स्पेन, बेल्जियम, उरुग्वे और मिस्र के लिए आज का दिन बेहद अहम। FIFA World Cup 2026 में जीत दिला सकती है नॉकआउट की मजबूत उम्मीद।
नई दिल्ली: FIFA World Cup 2026 का रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है और आज टूर्नामेंट में चार ऐसे मुकाबले खेले जाने वाले हैं, जिन पर दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें टिकी हुई हैं।
21 जून को ग्रुप G और ग्रुप H की टीमें मैदान पर उतरेंगी, जहां स्पेन का सामना सऊदी अरब से, बेल्जियम का ईरान से, उरुग्वे का काबो वर्डे से और न्यूजीलैंड का मिस्र (Egypt) से होगा। इन मुकाबलों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पहले मैचों के बाद दोनों ग्रुपों की स्थिति बेहद दिलचस्प बनी हुई है और कोई भी टीम अभी तक नॉकआउट चरण के लिए मजबूत दावेदारी पेश नहीं कर पाई है।
आज के चारों मुकाबले केवल तीन अंकों की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह उन टीमों के लिए अपनी ताकत साबित करने का एक सुनहरा अवसर भी है जो विश्व कप में बड़े सपने लेकर आई हैं।
स्पेन और बेल्जियम जैसी पारंपरिक फुटबॉल शक्तियां अपने पहले मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं, जबकि सऊदी अरब और काबो वर्डे जैसी टीमों ने दिखा दिया कि वे किसी भी प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर देने की क्षमता रखती हैं।
ग्रुप G और H की मौजूदा स्थिति
ग्रुप G में पहले मैचों के बाद तस्वीर पूरी तरह खुली हुई है। बेल्जियम और मिस्र के बीच खेला गया मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था। उस मैच में बेल्जियम की टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण रखा, लेकिन मिस्र के डिफेंस और तेज अटैक ने उन्हें जीत से दूर रखा।
दूसरी ओर ईरान और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा, जहां दोनों टीमों ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया।
इस तरह ग्रुप G की चारों टीमों के खाते में एक-एक अंक है और गोल अंतर भी बहुत ज्यादा अलग नहीं है। ऐसे में आज जीत हासिल करने वाली टीम न केवल अंक तालिका में बढ़त बनाएगी बल्कि नॉकआउट में पहुंचने की अपनी संभावनाओं को भी काफी मजबूत कर लेगी।
ग्रुप H की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। स्पेन को काबो वर्डे ने गोलरहित ड्रॉ पर रोककर बड़ा उलटफेर किया था। स्पेन ने लगभग पूरे मैच में गेंद अपने कब्जे में रखी, लेकिन काबो वर्डे की रक्षात्मक रणनीति के सामने उसके स्टार खिलाड़ी बेअसर साबित हुए। वहीं उरुग्वे और सऊदी अरब का मुकाबला 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुआ था।
इस समय ग्रुप H की चारों टीमों के पास भी एक-एक अंक है, इसलिए आज का मैचडे पूरे ग्रुप का समीकरण बदल सकता है।
स्पेन बनाम सऊदी अरब
स्पेन को विश्व फुटबॉल की सबसे तकनीकी और व्यवस्थित टीमों में गिना जाता है। हालांकि काबो वर्डे के खिलाफ FIFA World Cup 2026 के पहले मैच में टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। स्पेन ने गेंद पर लगभग 70 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण रखा लेकिन गोल करने में नाकाम रही।
कोच लुइस डे ला फुएंते (Luis de la Fuente) की सबसे बड़ी चिंता टीम की फिनिशिंग रही है। पेड्री, फैबियन रूइज और रोड्री जैसे मिडफील्डर लगातार मौके बना रहे हैं, लेकिन अंतिम तीसरे हिस्से में टीम की धार कमजोर दिखाई दी।
यही वजह है कि आज के मुकाबले में युवा स्टार लामिन यामाल और निको विलियम्स पर विशेष नजर रहेगी।
दूसरी तरफ सऊदी अरब आत्मविश्वास से भरी हुई दिखाई दे रही है। उरुग्वे जैसी मजबूत टीम के खिलाफ ड्रॉ हासिल करना किसी उपलब्धि से कम नहीं था। टीम ने बेहद अनुशासित डिफेंस का प्रदर्शन किया और मौके मिलने पर तेजी से जवाबी हमला भी किया।
स्पेन की ताकत
स्पेन की सबसे बड़ी ताकत उसका बॉल पजेशन गेम है। टीम मैच के दौरान लंबे समय तक गेंद अपने पास रखकर विरोधी को थका देती है। रोड्री, पेड्री और फैबियन रूइज जैसे मिडफील्डर छोटे-छोटे पास के जरिए खेल की रफ्तार नियंत्रित करते हैं।काबो वर्डे के खिलाफ स्पेन ने 70% से अधिक पजेशन रखा था, जो उनकी शैली का उदाहरण है।
टीम विंगर्स लामिन यामाल और निको विलियम्स की गति का भी फायदा उठाती है। हालांकि जब विरोधी टीम गहरी रक्षात्मक लाइन बनाती है, तब स्पेन को गोल करने में मुश्किल होती है। इसलिए आज स्पेन जल्दी गोल करने की कोशिश करेगा।

