7 क्लासिक ईरानी फिल्में जो साबित करती हैं कि बेहतरीन सिनेमा बड़े बजट से नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं और सशक्त कहानी से बनता है। जानिए इनकी खासियत और उपलब्धियां।
नई दिल्ली: कभी-कभी सिनेमा का सबसे बड़ा जादू किसी महंगे सेट, बड़े स्टार या करोड़ों डॉलर के बजट में नहीं, बल्कि एक मासूम बच्चे की चिंता, एक बुजुर्ग की खामोशी या एक साधारण परिवार की टूटती-बिखरती जिंदगी में छिपा होता है। यही वजह है कि जब विश्व सिनेमा की सबसे संवेदनशील और मानवीय फिल्मों की बात होती है, तो ईरानी सिनेमा (Iranian Cinema) का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद जहां कई लोगों को लगा कि ईरानी फिल्म इंडस्ट्री पर प्रतिबंधों का असर उसकी रचनात्मकता को खत्म कर देगा, वहीं हुआ इसका बिल्कुल उलटा।
सीमित संसाधनों, कड़े सेंसरशिप नियमों और सामाजिक प्रतिबंधों के बीच ईरान के फिल्मकारों ने ऐसी कहानियां रचीं, जिन्होंने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया। यहां की फिल्मों में नायक अक्सर कोई सुपरहीरो नहीं होता, बल्कि आम इंसान होता है जो नैतिक दुविधाओं, रिश्तों, गरीबी, अकेलेपन, बचपन और उम्मीद जैसी भावनाओं से जूझ रहा होता है।
अब्बास कियारोस्तामी (Abbas Kiarostami), असगर फरहादी (Asghar Farhadi) और माजिद मजीदी (Majid Majidi) जैसे निर्देशकों ने यह साबित किया कि सिनेमा का सबसे बड़ा प्रभाव उसकी सादगी में छिपा होता है। उनकी फिल्मों ने कान्स, वेनिस, बर्लिन और ऑस्कर जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर न सिर्फ पुरस्कार जीते, बल्कि ईरानी सिनेमा को विश्व सिनेमा की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया।
आज हम ऐसी ही 7 फिल्मों की बात करेंगे, जिन्हें न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सिनेमाई अनुभवों में गिना जाता है।
1) A Separation (2011)
2011 में रिलीज़ हुई A Separation (Jodaeiye Nader az Simin) को आधुनिक विश्व सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता है। इसका निर्देशन ईरान के प्रसिद्ध फिल्मकार असगर फरहादी (Asghar Farhadi) ने किया, जबकि मुख्य भूमिकाओं में Peyman Moaadi, Leila Hatami, Sareh Bayat, Shahab Hosseini और Sarina Farhadi नज़र आते हैं।
कहानी तेहरान में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय दंपति, नादेर और सिमिन, के इर्द-गिर्द घूमती है। सिमिन बेहतर भविष्य के लिए ईरान छोड़ना चाहती है, लेकिन नादेर अपने अल्ज़ाइमर से पीड़ित पिता की देखभाल के कारण देश छोड़ने से इनकार कर देता है।
यहीं से शुरू हुआ वैवाहिक विवाद धीरे-धीरे एक कानूनी और नैतिक संघर्ष का रूप ले लेता है, जिसमें वर्गभेद, धार्मिक मान्यताएं और व्यक्तिगत जिम्मेदारियां एक-दूसरे से टकराती हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई भी पात्र पूरी तरह सही या गलत नहीं लगता। फरहादी ने इतनी संतुलित पटकथा लिखी है कि दर्शक हर किरदार के निर्णय को उसके नज़रिए से समझने लगता है।
वास्तविक लोकेशन, हैंडहेल्ड कैमरा और लगभग बिना बैकग्राउंड म्यूजिक के फिल्म को डॉक्यूमेंट्री जैसी प्रामाणिकता मिलती है। Sareh Bayat और Shahab Hosseini के दमदार अभिनय के लिए दोनों को Berlin International Film Festival में Silver Bear मिला।
