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जिसने दो बार बेच दिया था Eiffel Tower! जानिए दुनिया के सबसे शातिर ठग Victor Lustig की हैरतअंगेज कहानी

दुनिया के सबसे बड़े ठग Victor Lustig ने Eiffel Tower दो बार बेचा और सालों तक पुलिस को चकमा दिया। जानिए उसकी पूरी कहानी।

पेरिस, फ्रांस: क्या कोई इंसान दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में से एक को बेच सकता है? और अगर बेच भी दे, तो क्या वही इमारत दूसरी बार भी किसी और को बेच सकता है? यह सुनने में किसी फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन इतिहास में एक ऐसा व्यक्ति हुआ जिसने यह कारनामा सचमुच कर दिखाया। उसका नाम था विक्टर लस्टिग

दुनिया उसे “The Man Who Sold the Eiffel Tower Twice” यानी “वह आदमी जिसने एफिल टॉवर दो बार बेच दिया” के नाम से जानती है। लेकिन उसकी कहानी केवल एफिल टॉवर तक सीमित नहीं थी। उसने नकली नोट छापने वाली मशीन बेचकर करोड़ों ठगे, अमेरिका के सबसे खतरनाक गैंगस्टर अल कैपोन (Al Capone) को भी अपने जाल में फंसा लिया और वर्षों तक यूरोप और अमेरिका की पुलिस को चकमा देता रहा।

विक्टर लस्टिग को इतिहास के सबसे बुद्धिमान और चालाक ठगों में गिना जाता है। उसकी सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि उसकी भाषा, आत्मविश्वास, मनोविज्ञान की समझ और लोगों के लालच को पहचानने की कला थी।

कौन था Victor Lustig?

Victor Lustig का जन्म 4 जनवरी 1890 को उस समय के ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य के Hostinné (आज का चेक गणराज्य) में हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने जीनवकाल में उसने अपने दर्जनों नकली पहचान (Aliases) का इस्तेमाल किया।

उसका परिवार सामान्य मध्यमवर्गीय था। बचपन से ही वह बेहद तेज दिमाग और कई भाषाओं का जानकार था। कहा जाता है कि युवावस्था तक वह चेक, जर्मन, फ्रेंच, अंग्रेजी और इतालवी सहित कई भाषाएं धाराप्रवाह बोलने लगा था। यही बहुभाषी प्रतिभा आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

पढ़ाई छोड़कर अपराध की दुनिया में प्रवेश

लस्टिग ने कुछ समय तक पढ़ाई की, लेकिन पारंपरिक शिक्षा में उसकी कभी रुचि नहीं रही। किशोरावस्था में ही वह जुए, कार्ड गेम और अमीर लोगों को धोखा देने के छोटे-छोटे तरीकों में माहिर हो गया।

युवा होते-होते उसने यूरोप के बड़े शहरों और अटलांटिक महासागर में चलने वाले आलीशान जहाजों (Luxury Ocean Liners) को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया।

उस दौर में यूरोप और अमेरिका के बीच समुद्री जहाजों से यात्रा करने वाले लोग काफी संपन्न होते थे। लस्टिग खुद को कभी राजकुमार, कभी व्यापारी, कभी सरकारी अधिकारी और कभी निवेश सलाहकार बताकर यात्रियों का विश्वास जीत लेता था।धीरे-धीरे उसने समझ लिया कि किसी को बंदूक दिखाकर लूटने से कहीं आसान है उसे भरोसा दिलाकर खुद पैसे दिलवा देना।

लोगों के लालच को समझने की कला

Victor Lustig की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह सामने वाले व्यक्ति की मानसिकता कुछ ही मिनटों में समझ लेता था।

वह जानता था—

  • कौन व्यक्ति जल्दी अमीर बनना चाहता है।
  • किसे सरकारी संपर्कों का लालच है।
  • कौन रिश्वत देने को तैयार हो सकता है।
  • कौन अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पुलिस तक नहीं जाएगा।

इसी मनोवैज्ञानिक समझ ने उसे दुनिया का सबसे सफल ठग बना दिया।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद का बदलता फ्रांस

साल 1918 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ। युद्ध के बाद फ्रांस आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था। सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहा था और कई सार्वजनिक इमारतों के रखरखाव पर सवाल उठने लगे थे।

