कभी सौरमंडल का नौवां ग्रह रहा Pluto आज dwarf planet है। 24 अगस्त 2006 के उस फैसले की कहानी जानिए जिसने खगोल विज्ञान की किताबों में बड़ा बदलाव किया।
प्राग, चेक गणराज्य: आज से ठीक 20 साल पहले, 24 अगस्त 2006 को कुछ ऐसा ही हुआ था। प्राग में आयोजित International Astronomical Union (IAU) की महासभा में खगोलविदों ने ग्रह की आधिकारिक परिभाषा तय की और प्लूटो को ग्रहों की सूची से हटाकर ‘बौना ग्रह’ यानी dwarf planet की श्रेणी में रख दिया। इसके साथ ही हमारे सौरमंडल में ग्रहों की संख्या नौ से घटकर आठ रह गई।
हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से इसे सिर्फ Pluto को “ग्रह पद से हटाना” कहना पूरी कहानी नहीं बताता। असल में वैज्ञानिकों के सामने सवाल यह था कि आखिर किसी खगोलीय पिंड को ग्रह कहने की सीमा क्या होनी चाहिए?
2000 के दशक में Pluto जैसे कई दूरस्थ पिंडों की खोज ने इस सवाल को इतना जरूरी बना दिया कि खगोलविदों को ग्रह की परिभाषा पर औपचारिक फैसला लेना पड़ा। और इसी फैसले ने Pluto को विज्ञान की किताबों से गायब नहीं किया, बल्कि उसे खगोल विज्ञान की सबसे चर्चित दुनिया बना दिया।
1930 में हुई प्लूटो की खोज
प्लूटो की कहानी 24 अगस्त 2006 से बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। 18 फरवरी 1930 को अमेरिकी खगोलविद Clyde Tombaugh ने एरिजोना स्थित Lowell Observatory में प्लूटो की खोज की। उस समय इसे सौरमंडल का नौवां ग्रह माना गया।

उस दौर में प्लूटो को एक ऐसे अज्ञात ग्रह के रूप में देखा गया जो Neptune से भी आगे सूर्य की परिक्रमा कर रहा था। इसकी दूरी, बेहद कम चमक और छोटी आकार-सीमा के कारण इसे खोज पाना आसान नहीं था।
Pluto का नाम भी अपने आप में दिलचस्प कहानी रखता है। इसकी खोज के बाद 11 वर्षीय ब्रिटिश लड़की वेनेटिया बर्नी (Venetia Burney) ने इसका नाम ‘Pluto’ सुझाया था। यह नाम रोमन पौराणिक कथाओं के अधोलोक के देवता Pluto से लिया गया था। उनके दादा फॉल्कनर मदन (Falconer Madan) ने यह सुझाव Lowell Observatory तक पहुंचाया और बाद में इसे आधिकारिक नाम के रूप में चुना गया।

यानी प्लूटो की शुरुआत ही एक असाधारण खोज और एक 11 साल की बच्ची के सुझाए नाम से हुई थी।
वैज्ञानिकों के मन में क्यों उठे सवाल?
कई दशकों तक प्लूटो को ग्रह मानने में कोई बड़ी परेशानी नहीं थी। स्कूलों में नौ ग्रह पढ़ाए जाते थे और प्लूटो सौरमंडल का सबसे बाहरी ग्रह माना जाता था। लेकिन समय के साथ वैज्ञानिकों की इसको को लेकर समझ बदलने लगी।
दरअसल प्लूटो बाकी ग्रहों की तुलना में काफी छोटा था। इसकी कक्षा भी बाकी ग्रहों की कक्षाओं से अलग और काफी झुकी हुई है। इसके अलावा प्लूटो के आसपास उसी क्षेत्र में कई बर्फीले पिंड मौजूद होने के प्रमाण बढ़ने लगे।
वैज्ञानिकों ने समझना शुरू किया कि Neptune के पार का इलाका खाली नहीं है। वहां बड़ी संख्या में बर्फ और चट्टान से बने छोटे-छोटे पिंड मौजूद हैं। इस क्षेत्र को कुइपर बेल्ट (Kuiper Belt) कहा जाता है और Pluto इसी क्षेत्र का हिस्सा है।

इस खोज ने यह बुनियादी सवाल खड़ा किया किअगर Pluto ग्रह है, तो फिर उसके जैसे दूसरे पिंडों को क्या कहा जाएगा?
