फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर सिर्फ जीत-हार नहीं, बल्कि ऐसे Shocking Moments भी बने जिन्होंने करोड़ों फैंस को अविश्वास में डाल दिया। आज जानते हैं 5 सबसे बड़े पलों के बारे में।
फुटबॉल को दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल कहा जाता है। FIFA World Cup केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भावनाओं, उम्मीदों, जीत, हार और इतिहास का ऐसा मंच है जहां कुछ मिनटों में पूरी दुनिया की धारणाएं बदल जाती हैं। हर चार साल में होने वाला यह आयोजन कई महान खिलाड़ियों को अमर बनाता है, लेकिन कुछ ऐसे पल भी पैदा करता है जो दशकों बाद भी चर्चा का विषय बने रहते हैं।
विश्व कप के इतिहास में कई रोमांचक मुकाबले हुए, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी थीं जिन्होंने करोड़ों दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। कभी किसी कमजोर टीम ने दिग्गज को धूल चटा दी, तो कभी एक खिलाड़ी की एक हरकत ने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी। आइए जानते हैं FIFA World Cup इतिहास के पांच सबसे चौंकाने वाले और यादगार पलों के बारे में।
5. सऊदी अरब ने अर्जेंटीना को हराया (22 नवंबर 2022)
कतर में आयोजित FIFA World Cup 2022 के तीसरे दिन सबसे बड़ा उलटफेर हुआ। ग्रुप-सी के मुकाबले में लियोनेल मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना का सामना सऊदी अरब से था। मैच से पहले लगभग सभी विशेषज्ञ अर्जेंटीना की आसान जीत मान रहे थे।
22 नवंबर 2022 को लुसैल स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में अर्जेंटीना ने 10वें मिनट में मेसी के पेनाल्टी गोल की बदौलत बढ़त बना ली। पहले हाफ में अर्जेंटीना ने कई और गोल किए, लेकिन ऑफसाइड के कारण वे मान्य नहीं हुए।
दूसरे हाफ की शुरुआत के साथ ही सऊदी अरब ने मैच की पटकथा बदलनी शुरू की। 48वें मिनट में सालेह अल-शेहरी ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके केवल पांच मिनट बाद, 53वें मिनट में सलेम अल-दावसरी ने टूर्नामेंट के सबसे शानदार गोलों में से एक दागकर सऊदी अरब को 2-1 की बढ़त दिला दी।
इसके बाद अर्जेंटीना लगातार हमले करती रही, लेकिन सऊदी की रक्षा पंक्ति चट्टान की तरह खड़ी रही। अंतिम सीटी बजते ही विश्व फुटबॉल स्तब्ध रह गई। फीफा विश्व कप इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में गिनी जाने वाली इस जीत ने यह साबित कर दिया कि विश्व कप में नाम नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है। दिलचस्प बात यह रही कि शुरुआती झटके के बावजूद अर्जेंटीना ने 18 दिसंबर 2022 को फाइनल मुकाबले में फ्रांस को हराकर टूर्नामेंट अपने नाम की।

4. ब्राजील की 7-1 से ऐतिहासिक हार (8 जुलाई 2014)
फुटबॉल और ब्राजील लगभग एक-दूसरे के पर्याय माने जाते हैं। पांच बार की विश्व चैंपियन टीम अपने घरेलू मैदान पर, 2014 का फीफा विश्व कप जीतने की सबसे बड़ी दावेदार थी। लेकिन 8 जुलाई 2014 को बेलो होरिजोंटे के एस्टादियो मिनेराओ स्टेडियम में जो हुआ, उसने ब्राजील के लिए फुटबॉल इतिहास की सबसे दर्दनाक रातों में से एक साबित हुई।
2014 FIFA World Cup के सेमीफाइनल में ब्राजील का सामना जर्मनी से था। ब्राजील पहले ही अपने स्टार खिलाड़ी नेमार की चोट और कप्तान थियागो सिल्वा के निलंबन से जूझ रही थी, लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि परिणाम इतना भयावह होगा।
11वें मिनट में थॉमस मुलर ने जर्मनी को बढ़त दिलाई। इसके बाद अगले 18 मिनट में जर्मनी ने चार और गोल कर दिए। 23वें मिनट से 29वें मिनट के बीच जर्मनी ने चार गोल दागे और स्कोर 5-0 कर दिया। पूरा स्टेडियम स्तब्ध था। लाखों ब्राजीली प्रशंसकों की आंखों में आंसू थे।
दूसरे हाफ में जर्मनी ने दो और गोल किए। ब्राजील केवल एक सांत्वना गोल कर सका और मुकाबला 7-1 से समाप्त हुआ। यह ब्राजील की विश्व कप इतिहास की सबसे बड़ी हार थी। मैच को बाद में “मिनेराज़ो” नाम दिया गया, जिसे 1950 के “मराकानाज़ो” की तरह राष्ट्रीय सदमे का प्रतीक माना गया। आज भी यह मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे चौंकाने वाले परिणामों में शामिल है।