वहीं फिल्म ने 2012 में Best Foreign Language Film का ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा और यह सम्मान पाने वाली पहली ईरानी फिल्म बनी। यही कारण है कि A Separation को आज भी पारिवारिक रिश्तों और नैतिक दुविधाओं पर बनी सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है।
2) Close-Up (1990)
1990 में रिलीज़ हुई Close-Up (Nema-ye Nazdik) ईरानी महान निर्देशक अब्बास कियारोस्तामी (Abbas Kiarostami) की सबसे क्रांतिकारी फिल्मों में मानी जाती है।
यह फिल्म 1989 की एक वास्तविक घटना पर आधारित है, जिसमें होसैन सब्ज़ियान (Hossein Sabzian) नाम के एक व्यक्ति ने खुद को मशहूर निर्देशक मोहसेन मखमलबाफ (Mohsen Makhmalbaf) बताकर एक परिवार का विश्वास जीत लिया था।
गिरफ्तारी के बाद कियारोस्तामी ने इसी घटना को फिल्म का रूप दिया, लेकिन सबसे अनोखी बात यह रही कि इसमें वास्तविक घटना से जुड़े लोगों ने खुद अपने किरदार निभाए। इस तरह फिल्म डॉक्यूमेंट्री और फिक्शन का ऐसा दुर्लभ मिश्रण बन गई, जिसने विश्व सिनेमा की भाषा ही बदल दी।
फिल्म की कहानी धोखाधड़ी से ज्यादा उस इंसान की मानसिक दुनिया को समझने की कोशिश करती है, जो फिल्मों से इतना प्रेम करता है कि वह कुछ समय के लिए किसी और की पहचान जीना चाहता है।
कियारोस्तामी ने लंबे शॉट्स, प्राकृतिक प्रकाश और बेहद सादे कैमरा वर्क का इस्तेमाल किया, जिससे कहानी पूरी तरह वास्तविक महसूस होती है।
Close-Up आज दुनिया के कई प्रमुख फिल्म संस्थानों में पढ़ाई जाती है। Martin Scorsese सहित अनेक महान फिल्मकारों ने इसे अब तक की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में शामिल किया है। यह फिल्म साबित करती है कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इंसानी पहचान, सपनों और आत्मसम्मान को समझने का माध्यम भी हो सकता है।
3) Taste of Cherry (1997)
1997 में रिलीज़ हुई Taste of Cherry (Ta’m e Guilass) ईरानी निर्देशक अब्बास कियारोस्तामी की सबसे चर्चित और दार्शनिक फिल्मों में से एक है। फिल्म में Homayoun Ershadi ने मिस्टर बदीई का किरदार निभाया है, जो तेहरान के बाहरी इलाकों में कार चलाते हुए ऐसे व्यक्ति की तलाश करता है जो उसकी मृत्यु के बाद उसे दफना सके।
पूरी कहानी इसी साधारण-सी यात्रा के माध्यम से जीवन, अकेलेपन, उम्मीद और इंसानी रिश्तों पर गहरे सवाल उठाती है। फिल्म कभी भी दर्शक को स्पष्ट उत्तर नहीं देती, बल्कि उसे अपने निष्कर्ष खुद निकालने के लिए प्रेरित करती है।
कियारोस्तामी ने फिल्म को अत्यंत न्यूनतम शैली (Minimalism) में प्रस्तुत किया है। लंबे स्थिर शॉट्स, सूखे पहाड़ी इलाकों की प्राकृतिक सिनेमैटोग्राफी और लगभग बिना बैकग्राउंड म्यूजिक के फिल्म एक ध्यानपूर्ण अनुभव बन जाती है।
कहानी के दौरान बदीई अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों से मिलता है और हर बातचीत जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण सामने लाती है।
1997 के Cannes Film Festival में इस फिल्म ने प्रतिष्ठित Palme d’Or पुरस्कार जीता, जो किसी ईरानी फिल्म के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि थी। फिल्म का अंतिम दृश्य विश्व सिनेमा के सबसे चर्चित अंतों में गिना जाता है, जहां निर्देशक दर्शकों को याद दिलाते हैं कि वास्तविकता और सिनेमा के बीच हमेशा एक दूरी बनी रहती है।