इसी दौरान पेरिस का सबसे बड़ा प्रतीक एफिल टॉवर (Eiffel Tower) भी चर्चा का विषय बन गया। 1889 में बने इस टॉवर को मूल रूप से स्थायी स्मारक नहीं माना गया था। कई अखबारों में इसके रखरखाव की भारी लागत और इसे हटाने की संभावनाओं पर लेख प्रकाशित हो रहे थे।

Victor Lustig ने इन्हीं खबरों में अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका देख लिया।

कैसे आया Eiffel Tower बेचने का आइडिया?

1925 की शुरुआत में लस्टिग ने फ्रांसीसी अखबारों में छपी उन रिपोर्टों को पढ़ा, जिनमें एफिल टॉवर के रखरखाव की बढ़ती लागत का जिक्र था।

तभी उसके दिमाग में एक हैरान कर देने वाला विचार आया। उसने सोचा कि अगर लोग मान लें कि सरकार इसे तोड़ना चाहती है, तो क्या इसे कबाड़ (Scrap Metal) के रूप में बेचा जा सकता है?

यहीं से इतिहास के सबसे मशहूर फ्रॉड की शुरुआत हुई।

नकली सरकारी अधिकारी बनने की तैयारी

लस्टिग ने खुद को फ्रांसीसी डाक एवं टेलीग्राफ मंत्रालय (Ministry of Posts and Telegraphs) का वरिष्ठ अधिकारी बताया।

उसने नकली सरकारी लेटरहेड छपवाए। सरकारी दस्तावेज तैयार कराए। नकली पहचान पत्र बनवाया। यहां तक कि अपने सहयोगी Dan Collins को भी सरकारी कर्मचारी की भूमिका निभाने के लिए तैयार किया।

पेरिस के सबसे आलीशान होटल में बुलाई गई गुप्त बैठक

Victor Lustig ने पेरिस के प्रसिद्ध Hôtel de Crillon में एक शानदार सुइट किराए पर लिया। उसने पेरिस के छह बड़े स्क्रैप मेटल (कबाड़) कारोबारियों को गोपनीय निमंत्रण भेजा।

पत्र में लिखा गया कि—

“सरकार एफिल टॉवर को गुप्त रूप से हटाने की योजना बना रही है और केवल चुनिंदा व्यापारियों को इसकी नीलामी में भाग लेने का अवसर मिलेगा”।

पत्र पर सरकारी मुहर और आधिकारिक भाषा इतनी वास्तविक थी कि किसी को शक नहीं हुआ। सभी व्यापारी तय समय पर होटल पहुंच गए।

वह भाषण जिसने सबको विश्वास दिलाया

बैठक के दौरान Victor Lustig ने गंभीर सरकारी अधिकारी की तरह प्रस्तुति दी।

उसने बताया—

  • एफिल टॉवर का रखरखाव बेहद महंगा हो चुका है।
  • सरकार इसे सार्वजनिक विवाद से बचने के लिए गुप्त रूप से हटाना चाहती है।
  • इसलिए पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है।

इसके बाद उसने व्यापारियों को कार में बैठाकर एफिल टॉवर का निरीक्षण भी कराया। यह कदम उसकी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। टॉवर को सामने देखकर किसी व्यापारी को शक ही नहीं हुआ कि यह पूरी कहानी झूठ हो सकती है।

कैसे चुना गया आंद्रे पॉइसन?

बैठक में मौजूद व्यापारियों में एक नाम था आंद्रे पॉइसन (André Poisson) वह स्क्रैप मेटल कारोबार में अपेक्षाकृत नया था और खुद को बड़े व्यापारियों के बराबर साबित करना चाहता था।

Victor Lustig ने तुरंत उसकी मानसिकता पहचान ली। उसे समझ आ गया कि यही व्यक्ति सबसे आसान शिकार बनेगा। अगले दिन उसने Poisson से अलग से मुलाकात की।

लस्टिग ने Poisson से कहा—

सरकारी अधिकारी होने के कारण उसकी तनख्वाह बहुत कम है। यदि Poisson उसे “थोड़ी निजी सहायता” (यानी रिश्वत) दे दे, तो वह नीलामी उसी के पक्ष में कर सकता है। यह सुनकर Poisson को लगा कि सामने वाला वास्तव में सरकारी अधिकारी है।