सऊदी अरब की ताकत
सऊदी अरब की सबसे बड़ी ताकत उसकी रक्षात्मक अनुशासन और सामूहिक खेल है। टीम अक्सर 4-5-1 या 5-4-1 फॉर्मेशन में खेलकर अपने डिफेंस को मजबूत रखती है।
उरुग्वे के खिलाफ टीम ने यही रणनीति अपनाई थी और मजबूत प्रतिद्वंद्वी को ड्रॉ पर रोक दिया था। कप्तान सालेम अल डावसरी और फिरास अल बुरैकान काउंटर अटैक में अहम भूमिका निभाते हैं।
सऊदी अरब विरोधी टीम को गेंद रखने देता है लेकिन जैसे ही मौका मिलता है, तेज आक्रमण शुरू कर देता है। यही रणनीति स्पेन जैसी टीम के खिलाफ भी देखने को मिल सकती है।

संभावित प्लेइंग XI
स्पेन: उनाई सिमोन, कार्वाजाल, ले नॉर्मांड, लापोर्टे, कुकुरेला, रोड्री, पेड्री, फैबियन रूइज, लामिन यामाल, निको विलियम्स, अल्वारो मोराटा
सऊदी अरब: अल ओवैस, अब्दुलहामिद, अल अमरी, अल बुलायही, अल शाहरानी, कन्नो, अल मालिकी, अल डावसरी, अल बुरैकान, अल शेहरी
मैच प्रेडिक्शन: स्पेन के पास अधिक गुणवत्ता और गहराई है। यदि टीम शुरुआती गोल करने में सफल रहती है तो मैच पूरी तरह उसके नियंत्रण में जा सकता है।
बेल्जियम बनाम ईरान
ग्रुप G का सबसे रोमांचक मुकाबला बेल्जियम और ईरान के बीच माना जा रहा है। बेल्जियम भले ही पहले मैच में जीत हासिल नहीं कर सका हो, लेकिन उसके पास अभी भी विश्व स्तरीय खिलाड़ियों की भरमार है।
केविन डी ब्रुइने टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी बने हुए हैं। उनकी पासिंग और खेल को नियंत्रित करने की क्षमता किसी भी डिफेंस को तोड़ सकती है। वहीं रोमेलु लुकाकू की मौजूदगी विरोधी टीम के लिए हमेशा खतरा बनी रहती है।
ईरान की टीम पिछले कुछ वर्षों में एशिया की सबसे संगठित टीमों में से एक रही है। मेहदी तारेमी और सरदार अज़मून जैसे खिलाड़ी यूरोपीय फुटबॉल में अपनी पहचान बना चुके हैं।
बेल्जियम की ताकत
बेल्जियम की सबसे बड़ी ताकत उसकी अटैकिंग क्वालिटी है। केविन डी ब्रुइने जैसे खिलाड़ी अपने सटीक पास और विजन से किसी भी डिफेंस को तोड़ सकते हैं।
रोमेलु लुकाकू बॉक्स के अंदर बेहद खतरनाक स्ट्राइकर हैं, जबकि जेरेमी डोकू अपनी गति से डिफेंडरों को परेशान करते हैं। मिस्र के खिलाफ पहले मैच में भी बेल्जियम ने कई मौके बनाए थे।
टीम आमतौर पर गेंद पर नियंत्रण रखते हुए चौड़ाई में खेलती है और विंग्स से हमले करती है। सेट-पीस स्थितियों में भी बेल्जियम काफी मजबूत मानी जाती है।

