ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन ने नेपाल के महान पर्वतारोही निर्मल ‘निम्स’ पुरजा की जिंदगी छीन ली। जानिए ब्रिटिश स्पेशल फोर्स से 14 आठ-हजारी चोटियों के रिकॉर्ड तक की उनकी कहानी।
काठमांडू/गिलगित-बाल्टिस्तान: दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने वाले और पर्वतारोहण की सीमाओं को नए सिरे से परिभाषित करने वाले नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल ‘निम्स’ पुरजा की पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हुए भीषण हिमस्खलन में मौत की खबर ने दुनिया भर के पर्वतारोहण समुदाय को झकझोर दिया है।
8,000 मीटर से अधिक ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों को रिकॉर्ड समय में फतह करने वाले पुरजा उन चुनिंदा पर्वतारोहियों में थे, जिन्होंने आधुनिक पर्वतारोहण के सबसे कठिन अभियानों को असाधारण गति और साहस के साथ पूरा किया था।
पुरजा की मौत उस पहाड़ पर हुई, जिसे वे अपने करियर में पहले भी फतह कर चुके थे। लेकिन इस बार ब्रॉड पीक की ढलानों पर आया हिमस्खलन इतना भयावह था कि उसने कई पर्वतारोहियों और उनके अभियान को अपनी चपेट में ले लिया।
शुरुआती रिपोर्टों में उनके समेत कई पर्वतारोहियों के लापता होने की बात सामने आई थी। खराब मौसम, भारी बर्फबारी और बेहद कठिन ऊंचाई के कारण राहत और बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण रहा। बाद में पुरजा की मौत की पुष्टि हुई।
यह घटना केवल एक महान पर्वतारोही के निधन की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की यात्रा का अंत है, जिसने नेपाल के एक छोटे से गांव से निकलकर ब्रिटिश विशेष बलों में सेवा की, दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर रिकॉर्ड बनाए और पर्वतारोहण को अपने जीवन का मिशन बना लिया।
ब्रॉड पीक पर क्या हुआ?
ब्रॉड पीक पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित कराकोरम पर्वतमाला की एक विशाल चोटी है। इसकी ऊंचाई करीब 8,047 मीटर है और यह दुनिया की 14 आठ-हजारी चोटियों में शामिल है।
गुरुवार, 30 जुलाई के आसपास ब्रॉड पीक के ऊपरी हिस्से में एक शक्तिशाली हिमस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में पर्वतारोहियों का एक समूह आ गया। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 10 पर्वतारोहियों के प्रभावित होने और कई के लापता होने की जानकारी सामने आई।
बचाव दलों ने पर्वतारोहियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया। लेकिन खराब मौसम और ऊंचाई के कारण अभियान बेहद मुश्किल रहा।
ब्रॉड पीक जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में हिमस्खलन के बाद बचाव अभियान सामान्य परिस्थितियों से बिल्कुल अलग होता है। वहां ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड, तेज हवाएं और अस्थिर बर्फ की परतें बचाव दल के लिए भी जानलेवा जोखिम पैदा करती हैं। ऐसे में किसी शव या जीवित व्यक्ति तक पहुंचना भी बेहद कठिन हो सकता है।
इसी वजह से शुरुआती घंटों में बचाव दलों को मौसम और परिस्थितियों के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सेना और अनुभवी पर्वतारोहियों की मदद से खोज अभियान चलाया गया। इसके अलावा ड्रोन से भी प्रभावित क्षेत्र की निगरानी की गई।
मौत की वजह क्या रही?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्मल पुरजा की मौत का तत्काल कारण हिमस्खलन को माना जा रहा है। हिमस्खलन के पीछे कई प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। भारी बर्फबारी, तापमान में बदलाव, तेज हवाओं से बर्फ का जमाव और पर्वत की ढलान पर बर्फ की परतों का कमजोर होना ऐसे कारण हैं, जो हिमस्खलन का खतरा बढ़ा सकते हैं।
इस घटना की जांच और अभियान से जुड़े तथ्यों का विश्लेषण यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि हिमस्खलन किस स्थान पर और किन परिस्थितियों में हुआ, उस समय पर्वतारोहियों की स्थिति क्या थी और मौसम का वास्तविक प्रभाव कितना था।
लेकिन फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि यह किसी सामान्य चढ़ाई दुर्घटना का मामला नहीं था। यह एक बड़े हिमस्खलन की त्रासदी थी, जिसने एक साथ कई पर्वतारोहियों को प्रभावित किया।
कौन थे निर्मल ‘निम्स’ पुरजा?
