पुणे में राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम से एक दिन पहले ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं में भिड़ंत हुई। जानिए COEP विवाद, छात्राओं के आरोप और पुलिस की कार्रवाई।
पुणे: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले पुणे में छात्र राजनीति को लेकर तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार, 21 अगस्त को शिवाजीनगर स्थित COEP टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद के बाद झड़प हो गई। घटना के बाद कॉलेज परिसर और आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
यह विवाद ऐसे समय हुआ जब राहुल गांधी शनिवार, 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत छात्राओं से संवाद करने वाले हैं। कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पहले से व्यापक तैयारियां कर रही थी और पुलिस ने भी इसे अनुमति देते हुए कई सुरक्षा एवं प्रशासनिक शर्तें लागू की हैं। ऐसे में कार्यक्रम से एक दिन पहले छात्र संगठनों के बीच हुई झड़प ने सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रील बनाने से शुरू हुआ विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, COEP हॉस्टल में विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियों और रील बनाने को लेकर हुई। कार्यक्रम के प्रचार के दौरान छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई और मामला धीरे-धीरे बढ़ता गया। इसके बाद ABVP और NSUI से जुड़े लोग आमने-सामने आ गए और विवाद झड़प में बदल गया।
हालांकि, घटना की शुरुआत को लेकर दोनों पक्षों का पक्ष अलग है। ABVP का कहना है कि कांग्रेस और NSUI से जुड़े लोग कॉलेज के हॉस्टल परिसर में पहुंचे और छात्राओं पर राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव बनाया। वहीं कांग्रेस और NSUI ने इस आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि कार्यक्रम का समर्थन करने वाली दो छात्राओं को ABVP से जुड़े लोगों ने हॉस्टल के भीतर रोककर धमकाया।
दो छात्राओं के साथ मारपीट का आरोप
विवाद का सबसे गंभीर पहलू दो छात्राओं से जुड़ा आरोप है। NSUI और कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि कार्यक्रम का समर्थन करने वाली दो छात्राओं को हॉस्टल में रोका गया और उनके साथ मारपीट तथा धमकी दी गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद NSUI के कार्यकर्ता हॉस्टल के बाहर पहुंचे और विरोध जताया। इसके बाद दोनों छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार भी घटना के बाद हॉस्टल पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि ABVP कार्यकर्ताओं ने छात्राओं को धमकाया था। महाराष्ट्र प्रदेश यूथ कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष अक्षय जैन ने भी दावा किया कि संबंधित छात्राओं ने छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याएं उठाई थीं और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के समर्थन में थीं।
दूसरी ओर ABVP के प्रदेश मंत्री अथर्व कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि NSUI कार्यकर्ता हॉस्टल परिसर में प्रवेश कर रहे थे और छात्राओं पर कार्यक्रम में पंजीकरण के लिए दबाव डाल रहे थे। ABVP ने इसी को विवाद का कारण बताया।
झड़प में दो लोग घायल
रिपोर्ट के मुताबिक, झड़प के दौरान कांग्रेस से जुड़े दो कार्यकर्ता घायल हुए। दोनों को इलाज के लिए पुणे के संचेती अस्पताल ले जाया गया। बाद में कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की।
घटना के बाद कॉलेज परिसर में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को शांत कराने और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।
पुलिस अब उपलब्ध CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की जांच कर रही है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि झड़प के लिए कौन जिम्मेदार था।
कांग्रेस नेताओं ने कॉलेज परिसर में दिया धरना
घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। विजय वडेट्टीवार, सतेज पाटील और विश्वजीत कदम सहित कांग्रेस नेताओं के घटनास्थल पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कॉलेज परिसर में धरना दिया और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने इस घटना को छात्राओं की आवाज दबाने की कोशिश के तौर पर पेश किया, जबकि ABVP ने इसे कांग्रेस और NSUI द्वारा कॉलेज परिसर में राजनीतिक गतिविधियां करने से जोड़कर देखा। इस तरह घटना अब केवल दो छात्र संगठनों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
कांग्रेस सांसद प्रणिति शिंदे ने भी कथित रूप से प्रभावित छात्राओं से फोन पर बातचीत कर उनका हाल जाना। पुलिस से सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद वह हॉस्टल के बाहर से रवाना हुईं।
क्या है ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम?
‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस के छात्र और युवा संवाद अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी अलग-अलग शहरों में छात्रों के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। इससे पहले वह कोटा, देहरादून और प्रयागराज में छात्रों के साथ संवाद कर चुके हैं। पुणे का कार्यक्रम इस अभियान का चौथा बड़ा छात्र संवाद है।
कांग्रेस इस अभियान के जरिए छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। इसमें शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, कथित पेपर लीक, रोजगार, फीस और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल रहे हैं।
पुणे के कार्यक्रम को पिछले आयोजनों से अलग रखा गया है। इस बार कार्यक्रम खास तौर पर छात्राओं पर केंद्रित है। राहुल गांधी ने महिलाओं से उनकी जिंदगी, अनुभव, समस्याओं और भविष्य को लेकर अपने विचार साझा करने की अपील की है। कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

पुणे में महिला-केंद्रित होगा कार्यक्रम
कांग्रेस ने पुणे संस्करण को ‘महिला विशेष’ कार्यक्रम के तौर पर प्रचारित किया है। महाराष्ट्र कांग्रेस की ओर से जारी प्रचार सामग्री में 22 अगस्त को शाम 5 बजे AISSMS ग्राउंड में कार्यक्रम होने की जानकारी दी गई है।
राहुल गांधी ने कार्यक्रम को लेकर महिलाओं से सवाल किया है कि एक भारतीय महिला होने का उनके लिए क्या अर्थ है, समाज और परिवार से अलग उनकी अपनी आवाज क्या है और उनके संघर्ष, सपने तथा भविष्य को लेकर उनकी सोच क्या है।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, कार्यक्रम में छात्राओं से सीधे बातचीत के जरिए उनके सामने आने वाली शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को समझने की कोशिश की जाएगी। पार्टी ने इससे पहले पुणे में कार्यक्रम के प्रचार के लिए कैंपस संपर्क, पंजीकरण अभियान, बाइक रैली और संगीत कार्यक्रम जैसे आयोजन भी किए।
8 से 10 हजार लोगों के जुटने का अनुमान
पुणे पुलिस ने कार्यक्रम को अनुमति दी है, लेकिन इसके साथ 30 शर्तें लगाई हैं। अनुमति आदेश के मुताबिक कार्यक्रम शाम करीब 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक आयोजित किया जाना है और इसमें करीब 8,000 से 10,000 लोगों के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
पुलिस ने आयोजकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। कार्यक्रम में आपत्तिजनक तस्वीरों, पोस्टर या बैनर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। साथ ही ऐसी किसी गतिविधि से बचने को कहा गया है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त प्रवेश और निकास मार्ग, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था जैसी शर्तें भी रखी गई हैं। आयोजकों को महिला सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम स्थल पर CCTV कैमरों की व्यवस्था और लगातार निगरानी भी शर्तों में शामिल है। ड्रोन से फोटोग्राफी पर भी रोक लगाई गई है।
कर्फ्यू को लेकर भी बना था असमंजस
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले पुणे में प्रशासन ने 14 दिन के लिए निषेधात्मक आदेश लागू किए थे। इन प्रतिबंधों के कारण कार्यक्रम को लेकर शुरुआती दौर में असमंजस की स्थिति बनी थी। कांग्रेस ने संकेत दिया था कि अगर कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक रोक आती है तो वह कानूनी रास्ता अपना सकती है। बाद में पुलिस ने 30 शर्तों के साथ कार्यक्रम को अनुमति दे दी।
इस घटनाक्रम ने कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक तापमान पहले ही बढ़ा दिया था। इसके बाद COEP हॉस्टल में ABVP और NSUI के बीच हुई झड़प ने सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी।
BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ी राजनीतिक तकरार
‘छात्रों की गूंज’ केवल छात्र संवाद कार्यक्रम नहीं है। इसके जरिए कांग्रेस युवा मतदाताओं और खासकर छात्रों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राहुल गांधी के छात्र संवाद को आगे बढ़ाने और इसे करीब 800 शहरों और छोटे कस्बों तक ले जाने की बात कही थी।
इस अभियान में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए युवाओं की चिंताओं को सरकार की नीतियों से जोड़ रही है। दूसरी तरफ BJP और उससे जुड़े छात्र संगठन इस तरह के कार्यक्रमों को राजनीतिक प्रचार के रूप में देखते हैं।
पुणे की घटना इसी व्यापक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच हुई है। खास बात यह है कि विवाद किसी बड़े राजनीतिक मंच पर नहीं, बल्कि कॉलेज हॉस्टल परिसर में हुआ। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठन शैक्षणिक परिसरों को राजनीतिक टकराव से दूर रख पाएंगे।
विवाद के बीच प्रभावित होती छात्रों की आवाज
‘छात्रों की गूंज’ का मूल उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याएं सीधे राहुल गांधी के सामने रखने का मंच देना है। लेकिन पुणे में कार्यक्रम से ठीक पहले हुई झड़प ने इस उद्देश्य पर राजनीतिक विवाद की परत चढ़ा दी है।
एक तरफ कांग्रेस इसे छात्राओं की आवाज और उनके अधिकारों से जोड़ रही है। दूसरी तरफ ABVP कार्यक्रम के लिए कॉलेज परिसर में कथित प्रचार और पंजीकरण को लेकर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच अभी जारी है।
ऐसे में शनिवार का कार्यक्रम प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक ओर बड़े राजनीतिक कार्यक्रम को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराना और दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना कि छात्र राजनीति का विवाद कानून-व्यवस्था की समस्या में न बदले।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि COEP हॉस्टल में विवाद की वास्तविक शुरुआत किस वजह से हुई और झड़प के लिए कौन जिम्मेदार था। हालांकि, इतना स्पष्ट है कि राहुल गांधी के पुणे दौरे से पहले छात्र संगठनों के बीच यह टकराव कार्यक्रम के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा चुका है।
ये भी पढ़ें :- बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान! स्मृति ईरानी की वापसी, वसुंधरा राजे और राम माधव को बड़ी जिम्मेदारी


