फरिद बशारत को UFC रोस्टर से हटाए जाने की खबर ने MMA जगत में चर्चा छेड़ दी है। जानिए 16-0 का रिकॉर्ड, सात UFC जीत, चोट के बावजूद आखिरी मुकाबला खेलने और नए कॉन्ट्रैक्ट की मांग से जुड़ी पूरी कहानी।
लास वेगास, अमेरिका: मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) की दुनिया में किसी फाइटर के लिए लगातार जीत दर्ज करना उसकी प्रतिभा और निरंतरता का बड़ा प्रमाण माना जाता है। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी अपने पूरे प्रोफेशनल करियर में एक भी मुकाबला नहीं हारता और UFC जैसे बड़े संगठन में भी लगातार सात जीत हासिल करता है, तो उसका भविष्य और भी उज्ज्वल माना जाता है। अफगानिस्तान में जन्मे बैंटमवेट फाइटर फरिद बशारत के साथ एक अलग ही स्थिति सामने आई है।
फरिद बशारत को UFC के रोस्टर से हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 वर्षीय फाइटर ने जुलाई 2026 में जॉन गार्जा को हराकर अपने मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के तहत आखिरी मुकाबला पूरा किया था। इसके बाद उन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला। इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि बशारत का प्रोफेशनल MMA रिकॉर्ड 16 जीत और शून्य हार का है। UFC के ऑक्टागन में भी उन्होंने अपने सभी सात मुकाबले जीते थे।
फिलहाल UFC की ओर से इस फैसले के पीछे किसी खास वजह की सार्वजनिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
फरिद बशारत कौन हैं?
फरिद बशारत पेशेवर MMA के बैंटमवेट डिविजन के फाइटर हैं। इस वर्ग में आम तौर पर 135 पाउंड यानी लगभग 61.2 किलोग्राम की सीमा के भीतर मुकाबले होते हैं। उनका जन्म अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत में हुआ था और वह अमेरिकन टॉप टीम में प्रशिक्षण लेते रहे हैं। UFC की आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी उम्र 29 वर्ष और प्रोफेशनल रिकॉर्ड 16-0-0 दर्ज है।
बशारत ने 2018 में प्रोफेशनल MMA करियर की शुरुआत की थी। UFC में आने से पहले उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर लगातार जीत दर्ज कीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, UFC में जगह बनाने से पहले उनका रिकॉर्ड 8-0 था।
उनकी पहचान केवल अपराजित रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रही। बशारत स्ट्राइकिंग के साथ ग्राउंड गेम में भी प्रभावी रहे हैं। UFC की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उनके 16 प्रोफेशनल मुकाबलों में एक जीत नॉकआउट और छह सबमिशन से आईं। शेष जीतों में निर्णायकों के फैसले की भूमिका रही। उनकी तीन जीत पहले राउंड में मुकाबला समाप्त करके मिली थीं।
MMA में सबमिशन ऐसी तकनीक को कहा जाता है, जिसमें फाइटर प्रतिद्वंद्वी को चोक या जॉइंट लॉक जैसी पकड़ में फंसाकर मुकाबला छोड़ने के लिए मजबूर करता है। वहीं, निर्णय के जरिए मिलने वाली जीत में मुकाबला निर्धारित समय तक चलता है और निर्णायक अंकों के आधार पर विजेता तय करते हैं।
Dana White’s Contender Series से UFC तक का सफर
UFC में जगह बनाना किसी भी उभरते मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर के करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। फरिद बशारत ने भी डाना व्हाइट्स कंटेंडर सीरीज़ (DWCS) के जरिए इस प्रतिष्ठित संगठन तक पहुंचने का रास्ता बनाया। यह सीरीज उभरते फाइटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने और UFC के साथ कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने का अवसर देती है।
बशारत ने 2022 में इस मंच पर जीत दर्ज कर UFC में प्रवेश का मौका हासिल किया। इसके बाद उन्होंने 4 मार्च 2023 को UFC के ऑक्टागन में अपना पहला मुकाबला लड़ा। इससे पहले वह क्षेत्रीय MMA प्रतियोगिताओं में लगातार जीत दर्ज कर चुके थे और अपराजित रिकॉर्ड के साथ आगे बढ़ रहे थे। UFC में शामिल होने के बाद भी उनका यह सिलसिला जारी रहा।
बैंटमवेट डिविजन में प्रतिस्पर्धा करते हुए बशारत ने अपने शुरुआती मुकाबलों से ही निरंतरता दिखाई। उन्होंने अलग-अलग प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत हासिल की और संगठन में अपनी जगह मजबूत की। UFC में उनका रिकॉर्ड सात मुकाबलों में सात जीत का रहा, जबकि उनका कुल प्रोफेशनल रिकॉर्ड 16-0 तक पहुंच गया। ऐसे में लगातार सफलता के बावजूद रोस्टर से हटाए जाने की खबर ने MMA प्रशंसकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर UFC की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ये भी पढ़ें :- पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने लॉन्च की नई पार्टी, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में जुड़ा नया अध्याय
UFC में अपराजित रहे बशारत
फरिद बशारत का UFC रिकॉर्ड उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने संगठन के लिए सात मुकाबले लड़े और सभी में जीत दर्ज की। उनकी इन जीतों में जॉन गार्जा, जीन मात्सुमोतो, क्रिस गुटिएरेज, विक्टर ह्यूगो और टेलर लापिलस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रदर्शन शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने डा’मोन ब्लैकशियर के खिलाफ भी जीत हासिल की।
उनके प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने अलग-अलग तरह के प्रतिद्वंद्वियों के सामने अपनी क्षमता दिखाई। कुछ मुकाबलों में उन्हें पूरे तीन राउंड तक लड़ना पड़ा, जबकि अन्य अवसरों पर उन्होंने ग्राउंड गेम और सबमिशन के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता प्रदर्शित की।
बशारत ने UFC में अपनी सात में से छह जीत निर्णायकों के फैसले से हासिल कीं। इसका अर्थ है कि अधिकतर मुकाबलों में वह निर्धारित समय तक टिके रहे और अंकों के आधार पर जीत हासिल की।
प्रोफेशनल MMA में अपराजित रहना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन UFC में प्रतिस्पर्धा का स्तर, मुकाबलों की उपलब्धता, प्रतिद्वंद्वियों की रैंकिंग और संगठन की व्यावसायिक प्राथमिकताएं किसी फाइटर के करियर को प्रभावित कर सकती हैं। बशारत के मामले में भी यही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि सात लगातार जीत के बावजूद उन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं मिला।
जॉन गार्जा के खिलाफ आखिरी मुकाबले में क्या हुआ?