Eris की खोज ने बढ़ा दी परेशानी
प्लूटो की स्थिति को लेकर बहस का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2005 में आया, जब खगोलविदों ने एरिस नामक एक बहुत दूरस्थ पिंड की खोज की।
एरिस आकार और द्रव्यमान के लिहाज से प्लूटो के काफी करीब था। इसके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ। अगर प्लूटो को ग्रह माना जाए, तो एरिस को भी ग्रह क्यों न माना जाए?
और अगर एरिस को ग्रह माना जाए, तो आगे ऐसे और पिंड मिलने पर सौरमंडल में ग्रहों की संख्या कितनी बढ़ेगी?
इस गंभीर विषय पर IAU ने 2006 से पहले करीब दो वर्षों तक ग्रह की परिभाषा पर विचार किया। अगस्त 2006 में शुरू हुई महासभा के दौरान कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। शुरुआती प्रस्ताव के तहत सौरमंडल में 12 ग्रह तक होने की संभावना थी, लेकिन अंतिम मतदान में इससे अलग परिभाषा स्वीकार की गई।
यही वह वैज्ञानिक पृष्ठभूमि थी जिसने 24 अगस्त 2006 के फैसले की जमीन तैयार की।
24 अगस्त 2006 को क्या फैसला हुआ?
प्राग में IAU की महासभा में खगोलविदों ने आखिरकार ग्रह की औपचारिक परिभाषा तय की। इसके मुताबिक किसी खगोलीय पिंड को ग्रह कहलाने के लिए तीन मुख्य शर्तें पूरी करनी होंगी:
1) वह सूर्य की परिक्रमा करता हो।
2) उसका गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत हो कि वह अपने भार के कारण लगभग गोल आकार ग्रहण कर सके।
3) उसने अपनी कक्षा के आसपास के क्षेत्र को अन्य बड़े पिंडों से पर्याप्त रूप से साफ कर दिया हो।
प्लूटो पहली दो शर्तें पूरी करता है, लेकिन तीसरी शर्त पूरी नहीं करता।
यही वजह बनी कि उसे ग्रह की श्रेणी से हटाकर dwarf planet की श्रेणी में रखा गया। IAU ने Pluto को इस नई श्रेणी का एक प्रमुख उदाहरण भी माना।
इसके बाद सौरमंडल के 8 आधिकारिक ग्रह रह गए:
बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण
प्लूटो छोटा जरूर, लेकिन दिलचस्प भी
Pluto का ग्रह का दर्जा खत्म हुआ, लेकिन उसके बारे में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी खत्म नहीं हुई। इसके उलट, Pluto पर शोध और बढ़ गया।
NASA का New Horizons अंतरिक्ष यान 19 जनवरी 2006 को लॉन्च हुआ था। करीब नौ साल की यात्रा के बाद यह 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के बेहद करीब से गुजरा और पहली बार इस दूरस्थ दुनिया की विस्तृत तस्वीरें और वैज्ञानिक आंकड़े पृथ्वी तक पहुंचे।
New Horizons ने प्लूटो की सतह पर ऐसी विशेषताएं दिखाईं, जिनकी वैज्ञानिकों ने पहले कल्पना भी नहीं की थी। इसकी सतह पर पहाड़, घाटियां, मैदान, गड्ढे और बर्फीले क्षेत्र पाए गए। उसकी सबसे चर्चित विशेषताओं में से एक है दिल के आकार का विशाल क्षेत्र, जिसे टॉमबॉ रीजिओ (Tombaugh Regio) नाम दिया गया।
इस क्षेत्र के एक हिस्से में बर्फ से बना विशाल मैदान भी मिला, जिसे Sputnik Planum कहा जाता है।
न्यू होराइजन्स ने बदली प्लूटो की तस्वीर
2006 में जब Pluto को dwarf planet कहा गया था, तब आम धारणा यह बन गई थी कि यह बस एक छोटा और ठंडा पिंड है। लेकिन 2015 के न्यू होराइजन्स मिशन ने इस सोच को काफी हद तक बदल दिया।
अंतरिक्ष यान ने प्लूटो की सतह पर अपेक्षाकृत युवा भू-भाग और जटिल भौगोलिक संरचनाओं के संकेत देखे। वैज्ञानिकों को वहां बहती हुई बर्फ के प्रमाण भी मिले। इससे यह स्पष्ट हुआ कि छोटा आकार किसी दुनिया को वैज्ञानिक रूप से महत्वहीन नहीं बनाता। प्लूटो भले ही आठ मुख्य ग्रहों की सूची में नहीं है, लेकिन यह एक बेहद जटिल और सक्रिय खगोलीय दुनिया है।
Pluto के पास कितने चंद्रमा हैं?
