मुश्ताक खान ने फिल्मों में अक्सर सहायक और छोटे किरदार निभाए, लेकिन अपनी सहज कॉमेडी और अभिनय से उन्हें यादगार बना दिया। ‘वेलकम’ के बल्लू से लेकर ‘गदर’ के गुल खान तक उनके कई किरदार चर्चित रहे।
मुंबई: पर्दे पर अपनी कॉमेडी टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले अभिनेता मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे। वेल्कम, आशिकी और गदर जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाने वाले मुश्ताक खान का गुरुवार, 24 सितंबर की शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे।
लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे मुश्ताक का मुंबई के नानावती अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके बिजनेस पार्टनर शिवम के मुताबिक, कैंसर दोबारा लौटने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी और AICWA के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने भी उनके निधन की पुष्टि की।
मुश्ताक खान उन कलाकारों में थे जिन्हें शायद किसी फिल्म के पोस्टर पर सबसे बड़ा नाम नहीं मिलता था, लेकिन स्क्रीन पर आते ही दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे। उनकी कॉमेडी में बनावटीपन कम और किरदार की सहजता ज्यादा थी। फिल्म वेल्कम में उनकी कुछ मिनटों की मौजूदगी और संवाद आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो के रूप में दिखाई देते हैं।
56 साल की उम्र में उनका जाना इसलिए भी भावुक कर देने वाला है क्योंकि उन्होंने छोटे शहर से मुंबई तक का सफर संघर्ष, थिएटर और लगातार काम के दम पर तय किया था।
बैहर से मुंबई तक का सफर
मुश्ताक खान का जन्म और शुरुआती जीवन मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर में बीता। बचपन से ही उनका झुकाव अभिनय और रंगमंच की ओर था। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि स्कूल के दिनों में वह नाटकों और मोनो एक्टिंग में हिस्सा लेते थे। अभिनय के साथ-साथ उन्हें लेखन और निर्देशन में भी रुचि थी। कॉलेज के दौरान उन्होंने नाटक लिखने, उनमें अभिनय करने और उन्हें निर्देशित करने के प्रयोग किए। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय करियर की नींव बने।
थिएटर से जुड़ने के बाद उन्होंने मंच पर लगातार काम किया और अभिनय की बारीकियां सीखीं। बाद में अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए वह मुंबई पहुंचे। मायानगरी में उन्होंने थिएटर से जुड़े कलाकारों और फिल्म जगत के लोगों के साथ काम करना शुरू किया। ‘द्रोणाचार्य’ जैसे नाटकों में उनके अभिनय को पहचान मिली।
फिल्ममेकर अशोक पंडित ने उनके निधन के बाद उन्हें याद करते हुए बताया कि दोनों थिएटर, नाटक और टीवी के शुरुआती दौर से एक-दूसरे को जानते थे। मुश्ताक खान ने छोटे शहर से निकलकर थिएटर के रास्ते मुंबई तक का सफर तय किया और अपने अभिनय के दम पर हिंदी मनोरंजन जगत में पहचान बनाई।
चार दशक से ज्यादा लंबा फिल्मी सफर
मुश्ताक खान ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1980 में फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से की थी। इसके बाद चार दशक से ज्यादा लंबे सफर में उन्होंने हिंदी फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने छोटे से छोटे किरदार को भी अपने सहज और प्रभावी अभिनय से यादगार बनाया।
मुश्ताक खान ‘आशिकी’, ‘सड़क’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘राजा’, ‘हेरा फेरी’, ‘जोडी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘वेलकम’, ‘राउडी राठौर’ और ‘ओह माय गॉड!’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे। ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में उन्होंने गुल खान का किरदार निभाया था और बाद में ‘गदर 2’ में भी नजर आए।
उनकी बाद की फिल्मों में ‘बधाई दो’, ‘स्त्री 2’, ‘जाट’ और ‘धूम धाम’ जैसे प्रोजेक्ट शामिल रहे। फिल्मों के अलावा उन्होंने टेलीविजन पर भी काम किया और ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे धारावाहिकों में नजर आए।
चार दशक से ज्यादा के इस सफर में उन्होंने कॉमेडी से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक कई तरह के किरदार निभाए।
आज उनके निधन के मौके पर जानते हैं उनके व्यक्तिगत जीवन और फिल्मी करियर से जुड़े कुछ रोचक और भावुक कर देने वाले किस्से।
1. अमिताभ बच्चन से जुड़ा था पहला घर
मुश्ताक खान के संघर्ष के दिनों से जुड़ी एक कहानी अमिताभ बच्चन से संबंधित है। मुश्ताक ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब वह आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे, तब अमिताभ बच्चन की मदद से उन्हें मुंबई में अपना पहला फ्लैट हासिल करने में सहायता मिली।
उनके मुताबिक, उस समय कलाकारों के लिए मुख्यमंत्री कोटे से आवास मिलने की एक व्यवस्था थी। अमिताभ बच्चन उस दौर में कांग्रेस के सांसद थे। मुश्ताक ने उनसे अपनी परेशानी बताई तो बच्चन ने उन्हें एक पत्र देने की बात कही। बाद में उस पत्र के आधार पर उन्हें कांदिवली में फ्लैट मिलने की बात मुश्ताक ने खुद साझा की थी।
