सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 फायरिंग के बाद बिहार सरकार ने 17 IPS अधिकारियों का तबादला किया है। जानिए किस जिले के SP बदले और किसे मिली नई जिम्मेदारी।
सिवान/ भोजपुर: बिहार में मंगलवार, 18 अगस्त को पुलिस प्रशासन के स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया। राज्य सरकार ने 17 वरिष्ठ IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें सिवान और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक यानी SP भी शामिल हैं। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब सिवान में 25 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आने और भोजपुर में स्थानीय कार्यकर्ता भरत तिवारी से जुड़े एनकाउंटर को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे थे।
सिवान के तत्कालीन SP पूर्ण कुमार झा को हटा दिया गया है और उन्हें नई पोस्टिंग मिलने तक बिहार पुलिस मुख्यालय में रखा गया है। उनकी जगह भारत सोनी को सिवान का नया SP बनाया गया है। वहीं भोजपुर के SP मिस्टर राज का भी तबादला किया गया है। उनकी जगह अवधेश दीक्षित को भोजपुर का नया SP बनाया गया है।
सिवान में आखिर क्या हुआ था?
पूरे मामले की शुरुआत 25 जुलाई 2026 को सिवान में हुए छात्र प्रदर्शन से हुई। यह प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित राज्यव्यापी बंद का हिस्सा था। सिवान समेत बिहार के कई इलाकों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
सिवान में स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के कई जवान घायल हुए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी का AK-47 राइफल से फायरिंग करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया।
वीडियो सामने आने के बाद इस बात पर सवाल उठने लगे कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने इतनी खतरनाक राइफल का इस्तेमाल क्यों किया और क्या इसके लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति थी।
बिहार पुलिस ने बाद में बताया कि संबंधित पुलिसकर्मी ने हवा में चार राउंड फायर किए थे और उसके पास इसके लिए कोई आदेश नहीं था। पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया था।
पुलिस का क्या कहना था?
घटना के बाद पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हालात सामान्य नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और कुछ जवान भीड़ के बीच घिर गए थे।
बिहार सरकार ने बाद में सुप्रीम कोर्ट के सामने भी यही पक्ष रखा कि AK-47 चलाने वाला पुलिसकर्मी प्रदर्शन के दौरान भीड़ से घिर गया था। सरकार का कहना था कि उसने ऐसी स्थिति में हवा में फायरिंग की।
वहीं, इस घटना की आलोचना करने वालों का सवाल था कि अगर भीड़ हिंसक हो गई थी तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के पास मौजूद दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और AK-47 तक बात कैसे पहुंची।
कितने लोगों को गोली लगी?
25 जुलाई की हिंसा के बाद तीन लोगों के गोली लगने से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, सिवान के तत्कालीन SP पूर्ण कुमार झा ने कहा था कि तीनों मामलों में यह स्पष्ट नहीं था कि सभी गोलियां पुलिस की फायरिंग से ही चली थीं।
पुलिस के अनुसार, फायरिंग की घटनाओं की अलग-अलग जांच की गई। एक घायल व्यक्ति के मामले में पुलिस ने गोली लगने की पुष्टि की थी, जबकि बाकी मामलों में गोली का स्रोत जांच का विषय बना हुआ था।
इसी वजह से घटना के बाद पुलिस फायरिंग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हुई।
पुलिस की ओर से कितनी फायरिंग हुई?
घटना के बाद सिवान के तत्कालीन SP पूर्ण कुमार झा ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से चार राउंड लंबी दूरी के हथियारों से और तीन राउंड पिस्तौल से चलाए गए थे। उन्होंने कुल मिलाकर करीब आठ से दस राउंड फायरिंग की बात कही थी और कहा था कि बाकी फायरिंग कहां से हुई, इसकी भी जांच की जा रही है।
इस बयान ने भी सवाल खड़े किए, क्योंकि प्रदर्शन के दौरान AK-47 जैसे हथियार के इस्तेमाल की तस्वीर और वीडियो पहले ही सामने आ चुके थे।
AK-47 चलाने वाले पुलिसकर्मी पर हुई कार्रवाई
वीडियो सामने आने के बाद बिहार पुलिस ने संबंधित कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया था। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसने AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए थे।
पुलिस का कहना था कि उसने यह फायरिंग बिना आदेश की थी। इसके बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
लेकिन विवाद सिर्फ कांस्टेबल तक सीमित नहीं रहा। सवाल यह भी उठे कि एक संवेदनशील प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तैनाती, हथियारों के इस्तेमाल और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी कैसी थी।
यही वजह है कि बाद में सिवान के SP पूर्ण कुमार झा का तबादला भी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया।
प्रदर्शन की मुख्य वजह
सिवान का प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ था। इसके पीछे छात्रों से जुड़े कई मुद्दे थे। बिहार में छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से कथित NEET पेपर लीक को लेकर लगातार विरोध किया जा रहा था।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। इसी दौरान छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई ने विरोध को और बढ़ा दिया।
25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान पटना, सिवान, छपरा और दूसरे जिलों में भी प्रदर्शन हुए। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी। पुलिसकर्मियों के घायल होने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आईं।
