Sunday, 11 October 2026
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महाराजा सुखजीत सिंह की वसीयत: माई भागो इंस्टीट्यूट को 90% संपत्ति, माता गुजरी मेडिकल सेंटर और सिंध हॉर्स के लिए भी हिस्सा

पंजीकृत वसीयत में माता गुजरी मेडिकल सेंटर और अपनी रेजिमेंट सिंध हॉर्स के लिए भी अलग प्रावधान; कपूरथला की सिख लड़कियों के लिए विशेष शर्त

कपूरथला: कपूरथला के महाराजा, महा वीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) सुखजीत सिंह ने अपनी पंजीकृत वसीयत के माध्यम से अपनी शाही संपत्ति के भविष्य के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। सिंध हॉर्स के पूर्व अधिकारी और 91 वर्षीय महाराजा ने अपनी कुल संपत्ति का 90 प्रतिशत हिस्सा माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट फॉर गर्ल्स को देने का प्रावधान किया है, जिससे यह संस्थान उनकी संपत्ति का मुख्य लाभार्थी बन गया है। वसीयत में दिल्ली स्थित माता गुजरी मेडिकल सेंटर और उनकी रेजिमेंट सिंध हॉर्स के लिए भी अलग-अलग प्रावधान शामिल हैं।

अपनी वसीयत पंजीकृत कराने के बाद योद्धा-महाराजा ने 29 जून 2026 को अपनी देखभालकर्ता मीरा बसंत कौर से विवाह कर लिया।

वसीयत में उन्होंने यह भी प्रावधान किया है कि माई भागो इंस्टीट्यूट की कपूरथला एक्सटेंशन शाखा में प्रवेश केवल उन सिख लड़कियों तक सीमित रहेगा, जिनके पास 10 वर्ष से अधिक पुराने आधार कार्ड हों और जिनमें तत्कालीन कपूरथला रियासत के 1,632 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उनका भौगोलिक निवास दर्ज हो। यह शर्त इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि जिला पुनर्गठन के बाद वह क्षेत्र वर्तमान में पंजाब के किस जिले में आता है।

महाराजा सुखजीत सिंह ने नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 स्थित बी-90ए में अपनी हिस्सेदारी को ग्रेटर कैलाश-1 के पहाड़ी वाला गुरुद्वारा स्थित माता गुजरी मेडिकल सेंटर को देने का निर्देश दिया है। उन्होंने दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मेडिकल सेंटर को यह संपत्ति प्राप्त हो।

महाराजा ने अपनी संपत्ति का अलग से 10 प्रतिशत हिस्सा अपनी रेजिमेंट ‘सिंध हॉर्स’ के लिए निर्धारित किया है। उनकी इच्छा है कि जहां तक संभव हो, इसका लाभ कपूरथला के लोगों के लिए किया जाए। इसके अलावा उन्होंने अपने पदक भी अपनी रेजिमेंट को देने का प्रावधान किया है।

महाराजा सुखजीत सिंह को 6 जून 1954 को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला था। 1955 में कपूरथला के महाराजा के रूप में मान्यता मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी सैन्य सेवा जारी रखी।

उन्होंने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ सियालकोट सेक्टर में युद्ध लड़ा। इसके बाद 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने शकरगढ़ सेक्टर में सिंध हॉर्स का नेतृत्व करते हुए बसंतर की लड़ाई में हिस्सा लिया।

उस समय लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर रहे सुखजीत सिंह ने सिंध हॉर्स के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में असाधारण नेतृत्व, साहस और सैनिक कौशल का प्रदर्शन किया। उनकी रेजिमेंट ने पाकिस्तानी सेना के एक बड़े बख्तरबंद जवाबी हमले का सफलतापूर्वक मुकाबला किया। इसके बाद उनकी यूनिट ने दुश्मन के आठ टैंकों को नष्ट किया और एक अधिकारी तथा दो जूनियर कमीशंड अधिकारियों को बंदी बनाया।

बसंतर की लड़ाई में उनकी बहादुरी और नेतृत्व के लिए उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार महा वीर चक्र से सम्मानित किया गया। बाद में वह ब्रिगेडियर के पद तक पहुंचे।

1971 के बसंतर युद्ध के नायक और अब सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर महाराजा सुखजीत सिंह ने अपनी वसीयत में उन साथी सैनिकों को भी याद किया, जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान उनकी जान बचाने में मदद की थी।

उन्होंने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति उनका लगातार समर्थन उन साथियों के प्रति कृतज्ञता की भावना से प्रेरित रहा, जिन्होंने सैन्य सेवा के दौरान उनका साथ दिया था।

पंजीकृत वसीयत में महाराजा सुखजीत सिंह ने अपनी संपत्तियों के वितरण को लेकर अपनी इच्छाएं दर्ज की हैं। हालांकि, इन प्रावधानों का प्रभाव लागू उत्तराधिकार और संपत्ति कानूनों के अनुसार होगा। यह संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व और उनकी कानूनी स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

91 वर्ष की उम्र में इस योद्धा-महाराजा ने 29 जून 2026 को अपनी देखभालकर्ता मीरा बसंत कौर से विवाह किया। इसके साथ ही कपूरथला के शाही घराने को एक नई महारानी मिली। ऐसा प्रतीत होता है कि महाराजा सुखजीत सिंह को विश्वास था कि मीरा बसंत कौर तत्कालीन कपूरथला रियासत की सिख लड़कियों की सेवा और उनके कल्याण के उद्देश्य को आगे भी जारी रखेंगी।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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