निर्मल पुरजा, जिन्हें दुनिया भर में Nims या Nimsdai के नाम से भी जाना जाता था, नेपाल के उन पर्वतारोहियों में शामिल थे जिन्होंने हिमालय और कराकोरम की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले में जन्मे पुरजा ने सामान्य पर्वतारोही के रूप में अपना करियर शुरू नहीं किया था। उनका शुरुआती जीवन सैन्य सेवा से जुड़ा रहा। वे ब्रिटिश आर्मी की ब्रिगेड ऑफ गोरखाज में शामिल हुए और बाद में ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल फोर्स यूनिट Special Boat Service (SBS) में भी सेवा की।
सैन्य प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। अत्यधिक ठंड, कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता और मानसिक दृढ़ता ने आगे चलकर उनके पर्वतारोहण अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन पुरजा ने केवल सैन्य सेवा तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ऐसा अभियान शुरू किया, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
‘Project Possible’ ने रचा इतिहास
2019 में पुरजा ने वह लक्ष्य घोषित किया, जिसे उस समय बहुत से लोग लगभग असंभव मान रहे थे। उन्होंने दुनिया की सभी 14 आठ-हजारी चोटियों को सात महीने के भीतर फतह करने का लक्ष्य रखा।
इन सभी चोटियों की ऊंचाई 8,000 मीटर से अधिक है और इन्हें दुनिया के सबसे कठिन पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। इन पहाड़ों पर चढ़ाई को अक्सर ‘Death Zone’ से जोड़कर देखा जाता है, जहां इंसानी शरीर लंबे समय तक सामान्य रूप से काम नहीं कर सकता।
पुरजा ने अपने अभियान को Project Possible 14/7 नाम दिया। उन्होंने 23 अप्रैल 2019 को अन्नपूर्णा I से अभियान की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धौलागिरी, कंचनजंघा, एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू सहित कई चोटियों को बेहद कम समय में फतह किया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, पुरजा ने 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया।
उनके पूरे अभियान की समय-सीमा को अलग-अलग रिकॉर्ड श्रेणियों और रिकॉर्ड अपडेट के संदर्भ में अलग तरह से दर्ज किया गया है, लेकिन उनका सबसे चर्चित अभियान 2019 में छह महीने और छह दिन में सभी 14 आठ-हजार मीटर की चोटियों को फतह करना था। उन्होंने इस अभियान में बोतलबंद ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया था।
यह उपलब्धि इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि इससे पहले इन 14 चोटियों को फतह करने में वर्षों का समय लग सकता था। पुरजा ने अपनी गति और अभियान प्रबंधन के जरिए पर्वतारोहण की स्थापित सीमाओं को चुनौती दी।
एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू का रिकॉर्ड
पुरजा की सबसे चर्चित उपलब्धियों में एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू की चढ़ाई भी शामिल रही।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, उन्होंने 2019 में इन तीन चोटियों को बेहद कम समय में फतह किया। एवरेस्ट और ल्होत्से को फतह करने के बाद उन्होंने मकालू की ओर रुख किया और इन तीनों चोटियों को करीब दो दिन और 30 मिनट में पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया
।
यह उपलब्धि दिखाती है कि पुरजा सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि वे ऊंचाई वाले अभियानों की रणनीति, समय प्रबंधन और जोखिम को समझने में भी असाधारण क्षमता रखते थे।
कराकोरम से पुरजा का पुराना रिश्ता
ब्रॉड पीक पुरजा के लिए कोई अनजान पहाड़ नहीं था। 2019 में अपने ऐतिहासिक अभियान के दौरान उन्होंने पाकिस्तान की कई आठ-हजारी चोटियों को फतह किया था। इनमें नंगा पर्वत, गैशरब्रुम I, गैशरब्रुम II, K2 और ब्रॉड पीक शामिल थे।
यानी जिस ब्रॉड पीक ने 2026 में उनकी जिंदगी छीन ली, वह वही पर्वत था जिसे पुरजा पहले ही अपनी असाधारण पर्वतारोहण यात्रा के दौरान जीत चुके थे।