बाद में राज्य सरकार ने प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ पहले दर्ज FIR वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की घोषणा भी की थी।
सिवान के नए SP होंगे भारत सोनी
सरकार ने भारत सोनी को सिवान का नया SP बनाया है। इससे पहले वह नालंदा के SP थे। अब उन्हें सिवान की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, सिवान के तत्कालीन SP पूर्ण कुमार झा को बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना भेजा गया है। उन्हें फिलहाल नई पोस्टिंग का इंतजार करने को कहा गया है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झा उस समय सिवान के SP थे जब 25 जुलाई को AK-47 से फायरिंग की घटना हुई थी।
भोजपुर के SP का भी तबादला
सरकार के फेरबदल में सिर्फ सिवान नहीं, भोजपुर भी शामिल है। भोजपुर के SP मिस्टर राज का तबादला कर उन्हें रोहतास का SP बनाया गया है।
उनकी जगह बिहार पुलिस मुख्यालय में SP (Personnel-1) के पद पर तैनात अवधेश दीक्षित को भोजपुर का नया SP बनाया गया है।
भोजपुर में हाल में स्थानीय कार्यकर्ता भरत तिवारी से जुड़े एनकाउंटर को लेकर विवाद हुआ था। इसी कारण भोजपुर पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आई थी। मंगलवार के फेरबदल में भोजपुर SP का तबादला इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रोहतास और सारण में भी बदलाव
IPS फेरबदल का असर कई दूसरे जिलों पर भी पड़ा है। भोजपुर के SP मिस्टर राज को रोहतास का SP बनाया गया है। वहीं रोहतास के SP रोशन कुमार को सारण का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी SSP बनाया गया है।
नालंदा में भी बदलाव किया गया है जहां हृदय कांत को नालंदा का नया SP बनाया गया है। वह इससे पहले बिहार ATS में SP के पद पर तैनात थे।
इस तरह फेरबदल सिर्फ विवादों से जुड़े दो जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिलों और पुलिस की अलग-अलग शाखाओं में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
17 IPS अधिकारियों का बड़ा फेरबदल
बिहार सरकार के इस आदेश में कुल 17 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले और नई जिम्मेदारियां शामिल हैं। इनमें जिला पुलिस प्रमुखों के अलावा पुलिस मुख्यालय और विशेष शाखाओं में तैनात अधिकारी भी हैं।
इन बदलावों में कुछ अधिकारियों को सतर्कता, निषेध, NNTF, ATS, CID, मानवाधिकार और आर्थिक अपराध जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में भेजा गया है।
उदाहरण के लिए, 2010 बैच के IPS अधिकारी अनिल कुमार को DIG, निषेध और NNTF बनाया गया है। मृत्युंजय कुमार चौधरी को DIG, सिविल डिफेंस की जिम्मेदारी दी गई है। राजीव रंजन को विशेष सतर्कता इकाई में DIG बनाया गया है।
वहीं अजय कुमार पांडेय को वित्त एवं तकनीकी सेवाओं का DIG बनाया गया है और अमीर जावेद को सतर्कता जांच ब्यूरो में DIG की जिम्मेदारी मिली है।
पुलिस व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव
फेरबदल में कई अधिकारियों को उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों से हटाकर अलग-अलग विशेष शाखाओं में भेजा गया है। मिथिलेश कुमार को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-9, जमालपुर का कमांडेंट बनाया गया है।
सुशील कुमार को मानवाधिकार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। राजेश कुमार को NNTF, निषेध और राज्य स्तरीय नियंत्रण ब्यूरो की जिम्मेदारी मिली है। मनीष कुमार को विशेष सतर्कता इकाई में SP बनाया गया है।
इसके अलावा विनीत कुमार को बिहार ATS का SP बनाया गया है। रमानंद कुमार कौशल को भी विशेष सतर्कता इकाई में भेजा गया है। गरिमा को CID के कमजोर वर्ग एवं महिला प्रकोष्ठ में SP बनाया गया है।
यानी सरकार ने इस फेरबदल के जरिए जिला पुलिस के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पुलिस शाखाओं में भी जिम्मेदारियां बदली हैं।
AK-47 विवाद पर अब भी कई सवाल बाकी
पुलिसकर्मी के निलंबन और अब सिवान SP के तबादले के बाद भी घटना से जुड़े कई सवालों का जवाब जांच से मिलना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदर्शन के दौरान AK-47 का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ? पुलिस के मुताबिक, कांस्टेबल ने बिना आदेश हवा में गोली चलाई और वह भीड़ से घिर गया था। लेकिन घटना के पूरे क्रम, फायरिंग की परिस्थितियों और कमान की जिम्मेदारी की जांच अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
दूसरा सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से हुई फायरिंग में घायल हुए लोगों को लगी गोलियों का स्रोत क्या था। पुलिस पहले ही कह चुकी है कि तीनों मामलों में यह स्पष्ट नहीं था कि सभी गोलियां पुलिस की ओर से चली थीं।
हथियारों के इस्तेमाल पर उठते सवाल
इस घटना के बाद यह बहस भी शुरू हुई कि विरोध प्रदर्शन या बंद के दौरान पुलिस किस परिस्थिति में AK-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल कर सकती है।
कानूनी तौर पर कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और पुलिस बलों के हथियार इस्तेमाल करने के नियम राज्य के नियमों और पुलिस मैनुअल से भी जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया कि भीड़ नियंत्रण में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल असाधारण परिस्थिति में ही होना चाहिए और बल प्रयोग में आवश्यकता तथा अनुपात का ध्यान रखना जरूरी है।
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