उस दौर में कई सरकारी सौदों में रिश्वत देना असामान्य नहीं माना जाता था। यही वह मनोवैज्ञानिक चाल थी जिसने पूरे धोखे को वास्तविक बना दिया।

Poisson ने एफिल टॉवर खरीदने के लिए बड़ी रकम का चेक दिया और साथ में रिश्वत भी। पैसे मिलते ही Victor Lustig और उसका साथी Dan Collins पेरिस छोड़कर सीधे ऑस्ट्रिया भाग गए।

दूसरी बार भी बेचने पहुंच गया एफिल टॉवर

ऑस्ट्रिया पहुंचने के बाद Victor Lustig को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि उसके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। दरअसल, जिस कारोबारी आंद्रे पॉइसन को उसने ठगा था, वह अपनी बेइज्जती के डर से पुलिस के पास गया ही नहीं।

उसे लगता था कि यदि मामला सार्वजनिक हुआ तो लोग उसका मजाक उड़ाएंगे कि उसने दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारत खरीदने जैसी बात पर विश्वास कर लिया।

यहीं से लस्टिग का आत्मविश्वास और बढ़ गया। कुछ सप्ताह बाद वह दोबारा पेरिस लौटा और लगभग उसी योजना के साथ एक बार फिर Eiffel Tower बेचने की कोशिश की। उसने नए कबाड़ कारोबारियों से संपर्क किया और खुद को फिर सरकारी अधिकारी बताकर सौदा शुरू कर दिया।

नकली नोट छापने वाली मशीन का खेल

एफिल टॉवर के बाद Victor Lustig ने एक और ऐसा फ्रॉड किया, जिसने उसे अमेरिका का सबसे चर्चित ठग बना दिया।

उसने एक धातु का बक्सा तैयार कराया, जिसे वह “Rumanian Box” या “Money Printing Machine” कहता था। वह दावा करता था कि यह मशीन बिल्कुल असली अमेरिकी डॉलर छाप सकती है।

संभावित खरीदारों को भरोसा दिलाने के लिए वह मशीन में पहले से दो असली 100 डॉलर के नोट छिपा देता था। फिर मशीन में एक खाली कागज डालकर उसे कई घंटों तक “प्रोसेस” होने का नाटक करता। कुछ समय बाद मशीन से वही असली नोट बाहर निकलते और खरीदार को लगता कि मशीन वास्तव में पैसा छाप रही है।

मशीन खरीदने वाला व्यक्ति हजारों डॉलर देकर उसे अपने साथ ले जाता, लेकिन कुछ नोट निकलने के बाद मशीन केवल साधारण कागज निकालती। तब तक Victor Lustig काफी दूर जा चुका होता।

इतिहासकारों के अनुसार उसने इस तरीके से अमेरिका और यूरोप में कई लोगों को लाखों डॉलर का चूना लगाया।

जब Al Capone भी उसके जाल में फंस गया

Victor Lustig के जीवन का सबसे मशहूर किस्सा अमेरिका के कुख्यात गैंगस्टर अल कपोन (Al Capone) से जुड़ा है।

लस्टिग ने Capone से मुलाकात कर कहा कि उसके पास एक बेहद लाभदायक निवेश योजना है और उसे केवल 50,000 डॉलर की जरूरत है। Capone ने पैसे दे दिए।

लेकिन लस्टिग ने उन पैसों को कहीं निवेश नहीं किया। उसने पूरी रकम दो महीने तक बैंक में सुरक्षित रखी और फिर Capone के पास जाकर कहा कि उसका कारोबार असफल हो गया है, इसलिए वह पूरी रकम लौटा रहा है।

Al Capone यह देखकर हैरान रह गया कि कोई व्यक्ति उसका पैसा ईमानदारी से वापस करने आया है। उसकी “ईमानदारी” से प्रभावित होकर Capone ने उसे इनाम के तौर पर लगभग 5,000 डॉलर दे दिए।

असल में यही Victor Lustig की योजना थी। वह जानता था कि Al Capone को ठगना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए उसने केवल इनाम कमाने के लिए यह पूरा खेल खेला।

