शमी ने 6 नवंबर 2026 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया। खास बात है कि 13 साल पहले इसी दिन उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। जानें उनके करियर के आंकड़े।
अमरोहा, उत्तर प्रदेश: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 6 नवंबर 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने इस फैसले की जानकारी दी।
खास बात यह है कि आज ही के दिन 13 साल पहले यानी 6 नवंबर 2013 को शमी ने अपना टेस्ट डेब्यू किया था। इस तरह जिस तारीख को उनके टेस्ट करियर की शुरुआत हुई थी, उसी तारीख को उन्होंने इस फॉर्मेट को अलविदा कहने का फैसला किया।
शमी ने साफ किया है कि टेस्ट क्रिकेट से विदाई लेने के बावजूद वह क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं हो रहे हैं। वह वनडे और टी20 क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। अपने संदेश में उन्होंने टेस्ट जर्सी से जुड़ी यादों, मैदान पर मिले अनुभवों, चोटों से वापसी और भारतीय टीम के लिए खेलने के गौरव का जिक्र किया। उनके इस फैसले के साथ ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट में एक ऐसे तेज गेंदबाज के सफर का अंत हो गया, जिन्होंने अपनी सीम और रिवर्स स्विंग से कई मौकों पर विपक्षी बल्लेबाजों को चुनौती दी।
सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा कर दी संन्यास की जानकारी
मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर को अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। इसके साथ उन्होंने एक भावुक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा कि सफेद जर्सी से विदा ले रहे हैं, लेकिन उससे जुड़ी यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी।
शमी के मुताबिक, जब उन्होंने पहली बार भारतीय टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब उनका सपना अपने देश के लिए कुछ खास करने का था।
अपने संदेश में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट के सफर को याद करते हुए लिखा कि हर विकेट, हर संघर्ष, हर चोट और हर वापसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को केवल एक फॉर्मेट नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी का बेहद खास हिस्सा बताया। शमी ने कहा कि वह भारी दिल और अनगिनत खूबसूरत यादों के साथ इस फॉर्मेट से संन्यास लेने का फैसला कर रहे हैं।
अंत में शमी ने लिखा कि मैदान पर उनकी आखिरी टेस्ट गेंद भले ही फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेगा।
13 साल पहले इसी दिन किया था टेस्ट डेब्यू
शमी के टेस्ट संन्यास की घोषणा की तारीख उनके करियर के लिहाज से काफी खास है। उन्होंने 6 नवंबर 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। अब 6 नवंबर 2026 को उन्होंने इसी फॉर्मेट से विदाई लेने का ऐलान किया है। यानी उनके टेस्ट डेब्यू और संन्यास की घोषणा के बीच ठीक 13 साल का अंतर है।
शमी ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू मुकाबले में उन्होंने पहली पारी में पांच विकेट हासिल किए थे। घरेलू मैदान पर मिले इस प्रदर्शन ने उनके अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर की मजबूत शुरुआत की। इसके बाद वह भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बनते चले गए।
मोहम्मद शमी की गेंदबाजी की खासियत गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही। वह नई गेंद से बल्लेबाजों को परेशान करने के साथ-साथ पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए भी जाने गए। उनकी सीम पोजिशन और सटीक लाइन-लेंथ ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट में लगातार प्रभावी बनाए रखा। अलग-अलग पिचों और परिस्थितियों में विकेट लेने की उनकी क्षमता भारतीय टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हुई।
64 टेस्ट मैचों में झटके 229 विकेट
मोहम्मद शमी ने भारत के लिए कुल 64 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान उनके नाम 229 विकेट दर्ज हुए। उन्होंने 27.71 की गेंदबाजी औसत से ये विकेट हासिल किए। टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक पारी में 6 विकेट लेकर 56 रन देना रहा। इसके अलावा उन्होंने अपने करियर में छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया।
शमी ने टेस्ट क्रिकेट में 12 बार एक पारी में चार विकेट भी हासिल किए। उनके नाम एक टेस्ट मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रूप में 9 विकेट लेकर 118 रन देने का रिकॉर्ड दर्ज है। ये आंकड़े बताते हैं कि वह केवल एक पारी में ही नहीं, बल्कि पूरे टेस्ट मुकाबले के दौरान विपक्षी टीम पर दबाव बनाने की क्षमता रखते थे।
बल्लेबाजी में शमी का योगदान सीमित रहा, लेकिन उन्होंने निचले क्रम में कुछ उपयोगी पारियां भी खेलीं। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 750 रन दर्ज हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर 56 रन रहा। उन्होंने 64 मैचों में 364 मेडन ओवर भी फेंके। उनका टेस्ट गेंदबाजी स्ट्राइक रेट 50.28 और इकॉनमी रेट 3.31 रहा।
