रोजर फेडरर ने लगातार 237 हफ्ते नंबर-1 रहकर टेनिस में अपना दबदबा कायम किया। 45वें जन्मदिन पर जानिए उनके रिकॉर्ड, संघर्ष और महान विरासत की कहानी।
बासेल: टेनिस की दुनिया में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनके रिकॉर्ड गिने जा सकते हैं, लेकिन उनका असर आंकड़ों में नहीं समाया जा सकता। रोजर फेडरर भी उन्हीं नामों में हैं। कोर्ट पर उनकी चाल में जल्दबाजी नहीं दिखती थी, शॉट्स में बेवजह की ताकत नहीं और मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी चेहरे पर एक अजीब-सी शांति रहती थी। यही वजह है कि दुनिया ने उन्हें सिर्फ एक चैंपियन के तौर पर नहीं, बल्कि टेनिस की एक पूरी शैली के रूप में देखा।
8 अगस्त 1981 को स्विट्जरलैंड के बासेल में जन्मे फेडरर आज 45 साल के हो गए हैं। 20 ग्रैंड स्लैम, 103 एटीपी खिताब, 310 सप्ताह तक वर्ल्ड नंबर-1 और लगातार 237 सप्ताह तक शीर्ष स्थान पर रहने का रिकॉर्ड उनके करियर की तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है।
लेकिन फेडरर की असली कहानी उन ट्रॉफियों से आगे जाती है। यह कहानी एक ऐसे बच्चे की है जिसे शुरुआत में अपने गुस्से पर नियंत्रण करना पड़ा, एक ऐसे खिलाड़ी की है जिसने हार को स्वीकार करना सीखा और एक ऐसे चैंपियन की है जिसने उम्र, चोट और बदलती पीढ़ियों के बावजूद खुद को बार-बार नए रूप में ढाला।
बासेल से शुरू हुआ टेनिस का सफर
रोजर फेडरर का जन्म स्विट्जरलैंड के बासेल में हुआ। उनके पिता रॉबर्ट फेडरर स्विस थे, जबकि उनकी मां लिनेट फेडरर दक्षिण अफ्रीका से थीं। उनके माता-पिता एक फार्मास्युटिकल कंपनी में काम करते थे और बचपन में रोजर और उनकी बड़ी बहन डायना अक्सर माता-पिता के साथ कंपनी के टेनिस कोर्ट जाया करते थे।
फेडरर ने बेहद कम उम्र में टेनिस रैकेट पकड़ लिया था। करीब तीन साल की उम्र में उन्होंने पहली बार टेनिस खेला। छह साल की उम्र तक वह अपने आयु वर्ग के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में गिने जाने लगे थे। आठ साल की उम्र में उनकी मां ने उन्हें बासेल के ओल्ड बॉयज टेनिस क्लब के जूनियर कार्यक्रम में भेजा, जहां उन्होंने चेक कोच एडोल्फ काकोव्स्की से प्रशिक्षण लिया।
लेकिन उनके सफर में सिर्फ प्रतिभा ही महत्वपूर्ण नहीं थी। उनके शुरुआती कोचों में पीटर कार्टर की भूमिका बेहद खास रही। फेडरर करीब 10 साल की उम्र में कार्टर के साथ काम करने लगे और तकनीक के साथ-साथ रणनीति तथा खेल की मानसिक समझ विकसित करने में उन्हें कार्टर से काफी मदद मिली।
14 साल की उम्र में फेडरर ने घर से दूर जाकर टेनिस अकादमी में प्रशिक्षण लेने का फैसला किया। बाद में उन्होंने याद किया कि घर से दूर जाना उनके लिए आसान नहीं था। वह ट्रेन से निकलते समय रोया करते थे, लेकिन उन्हें पता था कि पेशेवर खिलाड़ी बनने के लिए यह त्याग जरूरी है।
प्रतिभा के साथ गुस्सा भी
आज जिस रोजर फेडरर को दुनिया शांत, संयमित और बेहद नियंत्रित खिलाड़ी के रूप में जानती है, वह हमेशा ऐसे नहीं थे।
युवा फेडरर काफी भावुक खिलाड़ी थे। वह गलत शॉट के बाद गुस्सा करते, रैकेट फेंकते और कभी-कभी मैच के दौरान अपना नियंत्रण खो देते थे। स्वीडिश कोच पीटर लुंडग्रेन ने उनके इस स्वभाव को बदलने में अहम भूमिका निभाई।