FBI की नजर में आया दुनिया का सबसे बड़ा ठग

1930 के दशक तक Victor Lustig की गतिविधियां अमेरिका की संघीय एजेंसी FBI की नजर में आ चुकी थीं। अब उसका ध्यान नकली नोटों के बड़े नेटवर्क पर था। जांच एजेंसियों को संदेह था कि वह अमेरिका में बड़े पैमाने पर जाली मुद्रा चलाने वाले गिरोह का हिस्सा है।

कई वर्षों तक वह लगातार नाम बदलता रहा। उसने दर्जनों नकली पासपोर्ट और पहचान पत्र बनाए। वह होटल बदलता रहता था और कभी एक शहर में ज्यादा दिन नहीं रुकता था।

एक महिला ने बिगाड़ दिया पूरा खेल

Victor Lustig जितना चालाक था, उसकी गिरफ्तारी उतनी ही साधारण वजह से हुई। उसकी प्रेमिका Billie May उससे नाराज हो गई। दोनों के बीच विवाद बढ़ा और उसने FBI को Victor Lustig की जानकारी दे दी। यही सूचना उसके पूरे साम्राज्य के अंत की शुरुआत बनी।

10 मई 1935 को FBI ने न्यूयॉर्क में Victor Lustig को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से बड़ी मात्रा में नकली नोट, जाली दस्तावेज और ठगी से जुड़े कई सबूत मिले। जांच में सामने आया कि वह अमेरिका में चल रहे बड़े नकली मुद्रा गिरोह से जुड़ा हुआ था। अदालत ने उसे नकली नोट बनाने और अन्य वित्तीय अपराधों का दोषी पाया।

अल्काट्राज़ जेल तक पहुंचा सफर

सजा मिलने के बाद Victor Lustig को पहले अन्य जेलों में रखा गया, लेकिन उसके बार-बार भागने की कोशिशों के कारण आखिरकार उसे अमेरिका की सबसे सुरक्षित जेल Alcatraz Federal Penitentiary भेज दिया गया।

Alcatraz उस समय दुनिया की सबसे कठिन और सुरक्षित जेलों में गिनी जाती थी, जहां अमेरिका के सबसे खतरनाक अपराधियों को रखा जाता था।

कैसे हुई विक्टर की मौत?

लगातार कैद और खराब स्वास्थ्य के कारण Victor Lustig की तबीयत बिगड़ने लगी। 11 मार्च 1947 को मिसौरी (Missouri), अमेरिका के United States Medical Center for Federal Prisoners, Springfield में निमोनिया (Pneumonia) के कारण उसकी मृत्यु हो गई। उस समय उसकी उम्र 57 वर्ष थी।

जिस व्यक्ति ने करोड़ों डॉलर की ठगी की, दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारत बेच दी और वर्षों तक पुलिस को चकमा देता रहा, उसका अंत जेल के अस्पताल में हुआ।

इतिहास के पन्नों में अमर Victor Lustig

विक्टर लस्टिग ने किसी बड़ी सेना का नेतृत्व नहीं किया, न कोई साम्राज्य बनाया और न ही कोई वैज्ञानिक खोज की। फिर भी उसका नाम इतिहास में दर्ज है क्योंकि उसने मानव मनोविज्ञान का ऐसा इस्तेमाल किया, जो आज भी अपराध विज्ञान (Criminology) और साइकोलॉजी के छात्रों के लिए अध्ययन का विषय है।

उसकी सबसे बड़ी ताकत लोगों की कमजोरियों को पहचानना थी। वह जानता था कि लालच, प्रतिष्ठा और जल्दी अमीर बनने की इच्छा इंसान से कोई भी गलती करवा सकती है।

आज “The Man Who Sold the Eiffel Tower Twice” केवल एक दिलचस्प कहानी नहीं, बल्कि यह याद दिलाने वाली सच्ची घटना है कि ठगी केवल हथियारों से नहीं, बल्कि भरोसे का फायदा उठाकर भी की जाती है। यही कारण है कि लगभग एक सदी बाद भी Victor Lustig को इतिहास का सबसे शातिर और चर्चित कॉनमैन माना जाता है।

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MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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