Thursday, 22 October 2026
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लाल किला मेट्रो के पास ‘अवैध वसूली’ पर हाईकोर्ट का हथौड़ा: पार्किंग लाइसेंस रद्द, कोर्ट ने कहा- जनता की जान से बढ़कर ठेकेदार का मुनाफा नहीं

पार्किंग ठेकेदार की मनमानी पड़ी भारी

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

राजधानी के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक इलाके चांदनी चौक-लाल किला क्षेत्र में ट्रैफिक जाम से जूझने वाले लाखों लोगों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास अवैध पार्किंग और यातायात में बाधा डालने वाले ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उसका लाइसेंस रद्द करने के आदेश को सही ठहराया है। जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने साफ कर दिया कि जब बात सार्वजनिक सुरक्षा और सुगम आवागमन की हो, तो किसी निजी ठेकेदार के व्यावसायिक हितों को तवज्जो नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट की दो टूक: पार्किंग साइट नहीं, यह हादसे का न्योता

अदालत ने एमसीडी (MCD) द्वारा 13 अगस्त 2025 को जारी किए गए नोटिस को वैध मानते हुए कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं को निजी लाभ के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने माना कि लाल किला और चांदनी चौक जैसे संकरे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अव्यवस्थित पार्किंग केवल ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है।

मामले की बड़ी बातें

अवैध कब्जा: गेट नंबर 1 और 2 का ठेका लेकर गेट नंबर 3 और 4 पर भी वसूली हो रही थी।
जुर्माना: नियमों के उल्लंघन पर ठेकेदार पर 1.14 लाख रुपये का जुर्माना पहले ही लग चुका था।
फीस की चोरी: ठेकेदार न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहा था, बल्कि मासिक लाइसेंस फीस का भुगतान भी नहीं कर रहा था।

ट्रैफिक पुलिस की चेतावनी ने खोला ‘अवैध वसूली’ का कच्चा चिट्ठा

इस पूरे विवाद की जड़ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वह रिपोर्ट है, जो 21 फरवरी 2025 को एमसीडी को सौंपी गई थी। पुलिस ने आगाह किया था कि लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 3 और 4 के पास जिस तरह से गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं, उससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जांच में खुलासा हुआ कि एमसीडी ने आधिकारिक तौर पर केवल गेट नंबर 1 और 2 के लिए पार्किंग आवंटित की थी। लेकिन ठेकेदार की ‘दबंगई’ ऐसी थी कि उसने गेट नंबर 3 और 4 पर भी अवैध रूप से वसूली केंद्र बना लिया था। निर्धारित सीमा से बाहर जाकर सड़कें घेरी जा रही थीं, जिससे मेट्रो से निकलने वाले यात्रियों और पैदल चलने वालों का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया था।

3 साल का था ठेका, 1 साल में ही ‘ब्लैकलिस्ट’ की नौबत

दिसंबर 2024 में इस साइट का आवंटन 3 साल के लिए किया गया था। लेकिन महज कुछ महीनों में ही शिकायतों का अंबार लग गया। एमसीडी ने कोर्ट को बताया कि ठेकेदार को बार-बार ‘कारण बताओ नोटिस’ दिए गए, लेकिन उसकी मनमानी नहीं रुकी। जब एमसीडी ने लाइसेंस रद्द करने और सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने की चेतावनी दी, तो ठेकेदार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली। हालांकि, कोर्ट ने ठेकेदार की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ट्रैफिक पुलिस की शिकायतें बेहद गंभीर हैं और इन्हें नजरअंदाज करना जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ होगा।

सुरक्षा राशि होगी जब्त, अब नए सिरे से होगी कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को छूट दी है कि वह दोषी ठेकेदार की सुरक्षा राशि (Security Deposit) और फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त कर सकती है। हालांकि, ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की प्रक्रिया पर कोर्ट ने कहा कि इसके लिए ठेकेदार को सुनवाई का एक और मौका दिया जाना चाहिए, ताकि कानूनी प्रक्रिया का पालन हो सके। लाल किला और चांदनी चौक दिल्ली के ‘हार्ट’ हैं। यहाँ हर दिन लाखों की फुटफॉल होती है। अगर यहाँ पार्किंग माफिया सक्रिय रहते हैं, तो आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का निकलना भी नामुमकिन हो जाता है। हाईकोर्ट का यह फैसला अन्य पार्किंग ठेकेदारों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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