लुंडग्रेन ने फेडरर की प्रतिभा को बहुत जल्दी पहचान लिया था, लेकिन उन्होंने यह भी देखा कि खिलाड़ी को शारीरिक और मानसिक अनुशासन पर काफी काम करने की जरूरत है। प्रशिक्षण में टेनिस के अलावा फुटबॉल, स्क्वैश, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसी गतिविधियां भी शामिल की गईं। फेडरर को खेल मनोवैज्ञानिक की देखरेख में भी रखा गया।
बाद में फेडरर ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें अपने गुस्से को नियंत्रित करने में कई साल लगे। 2024 में डार्टमाउथ कॉलेज के दीक्षांत समारोह में उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में वह शिकायत करते, गुस्सा करते, गालियां देते और रैकेट तक फेंकते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने भावनात्मक नियंत्रण पर काम किया।
पीट सम्प्रास को हराकर दुनिया को दिया संकेत
फेडरर के करियर में कई महत्वपूर्ण मुकाबले आए, लेकिन 2001 का विंबलडन उनके लिए खास था। चौथे दौर में उनका सामना उस समय के महानतम खिलाड़ियों में से एक पीट सम्प्रास से हुआ।
फेडरर ने पांच सेट के मुकाबले में सम्प्रास को हराकर टेनिस जगत को चौंका दिया। यह सिर्फ एक बड़ी जीत नहीं थी। यह उस दौर के टेनिस में पीढ़ी बदलने का संकेत भी माना गया।
दो साल बाद 2003 में वही विंबलडन उनके करियर की पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी लेकर आया। फाइनल में उन्होंने मार्क फिलिपोसिस को सीधे सेटों में हराया और पहली बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन बने।
शुरू हुआ फेडरर का साम्राज्य
2004 ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने के बाद फेडरर पहली बार वर्ल्ड नंबर-1 बने। इसके बाद उन्होंने ऐसा दबदबा बनाया जो पुरुष टेनिस में लंबे समय तक मिसाल बना रहा।
2 फरवरी 2004 से 18 अगस्त 2008 तक वह लगातार 237 सप्ताह वर्ल्ड नंबर-1 रहे। यह पुरुष टेनिस के इतिहास में लगातार नंबर-1 रहने का रिकॉर्ड है। कुल मिलाकर उन्होंने 310 सप्ताह शीर्ष स्थान पर बिताए।
2004 से 2007 के बीच विंबलडन में लगातार चार साल उन्होंने खिताब जीता और बाद में 2007 तक लगातार पांच विंबलडन खिताब पूरे किए। कुल मिलाकर उनके नाम आठ विंबलडन खिताब हैं, जो पुरुष एकल में रिकॉर्ड है।
यूएस ओपन में भी उनका दबदबा देखने को मिला। 2004 से 2008 तक उन्होंने लगातार पांच खिताब जीते।
फिर आया 2009 का फ्रेंच ओपन। रोलां गैरो में जीत के साथ फेडरर ने करियर ग्रैंड स्लैम पूरा किया। इस जीत के साथ वह उन चुनिंदा पुरुष खिलाड़ियों में शामिल हुए जिन्होंने चारों ग्रैंड स्लैम जीते थे।
20 ग्रैंड स्लैम और 103 खिताब
फेडरर के ग्रैंड स्लैम रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उन्होंने:
- ऑस्ट्रेलियन ओपन – 6 बार
- फ्रेंच ओपन – 1 बार
- विंबलडन – 8 बार
- यूएस ओपन – 5 बार जीता।
कुल मिलाकर उनके नाम 20 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने करियर में 103 एटीपी टूर-लेवल खिताब जीते और 28 एटीपी मास्टर्स 1000 ट्रॉफियां हासिल कीं।
