Bengaluru के Capgemini डे-केयर विवाद में CCTV फुटेज वायरल होने के बाद एक महिला कर्मचारी गिरफ्तार की गई है। जानिए बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का पूरा मामला।
बेंगलुरु: बेंगलुरु को भारत की आईटी राजधानी कहा जाता है। हजारों कामकाजी माता-पिता अपने छोटे बच्चों को ऑफिस परिसर में मौजूद डे-केयर (Creche) के भरोसे छोड़कर काम करते हैं। यह व्यवस्था इसलिए बनाई जाती है ताकि माता-पिता निश्चिंत होकर काम कर सकें। लेकिन जुलाई 2026 में सामने आए एक मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेंगलुरु के Capgemini कैंपस में संचालित एक डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए CCTV फुटेज में कर्मचारियों द्वारा बच्चों के साथ कथित तौर पर मारपीट, उन्हें बाथरूम में बंद करना और वॉशिंग मशीन के ऊपर बैठाने जैसी घटनाएं दिखाई देने का दावा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेंगलुरु पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच के दौरान एक महिली कर्मचारी को गिरफ्तार भी कर लिया है। वहीं Capgemini ने संबंधित डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
यह मामला जून 2026 के अंतिम सप्ताह में तब सामने आया जब कुछ अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगे। कई बच्चे अचानक डे-केयर जाने से डरने लगे, कुछ लगातार रोने लगे, जबकि कुछ में मानसिक तनाव जैसे संकेत दिखाई दिए।
इसी दौरान कुछ अभिभावकों ने डे-केयर के CCTV फुटेज देखने की मांग की। कथित तौर पर सामने आए वीडियो में बच्चों के साथ स्टाफ के व्यवहार को देखकर माता-पिता हैरान रह गए।
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और कुछ ही घंटों राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।
अभिभावकों ने वीडियो में क्या देखा?
पुलिस के पास जमा कराए गए और मीडिया रिपोर्टों में वर्णित CCTV फुटेज में कथित तौर पर कई विचलित कर देने वाले वाले दृश्य दिखाई देते हैं।
कुछ वीडियो में कर्मचारियों को छोटे बच्चों को जोर से पकड़ते, धक्का देते और खींचते हुए देखा गया। कुछ क्लिप में बच्चों को बाथरूम के अंदर बंद करने तथा रोने पर डांटने के आरोप लगे।
सबसे अधिक चर्चा उस वीडियो की हुई जिसमें एक बच्चे को कथित रूप से वॉशिंग मशीन के ऊपर बैठाया गया। कुछ अन्य फुटेज में बच्चों के साथ कठोर व्यवहार और डराने-धमकाने जैसे दृश्य होने का भी दावा किया गया है।
हालांकि इन वीडियो की फोरेंसिक जांच और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
दर्ज कराई गई FIR
वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों ने पुलिस से संपर्क किया। 1 जुलाई 2026 को बेंगलुरु पुलिस ने संबंधित डे-केयर स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act की संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की।
इसी बीच कैपजेमिनी ने भी सगातार लग रहे आरोपों को ध्यान में रखते हुए बेंग्लुरु स्थित अपनी डे-केयर सेंटर को अस्थाई रूप से बंद करने की घोषणा की है।
जांच अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित घटनाएं कितने समय से चल रही थीं और कितने बच्चे इससे प्रभावित हुए।
किन लोगों से पूछताछ हुई?
