Sunday, 12 July 2026
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CBSE की खामियां उजागर करने वाले 19 साल का लड़के को IIT Kanpur ने दी नौकरी, जानिए निसर्ग अधिकारी की पूरी कहानी

हाल ही में 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी ने राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड CBSE के ऑनलाइन मार्किंग पोर्टल की सुरक्षा से जुड़े कमजोरियों को उजागर किया था। इस बात से प्रभावित होकर IIT Kanpur ने निसर्ग को एक खास नौकरी प्रदान की है। जानिए पूरा मामला

कानपुर/नई दिल्ली: अक्सर हम यह सुनते हैं कि किसी बड़ी संस्था में नौकरी पाने से पहले किसी भी व्यक्ति को लंबा संघर्ष करना पड़ता है। अपने कार्य क्षेत्र का लंबा अनुभव और लंबे-चौड़े CV के बाद ही कोई बड़ी संस्था व्यक्ति को नौकरी देती है। लेकिन IIT Kanpur से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है।

दरअसल, IIT Kanpur ने एक 19 साल के लड़के को अपनी संस्था के बेहद ही जरूरी विभाग में नौकरी दी है। जिस उम्र में अधिकांश छात्र कॉलेज, करियर और रिजल्ट को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी का एक युवक देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक CBSE की डिजिटल सुरक्षा को परखने में जुटा था।

यह कहानी है निसर्ग अधिकारी (Nisarga Adhikary) की, जिसने दावा किया कि उसने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में गंभीर सुरक्षा कमजोरियां खोजीं। उसके खुलासे ने देशभर में बहस छेड़ दी। कुछ ही दिनों बाद उस युवक को IIT Kanpur के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब में नौकरी मिल गई है।

कौन हैं निसर्ग अधिकारी?

निसर्ग अधिकारी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के रहने वाले हैं। 6 साल की उम्र से ही उन्हें कंप्यूटर, कोडिंग और साइबर सिक्योरिटी में गहरी रुचि थी। जहां अधिकांश बच्चे गेम खेलते हैं, वहीं निसर्ग वेबसाइटों और डिजिटल सिस्टम की संरचना को समझने में समय बिताते थे।

साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में उन्हें “एथिकल हैकर” कहा जाता है। यानी ऐसा व्यक्ति जो सुरक्षा खामियों का फायदा उठाने के बजाय उन्हें खोजकर संबंधित संस्थाओं को सूचित करता है ताकि सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। आपको बता दें कि निसर्ग के माता-पिता फाइनेंस सेक्टर में कार्यरत हैं।

निसर्ग ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा शोध से जुड़ा काम किया और धीरे-धीरे तकनीकी समुदाय में पहचान बनानी शुरू की। लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब उन्होंने CBSE के OSM प्लेटफॉर्म को लेकर सवाल उठाए।

आखिर क्या था पूरा मामला?

साल 2026 में CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और तेज बनाने के लिए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया। इस व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाता है। इसका उद्देश्य मानवीय त्रुटियों (Human Errors) को कम कर परिणाम प्रक्रिया को तेज बनाना था।

निसर्ग ने दावा किया कि फरवरी 2026 में इस सिस्टम की जांच के दौरान उन्हें कई गंभीर सुरक्षा कमजोरियां नजर आईं। उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी खामियां ऐसी थीं जो गलत हाथों में पड़ने पर मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती थीं।

निसर्ग के अनुसार, उन्होंने इन मुद्दों की जानकारी जिम्मेदार तरीके से संबंधित एजेंसियों और CERT-In को दी थी। बाद में उन्होंने अपनी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसके बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।

सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

जैसे ही निसर्ग के दावे सार्वजनिक हुए, तकनीकी समुदाय में बहस शुरू हो गई। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों, डेवलपर्स और टेक प्रोफेशनल्स ने उनके दावों का विश्लेषण करना शुरू किया। कई लोगों ने कहा कि अगर रिपोर्ट में बताए गए मुद्दे सही हैं तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कुछ दिनों के भीतर यह मामला तकनीकी मंचों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया। निसर्ग का नाम अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