ईरान की ताकत
ईरान की सबसे बड़ी ताकत सामूहिक संगठन और काउंटर अटैक है। मेहदी तारेमी और सरदार अज़मून की जोड़ी विरोधी डिफेंस के लिए लगातार खतरा पैदा करती है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ 2-2 के ड्रॉ में ईरान ने दिखाया कि वह जरूरत पड़ने पर आक्रामक फुटबॉल भी खेल सकता है।

संभावित प्लेइंग XI
बेल्जियम: कास्टील्स, कास्टाग्ने, फास, डेबास्ट, थिएट, ओनाना, टिलेमन्स, डी ब्रुइने, डोकू, ट्रोसार्ड, लुकाकू
ईरान: बेइरानवंद, मोहार्रामी, कनानी, चेश्मी, मोहम्मदी, एजातोलाही, नूरोल्लाही, जहानबख्श, घोलिजादेह, तारेमी, अज़मून
मैच प्रेडिक्शन: ईरान मुकाबले को कठिन जरूर बनाएगा लेकिन बेल्जियम का अनुभव अंतर पैदा कर सकता है।
उरुग्वे बनाम काबो वर्डे
काबो वर्डे ने FIFA World Cup 2026 के पहले ही मैच में दुनिया को चौंका दिया था। स्पेन जैसी मजबूत टीम को गोलरहित ड्रॉ पर रोककर उसने साबित कर दिया कि वह केवल भाग लेने नहीं बल्कि मुकाबला करने आई है।
हालांकि अब उसके सामने उरुग्वे की चुनौती है, जो दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल की सबसे खतरनाक टीमों में से एक मानी जाती है।
मार्सेलो बिएल्सा (Marcelo Bielsa) की कोचिंग में उरुग्वे ने पिछले कुछ वर्षों में बेहद आक्रामक शैली अपनाई है।
उरुग्वे की ताकत
मार्सेलो बिएल्सा की कोचिंग में उरुग्वे बेहद आक्रामक फुटबॉल खेल रही है। टीम की सबसे बड़ी ताकत हाई प्रेसिंग है, जिसके जरिए वह विरोधी को अपनी ही आधी लाइन में दबाव में रखती है।
फेडेरिको वाल्वरडे और मैनुएल उगार्टे मिडफील्ड में लगातार ऊर्जा देते हैं, जबकि डार्विन नुनेज़ गोल करने के लिए जाने जाते हैं।
सऊदी अरब के खिलाफ टीम को ड्रॉ जरूर मिला, लेकिन उसने कई मौके बनाए थे। उरुग्वे का लक्ष्य शुरुआती मिनटों में दबाव बनाकर मैच का नियंत्रण अपने हाथ में लेना होता है।

काबो वर्डे की ताकत
काबो वर्डे इस FIFA World Cup की सबसे बड़ी सरप्राइज टीमों में से एक बनकर उभरी है। स्पेन जैसी मजबूत टीम को 0-0 से रोकना इसकी सबसे बड़ी मिसाल है।
रक्षात्मक मजबूती और धैर्य टीम सबसे प्रभावी रणनीति है। खिलाड़ी अपने क्षेत्र में संगठित रहते हैं और विरोधी को आसानी से जगह नहीं देते।
गोलकीपर वोजिन्हा और सेंटर-बैक लोगन कोस्टा टीम के अहम खिलाड़ी हैं। जब विरोधी आगे बढ़ता है तो काबो वर्डे खाली जगहों का फायदा उठाकर जवाबी हमला करने की कोशिश करता है।

