Friday, 10 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
टेलीग्राम फिशिंग लिंक से परिवार के तीन सदस्य बने निशाना, डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने दिल्ली पुलिस से जांच मांगी जिसने दो बार बेच दिया था Eiffel Tower! जानिए दुनिया के सबसे शातिर ठग Victor Lustig की हैरतअंगेज कहानी Viral Video: अर्जेंटीना की बड़ी जीत के बाद अचानक वायरल हुआ मेसी और अनंत अंबानी का पुराना वीडियो, दर्शकों ने भी मैच के आखिरी 11 मिनट को माना चमत्कार स्व. सत्यनारायण सिन्हा की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि, राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया गया स्मरण दो दशक बाद ‘एड्स 2026’ सम्मेलन में फिर दिखाई जाएगी अनंत गुप्ता की चर्चित फिल्म ‘अस एंड देम’ Behdienkhlam Festival 2026: जब पूरा गांव मिलकर बीमारियों और बुरी शक्तियों को देता है विदाई, जानिए मेघालय के इस अनोखे पर्व की पूरी कहानी Mr. Bean: एक ऐसा कॉमेडियन जिसने बिना बोले पूरी दुनिया को हंसा दिया 98th Grandmaster: 18 वर्षीय अश्वत एस ने रचा इतिहास, भारत को मिला 98वां ग्रैंडमास्टर टेलीग्राम फिशिंग लिंक से परिवार के तीन सदस्य बने निशाना, डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने दिल्ली पुलिस से जांच मांगी जिसने दो बार बेच दिया था Eiffel Tower! जानिए दुनिया के सबसे शातिर ठग Victor Lustig की हैरतअंगेज कहानी Viral Video: अर्जेंटीना की बड़ी जीत के बाद अचानक वायरल हुआ मेसी और अनंत अंबानी का पुराना वीडियो, दर्शकों ने भी मैच के आखिरी 11 मिनट को माना चमत्कार स्व. सत्यनारायण सिन्हा की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि, राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया गया स्मरण दो दशक बाद ‘एड्स 2026’ सम्मेलन में फिर दिखाई जाएगी अनंत गुप्ता की चर्चित फिल्म ‘अस एंड देम’ Behdienkhlam Festival 2026: जब पूरा गांव मिलकर बीमारियों और बुरी शक्तियों को देता है विदाई, जानिए मेघालय के इस अनोखे पर्व की पूरी कहानी Mr. Bean: एक ऐसा कॉमेडियन जिसने बिना बोले पूरी दुनिया को हंसा दिया 98th Grandmaster: 18 वर्षीय अश्वत एस ने रचा इतिहास, भारत को मिला 98वां ग्रैंडमास्टर

Himanta Biswa Sarma: कांग्रेस छोड़ने से लेकर पूर्वोत्तर के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्री बनने तक का सफर, कैसे एक ‘पिद्दी’ सी हरकत ने बदल दी असम की राजनीति

नई दिल्ली: 9 अप्रैल को असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुए, जिनके नतीजे 4 मई को सामने आए। इन नतीजों में बीजेपी+ को कुल 102 सीटों पर जीत मिली। वहीं कांग्रेस+ को 21 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

एक बार फिर से असम में बीजेपी और उनके सहायक दल वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में सरकार बना सकते हैं। यह जीत यकीनन पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी की प्रभुता को कायम रखने में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर हिमंता बिस्व सरमा की लोकप्रियता को भी बल देगी।

हिमंता बिस्व सरमा का शुरुआती जीवन

हिमंता बिस्व सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में कैलाश नाथ शर्मा और मृणालिनी देवी के घर पर हुआ। 1985 में उन्होंने गुवाहाटी के कामरूप अकादमी से सीनियर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक (1990) और गौहाटी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि भी हासिल की।

स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल करने के बाद उन्होंने गुवाहाटी के ला कालेज से LLB और गुवाहाटी विश्वविद्यालय से ही राजनीति विज्ञान में PhD की डिग्री भी हासिल की।

छात्र राजनीति और वकालत

कॉटन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान डॉ. सरमा राजनीतिक रूप से काफ़ी सक्रिय रहे और 1988 से 1992 के बीच तीन बार कॉटन कॉलेज छात्र संघ के जनरल सेक्रेटरी चुने गए। पूर्ण रूप से राजनीति में आने से पहले उन्होंने 1996 से 2001 तक गुवाहाटी हाई कोर्ट में वकालत की।

राजनीतिक सफर

आज पूर्वोत्तर भारत की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले डॉ. सरमा की राजनीतिक सफर की शुरुआत 1994 में उनके वर्तमान के विपक्षी दल कांग्रेस के साथ हुई थी। 2001 में पहली बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जालुकबाड़ी से चुनाव जीता और तरुण गोगोई सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख विभाग संभाले।

इसके बाद से लेकर अब तक वे लगातार 6 बार (3 कांग्रेस, 3 बीजेपी) से इस सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं। कांग्रेस में साथ हुए मतभेद के बाद 2015 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। ये उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने नेडा (NEDA – North East Democratic Alliance) के संयोजक के रूप में 2016 के असम चुनाव में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी भाजपा के विस्तार में अपनी अहम भूमिका निभाई।

2021 में उन्होंने असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2026 में भी जालुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र में 1,27,151 वोट हासिल कर उन्होंने कांग्रेस की बिदिशा नियोग को 89,434 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

क्या है ‘पिद्दी विवाद’, जो बना काग्रेस के लिए काल?

हिमंता बिस्व सरमा और राहुल गांधी के बीच अकसर राजनीतिक बयानबाजी होती रहती है। 2015 तक डॉ. सरमा कांग्रेस में ही थे। लेकिन राहुल गांधी के साथ हुए एक मुलाकात में कुछ ऐसा हुआ जिसने डॉ. सरमा, कांग्रेस और पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक तस्वीर को हमेशा-हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

2017 में डॉ. सरमा ने दावा किया था कि जब वे कांग्रेस में थे और असम के मुद्दों पर राहुल गांधी से चर्चा करने गए, तब राहुल गांधी अपने पालतू कुत्ते ‘पीद्दी’ को बिस्किट खिलाने में व्यस्त थे और उन्होंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

डॉ. सरमा के अनुसार, राहुल गांधी के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की वजह से उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंची, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। इस घटना के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी साख की तलाश में है।


सूत्रों के मुताबिक सरमा असम में कांग्रेस दल का नेतृत्व करना चाहते थे और उन्हें 58 विधायकों का समर्थन भी प्राप्त था, लेकिन तब उनकी इस मांग पर तरजीह नहीं दी गई जिससे नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया।

2026 के असम विधानसभा चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद डॉ. सरमा एक और कार्यकाल की तलाश में हैं।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।