शमी के आंकड़े भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान की तस्वीर पेश करते हैं। 229 विकेट के साथ उन्होंने भारत के लिए कई अहम मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया और तेज गेंदबाजी विभाग को मजबूती दी।
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WTC फाइनल रहा आखिरी टेस्ट मुकाबला
मोहम्मद शमी ने अपना आखिरी टेस्ट मैच जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में खेला था। यह मुकाबला इंग्लैंड के द ओवल मैदान पर हुआ था। इसके बाद से वह भारतीय टेस्ट टीम में वापसी नहीं कर सके। इस दौरान उनकी फिटनेस और चोटों से जुड़ी चुनौतियां भी चर्चा में रहीं। अक्टूबर 2026 में न्यूजीलैंड दौरे के लिए घोषित भारतीय टेस्ट टीम में भी उनका नाम शामिल नहीं था।
साल 2018 और 2019 रहे अहम
शमी के टेस्ट करियर में 2018 और 2019 के साल काफी अहम रहे। 2018 में उन्होंने 12 टेस्ट मैचों में 47 विकेट हासिल किए थे। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिसंबर 2018 में उनका सर्वश्रेष्ठ टेस्ट गेंदबाजी प्रदर्शन भी आया, जब उन्होंने एक पारी में 56 रन देकर छह विकेट झटके। यह उनके टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ पारी प्रदर्शन रहा।
इसके बाद 2019 में भी शमी ने अपनी लय बरकरार रखी। उन्होंने उस साल आठ टेस्ट मैचों में 33 विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबलों में भी उनकी गेंदबाजी प्रभावी रही। टेस्ट क्रिकेट में उनकी पहचान ऐसे तेज गेंदबाज के रूप में बनी, जो लंबे स्पेल डालने के साथ लगातार विकेट लेने की क्षमता रखते थे।
2021 में भी शमी का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। उन्होंने पांच टेस्ट मैचों में 23 विकेट हासिल किए। इस साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में पांच विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। विदेशी परिस्थितियों में उनकी गेंदबाजी भारतीय टीम के लिए खास तौर पर उपयोगी रही।
चोटों और वापसी के बीच जारी रहा करियर
शमी का क्रिकेट सफर हमेशा आसान नहीं रहा। तेज गेंदबाज होने के कारण उन्हें फिटनेस और चोटों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों पर काम का बोझ अधिक होता है, क्योंकि उन्हें लगातार लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं। शमी के करियर में भी चोटों के कारण मैदान से दूर रहने के दौर आए।
इसके बावजूद उन्होंने कई बार वापसी की और भारतीय टीम के लिए प्रदर्शन किया। उनके इंस्टाग्राम संदेश में भी चोटों और कमबैक का खास तौर पर उल्लेख है। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट के सफर में हर विकेट, हर संघर्ष, हर चोट और हर वापसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया।
शमी का यह बयान उनके लंबे टेस्ट करियर के अनुभवों को दर्शाता है। किसी भी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक खेलना केवल प्रतिभा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि फिटनेस, मेहनत, अनुशासन और मुश्किल दौर से उबरने की क्षमता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। शमी ने अपने संदेश में उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने उनके अच्छे और कठिन समय में उनका साथ दिया।
व्हाइट बॉल क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे
शमी ने अपने वीडियो और संदेश के जरिए यह भी स्पष्ट किया है कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का मतलब उनके क्रिकेट करियर का अंत नहीं है। वह वनडे और टी20 क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। यानी भारतीय क्रिकेट प्रशंसक उन्हें सीमित ओवरों के मुकाबलों में खेलते हुए देख सकेंगे।
यह फैसला उनके करियर के एक फॉर्मेट तक सीमित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा नहीं की है। शमी का ध्यान अब वनडे और टी20 क्रिकेट पर रहेगा। इसके अलावा वह घरेलू क्रिकेट में भी सक्रिय हैं। हाल ही में उन्हें बंगाल की ओर से 2026-27 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए घोषित टीम में शामिल किए जाने की खबरें आई है।
BCCI और CAB को भी कहा धन्यवाद
अपने विदाई संदेश में शमी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा किया, उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए और उनके क्रिकेट करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शमी ने अपने साथियों, कोच और परिवार के योगदान को भी याद किया। उन्होंने उन करोड़ों भारतीय प्रशंसकों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनके अच्छे प्रदर्शन के दौरान उत्साह बढ़ाया और मुश्किल समय में भी उनका समर्थन किया।
उनका संदेश इस बात को भी सामने लाता है कि एक खिलाड़ी का करियर केवल मैदान पर बनाए गए रिकॉर्ड से नहीं बनता। उसके पीछे टीम के साथी, प्रशिक्षक, परिवार और प्रशंसकों का योगदान भी होता है। शमी ने अपने टेस्ट करियर के अंतिम संदेश में इन सभी को याद किया।