संभावित प्लेइंग XI
उरुग्वे: रोशेट, नांदेज़, अराउजो, जिमेनेज़, विना, उगार्टे, वाल्वरडे, डे ला क्रूज़, पेलिस्त्री, डार्विन नुनेज़, मैक्सी अराउजो
काबो वर्डे: वोजिन्हा, स्टॉपिरा, लोगन कोस्टा, फर्नांडीस, डुआर्टे, टावारेस, बेबे, सेमेडो, मेंडेस, रोड्रिग्स, डुआर्टे
मैच प्रेडिक्शन: काबो वर्डे मुकाबले को लंबा खींचने की कोशिश करेगा, लेकिन उरुग्वे की आक्रामक क्षमता अंततः भारी पड़ सकती है।
न्यूजीलैंड बनाम मिस्र
दिन का चौथा मुकाबला शायद सबसे संतुलित मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। न्यूजीलैंड ने ईरान के खिलाफ शानदार संघर्ष करते हुए 2-2 का ड्रॉ हासिल किया था।
दूसरी तरफ मिस्र की टीम मोहम्मद सलाह की अगुआई में मैदान पर उतरेगी। सलाह की गति, तकनीक और गोल करने की क्षमता किसी भी मैच को बदल सकती है।
उमर मरमौश और त्रेजेगेट जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी मिस्र के आक्रमण को और भी खतरनाक बनाती है।
न्यूजीलैंड की ताकत
न्यूजीलैंड की टीम तकनीकी रूप से भले ही शीर्ष टीमों जैसी न हो, लेकिन शारीरिक मजबूती उनकी बड़ी ताकत है। टीम लंबे पास और क्रॉस पर काफी निर्भर रहती है। क्रिस वुड जैसे लंबे स्ट्राइकर हवाई गेंदों पर बेहद खतरनाक साबित होते हैं। ईरान के खिलाफ 2-2 के मुकाबले में न्यूजीलैंड ने इसी शैली का सफल उपयोग किया था। सेट-पीस, कॉर्नर और फ्री-किक स्थितियों में टीम अक्सर गोल करने के मौके बनाती है।

मिस्र की ताकत
मिस्र की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज और सीधा आक्रमण है। मोहम्मद सलाह टीम के मुख्य हथियार हैं, जो अकेले दम पर मैच का रुख बदल सकते हैं।
बेल्जियम के खिलाफ पहले मैच में मिस्र ने दिखाया कि वह बड़े प्रतिद्वंद्वी के सामने भी आत्मविश्वास के साथ खेल सकता है। उमर मरमौश और त्रेजेगेट जैसे खिलाड़ी विंग्स से गति प्रदान करते हैं, जबकि एलनेनी मिडफील्ड को संतुलन देते हैं।
मिस्र आमतौर पर गेंद जीतने के बाद तेजी से आगे बढ़ता है और विरोधी डिफेंस को संभलने का मौका नहीं देता। यही रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ भी देखने को मिल सकती है।

संभावित प्लेइंग XI
न्यूजीलैंड: क्रोकोम्ब, पेन, बॉक्सॉल, सुरमन, काकाचे, बेल, स्टामेनिक, गार्बेट, जस्ट, क्रिस वुड, बार्बारूसेस
मिस्र: एल शेनावी, हेगाज़ी, अब्देलमोनेम, हम्दी फाथी, एलनेनी, तारेक हमेद, त्रेजेगेट, मरमौश, सलाह, मोस्तफा मोहम्मद, फाथी
मैच प्रेडिक्शन: न्यूजीलैंड कड़ी टक्कर देगा लेकिन मिस्र के पास मैच विनर खिलाड़ियों की संख्या अधिक है।
चारों मुकाबलों का शेड्यूल (भारतीय समयानुसार)
स्पेन बनाम सऊदी अरब – रात 9:30 बजे
बेल्जियम बनाम ईरान – रात 12:30 बजे (22 जून)
उरुग्वे बनाम काबो वर्डे – सुबह 3:30 बजे (22 जून)
न्यूजीलैंड बनाम मिस्र – सुबह 6:30 बजे (22 जून)
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