केरलम सरकार की SIT निजी कंपनियों के चयन, प्रायोजक प्रक्रिया, विदेशी भुगतान, सरकारी मंजूरियों, अधिकारियों की भूमिका और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल समेत आयोजन से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही है।
तिरुवनंतपुरम: लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की विश्व कप विजेता फुटबॉल टीम को केरलम लाने की योजना अब एक बड़े जांच मामले में बदल गई है। जिस प्रस्तावित मैच को लेकर राज्य के फुटबॉल प्रशंसकों में भारी उत्साह था, उसी आयोजन से जुड़े वित्तीय लेनदेन, निजी प्रायोजक के चयन, सरकारी मंजूरियों, स्टेडियम के इस्तेमाल और अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) के साथ हुए कथित समझौतों पर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
मामले में केरलम सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इसके बाद पुलिस ने बुधवार, 16 सितंबर को रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (RBC) के कार्यालय और कंपनी से जुड़े लोगों के परिसरों समेत पांच स्थानों पर छापेमारी की। इससे पहले कलामस्सेरी पुलिस ने RBC, उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एंटो ऑगस्टिन और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की थी।
यह पूरा विवाद केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि मेसी केरलम क्यों नहीं आए। जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आयोजन के लिए पैसा कहां से आया, विदेश में कितना पैसा भेजा गया, किसे भेजा गया, क्या इसके लिए जरूरी अनुमति और दस्तावेज मौजूद थे और प्रस्तावित मैच के लिए निजी कंपनियों तथा सरकारी तंत्र के बीच किस तरह की व्यवस्था की गई थी।
कैसे शुरू हुआ मेसी को केरलम लाने का प्लान?
मेसी और अर्जेंटीना की टीम को केरलम लाने की योजना सार्वजनिक रूप से 2023 में सामने आई थी। तत्कालीन खेल मंत्री वी. अब्दुरहीमान ने जुलाई 2023 में घोषणा की थी कि अर्जेंटीना की टीम राज्य में आएगी और मेसी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इसके बाद केरलम में इस संभावित मैच को लेकर काफी उत्साह पैदा हुआ।
सरकार के सामने पेश की गई योजना में एक निजी प्रायोजक की मदद से आयोजन कराने की बात थी। बाद में रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी इस परियोजना की प्रमुख प्रायोजक के तौर पर सामने आई। हालांकि, खेल विभाग की बाद की जांच में प्रायोजक के चयन की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में गोल्ड एंड ग्लोबल नाम की कंपनी ने सरकार से संपर्क किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी उस समय नई पंजीकृत थी और उसकी पूंजी केवल करीब 1 लाख रुपये थी। बाद में उसका संबंध उसी पते से पाया गया जहां RBC का कार्यालय था। जांच में यह सवाल भी उठाया गया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए प्रायोजक चुनने के दौरान खुली निविदा प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।
₹250 करोड़ की बात कहां से आई?
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ₹250 करोड़ की रही है। अप्रैल 2026 में तत्कालीन खेल मंत्री वी. अब्दुरहीमान ने आरोप लगाया था कि अर्जेंटीना की टीम को केरलम लाने के लिए प्रायोजकों के जरिए करीब ₹250 करोड़ की व्यवस्था की गई थी।
अब्दुरहीमान ने आरोप लगाया था कि काफी प्रयासों के बाद टीम को लाने के लिए रकम जुटाई गई, लेकिन इसके बावजूद अर्जेंटीना की टीम केरलम नहीं आई। उन्होंने इसे लेकर कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की संभावना की बात भी कही थी। हालांकि, ₹250 करोड़ का आंकड़ा उस समय मंत्री द्वारा किए गए दावे से जुड़ा है और यह जरूरी नहीं कि पूरी रकम अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन को भुगतान की गई हो।
₹126 करोड़ का कथित विदेशी भुगतान
खेल विभाग की जांच के मुताबिक, आयोजन के प्रायोजक ने दावा किया था कि करीब 15 मिलियन डॉलर यानी उस समय लगभग ₹126 करोड़ अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन को दिए गए थे।
लेकिन अगस्त 2026 में सामने आई जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों में इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला कि AFA या अर्जेंटीना की टीम ने यह रकम वास्तव में प्राप्त की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकार के पास केरलम सरकार और AFA के बीच किसी औपचारिक समझौते का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।
यही बिंदु अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सवाल यह है कि यदि रकम विदेश भेजी गई थी तो वह किस बैंकिंग चैनल के जरिए गई, किस संस्था या एजेंसी को गई और उसके बदले में क्या सेवा या अनुबंध मौजूद था।
₹206 करोड़ कहां से आए?
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच ने वित्तीय लेनदेन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अगस्त 2026 में ED ने FEMA के तहत RBC से जुड़े कथित विदेशी भुगतान की जांच शुरू की।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, RBC के खाते में दो अलग-अलग बाहरी कंपनियों से करीब ₹206 करोड़ जमा हुए। इनमें से करीब ₹126 करोड़ विदेश भेजे जाने की बात सामने आई है। बची करीब ₹80 करोड़ की रकम के स्रोत और इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
ED यह भी देख रही है कि इन ₹206 करोड़ के लेनदेन के पीछे ऋण, सेवा अनुबंध या कोई अन्य वैध वित्तीय व्यवस्था थी या नहीं। जांच एजेंसी कथित विदेशी भुगतान और उसके बदले मिली सेवा या लाभ के बीच संबंध की भी पड़ताल कर रही है।
GST को लेकर भी जांच
इस मामले में कर संबंधी सवाल भी उठे हैं। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, GST विभाग की जांच में ₹25.78 करोड़ तक की कथित कर चोरी का उल्लेख किया गया। वित्त विभाग की SIT ने इस संबंध में कई एजेंसियों से आगे जांच की सिफारिश की है।
एक अन्य रिपोर्ट में प्रायोजक से करीब ₹22.68 करोड़ की सेवा कर देनदारी को लेकर GST विभाग की ओर से कार्रवाई का उल्लेख है। अलग-अलग जांचों में सामने आए आंकड़ों और आरोपों को इसलिए अलग-अलग समझना जरूरी है। ये सभी रकम एक ही प्रकार की देनदारी या एक ही लेनदेन का हिस्सा नहीं मानी जा सकतीं।
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SIT ने किन पहलुओं की जांच शुरू की?
