Saturday, 26 September 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
Explained: मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA के बढ़ने के बाद, जानिए सेना के पास कौन सी शक्तियां होंगी? स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट से मौखिक सुनवाई की मांग, माता-पिता बोले- हमें नहीं सुना गया Happy Birthday Serena Williams: कॉम्पटन के कोर्ट से निकलकर टेनिस की दुनिया पर राज करने तक, ऐसी रही ‘क्वीन ऑफ टेनिस’ की कहानी ‘दिव्यांगों के नाम एक शाम’ में दिल्ली पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष पारुल सिंह सम्मानित आखिर क्यों इटली में महिला नेता ‘मिनी स्कर्ट’ पहनकर कर रही हैं विरोध? एक मंत्री के बयान से शुरू हुआ विवाद संसद तक पहुंचा SIR विवाद पर देशभर में प्रदर्शन, जंतर-मंतर में बैरिकेडिंग के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज नहीं रहे NBA के पहले MVP Bob Pettit, 93 साल की उम्र में हुआ निधन Sikkim Landslide: सिक्किम में बारिश के बीच आया बड़ा भूस्खलन, रिंबी में 30 से ज्यादा घर प्रभावित Explained: मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA के बढ़ने के बाद, जानिए सेना के पास कौन सी शक्तियां होंगी? स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट से मौखिक सुनवाई की मांग, माता-पिता बोले- हमें नहीं सुना गया Happy Birthday Serena Williams: कॉम्पटन के कोर्ट से निकलकर टेनिस की दुनिया पर राज करने तक, ऐसी रही ‘क्वीन ऑफ टेनिस’ की कहानी ‘दिव्यांगों के नाम एक शाम’ में दिल्ली पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष पारुल सिंह सम्मानित आखिर क्यों इटली में महिला नेता ‘मिनी स्कर्ट’ पहनकर कर रही हैं विरोध? एक मंत्री के बयान से शुरू हुआ विवाद संसद तक पहुंचा SIR विवाद पर देशभर में प्रदर्शन, जंतर-मंतर में बैरिकेडिंग के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज नहीं रहे NBA के पहले MVP Bob Pettit, 93 साल की उम्र में हुआ निधन Sikkim Landslide: सिक्किम में बारिश के बीच आया बड़ा भूस्खलन, रिंबी में 30 से ज्यादा घर प्रभावित

स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट से मौखिक सुनवाई की मांग, माता-पिता बोले- हमें नहीं सुना गया

ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के परिवारों ने वैज्ञानिक शोध और पहले से इलाज करा रहे बच्चों के मामलों पर सुनवाई की मांग की

नई दिल्ली: ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के माता-पिता ने स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर मौखिक सुनवाई की मांग की है। परिवारों ने कहा कि अदालत को पहले से उपचार ले रहे बच्चों के मामलों और उनके द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी विचार करना चाहिए।

पैरेंट्स फोरम फॉर स्टेम सेल्स इन ऑटिज्म एंड सेरेब्रल पाल्सी ने शनिवार को नई दिल्ली के आंध्र भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह मांग उठाई। संगठन करीब 5,000 परिवारों का प्रतिनिधित्व करता है।

जनवरी 2025 की सुनवाई का दिया हवाला

फोरम यश चैरिटेबल ट्रस्ट एंड अन्य बनाम भारत संघ एंड अन्य मामले में प्रतिवादी है। फोरम के अनुसार, जनवरी 2025 में पहली सुनवाई के दौरान उसके वकील ने अदालत के सामने अपनी दलील रखने की अनुमति मांगी थी। संगठन का कहना है कि अदालत ने उसे लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए कहा।

फोरम अब मामले में मौखिक सुनवाई का अवसर मांग रहा है।

“हमारी पहली मांग बिल्कुल सरल है- हमें सुना जाए,” फोरम ने कहा।

उपचार रोकने को लेकर परिवारों की चिंता

फोरम के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी को नियमित उपचार के तौर पर जारी न रखने और पहले से उपचार ले रहे बच्चों को क्लिनिकल ट्रायल करने वाले संस्थानों की ओर भेजने की बात कही गई है।

फोरम का दावा है कि इन बच्चों के लिए फिलहाल कोई उपयुक्त क्लिनिकल ट्रायल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परिवार पहले से चल रहे उपचार को रोकने के संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।

संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि पहले से उपचार ले रहे बच्चे क्लिनिकल ट्रायल की पात्रता शर्तों को पूरा करेंगे या नहीं।

https://notdnews.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Video-2026-09-26-at-15.55.26.mp4

माता-पिता ने साझा किए उपचार के अनुभव

प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए माता-पिता ने अपने बच्चों के उपचार से जुड़े अनुभव बताए।

जबलपुर की डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने अपने बच्चे के उपचार का अनुभव साझा किया। वह डेंटल सर्जन और आरसीआई पंजीकृत रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी के बाद अपने बच्चे की गतिशीलता, संवाद, समझ और रोजमर्रा की गतिविधियों में बदलाव देखा।

हैदराबाद की डॉ. संध्या गोकोवरापु ने उपचार की निरंतरता को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने कहा, “पहले से उपचार ले रहे बच्चे को केवल उपचार बंद करने के लिए नहीं कहा जा सकता, जब तक यह स्पष्ट न हो कि उसके लिए उपयुक्त क्लिनिकल ट्रायल उपलब्ध है या नहीं और वह बच्चा उसमें शामिल होने के योग्य है या नहीं।”

फोरम ने 82 शोध पत्र जमा करने की बात कही

फोरम ने कहा कि उसने अदालत के सामने 82 पीयर-रिव्यू किए गए शोध पत्र, क्लिनिकल रिकॉर्ड, परिवारों के अनुभवों से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री पेश की है।

फोरम चाहता है कि अदालत इन सामग्रियों की समीक्षा करे और पहले से उपचार ले रहे बच्चों पर फैसले के संभावित प्रभावों को भी देखे।

ऑटोलोगस स्टेम सेल उपचार पर नियामकीय सवाल

फोरम ने ऑटोलोगस स्टेम सेल उपचार से जुड़े नियामकीय प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। इस प्रक्रिया में मरीज की अपनी कोशिकाएं लेकर उन्हें उसी मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है।

संगठन ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 में “ड्रग” की परिभाषा को न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 और सीडीएससीओ के नियामकीय ढांचे के साथ देखा जाना चाहिए।

फोरम के उपाध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने कहा, “हम अदालत से हमें सुनने, हमारे द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच करने और पहले से उपचार ले रहे बच्चों पर फैसले के प्रभावों पर विचार करने की मांग कर रहे हैं।”

फोरम ने मौखिक सुनवाई, अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के स्वास्थ्य के अधिकार पर विचार, परिवारों के क्लिनिकल रिकॉर्ड और अनुभवों की समीक्षा तथा वैज्ञानिक शोध की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version