पुलिस की पूछताछ के दौरान डे-केयर सेंटर में कार्यरत कई कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार केयरगिवर्स, सुपरवाइजर्स और प्रशासनिक कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। पुलिस CCTV रिकॉर्डिंग, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रोस्टर और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका का मूल्यांकन किया जाएगा।
एक महिला हुई गिरफ्तार
मामले की जांच में 3 जुलाई 2026 को पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु पुलिस ने डे-केयर सेंटर की एक महिला केयरगिवर को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी वायरल CCTV वीडियो, अभिभावकों की शिकायतों और प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर की गई।
पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में नामजद अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ जारी है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के बाद आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित दुर्व्यवहार में कितने कर्मचारी शामिल थे, यह घटनाएं कब से चल रही थीं और क्या प्रबंधन स्तर पर किसी को इसकी जानकारी थी।पुलिस ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसके द्वारा संचालित था डे-केयर सेंटर?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार Capgemini परिसर में स्थित यह क्रेच एक बाहरी एजेंसी द्वारा संचालित किया जा रहा था।
भारत में कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों के बच्चों के लिए डे-केयर सुविधा उपलब्ध कराती हैं, लेकिन उसका संचालन अक्सर विशेषीकृत चाइल्ड-केयर कंपनियों को सौंपा जाता है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सेवा प्रदाता संस्था ने भर्ती, प्रशिक्षण, निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा
मामले के सामने आने के बाद कई अभिभावकों ने कंपनी परिसर में बैठक की। उनकी सबसे बड़ी मांग थी कि डे-केयर सेंटर में 24×7 लाइव CCTV एक्सेस उपलब्ध कराया जाए ताकि माता-पिता किसी भी समय अपने बच्चों को देख सकें।
कुछ अभिभावकों ने यह भी मांग की कि बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों का विस्तृत पुलिस सत्यापन, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
कई माता-पिता का कहना है कि वे अपने बच्चों को सबसे सुरक्षित स्थान समझकर वहां छोड़ते थे, और इसके बाद भी इस तरह की घटनाओं का सामने आना भावनात्मक और मानसिक रूप उन्हें चिंतित कर रही हैं।
बच्चों के व्यवहार में क्या बदलाव देखे गए?
अभिभावकों के अनुसार कई बच्चों में अचानक व्यवहार संबंधी परिवर्तन दिखाई दिए।
कुछ बच्चे डे-केयर का नाम सुनते ही रोने लगते थे। कुछ ने खाना कम कर दिया, जबकि कुछ रात में डरकर उठने लगे।
बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे बच्चे अक्सर अपने साथ हुए अनुभवों को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में उनके व्यवहार में आए बदलाव संभावित मानसिक तनाव का संकेत हो सकते हैं।
हालांकि प्रत्येक बच्चे की स्थिति अलग होती है और विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
भारत में डे-केयर के नियम
भारत में कार्यस्थलों पर क्रेच सुविधा को लेकर कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017 के अनुसार 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले कई संस्थानों में निर्धारित परिस्थितियों में क्रेच सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों में डे-केयर संचालन के लिए सुरक्षा, स्वच्छता, स्टाफ अनुपात और बच्चों की देखभाल से जुड़े दिशा-निर्देश भी लागू हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित पालन और स्वतंत्र निरीक्षण भी उतना ही जरूरी है।
CCTV निगरानी पर नई बहस
इस घटना के बाद एक बार फिर डे-केयर में निगरानी व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अभिभावकों को सीमित और सुरक्षित लाइव एक्सेस दिया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
वहीं कुछ बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार लाइव स्ट्रीमिंग से बच्चों और कर्मचारियों दोनों की निजता से जुड़े सवाल भी उठते हैं। इसलिए तकनीकी समाधान के साथ स्पष्ट डेटा सुरक्षा नीति और गोपनीयता नियम भी आवश्यक हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न शहरों से डे-केयर और प्री-स्कूल में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन मामलों के बाद कई राज्यों ने निरीक्षण व्यवस्था मजबूत करने, कर्मचारियों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और CCTV अनिवार्य करने जैसे कदम उठाए।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है। नियमित ऑडिट, शिकायत निवारण प्रणाली और प्रशिक्षित स्टाफ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ की सलाह
बाल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अभिभावकों को डे-केयर चुनते समय केवल सुविधाएं नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ प्रशिक्षण, आपातकालीन प्रोटोकॉल और शिकायत प्रणाली की भी जांच करनी चाहिए।
बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए और उनसे उम्र के अनुसार सहज तरीके से बातचीत करनी चाहिए। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि संस्थानों में नियमित स्वतंत्र निरीक्षण और कर्मचारियों के लिए बाल संरक्षण (Child Protection) प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
अब इस मामले का अगला चरण पुलिस जांच, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के विश्लेषण तथा गवाहों के बयान पर निर्भर करेगा।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई करेगी।
फिलहाल पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों से बचने तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
भरोसे पर उठते सवाल
बेंगलुरु के Capgemini कैंपस में सामने आया यह मामला केवल एक पुलिस जांच नहीं है, बल्कि आधुनिक कार्यस्थलों पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है।
कॉर्पोरेट कार्यालयों में डे-केयर सुविधा का उद्देश्य कामकाजी माता-पिता को मानसिक संतोष देना होता है। लेकिन जब उसी व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगते हैं तो उसका प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में भरोसे की भावना प्रभावित होती है।
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