सितंबर की शुरुआत में केरलम सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया। SIT की अध्यक्षता ADGP पी. विजयन् कर रहे हैं। टीम को शुरुआत से लेकर पूरे आयोजन की प्रक्रिया की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
जांच के दायरे में कई अहम सवाल रखे गए हैं। इनमें निजी कंपनियों और मध्यस्थों का चयन, प्रायोजक चुनने की प्रक्रिया, सरकारी अधिकारियों की भूमिका, वित्तीय लेनदेन, विदेशी भुगतान, सरकारी मंजूरियां, रियायतें और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल की परिस्थितियां शामिल हैं।
SIT यह भी देख रही है कि क्या किसी निजी संस्था को अनुचित लाभ मिला और क्या इससे सरकार या किसी सार्वजनिक संस्था को वित्तीय नुकसान हुआ।
इसके अलावा AFA, Football Australia और अन्य संस्थाओं से जुड़े समझौतों तथा संचार की भी जांच की जा रही है।
कोच्चि के स्टेडियम का मुद्दा भी जांच में
प्रस्तावित मैच के लिए जवाहरलाल नेहरू अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, कलूर, कोच्चि को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। जांच में स्टेडियम को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं।
SIT यह जांच कर रही है कि स्टेडियम को निजी संस्था को किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया गया और वहां मरम्मत या अन्य काम कराने की अनुमति कैसे दी गई।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में RBC को स्टेडियम सौंपने की दिशा में कदम उठाए गए थे। साथ ही करीब ₹5 करोड़ की सुरक्षा राशि में छूट दिए जाने से जुड़े सवाल भी जांच के दायरे में हैं। स्टेडियम सरकारी स्वामित्व में है और ग्रेटर कोचीन डेवलपमेंट अथॉरिटी के नियंत्रण में है।
स्पेन यात्रा पर भी उठे सवाल
तत्कालीन खेल मंत्री वी. अब्दुरहीमान सितंबर 2024 में अधिकारियों के साथ स्पेन गए थे। बताया गया था कि यात्रा का उद्देश्य अर्जेंटीना की टीम को केरलम आने का निमंत्रण देना था।
हालांकि, खेल विभाग की जांच में कथित तौर पर इस यात्रा से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिले जिनसे यह साबित हो कि AFA ने मंत्री या उनके प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था। यह भी जांच का हिस्सा बना कि यात्रा के दौरान किन लोगों से बातचीत हुई और उसके परिणाम क्या रहे।
अर्जेंटीना टीम का केरलम दौरा क्यों नहीं हुआ?
केरलम में लंबे समय तक अर्जेंटीना टीम के संभावित दौरे की उम्मीद बनी रही। लेकिन बाद में टीम के कार्यक्रम में केरलम का मैच शामिल नहीं हुआ। 2025 में अर्जेंटीना की ओर से राज्य में प्रस्तावित दौरे के नहीं होने की स्थिति स्पष्ट हुई।
इस दौरान स्टेडियम से जुड़ी तैयारियां और आयोजन की योजनाएं चलती रहीं, जबकि टीम के कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी रही। आखिरकार मेसी और अर्जेंटीना की टीम के केरलम आने की योजना पूरी नहीं हो सकी।
दिलचस्प बात यह रही कि दिसंबर 2025 में मेसी भारत आए और कोलकाता तथा हैदराबाद में कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसलिए केरलम के प्रशंसकों के बीच यह सवाल और बड़ा हुआ कि जिस टीम के केरलम आने की लंबे समय तक घोषणा होती रही, वह राज्य में क्यों नहीं पहुंची।
पुलिस केस और SIT की छापेमारी
जांच का सबसे नया चरण सितंबर 2026 में सामने आया। मंगलवार, 15 सितंबर को कलामस्सेरी पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसमें RBC और एंटो ऑगस्टिन समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(4) और 61 का उल्लेख है। पुलिस का आरोप है कि AFA से जुड़े समझौते में कथित रूप से गलत प्रावधान शामिल किए गए और सरकारी तंत्र तथा जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई।
इसके अगले दिन SIT ने RBC के कार्यालय और कंपनी से जुड़े लोगों के आवास समेत पांच स्थानों पर छापेमारी की। इनमें कोच्चि और वायनाड स्थित परिसर भी शामिल बताए गए हैं।
RBC की ओर से छापेमारी पर आपत्ति जताई गई है। कंपनी और उसके प्रतिनिधियों ने जांच में सहयोग करने की बात कही है, जबकि मीडिया संस्थान की ओर से कर्मचारियों के फोन जब्त किए जाने का आरोप भी लगाया गया। पुलिस ने इस संबंध में कहा कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और उसे रिकॉर्ड किया गया था।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जिस प्रस्तावित आयोजन को केरलम में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल आयोजन के तौर पर देखा गया था, वह अब राज्य में एक बड़े प्रशासनिक और वित्तीय जांच मामले का विषय बन चुका है। मेसी का केरलम दौरा नहीं हो सका, लेकिन उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन, सरकारी फैसले और निजी संस्थाओं की भूमिका की जांच अभी जारी है।


