डॉ. के. ए. पॉल ने इजरायलियों से शांति और राजनीतिक जवाबदेही की अपील की। उन्होंने नेतन्याहू की नीतियों की समीक्षा और 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा मांगी
वॉशिंगटन डीसी: अंतरराष्ट्रीय शांति समर्थक और ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के. ए. पॉल ने इजरायल के नागरिकों से शांति के समर्थन में एकजुट होने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर राजनीतिक जवाबदेही तय करने की अपील की है। उन्होंने इजरायलियों से 27 अक्टूबर को अपनी आवाज उठाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह किया।
डॉ. पॉल ने ईरान को लेकर नेतन्याहू की नीतियों और सैन्य कार्रवाई के समर्थन पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन फैसलों ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इजरायल की सुरक्षा और उसके नागरिकों के भविष्य के लिए नेतृत्व को सैन्य टकराव के बजाय शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉ. पॉल ने कहा कि नागरिकों को अपने नेताओं से जवाब मांगने का लोकतांत्रिक अधिकार है। उनके अनुसार, देश से प्रेम करने का अर्थ सरकार के हर फैसले का समर्थन करना नहीं है। उन्होंने इजरायलियों से विचार करने को कहा कि मौजूदा नीतियां देश को स्थायी शांति की ओर ले जा रही हैं या बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ा रही हैं।
उन्होंने ईरान संघर्ष के आर्थिक और मानवीय प्रभावों पर भी चिंता जताई। डॉ. पॉल के मुताबिक, युद्ध का असर मध्य पूर्व से आगे बढ़कर ईंधन, खाद्य पदार्थों की कीमतों, आर्थिक स्थिरता और कमजोर समुदायों तक पहुंच सकता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ देशों में किराने के सामान की कीमतें दोगुनी या कई गुना बढ़ी हैं, हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में देशवार आंकड़े नहीं दिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। उन्होंने सरकारों, मानवीय संगठनों और धार्मिक नेताओं से युद्ध के प्रभावों का आकलन करने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कदम उठाने की अपील की।
डॉ. पॉल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और सैन्य अभियान के उद्देश्यों की समीक्षा करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश क्षेत्र को और अस्थिर कर सकती है। उन्होंने ईरान की यात्राओं का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश की राजनीतिक और सामाजिक जटिलताओं को समझे बिना सैन्य हमलों से सत्ता परिवर्तन की उम्मीद करना उचित नहीं है।
उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की हत्या से दुश्मनी बढ़ सकती है और बातचीत के जरिए समाधान निकालना मुश्किल हो सकता है।
डॉ. पॉल ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन के शांति प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका का राजनीतिक नेतृत्व संघर्ष में शामिल पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में मदद करेगा। साथ ही, उन्होंने युद्ध से जुड़े फैसलों, सलाहकारों की भूमिका और संभावित हितों के टकराव की पारदर्शी जांच की मांग की।
उन्होंने बताया कि 15 मार्च को उन्होंने ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने संबंधित पक्षों से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि प्रस्ताव की समीक्षा हुई है या नहीं और क्या इसके प्रावधान संघर्ष समाप्त करने में मदद कर सकते हैं।
डॉ. पॉल ने अमेरिका, इजरायल, ईरान और उनके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से कूटनीतिक बातचीत शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वार्ता का लक्ष्य युद्ध रोकना, नागरिकों की सुरक्षा करना और क्षेत्रीय संघर्ष को फैलने से रोकना होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अपील इजरायली सरकार की नीतियों और राजनीतिक नेतृत्व से संबंधित है, न कि यहूदी समुदाय को धार्मिक या जातीय आधार पर निशाना बनाने के लिए। उन्होंने इजरायलियों, फिलिस्तीनियों, ईरानियों और अन्य लोगों के लिए सुरक्षित भविष्य की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. पॉल ने मीडिया और विश्व नेताओं को 25 अक्टूबर 2026 को शाम 6 से 9 बजे तक डलास के प्रिस्मो कोलिनास में आयोजित होने वाली ग्लोबल पीस एंड प्रेयर मीटिंग में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए सैन्य विकल्पों के साथ-साथ विश्वसनीय कूटनीतिक प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