फरिद बशारत का UFC में आखिरी मुकाबला 11 जुलाई 2026 को UFC 329 में जॉन गार्जा के खिलाफ हुआ था। बशारत ने यह मुकाबला सर्वसम्मत निर्णय (Unanimous Decision) से जीता। यानी तीनों निर्णायकों ने उनके पक्ष में फैसला दिया। UFC की आधिकारिक फाइटर प्रोफाइल में इस जीत का उल्लेख है।
इस मुकाबले के बाद बशारत ने अपने कॉन्ट्रैक्ट को लेकर खुलकर बात की। MMA Insight की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने प्रसारण के दौरान कमेंटेटर जो रोगन से कहा कि यह उनके मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट का आखिरी मुकाबला था और वह संगठन के साथ नया करार चाहते हैं।
बशारत ने UFC में बने रहने की अपनी इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि UFC उनका बचपन से सपना रहा है और उन्हें भरोसा है कि उन्हें आगे बेहतर प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ मुकाबले करने का अवसर मिले, तो वह डिविजन के चैंपियन बन सकते हैं।
उनकी बातों में एक स्पष्ट मांग थी। उन्हें ऊंची रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ लड़ने का मौका दिया जाए। लगातार जीत के बावजूद अगर किसी फाइटर को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता, तो उसके लिए अपने करियर की दिशा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
चोट के बावजूद लड़े थे मुकाबला
फरिद बशारत के UFC में आखिरी मुकाबले से पहले उनकी चोट भी चर्चा में रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉन गार्जा के खिलाफ उतरने से पहले बशारत के घुटने में चोट लगी थी। उन्होंने इंटरव्यू में MCL (मेडियल कोलेटरल लिगामेंट) और मेनिस्कस में चोट का जिक्र किया था। इसके बावजूद उन्होंने मुकाबले से पीछे हटने के बजाय ऑक्टागन में उतरने का फैसला किया और जीत हासिल की।
MCL घुटने के अंदरूनी हिस्से में मौजूद लिगामेंट है, जो जोड़ को स्थिरता देने में मदद करता है। वहीं, मेनिस्कस घुटने में मौजूद कार्टिलेज का हिस्सा है, जो हड्डियों के बीच दबाव को सहने और जोड़ की गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने में भूमिका निभाता है। इन हिस्सों में चोट लगने से घुटने को मोड़ने, वजन संभालने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, बशारत की चोट की गंभीरता और मुकाबले के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति के बारे में विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।
चोट के बावजूद गार्जा के खिलाफ मिली जीत ने बशारत का अपराजित रिकॉर्ड बरकरार रखा। मुकाबले के बाद उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्ट और UFC में आगे खेलने की इच्छा भी जाहिर की। ऐसे में यह जीत उनके लिए सिर्फ एक और सफलता नहीं थी, बल्कि संगठन के साथ भविष्य बनाए रखने की उम्मीद से भी जुड़ी थी।
क्या बशारत की जीत का तरीका बना विदाई की वजह?
फरिद बशारत को UFC रोस्टर से हटाए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके मुकाबले जीतने के तरीके का इस फैसले से कोई संबंध था। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि फरिद और उनके भाई जाविद बशारत की UFC से विदाई के पीछे मुकाबलों को नॉकआउट या सबमिशन से जल्दी खत्म करने वाली जीतों की कम संख्या एक संभावित वजह हो सकती है। हालांकि, UFC ने इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, इसलिए इसे फैसले की पुष्टि की गई वजह नहीं माना जा सकता।
UFC जैसे बड़े MMA संगठन में किसी फाइटर का भविष्य केवल उसके जीत-हार के रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं करता। प्रतिद्वंद्वियों का स्तर, मुकाबलों का रोमांच, दर्शकों की दिलचस्पी, डिविजन में उपलब्ध विकल्प और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी बातचीत भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। बशारत ने UFC में अपने सातों मुकाबले जीते और उनका प्रोफेशनल रिकॉर्ड 16-0 रहा। इसके बावजूद उन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलने की खबर सामने आई है।
ऐसे में उनके प्रदर्शन और संगठन की अपेक्षाओं के बीच संभावित अंतर पर चर्चा हो रही है। हालांकि, आधिकारिक स्पष्टीकरण के अभाव में किसी एक कारण को उनकी विदाई के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