यानी यह कहानी सिर्फ किसी सुपरस्टार की मदद की नहीं, बल्कि उस दौर के एक संघर्षरत चरित्र अभिनेता की जिंदगी में आए ऐसे मोड़ की भी है, जिसने उन्हें मुंबई में अपना घर हासिल करने में मदद की।
ये भी पढ़ें :- Bank Strike: 5-डे वर्किंग समेत कई मांगों को लेकर तीन दिन तक बैंक हड़ताल, जानिए आम लोगों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके संभावित असर
2. ‘Welcome’ में फीस को लेकर कही थी बड़ी बात
मुश्ताक खान ने अपने करियर के आर्थिक पहलू पर भी खुलकर बात की थी। ‘वेलकम’ के दौरान मिलने वाली फीस को लेकर उन्होंने बताया था कि उन्हें लगा कि उनकी कमाई फिल्म में काम करने वाले अक्षय कुमार के स्टाफ के सदस्यों से भी कम रही होगी। उनका यह बयान बाद में काफी चर्चा में आया।
बाद में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि उनका समझौता 25 दिन के काम के हिसाब से हुआ था, लेकिन फिल्म की शूटिंग काफी लंबी चली। उन्होंने कहा था कि ‘वेलकम’ में उन्होंने लगभग 90 दिन काम किया, जबकि दूसरे प्रोजेक्ट के शेड्यूल की अवधि इससे भी ज्यादा रही।
उनकी बात का मूल मुद्दा स्टार और चरित्र कलाकारों के बीच फीस के बड़े अंतर को लेकर था। एक तरफ बड़े सितारों पर भारी रकम खर्च होती थी, वहीं सहायक कलाकारों को अक्सर सीमित भुगतान में लंबे समय तक काम करना पड़ता था।
3. 2024 में हुआ था अपहरण, मांगी गई थी ₹1 करोड़ की फिरौती
मुश्ताक खान की जिंदगी का सबसे डरावना अध्याय नवंबर 2024 में सामने आया था। उन्हें मेरठ में एक अवॉर्ड कार्यक्रम में बुलाने के बहाने दिल्ली बुलाया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें फ्लाइट टिकट और एडवांस भुगतान दिया गया था। दिल्ली पहुंचने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें कार में बैठाया और बिजनौर के पास एक सुनसान इलाके में ले गए।
उनके बिजनेस पार्टनर के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें करीब 12 घंटे तक बंधक बनाकर रखा और कथित तौर पर ₹1 करोड़ की फिरौती मांगी। मुश्ताक ने बाद में बताया कि वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल हुए। पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और मुख्य आरोपी लवी पाल को बाद में गिरफ्तार किया गया।
यह घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि इसी अवधि में कॉमेडियन सुनील पाल के साथ भी इसी तरह के अपहरण का मामला सामने आया था।
4. हॉलीवुड और ब्रिटिश सीरीज में भी किया काम
मुष्ताक खान ने अपने लंबे अभिनय करियर में सिर्फ हिंदी फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। 1987 में आई हॉलीवुड साइंस-फिक्शन फिल्म Terminal Entry में उन्होंने अभिनय किया था। इस फिल्म में उनका किरदार नकारात्मक भूमिका में नजर आया था। यह उनके करियर के शुरुआती दौर का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट माना जाता है।
इसके अलावा मुष्ताक खान ने ब्रिटिश टेलीविजन की चर्चित मिनी-सीरीज Traffik में भी काम किया। 1989 में प्रसारित हुई इस सीरीज की कहानी अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और उससे जुड़े राजनीतिक एवं सामाजिक नेटवर्क पर केंद्रित थी। सीरीज में अलग-अलग देशों और किरदारों के जरिए ड्रग व्यापार की जटिल दुनिया को दिखाया गया था।
मुष्ताक खान के इन अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का जिक्र उनके करियर के उस पहलू को सामने लाता है, जिसके बारे में हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है।
5. मुश्ताक खान की आखिरी शूटिंग
अभिनेता मुश्ताक खान अपने निधन से कुछ समय पहले तक फिल्मों में सक्रिय थे। उनके बेटे मोहसिन के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने से पहले मुश्ताक खान ने सलमान खान के लंबे समय से बॉडीगार्ड रहे शेरा के बेटे अबीर सिंह की डेब्यू फिल्म ‘टारज़न’ के लिए शूटिंग की थी। मोहसिन ने बताया कि उस समय उनके पिता बिल्कुल ठीक थे और काम को लेकर काफी उत्साहित थे।
निधन से सिर्फ दो घंटे पहले राजपाल यादव से हुई थी मुलाकात
मुश्ताक खान के निधन को और भावुक बनाने वाली बात यह है कि अभिनेता राजपाल यादव ने उनके निधन से कुछ घंटे पहले ही अस्पताल में उनसे मुलाकात की थी।
राजपाल यादव ने बताया कि उन्होंने मुश्ताक से बात की, उनसे हाथ मिलाया और वह बातचीत सुनकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। राजपाल ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को याद करते हुए लिखा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि जिस व्यक्ति से उन्होंने कुछ घंटे पहले हाथ मिलाया था, वह अब उनके बीच नहीं है।
यह मुलाकात मुश्ताक के आखिरी पलों की एक बेहद मानवीय तस्वीर सामने लाती है। एक अभिनेता, जिसने पर्दे पर दूसरों को हंसाया, जिंदगी के आखिरी दौर में अपने साथी कलाकारों के बीच था।



