

SECMOL के बाद भी जारी शिक्षा सुधार की लड़ाई

SECMOL की सफलता, शिक्षा सुधार के लिए किए गए प्रयोग और हजारों युवाओं की जिंदगी बदलने वाले सोनम वांगचुक आज जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और NEET-UG पेपर लीक जैसे मामलों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं।

उनका मानना है कि केवल वैकल्पिक संस्थान बनाना काफी नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना जरूरी है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार उनकी मांगों पर गंभीर संवाद करेगी या फिर शिक्षा सुधार की यह आवाज भी अनसुनी रह जाएगी।

ये भी पढ़ें :- NEET घोटाला: इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में INNOVATIVEVIEW की भूमिका पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

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MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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