CBSE की प्रतिक्रिया

CBSE ने निसर्ग के दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि निसर्ग द्वारा जिस URL और प्लेटफॉर्म की ओर इशारा किया गया था, वह वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली नहीं बल्कि एक परीक्षण (टेस्टिंग) वातावरण था। CBSE ने कहा कि वास्तविक OSM सिस्टम सुरक्षित था और उसमें किसी सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।

हालांकि विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। निसर्ग ने अपने दावों पर कायम रहते हुए कहा कि उन्होंने जो कुछ देखा और रिपोर्ट किया, वह सार्वजनिक हित में किया गया था। तकनीकी समुदाय का एक हिस्सा भी लगातार इस मामले पर चर्चा करता रहा।

शिक्षा मंत्री और IIT के विशेषज्ञ भी हुए सक्रिय

मामले ने इतना बड़ा रूप लिया कि खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने IIT Kanpur और IIT Madras के विशेषज्ञों को इस पूरे विवाद की तकनीकी समीक्षा के आदेश दिए। शिक्षा मंत्री के इस आदेश के बाद 4 विशेषज्ञों की टीम निसर्ग के दावों की जांच करने CBSE के दिल्ली हेडक्वार्टर पहुंची, जहां उन्होंने डिजिटल सुरक्षा ढांचे और संबंधित तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया।

इस दौरान IIT Kanpur के डायरेक्टर मणेंद्र अग्रवाल ने निसर्ग से मुलाकात भी की। बातचीत के दौरान वे निसर्ग से बेहद प्रभावित हुए। यहीं से निसर्ग की कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया।

IIT Kanpur ने दिया ऑफर

जिस युवक को कुछ दिन पहले तक लोग “CBSE की खामियां बताने वाला छात्र” कह रहे थे, उसे अब देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक IIT Kanpur ने नौकरी का ऑफर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक IIT Kanpur के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब से निसर्ग अधिकारी को जोड़ा गया है, जहां वे साइबर सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं में योगदान देंगे।

यह नियुक्ति केवल एक नौकरी नहीं है। यह उस सोच की मान्यता है जिसमें सुरक्षा खामियां उजागर करने वाले जिम्मेदार शोधकर्ताओं को खतरा नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा माना जाता है।

आगे पढ़ाई का कोई इरादा नहीं

इस बेहद खास उपलब्धि पर जब निसर्ग से आगे की पढ़ाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, फिलहाल उनका किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्हें किताबी पढ़ाई में अधिक दिलचस्पी नहीं है। वे ऐसे स्टार्टअप्स या प्रोडक्ट्स बनाना चाहते हैं, जिससे लोगों की मदद हो सके।

क्यों खास है यह नियुक्ति?

भारत में अक्सर हैकिंग शब्द को नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है। लेकिन दुनिया भर में एथिकल हैकर्स को डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। Google, Microsoft, Meta जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने सिस्टम की खामियों को खोजने वाले रिसर्चर्स को पुरस्कृत करती हैं।

निसर्ग का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां एक छात्र ने सुरक्षा चिंताओं को सामने रखा और बाद में उसी क्षमता के कारण उसे देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान में काम करने का अवसर मिला। यह संदेश देता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

डिजिटल भारत के लिए नया सबक

CBSE-Osm विवाद से अलग हटकर देखें तो यह घटना एक बड़ा संदेश देती है। भारत तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। शिक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शासन और परीक्षा प्रणाली सब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर होती जा रही हैं। ऐसे समय में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह भरोसे का सवाल बन चुकी है।

निसर्ग अधिकारी जैसे युवा शोधकर्ता इस बात की याद दिलाते हैं कि मजबूत डिजिटल ढांचे के लिए केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि निरंतर सुरक्षा परीक्षण और जिम्मेदार रिसर्च भी उतनी ही जरूरी है।

ये भी पढ़ें :- JEE Advanced 2026 डेटा एक्सपोज़र विवाद: शोधकर्ता Rylen Anil की खोज के बाद IIT Roorkee ने मानी क्लाउड स्टोरेज में खामी

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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