FOAII ने कहा— निजी आईटीआई संस्थान कौशल विकास अभियान की रीढ़, समस्याओं के समाधान से युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
नई दिल्ली: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया आईटीआई (FOAII) के नेतृत्व में देश के विभिन्न हिस्सों से आए निजी आईटीआई संचालकों और प्रबंधकों ने सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा। प्रदर्शन के दौरान निजी आईटीआई क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया आईटीआई (FOAII) तथा ऑल इंडिया आईटीआई प्रबंधक राज्यस्तरीय एवं राष्ट्रीय संगठन समन्वय समिति ने किया। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए आईटीआई संचालकों ने कौशल विकास क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा निजी संस्थानों के समक्ष मौजूद प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियों को दूर करने की मांग उठाई।
सभा को संबोधित करते हुए फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया आईटीआई के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. पुरुषोत्तम कुमार यादव ने कहा, “निजी आईटीआई संस्थान देश के युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं, लेकिन उनकी अनेक समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। हमारी मांग है कि थर्ड शिफ्ट और एनआईएमएस से संबंधित माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाए, लंबित भुगतान जारी किए जाएं और निजी संस्थानों को कौशल विकास कार्यक्रमों में समान अवसर प्रदान किए जाएं।”
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया आईटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेन्द्र आचार्य ने कहा, “आज जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ यह दर्शाती है कि निजी आईटीआई क्षेत्र अपनी समस्याओं को लेकर गंभीर है। सरकार को ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो कौशल शिक्षा को मजबूत करें, निजी संस्थानों को प्रोत्साहन दें और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएं।”
वहीं राष्ट्रीय संयोजक एवं सलाहकार सुशील कुमार सिंह ने कहा, “हमारी मांग केवल संस्थानों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कौशल विकास तंत्र को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने से जुड़ी है। एक देश-एक पोर्टल, सीट क्षमता में वृद्धि और संस्थागत प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे कदम पूरे क्षेत्र को नई दिशा देंगे।”
प्रदर्शन के समानांतर FOAII के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) तथा नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निजी आईटीआई क्षेत्र की समस्याओं और मांगों से अवगत कराया। ज्ञापन में थर्ड शिफ्ट की बहाली, एनआईएमएस से जुड़े मामलों में न्यायालय के आदेशों का अनुपालन, पीएमकेवीवाई के अंतर्गत लंबित भुगतान, सीट क्षमता में वृद्धि, डी-अफिलिएट यूनिटों को पुनः अवसर प्रदान करने, एक देश-एक पोर्टल लागू करने, स्किल हब से जोड़ने तथा निजी आईटीआई संस्थानों को सरकारी योजनाओं में समान भागीदारी देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निजी आईटीआई देश के कौशल विकास अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसलिए उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान आवश्यक है।
प्रमुख मांगें
- थर्ड शिफ्ट के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जाए।
- एनआईएमएस (NIMS) मामले में माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को लागू किया जाए।
- प्रति यूनिट सीटों की संख्या 20 से बढ़ाकर 30 की जाए।
- प्रशिक्षार्थियों के अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र संस्थानों के लॉगिन के माध्यम से जारी किए जाएं।
- आईटीआई संस्थानों को स्किल हब से जोड़ा जाए तथा पीएमकेवीवाई 5.0 का लाभ निजी आईटीआई संस्थानों को भी दिया जाए।
- सभी ट्रेनिंग पार्टनर्स का लंबित भुगतान शीघ्र जारी किया जाए।
- ट्रेनिंग सेंटर (TC) एवं ट्रेनिंग पार्टनर्स (TP) पर लगाए गए सभी शो-कॉज नोटिस समाप्त किए जाएं।
- पिछले पांच वर्षों में प्रवेश न मिलने के कारण डी-अफिलिएट की गई यूनिटों को पुनः एफिलिएट कर प्रवेश का अवसर दिया जाए।
- पूरे देश के लिए ‘एक देश, एक पोर्टल’ व्यवस्था लागू की जाए।
- कौशल भवन में अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के लिए सभी प्रबंधकों को स्थायी पास जारी किए जाएं।
- प्रशिक्षण संस्थानों में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति को बढ़ावा दिया जाए।
- सीओपीए (COPA) ट्रेड को सरकारी नौकरियों में CCC अथवा DOEACC ‘O’ Level के समकक्ष मान्यता दी जाए।
- पुराने एवं अनुभवी निजी आईटीआई संचालकों के लिए संस्थान शिफ्टिंग के नियमों को सरल बनाया जाए।
- ऑनलाइन परीक्षा संचालित करने में सक्षम निजी आईटीआई संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए।
- छात्राओं के प्रवेश को बढ़ावा देने के लिए हाई स्कूल विज्ञान एवं गणित की अनिवार्यता समाप्त कर किसी भी विषय से हाई स्कूल उत्तीर्ण छात्राओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए।
प्रदर्शन के अंत में FOAII पदाधिकारियों ने कहा कि निजी आईटीआई संस्थान देश के कौशल विकास अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और सरकार को उनके सुझावों तथा मांगों पर सकारात्मक विचार कर शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।
