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‘मणिपुर हिंसा के लावारिस शवों का सात दिनों के भीतर हो अंतिम संस्कार’, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए सख्त निर्देश

28/11/2023

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मणिपुर के शवगृहों में लापता शवों की दफन या दाह संस्कार की निगरानी में सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश का संदेश है कि मई महीने में जातिवादी हिंसा के बाद बहुत से लोगों की मौत हो चुकी है।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बताया कि उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों की महिला समिति ने एक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें मुर्दाघरों में पड़े शवों की स्थिति पर गहराई से विचार किया गया है। इस समिति का नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने किया है।

रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि 169 लापता शवों में से 81 पर परिजनों ने दावा किया है, जबकि 88 शवों पर दावा नहीं किया गया है। शीर्ष न्यायाधीश ने पाया कि राज्य सरकार ने नौ स्थलों की पहचान की है जहां शवों को दफनाया जा सकता है।

पीठ ने कहा, ‘उन शवों को अनिश्चित समय तक शवगृहों में रखना उचित नहीं होगा, जिनकी पहचान नहीं की गई है या जिन पर दावा नहीं किया गया है।’ शीर्ष न्यायाधीश ने कहा कि राज्य के अधिकारी शवों के परिजनों को स्थलों के बारे में सूचित करेंगे, जिन पर पहले ही दावा किया जा चुका है।

इस निर्देश के अनुसार, बिना किसी बाधा के शवों को नौ स्थलों में से किसी पर उनके परिवार के सदस्यों द्वारा अंतिम संस्कार किया जा सकता है। राज्य के अधिकारी इन शवों के परिजनों को सूचित करेंगे, जिन पर पहले से ही दावा किया जा चुका है।

शीर्ष न्यायाधीश ने कहा कि यह प्रक्रिया चार दिसंबर या उससे पहले पूरी होनी चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया है, ‘जिन शवों की पहचान कर ली गई है, लेकिन जिन पर दावा नहीं किया गया है, उनके संबंध में राज्य प्रशासन सोमवार को या उससे पहले परिजनों को सूचित करेगा कि उन्हें एक सप्ताह के भीतर आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी जाएगी।

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MK

Manoj K Sharma

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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