Friday, 21 August 2026
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दो दशक बाद ‘एड्स 2026’ सम्मेलन में फिर दिखाई जाएगी अनंत गुप्ता की चर्चित फिल्म ‘अस एंड देम’

20 वर्ष पहले बनी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान, एड्स 2026 में वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच होगी विशेष स्क्रीनिंग और संवाद

नई दिल्ली: दो दशक पहले बनी भारतीय शॉर्ट फिल्म ‘अस एंड देम’ एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बनने जा रही है। फिल्म निर्माता अनंत गुप्ता की इस डॉक्यू-ड्रामा फिल्म का प्रदर्शन 29 जुलाई को ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित होने वाले 26वें अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन ‘एड्स 2026’ के ग्लोबल विलेज नेटवर्किंग ज़ोन में किया जाएगा।

साल 2005 में बनी यह फिल्म दिखाती है कि एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे लोगों को समाज में किस तरह के भेदभाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। “देखभाल और अपनेपन” के संदेश पर टिकी यह फिल्म याद दिलाती है कि एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में इंसानियत, सम्मान और सबको गले लगाना कितना जरूरी है।

यह स्क्रीनिंग ‘एड्स 2026’ सम्मेलन का एक हिस्सा है, जो दुनिया में एचआईवी पर होने वाला सबसे बड़ा आयोजन है। यह सम्मेलन 26 से 31 जुलाई तक रियो डी जेनेरियो में चलेगा, जहाँ दुनिया भर के वैज्ञानिक, डॉक्टर्स, पॉलिसी मेकर्स और सामाजिक कार्यकर्ता एड्स को खत्म करने, इसके नए इलाज और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के अधिकारों पर चर्चा करने के लिए जुटेंगे।

अनंत ने यह फिल्म तब बनाई थी जब वह महज 20 साल के थे। उस दौरान वह एक मीडिया एजेंसी में काम कर रहे थे जो ‘राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन’ (NACO) के लिए काम करती थी। वहाँ एचआईवी से संक्रमित लोगों की आपबीती और उनके साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को करीब से जानकर अनंत ने एक ऐसी कहानी बनाने का फैसला किया जो लोगों के दिलों में इससे प्रभावित लोगों के प्रति सच्ची हमदर्दी जगा सके।

फिल्म के मुख्य किरदार का नाम ‘अभिमन्यु’ है, जो महाभारत के साहसी योद्धा से प्रेरित है। इस कहानी के जरिए अनंत गुप्ता एक मजबूत संदेश देना चाहते थे—कि एचआईवी से प्रभावित लोगों को भी समाज में बाकी लोगों की तरह ही प्यार, इज्जत और मानसिक सहारे की जरूरत होती है, और हमारा थोड़ा सा अपनापन किसी की जिंदगी बदल सकता है।

वैश्विक मंच पर अपनी फिल्म की वापसी को लेकर अनंत गुप्ता ने कहा, “जब मैंने 20 साल की उम्र में ‘अस एंड देम’ बनाई थी, तो मैं चाहता था कि लोग इन्फेक्शन को भूलकर सामने वाले इंसान को देखें। आज 20 साल बाद भी समाज में यह भेदभाव वैसे का वैसा ही है, इसलिए इस विषय पर बात करना आज भी उतना ही जरूरी है जितना तब था। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म एचआईवी से प्रभावित लोगों के प्रति समाज के नजरिए को बदलेगी और उनके लिए एक सम्मानजनक जगह बनाएगी।”

इस फिल्म में दिवंगत डॉ. के.के. अग्रवाल (पद्म श्री) और डॉ. एस.वाई. कुरैशी (पूर्व महानिदेशक – नाको) ने भी अपने विचार साझा किए हैं।

रिलीज के वक्त इस फिल्म की काफी तारीफ हुई थी और ‘कांको’ (KANCO) व बीबीसी (BBC) के तत्कालीन कंट्री हेड ने भी इसे सराहा था। इस शानदार हौसलाअफजाई ने अनंत को आगे भी ब्रांड फिल्म प्रोडक्शन और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) से जुड़ी फिल्मों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर गहराई से काम करने के लिए प्रेरित किया।

इस फिल्म की कामयाबी के बाद, अनंत ने मास कम्युनिकेशन में अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर दूरदर्शन से ट्रेनिंग ली और ‘ओगिल्वी’ जैसी नामी विज्ञापन एजेंसी में काम किया।

साल 2011 में उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘ए न्यू डायमेंशन’ की शुरुआत की। आज यह ऐसे क्रिएटिव विज़ुअल स्टोरीटेलर्स की टीम है, जो कॉरपोरेट, सरकारी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए सिर्फ फिल्में नहीं बनाती, बल्कि सीधे दिल को छूने वाली कहानियाँ बुनती है। पेप्सी, भारतीय रेलवे, एनआईआईटी, जीएमआर, सीबीएसई, पियर्सन और ‘सेव द चिल्ड्रेन’ जैसे बड़े नामों के साथ काम करते हुए इस टीम ने उद्देश्यपूर्ण विज़ुअल कम्युनिकेशन में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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