उनके नाम 1,251 करियर जीत भी दर्ज हैं। एटीपी के अनुसार उन्होंने 1,526 सिंगल्स मुकाबले खेले और इनमें लगभग 80 प्रतिशत मुकाबले जीते।
फेडरर का सबसे बड़ा हथियार
उनकी सर्विस अच्छी थी, फोरहैंड शानदार था और उनका वन-हैंडेड बैकहैंड टेनिस की सबसे खूबसूरत तकनीकों में गिना जाता है। लेकिन उनका सबसे बड़ा हथियार सिर्फ कोई एक शॉट नहीं था। उनकी टाइमिंग और निर्णय लेने की क्षमता उनका असली कमाल थी।
फेडरर गेंद को बहुत देर से नहीं खेलते थे। वह गेंद की दिशा और गति को बेहद जल्दी पढ़ते और कई बार विपक्षी खिलाड़ी को कोर्ट पर ऐसी जगह भेज देते थे जहां से अगला शॉट उनके लिए मुश्किल हो जाता।
उनका फुटवर्क हल्का दिखाई देता था। वह कोर्ट पर भागते कम और ग्लाइड करते हुए ज्यादा दिखाई देते थे।
राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच ने बदली कहानी
फेडरर के करियर को उनके दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के बिना समझना मुश्किल है – राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच।
एक समय ऐसा था जब फेडरर पुरुष टेनिस पर लगभग अकेले राज कर रहे थे। फिर नडाल आए और खासकर क्ले कोर्ट पर उन्होंने फेडरर के लिए सबसे बड़ी चुनौती खड़ी की। बाद में जोकोविच ने भी फेडरर और नडाल की पीढ़ी को चुनौती दी। इन प्रतिद्वंद्वियों ने फेडरर को हराया भी और उन्हें बेहतर बनने के लिए मजबूर भी किया।
फेडरर ने बाद में माना कि शुरुआत में उन्हें यह स्वीकार करने में समय लगा कि वह हमेशा अकेले शीर्ष पर नहीं रह सकते। लेकिन आखिरकार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को अपने विकास का हिस्सा माना। यह उनकी मानसिक परिपक्वता का एक और उदाहरण था।
परिवार ने बदली कोर्ट के बाहर की जिंदगी
फेडरर की निजी जिंदगी में भी टेनिस का बड़ा प्रभाव रहा। 2000 सिडनी ओलंपिक में उनकी मुलाकात स्विस टेनिस खिलाड़ी मिर्का वावरिनेक से हुई। दोनों ने 2009 में शादी की।
उनके चार बच्चे, जुड़वां बेटियां मायला और चार्लीन तथा जुड़वां बेटे लियो और लेनी।
फेडरर ने कई बार बताया कि परिवार ने उनके नजरिए को बदला। खासकर 2009 में जुड़वां बेटियों के जन्म के बाद उनकी प्राथमिकताओं में बदलाव आया। टेनिस अब भी बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन जिंदगी सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रही।
उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताने और अपने परिवार को करियर के साथ संतुलित करने की कोशिश की।
चोटों के बावजूद फेडरर की वापसी
फेडरर का करियर हमेशा जीतों से भरा नहीं रहा। उम्र बढ़ने के साथ चोटों ने उन्हें परेशान किया। 2016 में घुटने की सर्जरी के बाद वह कई महीनों तक बाहर रहे।
लेकिन 2017 में उनकी वापसी शायद उनके करियर की सबसे शानदार वापसी में से एक रही।
ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में उन्होंने राफेल नडाल को पांच सेट में हराकर अपना 18वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। अगले वर्षों में उन्होंने 20 ग्रैंड स्लैम का आंकड़ा पूरा किया। लेकिन शरीर की सीमाएं आखिरकार उनके करियर पर भारी पड़ीं।