3. लुइस सुआरेज़ के हैंडबॉल से जीता उरुग्वे (2 जुलाई 2010)
2010 FIFA World Cup का क्वार्टरफाइनल मुकाबला उरुग्वे और घाना के बीच जोहानिसबर्ग के सॉकर सिटी में खेला गया। अफ्रीकी फुटबॉल इतिहास के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर था। घाना विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम बनने के बेहद करीब थी।
अतिरिक्त समय के अंतिम क्षण में दोनों ही टीम का स्कोर 1-1 की बराबरी पर था। 120वें मिनट में घाना के डोमिनिक अडियाह का हेडर गोललाइन की ओर बढ़ रहा था। तभी उरुग्वे के स्ट्राइकर लुइस सुआरेज़ ने गोलकीपर की तरह दोनों हाथों से गेंद को रोक लिया। रेफरी ने तुरंत रेड कार्ड दिखाया और घाना को पेनाल्टी दे दी।
पूरा स्टेडियम मान चुका था कि घाना इतिहास रचने वाला है। लेकिन असामोआ ज्ञान का पेनाल्टी शॉट क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया। मैच पेनाल्टी शूटआउट में गया, जहां उरुग्वे ने 4-2 से जीत दर्ज की।
सुआरेज़ की हरकत को लेकर दुनिया दो हिस्सों में बंट गई। कुछ लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया, जबकि कुछ ने कहा कि उन्होंने टीम को बचाने के लिए नियमों के भीतर उपलब्ध अंतिम विकल्प चुना। आज भी यह घटना विश्व कप इतिहास के सबसे विवादित पलों में गिनी जाती है।

2. ज़िनेदिन ज़िदान का हेडबट, टूटा विश्व कप जीतने का सपना (9 जुलाई 2006)
9 जुलाई 2006 को बर्लिन का ओलंपिया स्टेडियम में फ्रांस और इटली के बीच टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। फ्रांस और इटली के बीच खेले जा रहे इस मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजर थी। यह फ्रांस के महान खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान के करियर का आखिरी पेशेवर मैच भी था।
ज़िदान ने सातवें मिनट में पेनाल्टी से गोल कर फ्रांस को बढ़त दिलाई। बाद में इटली के मार्को मातेरात्सी ने भी गोल कर मुकाबले को 1-1 की बराबरी पर खड़ा कर दिया है।
90 मिमट के खेल के बाद भी दोनों टीम 1-1 के स्कोर पर ही रहे। मैच अतिरिक्त समय तक पहुंच गया। 110वें मिनट में अचानक ऐसा कुछ हुआ जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
मातेरात्सी और ज़िदान के बीच कुछ शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। कुछ सेकंड बाद ज़िदान ने अपना सिर मातेरात्सी के सीने पर जोर से मार दिया। रेफरी ने वीडियो और सहायक अधिकारियों की मदद से घटना की समीक्षा की और ज़िदान को रेड कार्ड दिखा दिया।
पूरी दुनिया स्तब्ध थी। फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक अपने आखिरी मैच में मैदान से बाहर भेजा जा रहा था। बाद में पेनाल्टी शूटआउट की मदद से इटली ने फ्रांस को 5-3 से हराकर विश्व खिताब अपने नाम किया।
ज़िदान का वह हेडबट आज भी विश्व कप इतिहास के सबसे चर्चित और विवादास्पद पलों में गिना जाता है।

1. माराडोना का ‘Hand of God’ और ‘Goal of the Century’ (22 जून 1986)
यदि किसी एक मैच में विश्व कप इतिहास के दो सबसे प्रसिद्ध गोल देखने को मिले हों, तो वह था 22 जून 1986 को मेक्सिको सिटी में खेला गया अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड का क्वार्टरफाइनल मुकाबला।
मुकाबले के 51वें मिनट में डिएगो माराडोना इंग्लैंड के गोलकीपर पीटर शिल्टन के साथ गेंद तक पहुंचे। माराडोना ने हाथ का इस्तेमाल करते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। रेफरी ने गोल दे दिया क्योंकि उस समय VAR जैसी तकनीक मौजूद नहीं थी।
मैच के बाद माराडोना ने कहा कि यह गोल “थोड़ा माराडोना के सिर से और थोड़ा भगवान के हाथ से” हुआ था। यहीं से “Hand of God” शब्द अमर हो गया। लेकिन केवल चार मिनट बाद माराडोना ने वह किया जिसे कई विशेषज्ञ आज भी फुटबॉल इतिहास का सबसे महान गोल मानते हैं।
उन्होंने अपनी ही हाफ लाइन से गेंद लेकर पांच इंग्लिश खिलाड़ियों और गोलकीपर को छकाते हुए गोल कर दिया। इस गोल को बाद में फीफा ने “Goal of the Century” का दर्जा दिया। एक ही मैच में विवाद और प्रतिभा का ऐसा संगम शायद ही कभी देखने को मिला हो।