प्लूटो अकेला नहीं है। उसके कई ज्ञात चंद्रमा हैं, जिनमें सबसे बड़ा चारोन (Charon) है।
चारोन की खोज 1978 में हुई थी। प्लूटो और चारोन के आकार में काफी कम अंतर होने के कारण यह जोड़ी सौरमंडल की अन्य ग्रह-चंद्रमा प्रणालियों से अलग दिखाई देती है।
2006 में IAU के फैसले के समय चारोन को अलग से dwarf planet घोषित नहीं किया गया था। वह प्लूटो का उपग्रह यानी चंद्रमा ही माना गया। New Horizons ने Pluto और उसके चंद्रमाओं के बारे में हमारी समझ को और बेहतर किया।
क्या वैज्ञानिक आज भी प्लूटो को लेकर बहस करते हैं?
प्लूटो की ग्रह वाली पहचान को लेकर वैज्ञानिक और सार्वजनिक बहस 2006 के बाद पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
कुछ Planetary Scientists ने IAU की परिभाषा की आलोचना की है और ग्रह की वैकल्पिक परिभाषाओं पर चर्चा की है। उनका तर्क रहा है कि किसी पिंड की भूगर्भीय और भौतिक प्रकृति को भी उसकी ग्रहीय दर्जा तय करने में महत्व दिया जाना चाहिए।
लेकिन आधिकारिक तौर पर IAU का 2006 का वर्गीकरण अभी भी लागू है। इसके अनुसार Pluto dwarf planet है और सौरमंडल में आठ आधिकारिक ग्रह हैं। यानी बहस भले जारी हो, लेकिन आधिकारिक खगोलीय वर्गीकरण स्पष्ट है।
20 साल बाद भी प्लूटो क्यों है खास?
आज 24 अगस्त 2026 को प्लूटो के पुनर्वर्गीकरण को 20 साल पूरे हो गए हैं। इन दो दशकों में Pluto को लेकर हमारी समझ पहले से कहीं ज्यादा विस्तृत हुई है।
2006 में वह उस समय का “पूर्व नौवां ग्रह” था। 2015 में New Horizons ने उसकी सतह को पहली बार करीब से दिखाया। इसके बाद वैज्ञानिकों को उसके भूगोल, सतह, बर्फ और वातावरण के बारे में नई जानकारी मिली।
आज Pluto को एक dwarf planet, Kuiper Belt object और trans-Neptunian object के रूप में जाना जाता है। यानी उसका दर्जा बदला, लेकिन उसकी वैज्ञानिक अहमियत आज भी कायम है।
ग्रहों की सूची में प्लूटो भले अब नौवें नंबर पर नहीं है, लेकिन सौरमंडल की सबसे चर्चित दुनियाओं में उसका नाम आज भी सबसे ऊपर है।
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