यही वजह है कि उनकी मौत की खबर पर्वतारोहण जगत के लिए और भी भावुक कर देने वाली है। एक ऐसा पर्वतारोही, जिसने दुनिया की लगभग हर बड़ी चुनौती को पार किया था, आखिरकार उसी ऊंचाई वाले संसार में जीवन की सबसे कठिन चुनौती से हार गया।
पुरजा की सफलता ने नेपाल के पर्वतारोहण को नई पहचान दी
नेपाल दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतारोहण स्थलों में से एक है। माउंट एवरेस्ट समेत दुनिया की कई ऊंची चोटियां नेपाल और उसके आसपास स्थित हैं। लेकिन पुरजा ने नेपाली पर्वतारोहियों की भूमिका को दुनिया के सामने एक नए तरीके से पेश किया।
उन्होंने यह दिखाया कि नेपाली पर्वतारोही केवल विदेशी अभियानों के लिए गाइड या हाई-एल्टीट्यूड सपोर्ट स्टाफ नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं भी विश्व स्तरीय पर्वतारोहण अभियानों का नेतृत्व कर सकते हैं।
उनकी कहानी ने युवा पर्वतारोहियों को प्रेरित किया और नेपाल की पर्वतारोहण संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान दिया। काठमांडू पोस्ट ने भी उनकी विरासत को नेपाली पर्वतारोहण की सीमाओं को बदलने वाली यात्रा के रूप में रेखांकित किया है।
पुरजा की कहानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री
पुरजा की 14 चोटियों की रिकॉर्ड यात्रा ने सिर्फ पर्वतारोहण समुदाय को प्रभावित नहीं किया। उनकी कहानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘14 Peaks: Nothing Is Impossible’ ने भी उन्हें दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाया।
उस डॉक्यूमेंट्री में उनके अभियान, उनकी टीम और 14 आठ-हजारी चोटियों को कम समय में फतह करने के संघर्ष को बेहद ही संजीदगी से दर्शकों के सामने रखा गया। इसके बाद वे पर्वतारोहण की दुनिया से बाहर भी एक वैश्विक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाने लगे।
कई सवाल खड़े करता ब्रॉड पीक हादसा
पुरजा की मौत एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर पर्वतारोहण कितना जोखिम भरा है। 8,000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र इंसानी शरीर के लिए बेहद कठिन माना जाता है। वहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है और तापमान बेहद नीचे जा सकता है। इसके अलावा मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है।
हिमस्खलन, बर्फीले तूफान, क्रेवास, चट्टानों का गिरना और अचानक बदलता मौसम पर्वतारोहियों के लिए लगातार खतरा बने रहते हैं। अनुभवी पर्वतारोही भी इन जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकते।
पुरजा जैसे अत्यधिक अनुभवी पर्वतारोही की मौत यह भी याद दिलाती है कि पर्वतारोहण में अनुभव जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता।
एक असाधारण यात्रा का अंत
निर्मल ‘निम्स’ पुरजा की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने जीवन में कई बार अपनी सीमाओं को चुनौती दी। नेपाल के म्याग्दी से ब्रिटिश विशेष बलों तक और वहां से दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंचने की उनकी यात्रा असाधारण रही।
उन्होंने 14 आठ-हजारी चोटियों को रिकॉर्ड समय में फतह किया, एवरेस्ट, K2 और अन्य कठिन चोटियों पर अपनी पहचान बनाई और दुनिया को यह दिखाया कि पर्वतारोहण केवल ऊंचाई पर पहुंचने का खेल नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और टीमवर्क की भी परीक्षा है।
लेकिन 2026 में ब्रॉड पीक का हिमस्खलन उनकी इस अविश्वसनीय यात्रा का आखिरी अध्याय बन गया।
उनकी मौत से जुड़े बचाव और जांच अभियान से घटना की परिस्थितियों के बारे में आने वाले समय में और जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल, पर्वतारोहण की दुनिया ने एक ऐसे चेहरे को खो दिया है, जिसने दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों को केवल चढ़ाई के लक्ष्य के रूप में नहीं देखा, बल्कि उन्हें इंसानी क्षमता की सीमाओं को चुनौती देने का माध्यम बनाया।
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