2021 में विंबलडन के बाद वह लंबे समय तक कोर्ट से बाहर रहे। इससे पहले वह घुटने की दो सर्जरी करा चुके थे। 2021 फ्रेंच ओपन से भी उन्होंने अपने शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं डालने के लिए नाम वापस ले लिया था।
जब फेडरर ने ली विदाई
15 सितंबर 2022 को फेडरर ने पेशेवर टेनिस से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल चोटों और सर्जरी से जूझते हुए गुजरे और शरीर की सीमाएं अब उन्हें स्पष्ट संदेश दे रही थीं। उनका आखिरी एटीपी इवेंट लंदन में 2022 लेवर कप था। और इस विदाई को भी फेडरर ने बिल्कुल अपने अंदाज में खास बना दिया।
उनका अंतिम प्रतिस्पर्धी मुकाबला राफेल नडाल के साथ डबल्स में था। दोनों का सामना जैक सॉक और फ्रांसेस टियाफो से हुआ। फेडरर-नडाल की जोड़ी मुकाबला हार गई, लेकिन उस रात स्कोर से ज्यादा महत्वपूर्ण वह दृश्य था जब दो महान प्रतिद्वंद्वी एक ही तरफ खड़े थे। मैच के बाद फेडरर भावुक हो गए। उनकी पत्नी मिर्का, बच्चे और माता-पिता भी कोर्ट पर उनके साथ थे।
सन्यास के बाद फेडरर का जीवन
फेडरर अब पेशेवर टेनिस नहीं खेलते, लेकिन खेल से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। वह अपने परिवार, फाउंडेशन और विभिन्न सामाजिक व व्यावसायिक परियोजनाओं में सक्रिय हैं।
उनकी रोजर फेडरर फाउंडेशन शिक्षा पर केंद्रित है और अफ्रीका के कई देशों तथा स्विट्जरलैंड में बच्चों के लिए कार्यक्रमों का समर्थन करती है। एटीपी के अनुसार, फाउंडेशन ने 10 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई है और शिक्षा संबंधी पहलों में 50 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
2024 में डार्टमाउथ में उनके भाषण ने यह भी दिखाया कि संन्यास के बाद वह अपने अनुभवों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
2026 उनके लिए एक और खास साल है। फेडरर को इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम की 2026 क्लास के लिए चुना गया है। आधिकारिक इंडक्शन समारोह 27 से 29 अगस्त 2026 के बीच न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड में होना है।
20 ग्रैंड स्लैम से बड़ी फेडरर की विरासत
रोजर फेडरर की कहानी को सिर्फ 20 ग्रैंड स्लैम, 103 खिताब या 310 सप्ताह की नंबर-1 रैंकिंग से नहीं समझा जा सकता। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यह है कि उन्होंने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि महानता हमेशा शोर नहीं करती।
उन्होंने कोर्ट पर आक्रामक टेनिस खेला, लेकिन उनका खेल देखने में अक्सर शांत लगा। उन्होंने हजारों पॉइंट जीते, लेकिन हार के बाद भी अगले पॉइंट पर लौटना सीखा। उन्होंने चोटों से लड़कर वापसी की और अंत में यह स्वीकार करने का साहस भी दिखाया कि शरीर अब पहले जैसा साथ नहीं दे रहा।
आज 45 की उम्र में फेडरर के पास जीतने के लिए कोई नया ग्रैंड स्लैम नहीं है। लेकिन उनके करियर की सबसे बड़ी जीत शायद वह मानसिक बदलाव है जिसने एक गुस्सैल, भावुक युवा खिलाड़ी को दुनिया के सबसे संयमित और सम्मानित चैंपियनों में बदल दिया।
ये भी पढ़ें :- 25 की उम्र में इंग्लैंड के John Turner ने लिया क्रिकेट से संन्यास, चोट ने खत्म किया गेंदबाज का करियर