4) Where Is the Friend’s House? (1987)
1987 में रिलीज़ हुई Where Is the Friend’s House? (Khane-ye Doust Kojast?) प्रसिद्ध निर्देशक अब्बास कियारोस्तामी की Koker Trilogy की पहली फिल्म है।
इसकी कहानी आठ वर्षीय अहमद के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गलती से अपने सहपाठी की कॉपी घर ले आता है। शिक्षक की सख्त चेतावनी याद आने पर वह शाम ढलने से पहले पड़ोसी गांव जाकर अपने दोस्त को कॉपी लौटाने की कोशिश करता है।यही साधारण-सी घटना एक ऐसी भावनात्मक यात्रा में बदल जाती है, जो दोस्ती, जिम्मेदारी और नैतिक साहस का गहरा संदेश देती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है। कियारोस्तामी ने स्थानीय ग्रामीण इलाकों और गैर-पेशेवर कलाकारों का उपयोग किया, जिससे हर दृश्य पूरी तरह वास्तविक लगता है।
कैमरा अक्सर बच्चे की ऊंचाई से दुनिया को दिखाता है, जिससे दर्शक उसकी भावनाओं से गहराई से जुड़ जाता है। फिल्म में कोई बड़ा नाटकीय मोड़ नहीं है, फिर भी हर दृश्य उत्सुकता बनाए रखता है। प्राकृतिक ध्वनियां, गांव का वातावरण और धीमी गति वाली कहानी इसे बेहद आत्मीय अनुभव बनाती है।
यह फिल्म 1989 के Locarno International Film Festival सहित कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सम्मानित हुई और पश्चिमी दुनिया में ईरानी सिनेमा की पहचान मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5) The Color of Paradise (1999)
1999 में रिलीज़ हुई The Color of Paradise (Rang-e Khoda) निर्देशक माजिद मजीदी (Majid Majidi) की सबसे भावनात्मक और प्रशंसित फिल्मों में से एक है।
फिल्म के केंद्र में मोहम्मद नाम का एक नेत्रहीन बालक है, जो तेहरान के एक विशेष विद्यालय में पढ़ता है। गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने गांव लौटता है, लेकिन उसका पिता हाशेम उसे अपने जीवन पर बोझ समझता है और वह दोबारा विवाह करना चाहता है।
पिता और पुत्र के इस जटिल रिश्ते के माध्यम से फिल्म प्रेम, स्वीकार्यता, आध्यात्मिकता और सामाजिक पूर्वाग्रहों जैसे विषयों को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है।
माजिद मजीदी की निर्देशन शैली बेहद मानवीय है। वे भावनाओं को कृत्रिम संवादों के बजाय प्रकृति, मौन और पात्रों के व्यवहार से व्यक्त करते हैं। ईरान के हरे-भरे जंगल, पहाड़ और ग्रामीण दृश्य फिल्म को अद्भुत दृश्य सौंदर्य प्रदान करते हैं।
संगीतकार Mohammad Reza Aligholi का मधुर बैकग्राउंड स्कोर कहानी के भावनात्मक प्रभाव को और गहरा बनाता है। वहीं बाल कलाकार Mohsen Ramezani का सहज अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।
The Color of Paradise को Montreal World Film Festival समेत कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सराहना मिली और इसे आज भी आध्यात्मिक तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित विश्व सिनेमा की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म अंततः यही संदेश देती है कि देखने की सबसे बड़ी शक्ति आंखों में नहीं, बल्कि संवेदनशील हृदय में होती है।
6) The Cow (1969)
