सीरिया के नए राजनीतिक दौर के बीच UN Secretary-General António Guterres दमिश्क पहुंचे हैं। 2009 के बाद पहली ऐसी यात्रा से राजनीतिक संक्रमण, मानवीय संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या असर पड़ेगा?
दमिश्क, सीरिया: करीब डेढ़ दशक से अधिक समय तक युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, विस्थापन और मानवीय संकट से जूझते रहे सीरिया में शनिवार (25 जुलाई) को एक ऐसा कूटनीतिक घटनाक्रम हुआ, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) शनिवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे। यह यात्रा इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 2011 में सीरियाई गृहयुद्ध शुरू होने के बाद किसी कार्यरत UN Secretary-General की यह पहली आधिकारिक यात्रा है।
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की मून (Ban Ki-moon) ने जनवरी 2009 में सीरिया का दौरा किया था। यानी करीब 17 साल बाद संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च अधिकारी का सीरिया पहुंचना केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि युद्ध के बाद देश के बदलते राजनीतिक दौर का महत्वपूर्ण संकेत भी है।
António Guterres का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब सीरिया बशर-अल-असद (Bashar al-Assad) के लंबे शासन के अंत के बाद एक नए राजनीतिक संक्रमण से गुजर रहा है। दिसंबर 2024 में असद सत्ता से बाहर हुए और इसके बाद देश में नई सत्ता व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। अब राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (Ahmed al-Sharaa) के नेतृत्व में नई सरकार देश को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ फिर से जोड़ने, संस्थाओं को मजबूत करने और वर्षों के युद्ध से तबाह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में गुटेरेस की यात्रा को संयुक्त राष्ट्र और सीरिया के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
दमिश्क पहुंचते ही हुआ भव्य स्वागत
शनिवार को दमिश्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर गुटेरेस और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी (Asaad al-Shaibani) ने किया। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार गुटेरेस 24 से 27 जुलाई तक क्षेत्रीय दौरे पर हैं।
वह 24 जुलाई को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे थे और वहां से 25 जुलाई को दमिश्क के लिए रवाना हुए। सीरिया में उनका कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण बैठकों से भरा हुआ है।
एंटोनियो गुटेरेस की मुलाकात राष्ट्रपति अहमद अल-शरा और विदेश मंत्री असद अल-शैबानी समेत वरिष्ठ सीरियाई अधिकारियों से होने की उम्मीद है। उनकी यात्रा के दौरान राजनीतिक संक्रमण, देश की पुनर्बहाली, मानवीय सहायता, सुरक्षा और सीरिया के भविष्य को लेकर चर्चा प्रमुख विषय रहेंगे।
रिपोर्टों के अनुसार, गुटेरेस नई सीरियाई संसद को भी संबोधित कर सकते हैं। यह संबोधन इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सीरिया में नई राजनीतिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और स्थिर बनाने पर लगातार जोर देता रहा है।
इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना भूमिका भी है। गुटेरेस सीरिया और इजरायल के बीच संवेदनशील क्षेत्र के पास मौजूद UN Peacekeeping Force का दौरा भी कर सकते हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से मध्य पूर्व की सुरक्षा राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में उनकी यात्रा केवल दमिश्क तक सीमित नहीं होगी, बल्कि सीरिया की व्यापक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों को भी छुएगी।
2009 में Ban Ki-moon आए थे सीरिया
सीरिया में किसी UN Secretary-General की पिछली आधिकारिक यात्रा को समझने के लिए हमें 2009 में लौटना होगा। उस समय संयुक्त राष्ट्र महासचिव Ban Ki-moon ने 18 जनवरी 2009 को दमिश्क का दौरा किया था। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति बशर-अल-असद से मुलाकात की थी। उस यात्रा के दौरान चर्चा का मुख्य विषय गाज़ा संकट था, लेकिन दोनों नेताओं ने सीरिया की क्षेत्रीय भूमिका और मानवीय सहायता से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की थी।

इसके केवल दो साल बाद सीरिया की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल गई। 2011 में अरब जगत में शुरू हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों की लहर के बीच सीरिया में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए। सरकार की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन के बाद स्थिति तेजी से गृहयुद्ध में बदल गई।
देखते ही देखते सीरिया एक जटिल युद्धभूमि बन गया, जहां सरकारी सेना, विपक्षी समूह, कुर्द नेतृत्व वाले बल, ISIS जैसे आतंकी संगठन और अलग-अलग क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शक्तियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गईं।
संयुक्त राष्ट्र के लिए भी सीरिया संकट सबसे कठिन कूटनीतिक चुनौतियों में से एक बन गया। बान की मून ने 2011 में ही सीरिया में नागरिकों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जताई थी और तत्कालीन सरकार से बल प्रयोग रोकने की अपील की थी। लेकिन संघर्ष लगातार बढ़ता गया।
युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव का सीरिया का आधिकारिक दौरा संभव नहीं हो सका। इसके पीछे सुरक्षा स्थिति के अलावा राजनीतिक और कूटनीतिक जटिलताएं भी थीं।
सीरिया में 2011 का संघर्ष
2011 में शुरू हुआ सीरियाई संघर्ष आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे और विनाशकारी युद्धों में से एक बन गया। शुरुआती दौर में यह सरकार और उसके खिलाफ खड़े प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष था, लेकिन समय के साथ इसमें कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पक्ष शामिल होते गए।

