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अग्रिम जमानत रद्द, गिरफ्तारी नहीं; पीड़िता ने दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026

दिल्ली की एक सत्र अदालत द्वारा बलात्कार के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बावजूद अब तक उसकी गिरफ्तारी न होने पर पीड़िता ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़िता और उनके अधिवक्ताओं ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी में हो रही देरी जांच की विश्वसनीयता, गति और निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को पीड़िता के साथ उनके कानूनी प्रतिनिधियों—असग़र खान एंड एसोसिएट्स और ब्लैकथॉर्न चैंबर्स—ने संबोधित किया। इस दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता असग़र खान, नजमी खान, अब्दुल ताहिर खान, सहर मसरूर और मोहद. वासिल खान व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे।

यह मामला एफआईआर संख्या 300/2025 से संबंधित है, जो वसंत विहार थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर में शरत वोहरा को आरोपी नामित किया गया है। आरोपों में विवाह के झूठे वादे पर बलात्कार, यौन शोषण और आपराधिक धमकी शामिल हैं। कानून के प्रावधानों के अनुरूप पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है।

पीड़िता के अधिवक्ताओं ने बताया कि 14 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली की सत्र अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने यह आदेश न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अध्यक्षता में पारित किया, जिसमें रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का विस्तार से अवलोकन किया गया।

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संबंध वैवाहिक प्रकृति के थे और पीड़िता की सहमति विवाह के झूठे वादे के कारण प्रभावित और दूषित हुई। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि आरोपी द्वारा पीड़िता और उसके परिवार को प्रभावित करने के प्रयास किए गए, जिनका समर्थन कॉल डिटेल रिकॉर्ड से होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में गिरफ्तारी से संरक्षण देने के लिए कोई असाधारण आधार मौजूद नहीं है।

एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाई और बार-बार विवाह का आश्वासन दिया। शिकायत में कहा गया है कि यह भरोसा केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारिवारिक बातचीत के माध्यम से भी इसे मजबूत किया गया।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इन झूठे आश्वासनों के आधार पर आरोपी ने उससे बार-बार शारीरिक संबंध बनाए और जबरन यौन कृत्य किए, जिससे उसे शारीरिक चोट और गंभीर मानसिक आघात का सामना करना पड़ा।

एफआईआर और अदालत के आदेश में यह तथ्य भी दर्ज है कि आरोपी कथित रूप से विवाह के बाद की योजना दर्शाने के लिए पीड़िता के साथ आईवीएफ और अन्य चिकित्सा क्लीनिकों तक गया। अदालत ने इस आचरण को पीड़िता द्वारा लगाए गए धोखे के आरोपों को और मजबूत करने वाला माना।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और उसे चुप कराने के उद्देश्य से अंतरंग सामग्री प्रसारित करने की चेतावनी भी दी।

पीड़िता और उनके अधिवक्ताओं का कहना है कि सत्र अदालत के आदेश के बावजूद आरोपी का अब तक गिरफ्तार न होना गंभीर चिंता का विषय है। पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, स्वयं और अपने परिवार के लिए सुरक्षा, तथा निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग की है।

पीड़िता ने यह आशंका भी जताई है कि गिरफ्तारी में लगातार हो रही देरी से आरोपी के फरार होने, गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ रही है। उनके अधिवक्ताओं का कहना है कि समय पर गिरफ्तारी और कानून का सख्त अनुपालन ही न्याय सुनिश्चित कर सकता है और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रख सकता है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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