दिल्ली में SIR विरोध प्रदर्शन के कारण बंगला साहिब, कनॉट प्लेस और चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास यातायात प्रभावित हुआ। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक लगाया प्रतिबंध।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुए और चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की योजना बनाई।
इस प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक बंगला साहिब और कनॉट प्लेस के कुछ हिस्सों में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध और डायवर्जन की व्यवस्था की। पुलिस ने लोगों को प्रभावित मार्गों से बचने और यात्रा की योजना पहले से बनाने की सलाह दी।
यह प्रदर्शन ‘People Against SIR’ मंच के आह्वान पर आयोजित किया गया। इसमें वामपंथी संगठनों, छात्र समूहों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, SIR प्रक्रिया को रोकना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। आयोजकों ने प्रदर्शन को लोकतंत्र की बहाली से जोड़ते हुए इसे शांतिपूर्ण मार्च बताया।
बंगला साहिब से चुनाव आयोग तक मार्च की योजना
आयोजकों की घोषणा के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों को शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे गुरुद्वारा बंगला साहिब के आसपास एकत्र होना था। यहां से मार्च निकालकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने की योजना बनाई गई थी। आयोजकों ने किसानों, युवाओं, मजदूरों, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों से इसमें भाग लेने की अपील की थी। प्रतिभागियों से राष्ट्रीय ध्वज साथ रखने का भी आग्रह किया गया था।
आयोजकों ने कहा था कि यदि पुलिस मार्च को रास्ते में रोकती है, तो उस स्थान पर ‘पीपुल्स पार्लियामेंट’ यानी जन संसद आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में प्रस्ताव पारित करने और राष्ट्रगान गाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, यह आयोजकों की ओर से पहले बताई गई रूपरेखा थी।
दिल्ली में यह मार्च ऐसे समय हुआ, जब नई दिल्ली जिले में पहले के प्रदर्शनों के दौरान लागू की गई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पाबंदियां जारी थीं। इस प्रावधान के तहत संबंधित क्षेत्र में पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, धरना देने, नारे लगाने और भाषण देने जैसी गतिविधियों पर रोक थी।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जारी
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बंगला साहिब और कनॉट प्लेस के आसपास यातायात व्यवस्था में बदलाव किए। रिपोर्ट के मुताबिक, बंगला साहिब से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले हिस्से में वाहनों की आवाजाही बंद रखने की जानकारी दी गई। कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल के बीच यात्रा करने वालों को प्रभावित रास्तों से बचने की सलाह दी गई।
इसका असर उन यात्रियों पर पड़ा, जिन्हें कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और चुनाव आयोग के आसपास के इलाकों से गुजरना था। पुलिस ने यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा शुरू करने से पहले रास्तों की स्थिति जांच लें, अतिरिक्त समय लेकर निकलें और मौके पर तैनात यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस मुख्यालय और आसपास के मार्गों पर हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने वाली बसों की तैनाती भी की गई है।
यात्रियों के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि ट्रैफिक प्रतिबंध समय और मौके की स्थिति के हिसाब से बदल सकते हैं। ऐसे में किसी पुराने रूट मैप या सामान्य यात्रा समय पर निर्भर रहने के बजाय दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा सूचना देखना अधिक उपयोगी होगा।
‘People Against SIR’ मंच में कौन-कौन से समूह शामिल हैं?
‘People Against SIR’ एक ऐसा मंच है, जिसे किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों ने मिलकर बनाया है। इसका गठन 14 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित सुरजीत भवन में हुआ था। मंच का उद्देश्य SIR के खिलाफ विभिन्न वर्गों की चिंताओं को एक साथ उठाना है।
दिल्ली में आयोजित मार्च के लिए कई जानी-मानी हस्तियों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इनमें कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, छात्र नेता नेहा बोरा और आइशी घोष, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज, किसान नेता राकेश टिकैत और लेखक तुषार गांधी के नाम शामिल थे।
मंच ने अपने अभियान के लिए ‘हर गली जंतर-मंतर, हर गांव जंतर-मंतर, मेरा घर जंतर-मंतर’ का नारा भी दिया है। इसका उद्देश्य प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों से बाहर भी SIR के विरोध में अपनी बात रखने के अभियान को आगे बढ़ाना है। मंच ने देश के अन्य हिस्सों में भी मार्च आयोजित करने की योजना का उल्लेख किया था।
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जंतर-मंतर को लेकर विवाद भी बना विरोध की वजह
दिल्ली में प्रदर्शन के पीछे जंतर-मंतर को लेकर जारी विवाद भी एक अहम वजह रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने के बाद वहां धरना देने और सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराने को लेकर प्रतिबंधों का मुद्दा उठा। प्रदर्शनकारी संगठनों ने इस स्थिति पर आपत्ति जताई और अपनी मांगों को लोगों तक पहुंचाने के लिए दूसरे स्थानों पर जुटने की रणनीति अपनाई।
23 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च से पहले आयोजकों ने स्पष्ट किया था कि वे पुलिस से अनुमति मिलने का इंतजार करने के बजाय मार्च निकालेंगे। उनके इस रुख से प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई थी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने संबंधित इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने और मार्च की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी थी। प्रशासन का रुख कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी अप्रिय स्थिति को रोकने पर केंद्रित था।
इस विवाद ने सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस को भी सामने ला दिया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में एकत्र होना चाहते थे, जबकि प्रशासन प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रहा था। ऐसे में यह मामला विरोध दर्ज कराने के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन के सवाल से भी जुड़ गया।
पहले भी हिरासत में लिए गए थे लोग
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध का मुद्दा दिल्ली में पहली बार नहीं उठा है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की कोशिश हुई थी। उस दौरान कॉकक्रोच जनता पार्टी से जुड़े अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में छात्र नेता नेहा बोरा, आइशी घोष और प्रशांत भूषण को भी उस दिन की कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।
इसी महीने 6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के सांसदों ने भी संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च किया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्च में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के सांसद शामिल थे और कई सांसदों को हिरासत में लिया गया था।
इसके बाद 16 अक्टूबर को भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। उस समय कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। दिल्ली पुलिस ने संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए थे।
पुलिस और चुनाव आयोग का रुख है
23 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू किए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, नई दिल्ली के संबंधित इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू थी। इसके तहत निर्धारित शर्तों और अनुमति के बिना लोगों के एकत्र होने तथा जुलूस निकालने पर रोक थी। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं होने की जानकारी भी दी थी। वहीं, ट्रैफिक पुलिस ने बंगला साहिब, कनॉट प्लेस और आसपास के प्रभावित मार्गों से बचने की सलाह दी, ताकि यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
दूसरी ओर, SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोपों को खारिज किया है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
आम लोगों के लिए बढ़ती परेशानी
दिल्ली में प्रदर्शन का सबसे तत्काल असर मध्य दिल्ली के यातायात पर पड़ा है। बंगला साहिब, कनॉट प्लेस और चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर प्रतिबंध के कारण निजी वाहन चालकों, कार्यालय जाने वालों और सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लग सकता है।
प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वालों के लिए जरूरी है कि वे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखें और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। किसी मार्ग के बंद होने या डायवर्जन की अवधि को लेकर पुरानी जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक समय में उपलब्ध अपडेट देखना बेहतर है।
राजनीतिक स्तर पर यह प्रदर्शन मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जारी बहस का हिस्सा है। प्रदर्शनकारी SIR की प्रक्रिया में बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं, जबकि चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया है। आने वाले समय में इस विवाद की दिशा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं, प्रशासनिक फैसलों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।