रूस ने असद सरकार का समर्थन किया, जबकि तुर्की (Turkey), संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और अन्य देशों ने अलग-अलग चरणों में सीरिया के विभिन्न राजनीतिक और सैन्य समूहों के साथ काम किया।
ISIS के उभार ने संकट को और जटिल बना दिया। इस संगठन ने सीरिया और इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा कर अपने तथाकथित खिलाफत की घोषणा की थी।
इस संघर्ष ने सीरिया की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। लाखों लोग देश के भीतर विस्थापित हुए और लाखों अन्य लोगों ने पड़ोसी देशों तथा यूरोप में शरण ली। युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और पूरा देश मानवीय संकट की चपेट में आ गया।
बशर-अल-असद के बाद शुरू हुआ नया दौर
सीरिया की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव दिसंबर 2024 में आया, जब लंबे समय तक सत्ता में रहे Bashar al-Assad को सत्ता से बाहर होना पड़ा। इसके बाद देश में एक संक्रमणकालीन राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई, जिसके नेतृत्व में Ahmed al-Sharaa प्रमुख भूमिका में आए।

यह बदलाव सीरिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। असद परिवार दशकों तक देश की राजनीति के केंद्र में रहा था। बशर-अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफ़िज़ अल-असद के निधन के बाद राष्ट्रपति पद संभाला था और लगभग 24 वर्षों तक सत्ता में रहे।

असद के पतन के बाद नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें देश की राजनीतिक संस्थाओं को फिर से खड़ा करना, अलग-अलग समुदायों के बीच विश्वास पैदा करना, सुरक्षा व्यवस्था को स्थिर करना और युद्ध से बर्बाद अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना शामिल है।
नई सत्ता के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता हासिल करने की चुनौती भी है। सीरिया में सुन्नी मुस्लिम, अलावी, ईसाई, द्रुज, कुर्द और अन्य समुदाय रहते हैं। इसलिए देश का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई राजनीतिक व्यवस्था इन सभी समुदायों को कितनी प्रभावी तरीके से प्रतिनिधित्व देती है।
संयुक्त राष्ट्र लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि सीरिया का राजनीतिक भविष्य समावेशी होना चाहिए और देश के सभी सामाजिक, धार्मिक तथा जातीय समूहों को उसमें स्थान मिलना चाहिए। गुटेरेस का दौरा इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है।
गुटेरेस की यात्रा के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?
इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य सीरिया के राजनीतिक संक्रमण को समर्थन देना और देश को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करना है।
गुटेरेस संभवतः सीरियाई नेतृत्व को यह संदेश देंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय देश की नई शुरुआत का समर्थन कर सकता है, लेकिन इसके लिए मजबूत संस्थाओं, कानून के शासन, मानवाधिकारों की सुरक्षा और सभी समुदायों की भागीदारी जरूरी होगी।
यहां संयुक्त राष्ट्र के सामने एक मुश्किल संतुलन भी है। एक तरफ संगठन को सीरिया की नई सरकार के साथ काम करना है, ताकि राजनीतिक संक्रमण और मानवीय सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। दूसरी तरफ उसे यह भी सुनिश्चित करना है कि नई सत्ता के दौरान मानवाधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा से समझौता न हो।
इसलिए गुटेरेस का दौरा केवल समर्थन यात्रा के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह नई सीरियाई सत्ता के सामने अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं को रखने का भी अवसर है।
क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा असर
सीरिया का संकट कभी केवल सीरिया तक सीमित नहीं रहा। इस देश में हुए घटनाक्रम का प्रभाव लेबनान, तुर्की, इराक, इजरायल और पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ा है।
सीरिया की भौगोलिक स्थिति इसे क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यहां स्थिरता आने से पड़ोसी देशों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं अगर राजनीतिक संक्रमण असफल होता है या नए सिरे से हिंसा बढ़ती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
इसी कारण गुटेरेस की यात्रा को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य संभवतः यह सुनिश्चित करना होगा कि सीरिया दोबारा बड़े पैमाने पर संघर्ष की ओर न लौटे।
इसके लिए केवल राजनीतिक समझौता पर्याप्त नहीं होगा। देश में आर्थिक अवसर, संस्थागत सुधार, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक मेल-मिलाप भी जरूरी होंगे।
सीरिया के लिए नई शुरुआत का संकेत
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का दमिश्क पहुंचना निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक क्षण है, लेकिन इसे सीरिया के सभी संकटों के समाधान के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
करीब 17 साल बाद UN के Secretary-General की यात्रा अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक संकेत है। यह दिखाता है कि सीरिया के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। लेकिन असली चुनौती इस यात्रा के बाद शुरू होगी।
नई सरकार को राजनीतिक स्थिरता कायम करनी होगी। देश के अलग-अलग समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना होगा। युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए न्याय और जवाबदेही के सवालों को संबोधित करना होगा। विस्थापित लोगों की वापसी और पुनर्वास का रास्ता बनाना होगा। साथ ही आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना होगा।
संयुक्त राष्ट्र के लिए भी चुनौती कम नहीं है। उसे नई सरकार के साथ सहयोग करते हुए मानवाधिकारों, समावेशी शासन और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी।
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