1969 में रिलीज़ हुई The Cow (Gav) को ईरानी सिनेमा के इतिहास की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है। इसका निर्देशन दारीयूश मेहरजुई (Dariush Mehrjui) ने किया था और यह प्रसिद्ध लेखक ग़ोलामहुसैन साएदी (Gholam-Hossein Sa’edi) की कहानी The Mourners of Bayal पर आधारित है। फिल्म में Ezzatolah Entezami ने मुख्य भूमिका निभाई है, जिसे उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है।
कहानी एक गरीब ग्रामीण किसान मश हसन की है, जिसकी सबसे प्रिय संपत्ति उसकी गाय होती है। जब उसकी अनुपस्थिति में गाय मर जाती है, तो गांव वाले उसे इस दुखद घटना से बचाने के लिए सच्चाई छिपा लेते हैं। लेकिन जब मश हसन लौटता है, तो वह मानसिक आघात के कारण स्वयं को ही गाय समझने लगता है।
यह कहानी केवल एक व्यक्ति के मानसिक रूप से टूटने की नहीं, बल्कि गरीबी, सामाजिक अकेलेपन, पहचान और इंसानी अस्तित्व का गहरा रूपक है। मेहरजुई ने गांव के जीवन को अत्यंत यथार्थवादी शैली में फिल्माया है, जहां ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमैटोग्राफी कहानी के उदास और मनोवैज्ञानिक वातावरण को और प्रभावशाली बनाती है।
फिल्म ने 1971 Venice Film Festival में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सराहना हासिल की और इसे ईरानी New Wave Cinema की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि इसी फिल्म की सफलता ने आगे चलकर अब्बास कियारोस्तामी, माजिद मजीदी और असगर फरहादी जैसे फिल्मकारों के लिए वैश्विक रास्ता तैयार किया। The Cow आज भी ईरानी सिनेमा की आधारशिला मानी जाती है।
7) Children of Heaven (1997)
1997 में रिलीज़ हुई Children of Heaven (Bacheha-ye Aseman) निर्देशक माजिद मजीदी (Majid Majidi) की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। फिल्म में Amir Farrokh Hashemian और Bahare Seddiqi ने भाई-बहन अली और ज़हरा की भूमिकाएं निभाई हैं।
कहानी तब शुरू होती है जब अली गलती से अपनी बहन के जूते खो देता है। गरीबी के कारण दोनों एक ही जोड़ी जूते साझा करके स्कूल जाते हैं। इसी दौरान अली को एक दौड़ प्रतियोगिता के बारे में पता चलता है, जिसमें तीसरे स्थान पर आने वाले को जूतों की जोड़ी मिलनी होती है।
वह अपनी बहन के लिए वही इनाम जीतना चाहता है, लेकिन उस रेस के दौरान भावुकता में आकर अली पहला स्थान हासिल कर लेता है। यही विडंबना फिल्म का सबसे भावुक क्षण बनती है।
माजिद मजीदी ने फिल्म को अत्यंत सरल लेकिन प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बच्चों की मासूमियत को बिना किसी कृत्रिम भावुकता के कैमरे में कैद किया। तेहरान की गलियां, साधारण घर और वास्तविक लोकेशन फिल्म को प्रामाणिकता प्रदान करते हैं।
Children of Heaven को 71वें Academy Awards (1999) में Best Foreign Language Film के लिए नामांकन मिला और यह ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली ईरानी फिल्म बनी।
इसके अलावा यह Montreal World Film Festival, Singapore International Film Festival सहित कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सम्मानित हुई। आज भी इसे परिवार, बचपन और मानवीय संवेदनाओं पर बनी विश्व सिनेमा की सबसे प्रेरणादायक फिल्मों में गिना जाता है।
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